मेरठ/गाजियाबाद: 1 अप्रैल का दिन वैसे तो 'अप्रैल फूल डे' के रूप में जाना जाता है, लेकिन इस बार 1 अप्रैल 2026 की सुबह आम जनता, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश (West UP) और दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक असली और कड़वा झटका लेकर आई है। वित्तीय वर्ष के पहले ही दिन से महंगाई ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। 31 मार्च की रात 12 बजे के बाद से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा जारी नई टोल दरें लागू कर दी गई हैं।READ ALSO:-मेरठ अदालत परिसर में बम की धमकी से मचा भारी हड़कंप: चप्पे-चप्पे पर पुलिस का कड़ा पहरा, वकीलों और आम जनता को निकाला गया बाहर
\r\n\r\n\r\n\r\n
दिल्ली से मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और देहरादून जाने वाले यात्रियों को अब अपने फास्टैग (FASTag) वॉलेट में ज्यादा बैलेंस रखना होगा। कार, जीप और वैन जैसे हल्के वाहनों से लेकर बस, ट्रक, मल्टी-एक्सल (Multi-axle) और ओवरसाइज कमर्शियल वाहनों तक—सभी श्रेणियों के लिए टोल टैक्स के स्लैब में बदलाव किया गया है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब आम आदमी पहले ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों और रोजमर्रा की महंगाई से जूझ रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
आइए, 'खबरीलाल' की इस विस्तृत विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में जानते हैं कि किस हाईवे पर आपकी जेब कितनी ज्यादा कटेगी, ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर इसका क्या असर होगा, और स्थानीय निवासियों के लिए राहत के क्या प्रावधान किए गए हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
1. दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME): दिल्ली से मेरठ का सफर अब और खर्चीला
\r\n\r\nदिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (Delhi-Meerut Expressway - DME) पश्चिमी उत्तर प्रदेश की लाइफलाइन बन चुका है। 14 लेन का यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के सराय काले खां (Sarai Kale Khan) से शुरू होकर गाजियाबाद, डासना होते हुए मेरठ के परतापुर तक जाता है। रोजाना हजारों नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और छात्र इस रूट का इस्तेमाल करते हैं। बेहतरीन सड़क और कम समय में सफर पूरा होने की वजह से यह लोगों की पहली पसंद है, लेकिन अब इस सुविधा की कीमत बढ़ गई है।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
क्या हैं नई दरें?
\r\n\r\nNHAI के ताजा नोटिफिकेशन के अनुसार, 31 मार्च की आधी रात से सराय काले खां से मेरठ (काशी टोल प्लाजा) तक का पूरा सफर करने वाले हल्के वाहनों (कार, जीप, वैन) के लिए टोल टैक्स 170 रुपये से बढ़ाकर 175 रुपये कर दिया गया है। यानी सीधे तौर पर प्रति फेरा 5 रुपये का इजाफा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भले ही 5 रुपये की बढ़ोतरी आम कार चालक को छोटी लगे, लेकिन जो व्यक्ति महीने में 20 दिन अप-डाउन (Up-down) करता है, उसके लिए यह मासिक खर्च में 200 रुपये की सीधी वृद्धि है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कमर्शियल वाहनों पर बड़ी मार
\r\n\r\nसबसे ज्यादा असर बस, ट्रक और अन्य भारी वाहनों पर पड़ा है। इस एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों के टोल में 15 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। मल्टी-एक्सल वाहनों और ओवरसाइज वाहनों (Oversized Vehicles) के लिए टोल दरों में स्लैब के अनुसार वृद्धि की गई है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (सराय काले खां से मेरठ) - टोल रेट कार्ड:
\r\n\r\n(नोट: यह दरें एंड-टू-एंड सफर के लिए हैं, बीच के एग्जिट पॉइंट पर दूरी के हिसाब से कटने वाले टोल में भी आनुपातिक रूप से वृद्धि हुई है)
\r\n\r\n| \r\n वाहन की श्रेणी (Vehicle Category) \r\n | \r\n \r\n पुरानी दर (Old Rate) \r\n | \r\n \r\n नई दर (New Rate - 1 April 2026) \r\n | \r\n \r\n बढ़ोतरी (Hike) \r\n | \r\n
| \r\n कार, जीप, वैन (LMV) \r\n | \r\n \r\n ₹170 \r\n | \r\n \r\n ₹175 \r\n | \r\n \r\n + ₹5 \r\n | \r\n
| \r\n हल्के कमर्शियल वाहन (LCV/Minibus) \r\n | \r\n \r\n (अनुमानित) ₹270 \r\n | \r\n \r\n (अनुमानित) ₹280 \r\n | \r\n \r\n + ₹10 \r\n | \r\n
| \r\n बस और ट्रक (2 Axle) \r\n | \r\n \r\n (अनुमानित) ₹530 \r\n | \r\n \r\n (अनुमानित) ₹545 \r\n | \r\n \r\n + ₹15 \r\n | \r\n
| \r\n मल्टी-एक्सल कमर्शियल वाहन \r\n | \r\n \r\n (स्लैब अनुसार) \r\n | \r\n \r\n (स्लैब अनुसार) \r\n | \r\n \r\n + ₹15 तक \r\n | \r\n
\r\n\r\n
दैनिक यात्रियों की प्रतिक्रिया:
\r\n\r\nमेरठ से रोजाना दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित अपने ऑफिस जाने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर रजत त्यागी कहते हैं, "एक्सप्रेसवे ने समय तो बचाया है, लेकिन हर साल 1 अप्रैल को टोल बढ़ना एक रूटीन बन गया है। फास्टैग से पैसे कट जाते हैं तो तुरंत दर्द महसूस नहीं होता, लेकिन महीने के अंत में जब बजट देखते हैं तो समझ आता है कि यात्रा कितनी महंगी हो गई है।"
\r\n\r\n\r\n\r\n
2. दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: यहां लगा है सबसे बड़ा 'टोल शॉक'
\r\n\r\nअगर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की बढ़ोतरी को 'हल्का झटका' कहा जाए, तो दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi-Dehradun Expressway) पर लागू की गई नई दरें वाहन चालकों के लिए किसी 'बड़े झटके' से कम नहीं हैं। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर होते हुए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून तक जाता है। इसका निर्माण कार्य कई चरणों में पूरा हो रहा है और जो हिस्से चालू हो चुके हैं, वहां टोल वसूली की जा रही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कार का टोल हुआ दोगुने से भी ज्यादा
\r\n\r\nइस एक्सप्रेसवे के चालू खंडों पर कार चालकों के लिए टोल दरों में भारी उछाल आया है। जो कार चालक पहले एक निश्चित दूरी के लिए 35 रुपये टोल चुकाते थे, अब उन्हें उसी दूरी के लिए सीधे 85 रुपये का भुगतान करना होगा। यह 50 रुपये की सीधी बढ़ोतरी है, जो प्रतिशत के हिसाब से 140% से भी अधिक का उछाल है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भारी वाहनों के लिए ढाई गुना तक वृद्धि
\r\n\r\nसबसे बुरी खबर ट्रांसपोर्टरों और बस ऑपरेटरों के लिए है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बस और ट्रक (Heavy Vehicles) के लिए पहले जहां 115 रुपये टोल लगता था, उसे बढ़ाकर सीधे 300 रुपये कर दिया गया है। यह लगभग ढाई गुना (2.5x) की बढ़ोतरी है।
\r\n\r\n| \r\n वाहन की श्रेणी (Vehicle Category) \r\n | \r\n \r\n पुरानी दर (Old Rate) \r\n | \r\n \r\n नई दर (New Rate - 1 April 2026) \r\n | \r\n \r\n बढ़ोतरी का असर \r\n | \r\n
| \r\n कार, जीप, हल्के वाहन \r\n | \r\n \r\n ₹35 \r\n | \r\n \r\n ₹85 \r\n | \r\n \r\n भारी उछाल (+ ₹50) \r\n | \r\n
| \r\n बस और ट्रक (Heavy Vehicles) \r\n | \r\n \r\n ₹115 \r\n | \r\n \r\n ₹300 \r\n | \r\n \r\n अकल्पनीय वृद्धि (+ ₹185) \r\n | \r\n
\r\n\r\n
इतनी भारी बढ़ोतरी का कारण क्या है?
\r\n\r\nविभागीय सूत्रों और NHAI के अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट (Greenfield Project) है, जिसमें एलिवेटेड रोड, वन्यजीवों के लिए एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर (Wildlife Corridor) और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल है। जैसे-जैसे इस एक्सप्रेसवे के नए हिस्से जुड़ते जा रहे हैं और किलोमीटर की लंबाई बढ़ रही है, 'यूजर फी' (User Fee) के नियमों के तहत टोल को पुनर्गठित (Restructured) किया गया है। शुरुआती दौर में यह रियायती दरों पर था, जिसे अब वास्तविक स्लैब में लाया गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
हालांकि, ट्रांसपोर्ट यूनियन इस तर्क को मानने को तैयार नहीं हैं और इसे सीधे तौर पर 'लूट' करार दे रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
3. मेरठ-पौड़ी और मेरठ-करनाल हाईवे का हाल: कहीं राहत, कहीं आफत
\r\n\r\nवेस्ट यूपी के कस्बों और गांवों को जोड़ने वाले स्टेट हाईवे और नेशनल हाईवे के अन्य खंडों पर भी टोल की नई दरें लागू हुई हैं। इनमें मुख्य रूप से मेरठ-पौड़ी हाईवे (NH-119) और मेरठ-करनाल हाईवे (NH-709A) शामिल हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भैंसा टोल प्लाजा (मेरठ-पौड़ी हाईवे):
\r\n\r\nमेरठ से मवाना, बिजनौर, नजीबाबाद होते हुए पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड) तक जाने वाले इस महत्वपूर्ण हाईवे पर स्थित भैंसा टोल प्लाजा (Bhainsa Toll Plaza) पर भी वाहन चालकों की जेब ढीली होगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n यहां वाहनों की विभिन्न श्रेणियों के आधार पर टोल टैक्स में 5 रुपये से लेकर 25 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।\r\n \r\n
- \r\n यह रूट बिजनौर और गढ़वाल क्षेत्र के लोगों के लिए मुख्य मार्ग है। इस बढ़ोतरी से बिजनौर से मेरठ आने-जाने वाली रोडवेज बसों और डग्गामार वाहनों के किराये में भी जल्द ही वृद्धि होने की पूरी संभावना है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
भूनी टोल प्लाजा (मेरठ-करनाल हाईवे): कार चालकों को बड़ी राहत
\r\n\r\nसरधना, शामली होते हुए हरियाणा के करनाल को जोड़ने वाले हाईवे पर स्थित भूनी टोल प्लाजा (Bhuni Toll Plaza) पर NHAI ने थोड़ी समझदारी और नरमी दिखाई है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n कार चालकों के लिए 'नो चेंज': इस टोल प्लाजा पर कार, जीप और हल्के वाहनों के लिए टोल दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। एक तरफ (Single Journey) का किराया पहले की तरह ही 85 रुपये बरकरार रखा गया है।\r\n \r\n
- \r\n कमर्शियल पर गिरी गाज: हालांकि, इस राहत का बोझ कमर्शियल वाहनों पर डाल दिया गया है। भूनी टोल प्लाजा से गुजरने वाले बस और ट्रकों के लिए टोल टैक्स में सीधे 20 रुपये का इजाफा कर दिया गया है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
4. स्थानीय निवासियों के लिए राहत की खबर: मासिक पास की व्यवस्था
\r\n\r\nटोल प्लाजा के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और शहरवासियों के लिए एक राहत भरी खबर यह है कि NHAI ने 'लोकल पास' (Local Pass) की सुविधा को जारी रखा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
20 किलोमीटर के दायरे का नियम:
\r\n\r\nराष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दरें और संग्रहण) नियम, 2008 (National Highways Fee Rules) के तहत, टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे (Radius) में रहने वाले गैर-व्यावसायिक (Non-commercial) वाहन मालिकों को मासिक पास की सुविधा दी जाती है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n भैंसा (Bhainsa) और भूनी (Bhuni) दोनों ही टोल प्लाजा पर 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय निवासियों के लिए कार/जीप का मासिक पास 350 रुपये में जारी रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n यह पास बनवाने के लिए वाहन मालिक को अपना आधार कार्ड, वाहन की आरसी (RC) और निवास प्रमाण पत्र फास्टैग प्रदाता (FASTag Provider) या टोल प्लाजा के कार्यालय में जमा कराना होता है।\r\n \r\n
- \r\n इस पास से स्थानीय लोग जो खेती-किसानी, नौकरी या व्यापार के सिलसिले में दिन में कई बार टोल पार करते हैं, उन्हें भारी आर्थिक बोझ से बचने में मदद मिलेगी।\r\n \r\n
\r\n\r\n
वेस्टर्न यूपी टोल प्लाजा: फिलहाल टली बढ़ोतरी
\r\n\r\nदिल्ली-देहरादून हाईवे के ही एक अन्य महत्वपूर्ण 'वेस्टर्न यूपी टोल प्लाजा' (Western UP Toll Plaza) के उपयोगकर्ताओं के लिए अच्छी खबर है। प्रशासन और टोल संचालन कंपनी के बीच हुए पूर्व समझौते के अनुसार, यहां टोल दरों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इस प्लाजा पर जुलाई महीने तक पुरानी दरें ही लागू रहेंगी। जो वाहन चालक इस रूट का नियमित इस्तेमाल करते हैं, वे अगले तीन महीने तक राहत की सांस ले सकते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
5. अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर टोल बढ़ोतरी का प्रभाव (Economic Impact Analysis)
\r\n\r\nटोल टैक्स केवल सड़क के इस्तेमाल का शुल्क नहीं है; यह एक ऐसा आर्थिक 'डोमिनो इफेक्ट' (Domino Effect) पैदा करता है, जिसका असर समाज के हर वर्ग पर पड़ता है। जब टोल बढ़ता है, तो उसका सीधा असर माल ढुलाई (Freight Charges) पर पड़ता है, और जब माल ढुलाई महंगी होती है, तो बाजार में हर चीज के दाम बढ़ जाते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
क) ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर सीधा असर:
\r\n\r\nमेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर और शामली को वेस्ट यूपी का औद्योगिक और कृषि हब माना जाता है। यहां से रोज हजारों ट्रक गन्ना, गुड़, चीनी, कपड़ा, खेल का सामान (Sports Goods), और ताजी सब्जियां लेकर दिल्ली की आजादपुर मंडी और देश के अन्य हिस्सों में जाते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर 115 रुपये से 300 रुपये और दिल्ली-मेरठ पर 15 रुपये प्रति चक्कर की बढ़ोतरी ट्रांसपोर्टरों की लागत को काफी बढ़ा देगी।\r\n \r\n
- \r\n ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के स्थानीय पदाधिकारियों ने इस बढ़ोतरी पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि "एक तरफ डीजल की कीमतें स्थिर नहीं हैं, स्पेयर पार्ट्स महंगे हो रहे हैं, इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ रहा है और ऊपर से टोल टैक्स का यह बेतहाशा इजाफा। ट्रक ऑपरेटरों के पास अब माल भाड़ा (Freight Rate) बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।"\r\n \r\n
\r\n\r\n
ख) बाजार में महंगाई (Inflation):
\r\n\r\nजब एक ट्रक ऑपरेटर अपना माल भाड़ा बढ़ाएगा, तो थोक व्यापारी (Wholesaler) उस अतिरिक्त लागत को फुटकर व्यापारी (Retailer) पर डालेगा, और अंततः वह बोझ आम उपभोक्ता (Consumer) की जेब पर पड़ेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n सब्जियां और फल: दिल्ली की मंडियों में मेरठ और आसपास के इलाकों से आने वाली ताजी सब्जियों और फलों की कीमतों में प्रति किलो 1 से 2 रुपये का उछाल देखने को मिल सकता है।\r\n \r\n
- \r\n निर्माण सामग्री: गाजियाबाद और मुजफ्फरनगर से आने वाले सीमेंट, सरिये और ईंटों के ट्रकों का भाड़ा बढ़ने से घर बनाना भी महंगा हो जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n बस किराया: यूपी रोडवेज (UPSRTC) और प्राइवेट बस संचालक भी जल्द ही अपने यात्री किराये (Passenger Fare) में संशोधन कर सकते हैं। जब बस का टोल 20 रुपये से 185 रुपये तक बढ़ता है, तो प्रति यात्री 5 से 10 रुपये का टिकट महंगा होना तय माना जा रहा है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
ग) पारिवारिक बजट का बिगड़ना:
\r\n\r\nजो व्यक्ति कार से मेरठ से दिल्ली रोज अप-डाउन करता है, उसके लिए महीने का टोल खर्च 200 से 300 रुपये बढ़ गया है। साल भर में यह आंकड़ा 2400 से 3600 रुपये बैठता है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए, जिनकी सैलरी में उस अनुपात में इंक्रीमेंट नहीं होता, यह एक अतिरिक्त और अनावश्यक बोझ है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
6. हर साल 1 अप्रैल को क्यों बढ़ता है टोल? (Why Toll Taxes Increase Annually)
\r\n\r\nबहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर हर साल 1 अप्रैल को ही टोल टैक्स क्यों बढ़ा दिया जाता है? क्या सरकार अपनी मर्जी से यह दाम तय करती है? इसका जवाब NHAI की नीतियों और देश की अर्थव्यवस्था के गणित में छिपा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
WPI (Wholesale Price Index) लिंकेज:
\r\n\r\nराष्ट्रीय राजमार्ग (शुल्क) नियम 2008 के प्रावधानों के अनुसार, टोल टैक्स की दरों को थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index - WPI) के साथ लिंक (Link) किया गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n NHAI हर साल मुद्रास्फीति (Inflation) यानी महंगाई दर की समीक्षा करता है। WPI में जितने प्रतिशत की वृद्धि होती है, उसी अनुपात में टोल दरों को हर साल वित्तीय वर्ष की शुरुआत (1 अप्रैल) में 'इंडेक्स' (Indexed) किया जाता है।\r\n \r\n
- \r\n आसान शब्दों में समझें तो, टोल प्लाजा का रखरखाव, सड़क की मरम्मत (Pothole fixing), एंबुलेंस सुविधा, क्रेन और कर्मचारियों की सैलरी का खर्च हर साल बढ़ता है। टोल संचालन करने वाली कंपनियों (Concessionaires) को इस बढ़ती लागत की भरपाई करने के लिए अनुबंध के तहत हर साल रेट बढ़ाने का अधिकार दिया गया है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
हालांकि, इस साल कुछ मार्गों (जैसे दिल्ली-देहरादून) पर जो बेतहाशा वृद्धि हुई है, वह केवल WPI के कारण नहीं, बल्कि परियोजना के नए चरणों के जुड़ने (Capital Cost Recovery) के कारण हुई है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
7. फास्टैग (FASTag) और भविष्य की तकनीक: क्या आगे टोल से मिलेगा छुटकारा?
\r\n\r\nवर्तमान में देश के सभी नेशनल हाईवे पर फास्टैग (FASTag) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) हो रहा है। इससे टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम से तो मुक्ति मिल गई है, लेकिन पैसे कटने की रफ्तार बढ़ गई है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
GNSS (Global Navigation Satellite System) की आहट:
\r\n\r\nखबरीलाल के टेक और ऑटोमोबाइल पाठकों के लिए यह जानना दिलचस्प होगा कि सरकार जल्द ही मौजूदा फास्टैग सिस्टम को भी बदलने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) पूरे देश में GNSS आधारित टोलिंग सिस्टम लागू करने पर काम कर रहा है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n यह कैसे काम करेगा? इस नई प्रणाली में टोल प्लाजा के बूम बैरियर पूरी तरह से हटा दिए जाएंगे। आपकी गाड़ी में लगे GPS/GNSS डिवाइस के जरिए सेटेलाइट आपकी गाड़ी को ट्रैक करेगा।\r\n \r\n
- \r\n फायदा: आप हाईवे पर जितने किलोमीटर गाड़ी चलाएंगे, आपके बैंक खाते से केवल उतने ही किलोमीटर का सटीक टोल कटेगा। अभी कई बार ऐसा होता है कि आप दो टोल प्लाजा के बीच की पूरी दूरी तय नहीं करते, लेकिन आपको पूरा टोल देना पड़ता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मेरठ और दिल्ली के बीच यात्रा करने वालों को GNSS सिस्टम के लागू होने का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि इससे 'पे-एज-यू-यूज़' (Pay as you use) का वास्तविक फायदा मिलेगा और छोटी दूरी के यात्रियों के पैसे बचेंगे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
8. वैकल्पिक मार्ग (Alternative Routes): क्या टोल से बचा जा सकता है?
\r\n\r\nटोल बढ़ने के बाद बहुत से वाहन चालक टोल-फ्री वैकल्पिक मार्गों (Toll-free routes) की तलाश करते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n मेरठ से दिल्ली के लिए पुरानी सड़क: जो लोग दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) का 175 रुपये का टोल नहीं देना चाहते, वे अभी भी पुराने नेशनल हाईवे-58 (NH-58) यानी मुरादनगर-मोदीनगर-गजरौला मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n समस्या क्या है? हालांकि पुरानी सड़क टोल-फ्री है, लेकिन वहां लगने वाला भारी ट्रैफिक जाम, खस्ताहाल सड़कें, ई-रिक्शा और अतिक्रमण के कारण आपका जो समय (Time) और ईंधन (Fuel/Petrol) बर्बाद होता है, उसकी कीमत 175 रुपये के टोल से कहीं ज्यादा बैठती है। समय की बचत और गाड़ी की मेंटेनेंस को देखते हुए, ज्यादातर समझदार चालक भारी मन से ही सही, लेकिन एक्सप्रेसवे का ही चुनाव करते हैं।\r\n \r\n
\r\n\r\n
विकास की कीमत या जनता की जेब पर डकैती?
\r\n\r\nवर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर (World-class Infrastructure), चौड़ी सड़कें, एक्सप्रेसवे और स्मूथ राइडिंग—ये सब 21वीं सदी के विकसित भारत की पहचान हैं। गडकरी जी के नेतृत्व में सड़क परिवहन मंत्रालय ने निसंदेह जाल बिछा दिया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस विकास की कीमत (Cost of Development) कौन चुकाएगा?
\r\n\r\n\r\n\r\n
सरकार का तर्क है कि अगर अच्छी सड़क चाहिए, समय और ईंधन बचाना है, तो 'यूजर फी' (User Fee) देनी होगी। BOT (Build-Operate-Transfer) मॉडल में निजी कंपनियां निवेश करती हैं, और उन्हें अपना पैसा वसूलने का अधिकार है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लेकिन दूसरी तरफ, आम जनता का तर्क है कि जब हम वाहन खरीदते समय 15 साल का भारी-भरकम 'रोड टैक्स' (Road Tax), पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty), और वैट (VAT) चुका रहे हैं, तो फिर हर 50 किलोमीटर पर टोल टैक्स के नाम पर यह अतिरिक्त वसूली क्यों? विशेषकर दिल्ली-देहरादून जैसे हाईवे पर ढाई गुना की एकमुश्त बढ़ोतरी किसी भी तर्क से जायज नहीं ठहराई जा सकती।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सरकार और NHAI को टोल दरों के पुनर्गठन के समय आम आदमी की 'अफोर्डेबिलिटी' (Affordability) का भी ध्यान रखना चाहिए। फिलहाल, वेस्ट यूपी और दिल्ली-एनसीआर के निवासियों को इस 'टोल शॉक' (Toll Shock) के साथ ही जीना होगा और अपने दैनिक बजट में कटौती करके इन शानदार लेकिन महंगी सड़कों के सफर का आनंद लेना होगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.