मेरठ। उत्तर प्रदेश के संपत्ति खरीदारों और सरकारी संस्थाओं (जैसे मेरठ विकास प्राधिकरण, आवास एवं विकास परिषद, यूपीसीडा) के आवंटियों के लिए एक बेहद सुखद और राहत भरी खबर है। वर्षों से रजिस्ट्री कार्यालयों (तहसील) में लगने वाली लंबी लाइनों, कागजी दस्तावेजों के अंबार और दलालों के हस्तक्षेप से अब आम जनता को मुक्ति मिलने वाली है।READ ALSO:-8 जून 2026 का पंचांग और महा-राशिफल: सोमवार को कालाष्टमी का दिव्य संयोग, जानिए भगवान शिव की कृपा से किन राशियों के खुलेंगे भाग्य के द्वार!
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उत्तर प्रदेश शासन ने संपत्ति पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह से आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए 'ई-पंजीकरण' (E-Registration) की नई व्यवस्था का शंखनाद कर दिया है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उद्देश्य 'प्रेरणा' (Prerna) पोर्टल को और अधिक सशक्त बनाना है, ताकि लोग सरकारी दफ्तरों के बजाय डिजिटल माध्यम से अपनी रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरा कर सकें।
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प्रेरणा पोर्टल पर सरकारी संस्थाओं को मिला 'अलग लॉगिन'
\r\n\r\nशासन के इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत, अब सरकारी संस्थाओं को निबंधन विभाग के 'प्रेरणा' सॉफ्टवेयर पर एक विशिष्ट 'लॉगिन' (Separate Login) सुविधा प्रदान की गई है। अभी तक रजिस्ट्री की अधिकांश औपचारिकताएं व्यक्ति को खुद उप-निबंधक कार्यालय जाकर पूरी करनी पड़ती थीं, जिसमें घंटों का समय बर्बाद होता था।
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प्रदेश की महानिरीक्षक निबंधन, नेहा शर्मा ने इस बाबत स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी स्थानीय अधिकारियों को इस नई व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार करना चाहिए। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि जनता को पता चले कि रजिस्ट्री अब एक सरल, डिजिटल प्रक्रिया बन चुकी है। मेडा (MEEDA) और आवास विकास जैसे निकायों के अधिकारियों के साथ जल्द ही समन्वय बैठकें की जाएंगी ताकि इस व्यवस्था को बिना किसी तकनीकी खामी के लागू किया जा सके।
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क्या है यह नई 'ई-पंजीकरण' व्यवस्था? (कार्यप्रणाली)
\r\n\r\nयह नई व्यवस्था केवल भीड़ कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रजिस्ट्री प्रक्रिया को सुरक्षा का एक नया कवच भी प्रदान करती है। नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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- \r\n प्राधिकृत अधिकारी (Authorized Official): प्रत्येक सरकारी संस्था में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा, जो रजिस्ट्री प्रक्रिया की देखरेख और दस्तावेजों के परीक्षण के लिए जिम्मेदार होगा।\r\n \r\n
- \r\n डिजिटल ई-केवाईसी (Digital e-KYC): सुरक्षा और धोखाधड़ी को रोकने के लिए पक्षकारों की आधार आधारित ई-केवाईसी अनिवार्य होगी। साथ ही, डिजिटल बायोमेट्रिक, फोटो और डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग किया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n ऑनलाइन शुल्क भुगतान: स्टांप शुल्क (Stamp Duty) और निबंधन शुल्क (Registry Fees) का भुगतान अब पूरी तरह ऑनलाइन होगा। इससे नगद लेन-देन की गुंजाइश खत्म हो जाएगी, जो पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है।\r\n \r\n
- \r\n दस्तावेजों का ऑनलाइन परीक्षण: उप-निबंधक (Sub-Registrar) अब दस्तावेजों का परीक्षण भौतिक रूप से फाइलों के ढेर में खोजने के बजाय ऑनलाइन करेंगे। एक बार सत्यापन पूरा होने के बाद, ऑनलाइन ही स्वीकृति प्रदान की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n डिजिटल दस्तावेज़ संरक्षण: रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज हमेशा के लिए विभागीय पोर्टल पर डिजिटल रूप में संरक्षित (Save) रहेंगे। आपको भविष्य में मूल दस्तावेजों के खोने या खराब होने का डर नहीं रहेगा।\r\n \r\n
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किन संपत्तियों पर लागू होगी यह सुविधा?
\r\n\r\nयह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि ई-पंजीकरण की यह सुविधा फिलहाल सभी के लिए नहीं है। यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जिन्होंने सरकारी संस्थाओं जैसे:
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- \r\n मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा)\r\n \r\n
- \r\n उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद\r\n \r\n
- \r\n यूपीसीडा (UPSIDA) से आवासीय, व्यावसायिक या औद्योगिक संपत्ति खरीदी है।\r\n \r\n
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यह सुविधा केवल उन योजनाओं के लिए मान्य होगी जो पूरी तरह से 'अनुमोदित' (Approved) हैं और जिनके दस्तावेज स्वीकृत प्रारूप में हैं। इसका अर्थ यह है कि अवैध कॉलोनियों या विवादित संपत्तियों के लिए यह ऑनलाइन प्रक्रिया लागू नहीं होगी।
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आम आदमी को कैसे मिलेगा लाभ?
\r\n\r\nएआईजी निबंधन, शर्मा नवीन कुमार एस का कहना है कि यह शासन का एक अत्यंत प्रगतिशील प्रयास है। उन्होंने बताया कि जब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी, तो बिचौलियों की भूमिका अपने आप खत्म हो जाएगी। आवंटी को अब अपनी रजिस्ट्री के लिए एक दिन की छुट्टी लेकर तहसील में लाइन नहीं लगानी पड़ेगी।
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आम जनता के लिए प्रक्रिया सरल हो गई है:
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- \r\n समय की बचत: लंबी प्रतीक्षा सूची और कार्यालय के चक्करों से मुक्ति।\r\n \r\n
- \r\n पारदर्शिता: हर कदम का डिजिटल रिकॉर्ड होने से कोई भी गलतफहमी या धांधली की गुंजाइश नहीं रहेगी।\r\n \r\n
- \r\n सुविधा: पक्षकारों को केवल अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सही ढंग से उपलब्ध करानी होगी। बाकी का काम संबंधित सरकारी संस्था और निबंधन विभाग के बीच डिजिटल तालमेल से हो जाएगा।\r\n \r\n
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सावधानियां और जरूरी निर्देश
\r\n\r\nभले ही यह प्रक्रिया ऑनलाइन हो रही है, लेकिन कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना अभी भी जरूरी है:
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- \r\n अपने आधार कार्ड को अपने चालू मोबाइल नंबर से लिंक जरूर रखें, क्योंकि ई-केवाईसी के लिए ओटीपी (OTP) उसी पर आएगा।\r\n \r\n
- \r\n रजिस्ट्री के दौरान उपयोग की जाने वाली ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर का उपयोग सावधानी से करें, क्योंकि विभाग के साथ पत्राचार उसी पर होगा।\r\n \r\n
- \r\n सरकारी संस्था के अधिकृत अधिकारी से अपनी योजना के 'अनुमोदन' (Approval) की स्थिति पहले ही स्पष्ट कर लें।\r\n \r\n
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एक डिजिटल भविष्य की ओर कदम
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और नागरिकों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' की दिशा में एक मील का पत्थर है। मेरठ और पूरे उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों के आवंटी अब डिजिटल युग की इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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यदि आप भी अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री करवाने की योजना बना रहे हैं, तो अपने संबंधित प्राधिकरण (मेडा, आवास विकास या यूपीसीडा) के जनसंपर्क कार्यालय में जाकर इस नई व्यवस्था के बारे में पूछताछ करें। भविष्य में रजिस्ट्री करवाना अब महज कुछ क्लिक का काम रह जाएगा।
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(नोट: यह व्यवस्था अभी चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है। अपने क्षेत्र के संबंधित उप-निबंधक कार्यालय या संबंधित प्राधिकरण की वेबसाइट पर जाकर नवीनतम अपडेट की जांच करते रहें।)
Sabse pehle comment karne wale banein.