मेरठ (उत्तर प्रदेश): कल्पना कीजिए कि आप अपने ही घर के बेडरूम में बैठे हैं, लेकिन आप पर किसी अदृश्य जेल का पहरा है। आप अपनी मर्जी से फोन नहीं काट सकते, किसी रिश्तेदार को कॉल नहीं कर सकते और कोई अजनबी इंसान 24 घंटे वीडियो कॉल के जरिए आपकी हर हरकत पर नजर रख रहा है। इसे 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) कहते हैं और यही वह खौफनाक तकनीक है जिसने मेरठ के एक सम्मानित और शिक्षित रिटायर्ड अधिकारी की जिंदगी में भूचाल ला दिया।READ ALSO:-गाड़ी आपकी, चालान किसी और का? गलत ई-चालान कटने पर न हों परेशान, यातायात पुलिस ने बताया इसे रद्द कराने का सबसे आसान और सही तरीका
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मेरठ पुलिस ने एक बड़े साइबर क्राइम सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए एक ऐसे शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है, जिसने खुद को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर 1.41 करोड़ रुपये की सनसनीखेज ठगी को अंजाम दिया। यह मामला सिर्फ एक ठगी का नहीं है, बल्कि इस बात का जीता-जागता सबूत है कि साइबर अपराधी आम लोगों के मन में पुलिस और कानून का कितना गहरा खौफ पैदा कर सकते हैं।
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आइए परत-दर-परत समझते हैं कि आखिर यह 'डिजिटल अरेस्ट' कैसे हुआ, ठगों का मास्टरमाइंड कौन है, और 33 दिनों तक उस बुजुर्ग दंपती के साथ क्या-क्या हुआ।
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पुलिस की गिरफ्त में शातिर मास्टरमाइंड: कौन है शब्बीर कुरैशी?
\r\n\r\nइस करोड़ों रुपये के साइबर घोटाले की जांच कर रही मेरठ पुलिस की साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद मुख्य आरोपियों में से एक को धर दबोचा है।
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गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम शब्बीर कुरैशी है, जो उत्तर प्रदेश के ही झांसी जिले का मूल निवासी है। पुलिस के हत्थे चढ़ा यह शातिर ठग कोई मामूली अपराधी नहीं है, बल्कि एक सुसंगठित और हाई-टेक साइबर क्राइम गैंग का अहम मोहरा है।
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शब्बीर कुरैशी ने पुलिस पूछताछ में जो खुलासे किए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। उसने बताया कि वह इस पूरे खेल में अकेला नहीं है। उसके साथ कई अन्य साथी भी काम करते हैं जो बकायदा एक फर्जी कॉल सेंटर चलाते हैं। इनका मुख्य काम रिटायर्ड कर्मचारियों, बुजुर्गों और अमीर लोगों का डेटा इकट्ठा करना और फिर उन्हें फर्जी मुकदमों का डर दिखाकर ब्लैकमेल करना है। पुलिस फिलहाल मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर ठगी करने वाले इस नेटवर्क के अन्य सफेदपोश और तकनीकी मददगारों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
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खौफ की शुरुआत: कैसे बिछाया गया 'डिजिटल अरेस्ट' का जाल? (Modus Operandi)
\r\n\r\nइस पूरी खौफनाक घटना की शुरुआत पिछले साल सर्दियों में हुई थी। मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पॉश रोहटा रोड स्थित नंद विहार कॉलोनी में राधा कृष्ण (बदला हुआ नाम) अपनी पत्नी के साथ शांतिपूर्ण जीवन बिता रहे थे। राधा कृष्ण बिजली विभाग में एक बड़े पद से सेवानिवृत्त (Retired) हुए थे और उनके बैंक खातों में उनके रिटायरमेंट फंड और जीवन भर की बचत के करोड़ों रुपये जमा थे।
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14 दिसंबर: वो फोन कॉल जिसने सब कुछ बदल दिया
\r\n\r\nपीड़ित राधा कृष्ण द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत (FIR) के अनुसार, 14 दिसंबर को उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से घंटी बजी। ट्रूकॉलर या कॉलर आईडी पर शायद 'Police' या 'CBI' लिखा आ रहा था।
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कॉल उठाने पर दूसरी तरफ से एक बेहद सख्त और भारी आवाज आई— "मैं दिल्ली हेडक्वार्टर से CBI ऑफिसर बोल रहा हूं।"
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डराने के लिए इस्तेमाल किया 'आधार कार्ड' का नाम ठग ने राधा कृष्ण को बताया कि उनके आधार कार्ड (Aadhaar Card) का गलत हाथों में इस्तेमाल हुआ है। कहानी गढ़ी गई कि उनके आधार कार्ड के जरिए 'नरेश गोयल' नाम के एक कुख्यात अपराधी ने फर्जी तरीके से मोबाइल सिम कार्ड जारी कराया है।
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बात यहीं नहीं रुकी। कथित CBI अधिकारी ने आगे कहा कि नरेश गोयल ने उसी आधार कार्ड का उपयोग करके दिल्ली स्थित एक बड़े बैंक में एक फर्जी बैंक खाता भी खोला है, और उस खाते के जरिए इंटरनेशनल मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है। चूंकि यह खाता राधा कृष्ण के दस्तावेजों पर है, इसलिए वे इस मामले में मुख्य आरोपी (Prime Suspect) बन गए हैं।
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बाहरी दुनिया से संपर्क काटना: आइसोलेशन की साजिश
\r\n\r\nठग जानते थे कि अगर राधा कृष्ण ने इस बारे में किसी वकील, पुलिस या अपने बच्चों से बात कर ली, तो उनका खेल उसी वक्त खत्म हो जाएगा। इसलिए कॉलर ने सख्त आदेश दिया कि राधा कृष्ण तुरंत अपने अन्य सभी मोबाइल नंबर और लैंडलाइन बंद कर दें। जब उन्होंने ऐसा करने से हिचकिचाहट दिखाई, तो ठगों ने अपने 'प्लान बी' का इस्तेमाल किया— वीडियो कॉल।
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33 दिनों का मानसिक टॉर्चर: वीडियो कॉल पर फर्जी थाना और 'डिजिटल हाउस अरेस्ट'
\r\n\r\nजब पीड़ित ने फोन बंद करने से मना किया, तो उन्हें तुरंत स्काइप (Skype) या व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल से जुड़ने का निर्देश दिया गया। जैसे ही राधा कृष्ण ने वीडियो कॉल उठाई, सामने का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए।
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फर्जी पुलिस स्टेशन का बैकग्राउंड वीडियो कॉल पर सामने कुर्सी पर बैठा शख्स पुलिस की असली जैसी दिखने वाली वर्दी में था। उसके पीछे का बैकग्राउंड बिल्कुल असली पुलिस स्टेशन या CBI के जांच कक्ष जैसा डिजाइन किया गया था। पीछे भारत का नक्शा, पुलिस के लोगो और फाइलें रखी हुई थीं।
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इस वर्दीधारी ठग ने खुद को सीनियर इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर बताते हुए राधा कृष्ण को तुरंत प्रभाव से 'डिजिटल हाउस अरेस्ट' घोषित कर दिया। उसने साफ कहा कि अगर वे घर से बाहर निकले, पुलिस को फोन किया या किसी पड़ोसी को इस बात की भनक लगने दी, तो स्पेशल फोर्स आकर उन्हें और उनकी पत्नी को हथकड़ी लगाकर दिल्ली ले जाएगी। बुढ़ापे में जेल और बदनामी का ऐसा डर दिखाया गया कि पीड़ित दंपती पूरी तरह से टूट गए।
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साइबर ठग शिफ्टों में काम करते थे। एक ठग लॉग आउट करता, तो दूसरा आ जाता। उन्होंने राधा कृष्ण को 33 दिनों तक लगातार इसी तरह वीडियो कॉल पर रखा। उनके सोने, खाने और बाथरूम जाने तक की निगरानी की जा रही थी। जांच के नाम पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
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1.41 करोड़ की लूट: कैसे खाली हुआ पूरा अकाउंट?
\r\n\r\nजब ठगों को यकीन हो गया कि राधा कृष्ण पूरी तरह से उनके मानसिक नियंत्रण (Mind Control) में हैं और खौफजदा हैं, तब उन्होंने अपना असली खेल शुरू किया।
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जांच को 'रफा-दफा' करने, उन्हें 'क्लीन चिट' दिलवाने और 'RBI से उनके बैंक खातों को फ्रीज' होने से बचाने का लालच दिया गया। ठगों ने कहा कि वे एक 'सिक्योर सरकारी अकाउंट' में उनके पैसे ट्रांसफर करवा रहे हैं और जांच खत्म होने पर सारा पैसा वापस कर दिया जाएगा।
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मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुके और दबाव में आए राधा कृष्ण और उनकी पत्नी ने ठगों के बताए फर्जी बैंक खातों में पैसे भेजने शुरू कर दिए। उन्होंने अलग-अलग किश्तों में RTGS (Real Time Gross Settlement) के माध्यम से एक-एक करके कुल 1.41 करोड़ रुपये (एक करोड़ इकतालीस लाख रुपये) ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।
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जब राधा कृष्ण का बैंक अकाउंट पूरी तरह से खाली हो गया और ठगों ने महसूस किया कि अब और पैसे नहीं निकाले जा सकते, तो उन्होंने अचानक वीडियो कॉल काट दी और सभी नंबर स्विच ऑफ कर लिए। तब जाकर उस बुजुर्ग दंपती का भ्रम टूटा और उन्हें एहसास हुआ कि वे किसी सरकारी जांच का नहीं, बल्कि एक बेहद खौफनाक साइबर ठगी का शिकार हुए हैं।
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पुलिस की कार्रवाई और एसपी क्राइम का बयान
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मामले की गंभीरता को देखते हुए, मेरठ के एसपी क्राइम (SP Crime) अवनीश कुमार ने तुरंत विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। बैंक अकाउंट्स के ट्रांजेक्शन डिटेल्स, IP एड्रेस और सर्विलांस (CDR) की मदद से पुलिस ने कड़ियों को जोड़ा और झांसी निवासी शब्बीर कुरैशी तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
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एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, "हमने इस गंभीर मामले में एक मुख्य आरोपी को अरेस्ट कर लिया है। डिजिटल अरेस्ट के जरिए करोड़ों की ठगी करने वाले इस गिरोह के तार कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है और उसके अन्य साथियों को पकड़ने के लिए हमारी टीमें लगातार काम कर रही हैं। हम जल्द ही पूरे नेटवर्क का सफाया करेंगे।"
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'डिजिटल अरेस्ट' से बचने के लिए क्या करें? (सुरक्षा गाइडलाइंस)
\r\n\r\nयह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के लिए एक चेतावनी है। साइबर अपराधी अब तकनीक के साथ-साथ आपके डर का व्यापार कर रहे हैं। अगर आपके या आपके परिवार के किसी सदस्य के पास भी ऐसा कोई कॉल आए, तो तुरंत ये कदम उठाएं:
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- \r\n असली पुलिस कभी वीडियो कॉल पर 'अरेस्ट' नहीं करती: यह सबसे बड़ा नियम है। भारत की कोई भी जांच एजेंसी—चाहे वह CBI हो, ED हो, NCB हो या स्थानीय पुलिस—कभी भी स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती। नोटिस हमेशा लिखित रूप में घर आता है।\r\n \r\n
- \r\n आधार कार्ड या पार्सल के नाम पर डरें नहीं: अगर कोई कहे कि आपके आधार कार्ड का मिसयूज हुआ है या आपके नाम से कोई ड्रग्स का पार्सल पकड़ा गया है, तो बिल्कुल न घबराएं। फोन करने वाले का नाम, बैच नंबर और थाने का पता पूछें।\r\n \r\n
- \r\n अपनी बैंकिंग डिटेल्स कभी साझा न करें: सरकारी अधिकारी कभी भी आपको किसी दूसरे खाते में पैसे ट्रांसफर करने या 'अकाउंट सिक्योर' करने के लिए नहीं कहते। OTP, UPI PIN या RTGS की जानकारी किसी को न दें।\r\n \r\n
- \r\n फोन तुरंत काट दें: जैसे ही सामने वाला आपको डराने की कोशिश करे या किसी और से बात करने से रोके, तुरंत फोन काट दें और उस नंबर को ब्लॉक कर दें।\r\n \r\n
- \r\n हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें: अगर आपको थोड़ा भी शक हो या आपके साथ ठगी हो जाए, तो एक मिनट की भी देरी किए बिना गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के नंबर 1930 पर कॉल करें। आप www.cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।\r\n \r\n
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साइबर सुरक्षा के इस युग में आपकी जागरूकता ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। इस खबर को अपने घर के बुजुर्गों और रिश्तेदारों के साथ जरूर साझा करें, ताकि भविष्य में कोई और निर्दोष इंसान इन साइबर भेड़ियों का शिकार न बन सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.