उत्तर प्रदेश का मेरठ शहर, जो ऐतिहासिक क्रांति, अपनी खेल नगरी (Sports City) की पहचान और कैंची उद्योग के लिए दुनियाभर में मशहूर है, अब वह फाइन डाइनिंग (Fine Dining) और अंतरराष्ट्रीय जायके की दुनिया में भी एक बड़ी छलांग लगा रहा है। मेरठवासियों के लिए अब वीकेंड या खास मौकों पर बाहर खाना सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं रहेगा, क्योंकि भारत के सबसे चहेते और "नमक शमक वाले सरदार जी" के नाम से मशहूर सेलिब्रिटी शेफ हरपाल सिंह सोखी ने शहर में अपने बहुचर्चित रेस्टोरेंट ब्रांड 'कारीगरी' का बेहद भव्य आगाज किया है।READ ALSO:-खाली हो रहे देश के ATM: 40 हजार करोड़ की 'मिसिंग' नकदी ने मचाया हाहाकार, RBI और IBA तक पहुंची CATMi की SOS रिपोर्ट
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इस नए और आलीशान रेस्टोरेंट का उद्घाटन बेहद शाही अंदाज में 'राज तिलक उत्सव' की थीम के साथ किया गया। ढोल-नगाड़ों और राजशाही स्वागत के बीच जब शेफ सोखी ने इसका रिबन काटा, तो पूरा माहौल जश्न में डूब गया। यह रेस्टोरेंट भारत के असली कारीगरों, खिलाड़ियों, कलाकारों और रचनाकारों की मेहनत और उनकी कला को समर्पित किया गया है।
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'13' अंक का वह अनोखा और भावनात्मक संयोग

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उद्घाटन समारोह के दौरान शेफ हरपाल सिंह सोखी काफी भावुक और पुरानी यादों में खोए नजर आए। उन्होंने मेरठ से अपने एक पुराने और बेहद दिलचस्प जुड़ाव की कहानी वहां मौजूद लोगों के साथ साझा की।
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शेफ सोखी ने बताया, "यह जिंदगी का एक बहुत ही खूबसूरत और हैरान करने वाला संयोग है। आज से ठीक 13 साल पहले मैं मेरठ शहर में एक लेडीज क्लब के विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आया था। उस वक्त यहां के लोगों ने जो बेशुमार प्यार और सम्मान दिया था, वह आज भी मेरे दिल में बसा है। आज पूरे 13 साल बाद, मैं अपने ब्रांड 'कारीगरी' के देशभर में 13वें आउटलेट का उद्घाटन करने फिर से इसी शहर में लौटा हूं।" उन्होंने कहा कि 13 का यह आंकड़ा उनके और मेरठ शहर के लिए एक बहुत ही भाग्यशाली (Lucky) संयोग बन गया है।
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मेन्यू का जादू: 3 रंगा बटर चिकन और ढाबे वाली दाल का 'रॉयल अवतार'

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'कारीगरी' का मेन्यू किसी आम रेस्टोरेंट के मेन्यू कार्ड जैसा बिल्कुल नहीं है। शेफ सोखी ने अपने दशकों के कुलीनरी अनुभव (Culinary Experience) और भारत भ्रमण की यादों से प्रेरित होकर इसे बेहद बारीकी से डिजाइन किया है।
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    दाल के अनोखे और प्रयोगात्मक रूप: शेफ सोखी बताते हैं कि बचपन में पंजाब के ढाबों पर खाई गई गाढ़ी और तड़के वाली दाल के स्वाद ने उन्हें हमेशा अपनी ओर खींचा। इसी देसी स्वाद को एक नया ट्विस्ट देते हुए उन्होंने दाल की कई विशेष वैरायटी तैयार की हैं। मेरठ के 'कारीगरी' में मेहमानों को दाल सोया चाप, दाल पनीर भुर्जी, दाल अंडा भुर्जी तड़का और दाल मेथी पालक जैसे बेहद लजीज व्यंजन चखने को मिलेंगे, जो शायद ही पहले कहीं और परोसे गए हों।
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    बटर चिकन का 'तिरंगा' रूप: नॉनवेज के शौकीनों के लिए यहां एक बहुत बड़ा सरप्राइज है। 'कारीगरी' में दुनिया भर में मशहूर 'बटर चिकन' केवल पारंपरिक लाल रंग (मखनी ग्रेवी) में ही नहीं, बल्कि लाल, सफेद और हरे (Red, White, and Green) तीन अलग-अलग रंगों और स्वादों में परोसा जाएगा। यह डिश रेस्टोरेंट का 'सिग्नेचर मास्टरपीस' है।
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    शाकाहारियों (Vegetarians) के लिए जन्नत: अक्सर देखा जाता है कि प्रीमियम फाइन डाइनिंग रेस्टोरेंट्स में नॉनवेज मेन्यू पर ज्यादा फोकस होता है, लेकिन 'कारीगरी' ने इस रूढ़िवादी धारणा को तोड़ दिया है। यहां शाकाहारी ग्राहकों के लिए नॉनवेज से भी बड़ा और विस्तृत मेन्यू तैयार किया गया है। इसमें राजमा गलौटी कबाब (जो मुंह में जाते ही घुल जाता है), पनीर मार्घेरिटा टिक्का और कई तरह के खास कबाब व आर्टिसनल ब्रेड्स (Breads) शामिल हैं।
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"हर डिश के पीछे छिपी है एक अनकही कहानी"

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शेफ सोखी का स्पष्ट मानना है कि 'कारीगरी' केवल भूख मिटाने की एक व्यावसायिक जगह नहीं है, बल्कि यह कहानियों और यादों का एक खूबसूरत सफर है।
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उन्होंने कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य केवल टेबल पर स्वादिष्ट भोजन परोसना नहीं है, बल्कि अपने मेहमानों को एक ऐसा अनुभव (Experience) देना है जिसे वे जीवन भर याद रखें। हम सिर्फ स्वाद नहीं, यादें परोसते हैं।" इस अनूठे डाइनिंग अनुभव को सुनिश्चित करने के लिए रेस्टोरेंट के पूरे स्टाफ और वेटर्स को महीनों तक एक विशेष ट्रेनिंग दी गई है। जब कोई वेटर आपकी टेबल पर डिश लेकर आएगा, तो वह सिर्फ प्लेट नहीं रखेगा, बल्कि उस डिश के बनने की कहानी, उसके खास मसालों का इतिहास और शेफ सोखी की जिंदगी की वह घटना बताएगा जिससे प्रेरित होकर वह डिश बनाई गई है।
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भावनात्मक स्पर्श: मां के संघर्षों की गवाही देती 'कारीगरी' की प्लेटें

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इस रेस्टोरेंट की सबसे भावुक कर देने वाली खासियत इसका इंटीरियर और क्रॉकरी (Crockery) है। 'कारीगरी' में इस्तेमाल होने वाली प्लेटों की डिजाइन कोई बाजार से खरीदी गई साधारण डिजाइन नहीं है।
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शेफ सोखी ने नम आंखों से बताया कि इन प्लेटों पर बने विभिन्न डिजाइन उनकी अपनी मां की जीवन यात्रा और उनके अनगिनत संघर्षों से प्रेरित हैं। प्लेटों का हर एक कट, हर एक रंग और डिजाइन एक कहानी कहता है जो उनकी मां के जीवन के अलग-अलग पड़ावों को दर्शाता है। उनका उद्देश्य केवल भोजन परोसना नहीं, बल्कि भारतीय पारिवारिक मूल्यों, मां के निस्वार्थ प्रेम और भारतीय संस्कृति की जड़ों को ग्राहकों के दिलों तक पहुंचाना है। रेस्टोरेंट की हर दीवार और हर नक्काशी अपने भीतर एक कलात्मक कहानी समेटे हुए है, जिससे लोग डाइनिंग के दौरान खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।
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तालियों की गड़गड़ाहट और "नमक शमक डाल देते हैं..."

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उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान माहौल तब और भी खुशनुमा और जीवंत हो गया जब शेफ हरपाल सिंह सोखी ने मंच से अपने मशहूर टेलीविजन शोज के चिर-परिचित डायलॉग सुनाए।
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जैसे ही उन्होंने अपने खास पंजाबी और जोशीले अंदाज में कहा— "नमक शमक, नमक शमक डाल देते हैं" और "जुबान दी होगी... बल्ले-बल्ले", तो वहां मौजूद दर्शकों और मेहमानों ने तालियों की गड़गड़ाहट और सीटियों से उनका जबरदस्त स्वागत किया। शेफ सोखी ने मुस्कुराते हुए कहा कि ये डायलॉग आज उनके अस्तित्व और उनकी पहचान का सबसे अहम हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा, "लोग आज भी मुझे सड़क पर या एयरपोर्ट पर देखकर मेरे असली नाम से कम और "नमक शमक वाले सरदार जी" या "नमक शमक वाले शेफ" कहकर ज्यादा बुलाते हैं। एक शेफ के रूप में आम जनता से यह सीधा और सच्चा जुड़ाव मेरे लिए दुनिया के किसी भी बड़े पुरस्कार या मेडल से कहीं बढ़कर है।"
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लोकल जायके का सम्मान: मेन्यू में दिखेंगे मेरठ के मटर कुल्चे और गजक

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एक सच्चा शेफ वही होता है जो जमीन से जुड़ा हो और स्थानीय जायकों का सम्मान करना जानता हो। शेफ सोखी ने मेरठ शहर की फूड कल्चर (Street Food Culture) की जमकर तारीफ की।
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उन्होंने बताया कि वे शहर के प्रसिद्ध स्थानीय स्वादों को करीब से जानने और समझने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से मेरठ के मशहूर मटर कुल्चे और सर्दियों की जान मेरठ की गजक का जिक्र किया। शेफ सोखी ने मेरठवासियों से वादा किया कि स्थानीय स्वादों से सीखकर भविष्य में उन्हें 'कारीगरी' के मेन्यू में एक बिल्कुल नए, अंतरराष्ट्रीय और फ्यूजन अंदाज (Fusion Style) में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा।
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संस्थापक का विजन: संस्कृति, कला और आतिथ्य का महासंगम

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इस भव्य उद्घाटन के अवसर पर 'कारीगरी' ब्रांड के संस्थापक और सीईओ (CEO) योगेश शर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने ब्रांड के विजन और मेरठ को चुनने के कारण को स्पष्ट करते हुए कहा, "मेरठ की एक बहुत ही समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और क्रांतिकारी विरासत है। हमारी कोशिश है कि हम इस शहर के लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरें। यहां हम केवल भोजन नहीं परोस रहे हैं, बल्कि संस्कृति, कला और भारतीय आतिथ्य (Indian Hospitality) का एक ऐसा प्रीमियम संगम पेश कर रहे हैं, जो शहर में फाइन डाइनिंग के स्तर को एक नई और वैश्विक ऊंचाई पर ले जाएगा।"
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मेरठ में 'कारीगरी' का यह शानदार आउटलेट इस बात का प्रमाण है कि अब टियर-2 (Tier-2) और टियर-3 शहरों के लोग भी विश्वस्तरीय डाइनिंग अनुभव के लिए पूरी तरह तैयार और लालायित हैं। अपनी अनकही कहानियों, मां के प्यार से सजी प्लेटों, लाजवाब इंटीरियर और 'नमक शमक' के असली तड़के के साथ, शेफ हरपाल सिंह सोखी का यह रेस्टोरेंट निश्चित रूप से मेरठ के फूड लवर्स और परिवारों के लिए एक नया और सबसे पसंदीदा 'हैंगआउट डेस्टिनेशन' (Hangout Destination) बनने जा रहा है।
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