उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला एक बार फिर अवैध हथियारों के काले कारोबार को लेकर सुर्खियों में आ गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपराध और हथियारों की तस्करी का नेटवर्क कितना गहरा है, इसका एक और खौफनाक उदाहरण शनिवार को देखने को मिला। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (Delhi Police Special Cell) ने एक बेहद गुप्त और सटीक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए मेरठ पेन पिस्टल फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। यह कोई आम हथियारों की फैक्ट्री नहीं थी, बल्कि यहां हॉलीवुड फिल्मों की तर्ज पर 'पेन पिस्टल' (Pen Pistol) जैसे घातक और हाई-टेक हथियार बनाए जा रहे थे। इस छापेमारी में पुलिस ने हथियारों के इस काले धंधे के मास्टरमाइंड और कुख्यात अपराधी परवेज उर्फ मैगजीन (Parvez alias Magazine) को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।READ ALSO:-यूपी में मौसम का 'डबल अटैक': कहीं चिलचिलाती धूप तो 16 जिलों में आंधी-तूफान के साथ झमाझम बारिश का अलर्ट; घर से निकलने से पहले पढ़ें IMD की बड़ी चेतावनी
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ख़बरीलाल की इस एक्सक्लूसिव और विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे दिल्ली पुलिस ने इस खौफनाक मेरठ पेन पिस्टल फैक्ट्री तक पहुंचने का रास्ता तय किया। हम इस 'साइलेंट किलर' (Silent Killer) हथियार की कार्यप्रणाली, आरोपी परवेज के खूंखार आपराधिक इतिहास और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जुड़े उसके पुराने तारों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
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मेरठ के सोहराब गेट इलाके में दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन
\r\n\r\nशनिवार का दिन मेरठ के सोहराब गेट (Sohrab Gate) इलाके के निवासियों के लिए एक आम दिन की तरह ही शुरू हुआ था। लेकिन दोपहर होते-होते शाहघासा (Shahghasa) स्थित एक मकान के आसपास अचानक सादे कपड़ों में और भारी हथियारों से लैस पुलिसकर्मियों की हलचल तेज हो गई। स्थानीय लोगों को कुछ समझ आता, इससे पहले ही पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। यह दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम थी, जो एक पक्की खुफिया सूचना के आधार पर यहां पहुंची थी।
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पुलिस को अपने विश्वस्त सूत्रों और सर्विलांस के जरिए यह पुख्ता जानकारी मिली थी कि सोहराब गेट के इस घनी आबादी वाले इलाके में एक हाई-टेक अवैध असलहा फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा है। पुलिस ने बिना कोई समय गंवाए परवेज के घर पर धावा बोल दिया। घर के अंदर का नजारा देखकर खुद पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। बाहर से बेहद सामान्य दिखने वाले इस मकान के अंदर मौत का एक पूरा कारखाना चल रहा था।
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कैसे हुआ मेरठ पेन पिस्टल फैक्ट्री का भंडाफोड़?
\r\n\r\nइस पूरी कार्रवाई की शुरुआत मेरठ से नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली से हुई थी। हथियारों के इस बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ रातों-रात नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे दिल्ली पुलिस की हफ्तों की कड़ी मेहनत और तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance) शामिल है।
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दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे नेटवर्क की पहली कड़ी 19 मार्च 2026 को उनके हाथ लगी थी। 19 मार्च को दिल्ली पुलिस ने एक खुफिया इनपुट के आधार पर दिल्ली के बादली रेलवे स्टेशन (Badli Railway Station) पर जाल बिछाया था। वहां से पुलिस ने एक संदिग्ध अपराधी को धर दबोचा, जिसका नाम हासिर उर्फ ‘शूटर’ (Hasir alias Shooter) था। जब हासिर की तलाशी ली गई, तो उसके पास से एक बेहद अजीबोगरीब हथियार बरामद हुआ, जो दिखने में बिल्कुल एक साधारण लिखने वाले पेन (Pen) जैसा था, लेकिन असल में वह एक घातक पिस्टल थी।
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जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हासिर उर्फ शूटर से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने टूटते हुए अपने सप्लायर का नाम उगल दिया। उसने बताया कि यह 'पेन पिस्टल' उसे उत्तर प्रदेश के मेरठ से सप्लाई की गई है और इसका निर्माता परवेज उर्फ मैगजीन है। इसी सटीक निशानदेही और लीड के आधार पर दिल्ली पुलिस की टीम ने शनिवार को मेरठ में यह बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की और मेरठ पेन पिस्टल फैक्ट्री को नेस्तनाबूद कर दिया।
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दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के ज्वाइंट सीपी का बयान
\r\n\r\nइस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व और निगरानी कर रहे दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के ज्वाइंट सीपी सुरेंद्र यादव (Joint CP Surendra Yadav) ने इस छापेमारी के बारे में मीडिया को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह फैक्ट्री सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन चुकी थी।
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ज्वाइंट सीपी सुरेंद्र यादव ने बताया, "पेन पिस्टल दिखने में बिल्कुल एक साधारण और महंगे पेन जैसी होती है। इसे किसी की शर्ट की जेब में आसानी से रखा जा सकता है। इसे सामान्य चेकिंग, मेटल डिटेक्टर (Metal Detector) की शुरुआती जांच या पुलिस नाकों पर पकड़ पाना लगभग नामुमकिन है। आरोपी परवेज 'साइलेंट किलिंग' (Silent Killing) के लिए इस्तेमाल होने वाले इन अत्याधुनिक हथियारों को डिजाइन करने में महारत हासिल कर चुका है।"
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उन्होंने आगे बताया कि मौके से भारी मात्रा में पुलिस को सफलता मिली है। यह फैक्ट्री बेहद शातिराना तरीके से घर के अंदर ही एक खुफिया कमरे में चलाई जा रही थी, ताकि पड़ोसियों को भी लेथ मशीन (Lathe Machine) या हथियार बनाने की आवाजें न आएं।
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25 पेन पिस्टल और भारी मात्रा में असलहा बरामद
\r\n\r\nछापेमारी के दौरान दिल्ली पुलिस की टीम ने जब घर के उस खुफिया हिस्से की तलाशी ली, तो वहां हथियारों का जखीरा देखकर हर कोई सन्न रह गया। पुलिस ने मौके से निम्नलिखित चीजें बरामद की हैं:
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- \r\n 25 तैयार पेन पिस्टल: ये सभी पिस्टल पूरी तरह से फायर करने के लिए तैयार थीं और संभवतः इनकी डिलीवरी किसी बड़े गैंग या शूटर को की जानी थी।\r\n \r\n
- \r\n भारी मात्रा में कारतूस: मौके से 7.65MM के कई जिंदा कारतूस (Cartridges) बरामद किए गए हैं, जो इन पेन पिस्टल में इस्तेमाल होते हैं।\r\n \r\n
- \r\n हथियार बनाने के पुर्जे: आधी बनी हुई पिस्टल, स्प्रिंग, ट्रिगर मैकेनिज्म, और लोहे की छोटी-छोटी नलियां (Barrels)।\r\n \r\n
- \r\n आधुनिक मशीनें: हथियारों को फिनिशिंग देने, उनकी कटाई करने और उन्हें असेंबल करने के लिए इस्तेमाल होने वाली ग्राइंडर, ड्रिल मशीन और अन्य उपकरण।\r\n \r\n
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यह पूरी बरामदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि परवेज का यह कारखाना कोई छोटा-मोटा जुगाड़ नहीं था, बल्कि यहां व्यावसायिक स्तर (Commercial Level) पर हथियारों का उत्पादन हो रहा था।
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क्या है 'पेन पिस्टल' और क्यों है यह पुलिस के लिए सिरदर्द?
\r\n\r\nआम जनता के लिए 'पेन पिस्टल' का कॉन्सेप्ट अक्सर जेम्स बॉन्ड (James Bond) या हॉलीवुड की जासूसी फिल्मों तक ही सीमित रहता है। लेकिन असल जिंदगी में अपराधियों के हाथ में इसका पहुंचना एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। आइए समझते हैं कि यह हथियार इतना खतरनाक क्यों है।
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- \r\n आकार और डिजाइन (Size and Design): यह पिस्टल बिल्कुल एक स्टैंडर्ड साइज के फाउंटेन पेन या बॉलपॉइंट पेन की तरह दिखती है। इसके बाहरी आवरण (Casing) को इस तरह से बनाया जाता है कि जब तक इसे खोलकर न देखा जाए, कोई भी इसे हथियार नहीं मान सकता।\r\n \r\n
- \r\n फायरिंग क्षमता (Firing Capacity): जांच अधिकारियों ने खुलासा किया है कि परवेज द्वारा बनाई जा रही यह पेन पिस्टल 7.65MM के खतरनाक कारतूस को फायर करने में पूरी तरह सक्षम है। 7.65MM का कारतूस वही है जो आमतौर पर पुलिस और अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली मानक पिस्टल में होता है। करीब से मारी गई इसकी गोली इंसान की जान लेने के लिए काफी है।\r\n \r\n
- \r\n साइलेंट किलर (The Silent Killer): पुलिस इसे 'साइलेंट किलर' मान रही है। हालांकि यह पूरी तरह से आवाज रहित (Silenced) नहीं होती, लेकिन इसे छिपाना इतना आसान होता है कि हमलावर भीड़भाड़ वाले इलाके, रेलवे स्टेशन, वीआईपी सुरक्षा घेरे (VIP Security Cordon), या किसी रैली में इसे आसानी से लेकर जा सकता है।\r\n \r\n
- \r\n टारगेट किलिंग (Target Killing) में इस्तेमाल: इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल आमतौर पर 'टारगेट किलिंग' यानी किसी विशेष व्यक्ति की हत्या करने के लिए किया जाता है। शूटर अपने लक्ष्य के बेहद करीब जाकर, बिना किसी को शक हुए, जेब से पेन निकालकर फायर कर सकता है और हथियार को वापस छिपाकर भीड़ में आसानी से गायब हो सकता है।\r\n \r\n
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यही कारण है कि मेरठ पेन पिस्टल फैक्ट्री का पकड़ा जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की बात है। अगर ये 25 पेन पिस्टल किसी स्लीपर सेल (Sleeper Cell) या आतंकी संगठन के हाथ लग जातीं, तो देश में कोई बहुत बड़ी वारदात हो सकती थी।
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कौन है कुख्यात परवेज उर्फ मैगजीन? (The Mastermind)
\r\n\r\nइस पूरी खौफनाक साजिश का मास्टरमाइंड परवेज उर्फ मैगजीन कोई नया या नौसिखिया अपराधी नहीं है। उसका नाम 'मैगजीन' ही इस बात का सबूत है कि अपराध की दुनिया में हथियारों की सप्लाई को लेकर उसकी कितनी गहरी पैठ है। परवेज का आपराधिक इतिहास (Criminal History) काफी लंबा, खौफनाक और चौंकाने वाला रहा है।
\r\n\r\nNIA की रडार पर रहा है आरोपी
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परवेज का नाम पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब गूंजा था, जब साल 2017 में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसे गिरफ्तार किया था। उस समय एनआईए (NIA) को शक था कि परवेज केवल स्थानीय गैंगस्टरों को ही नहीं, बल्कि देश में सक्रिय विभिन्न आतंकी संगठनों (Terror Outfits) को भी अवैध हथियार सप्लाई कर रहा है। एनआईए द्वारा उसकी गिरफ्तारी ने साबित कर दिया था कि उसके तार देशविरोधी ताकतों से भी जुड़े हो सकते हैं।
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जेल से छूटते ही फिर शुरू किया धंधा
\r\n\r\nएनआईए की कार्रवाई के बाद कुछ समय तक वह शांत रहा या जेल में रहा। लेकिन अपराध की दुनिया का यह कीड़ा ज्यादा दिन तक शांत नहीं बैठ सका। साल 2024 में भी मेरठ की स्थानीय पुलिस ने परवेज को अवैध हथियारों की तस्करी के एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेजा था।
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लेकिन हमारे कानूनी और न्यायिक सिस्टम की कुछ खामियों का फायदा उठाकर परवेज कुछ ही महीनों में जमानत (Bail) पर जेल से बाहर आ गया। जेल से बाहर आते ही उसने सुधरने के बजाय अपना पुराना और मौत का यह कारोबार फिर से शुरू कर दिया। इस बार उसने पुलिस से बचने के लिए देसी कट्टे (Desi Katta) या आम पिस्टल बनाने के बजाय, हाई-टेक 'पेन पिस्टल' बनाने का रास्ता चुना, ताकि वह आसानी से पुलिस की नजरों से बच सके।
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अवैध हथियारों का गढ़ बनता पश्चिमी उत्तर प्रदेश?
\r\n\r\nमेरठ पेन पिस्टल फैक्ट्री का यह भंडाफोड़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) की उस पुरानी और कड़वी सच्चाई को एक बार फिर सामने लाता है, जिसे अक्सर प्रशासन दबाने की कोशिश करता है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, और बागपत का इलाका दशकों से अवैध हथियारों (Illegal Weapons) के निर्माण और तस्करी का एक कुख्यात हब रहा है।
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पहले जहां इन इलाकों में गन्ने के खेतों या ईंट-भट्ठों पर छिपकर साधारण 'देसी कट्टे' (Country-made firearms) बनाए जाते थे, वहीं अब यहां के अपराधियों ने अपनी तकनीक को पूरी तरह से अपग्रेड कर लिया है। वे अब मुंगेर (Munger) की तर्ज पर अत्याधुनिक और परिष्कृत (Sophisticated) हथियार बना रहे हैं।
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सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई और गंभीर चुनौती
\r\n\r\nस्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए यह एक बहुत बड़ा सिरदर्द बन गया है। जब अपराधी 'पेन' जैसी रोजमर्रा की चीजों को मौत के हथियार में तब्दील करने लगें, तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। खासकर ऐसे समय में जब देश में लगातार वीआईपी (VIP) मूवमेंट होते रहते हैं और चुनावी माहौल में रैलियां होती हैं, एक छोटी सी पेन पिस्टल किसी भी बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी का कारण बन सकती है। पुलिस को अब अपनी चेकिंग के तरीकों, मेटल डिटेक्टर की संवेदनशीलता और खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करना होगा।
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आगे की जांच और पुलिस की रणनीति
\r\n\r\nपरवेज उर्फ मैगजीन की गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस और यूपी एटीएस (UP ATS) के लिए एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन जांच अभी खत्म नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
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- \r\n खरीदारों की तलाश (Tracking the Buyers): पुलिस अब परवेज के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल्स (CDR) और उसके संपर्कों को खंगाल रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये 25 पेन पिस्टल किसे डिलीवर की जानी थीं? क्या दिल्ली, पंजाब या हरियाणा का कोई बड़ा गैंग इन हथियारों का इंतजार कर रहा था?\r\n \r\n
- \r\n फंडिंग और कच्चा माल (Funding and Raw Material): इस तरह के अत्याधुनिक हथियार बनाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाला लोहा, स्प्रिंग और मशीनें कहां से आ रही थीं? पुलिस उन व्यापारियों और कबाड़ियों की भी जांच कर रही है, जो परवेज को कच्चा माल (Raw Material) सप्लाई कर रहे थे।\r\n \r\n
- \r\n आतंकी एंगल की जांच (Terror Angle Investigation): चूंकि परवेज पहले भी एनआईए (NIA) की रडार पर रह चुका है, इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां (Central Agencies) भी जल्द ही इस मामले में शामिल हो सकती हैं। पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि कहीं इन हथियारों का इस्तेमाल किसी आतंकी हमले या स्लीपर सेल द्वारा 'लोन वुल्फ अटैक' (Lone Wolf Attack) के लिए तो नहीं किया जाना था।\r\n \r\n
- \r\n नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब उन अन्य कारीगरों और सहयोगियों की भी तलाश कर रही है, जो परवेज के साथ मिलकर इस मेरठ पेन पिस्टल फैक्ट्री में काम करते थे।\r\n \r\n
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मेरठ के शाहघासा (Sohrab Gate) इलाके में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा की गई यह छापेमारी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अपराधी पुलिस से दो कदम आगे चलने की कोशिश कर रहे हैं। मेरठ पेन पिस्टल फैक्ट्री का पकड़ा जाना केवल एक स्थानीय अपराध की खबर नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला है। परवेज उर्फ मैगजीन जैसे आदतन अपराधी का बार-बार जेल से छूटकर इतने घातक 'साइलेंट किलर' हथियार बनाना हमारे सिस्टम पर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, दिल्ली पुलिस की सतर्कता और 19 मार्च को हासिर की गिरफ्तारी से मिले सुराग ने एक बहुत बड़े नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। यह उम्मीद की जानी चाहिए कि इस बार परवेज के खिलाफ इतने पुख्ता सुबूत जुटाए जाएंगे कि वह आसानी से सलाखों से बाहर न आ सके और 'टारगेट किलिंग' का यह खौफनाक कारखाना हमेशा के लिए बंद हो जाए। पुलिस और आम जनता दोनों को अब अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि खतरा अब पेन के रूप में भी आपकी जेब के करीब हो सकता है।
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संक्षिप्त सारांश (Summary): दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के मेरठ (सोहराब गेट इलाके) में एक हाई-टेक अवैध असलहा फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है। इस 'मेरठ पेन पिस्टल फैक्ट्री' में घातक 7.65MM के कारतूस दागने में सक्षम और 'साइलेंट किलिंग' के लिए इस्तेमाल होने वाली पेन पिस्टल बनाई जा रही थीं। पुलिस ने मौके से 25 पेन पिस्टल, मशीनें और कारतूस बरामद कर कुख्यात मास्टरमाइंड परवेज उर्फ मैगजीन को गिरफ्तार कर लिया है। परवेज 2017 में एनआईए (NIA) और 2024 में मेरठ पुलिस द्वारा पहले भी जेल भेजा जा चुका है। 19 मार्च 2026 को दिल्ली से गिरफ्तार शूटर हासिर की निशानदेही पर यह बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने कई संभावित टारगेट किलिंग की घटनाओं को टाल दिया है।
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