मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य और रसूखदार नेता डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंटी करप्शन विंग ने रंगे हाथों दबोचा। ठेकेदार से 10 लाख रुपये की मांगी गई थी डील, पहली किस्त लेते ही कसा शिकंजा। नोटों के बंडल देख अधिकारी भी रह गए हैरान।READ ALSO:-मेरठ में भड़काऊ बयानबाजी की तुरंत सजा: CM योगी और PM मोदी को अपशब्द कहने वाले की निकली हेकड़ी, थाने से कान पकड़कर लंगड़ाते हुए निकला 70 वर्षीय आरोपी
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मेरठ (क्राइम रिपोर्ट): भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति का दावा करने वाले सिस्टम में जब कोई रसूखदार नेता ही सेंधमारी करने लगे, तो जांच एजेंसियों का एक्शन भी उतना ही कड़ा होता है। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा देने वाली खबर सामने आई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एंटी करप्शन विंग (Anti-Corruption Wing) ने शुक्रवार देर शाम एक बड़ी और गुप्त कार्रवाई करते हुए मेरठ कैंट बोर्ड (Meerut Cantt Board) के मनोनीत सदस्य और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सतीश चंद्र शर्मा को 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।
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यह गिरफ्तारी सिर्फ 3 लाख रुपये तक सीमित नहीं रही। जब सीबीआई की टीम ने उनके आवास पर सघन तलाशी अभियान चलाया, तो वहां से 50 लाख रुपये से अधिक की अघोषित (बेहिसाबी) नकदी बरामद हुई। इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी के बाद पूरे मेरठ के प्रशासनिक महकमे और राजनीतिक हलकों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
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क्यों मांगी गई थी रिश्वत? (भ्रष्टाचार की जड़)
\r\n\r\nडॉ. सतीश शर्मा की गिरफ्तारी के पीछे ठेकों और टेंडरों के खेल की एक बड़ी कहानी है। दरअसल, छावनी परिषद (कैंट बोर्ड) के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण और लाखों रुपये के टेंडर जारी किए जाते हैं।
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यह रिश्वत मुख्य रूप से निम्नलिखित ठेकों को रद्द होने से बचाने के लिए मांगी गई थी:
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- \r\n तहबाजारी (बाजार शुल्क वसूली): स्थानीय बाजारों से शुल्क वसूलने का ठेका।\r\n \r\n
- \r\n पार्किंग का ठेका: छावनी क्षेत्र में वाहनों की पार्किंग व्यवस्था।\r\n \r\n
- \r\n ऐतिहासिक गांधी बाग: इस प्रसिद्ध बाग के रखरखाव और संचालन से जुड़े ठेके।\r\n \r\n
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शनिवार (आज) को कैंट बोर्ड की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित थी। इस बैठक के एजेंडे में इन टेंडरों को निरस्त (रद्द) करने का प्रस्ताव लाया जाना था। आरोपी नेता ने इसी का फायदा उठाते हुए ठेकेदार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था।
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शिकायत से छापेमारी तक: कैसे बुना गया CBI का अभेद्य जाल?
\r\n\r\nइस पूरे भ्रष्टाचार के भंडाफोड़ की शुरुआत 'बालाजी कॉन्ट्रैक्टर कंपनी' के मालिक विक्की ठेकेदार की एक साहसिक शिकायत से हुई।
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- \r\n 10 लाख रुपये की डिमांड: ठेकेदार विक्की ने सीबीआई की एंटी करप्शन विंग से संपर्क किया और बताया कि उनके टेंडर्स को कैंट बोर्ड की बैठक में निरस्त होने से बचाने के एवज में डॉ. सतीश शर्मा 10 लाख रुपये की मोटी रकम मांग रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n धमकी और दबाव: ठेकेदार के अनुसार, डॉ. शर्मा ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो शनिवार की बोर्ड बैठक में उनके सभी ठेके पक्के तौर पर रद्द कर दिए जाएंगे।\r\n \r\n
- \r\n सत्यापन और ट्रैप की तैयारी: शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने इसे हल्के में नहीं लिया। प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद तुरंत एक 'ट्रैप' (जाल) तैयार किया गया।\r\n \r\n
- \r\n रंगे हाथों गिरफ्तारी: डील के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर को डॉ. शर्मा ने ठेकेदार विक्की को ₹3 लाख की पहली किस्त लेकर पल्लवपुरम के अंसल टाउन स्थित अपने आवास पर बुलाया। जैसे ही ठेकेदार ने रिश्वत की रकम डॉ. शर्मा के हाथों में थमाई, वहां पहले से सादे कपड़ों में मौजूद सीबीआई के तेजतर्रार अधिकारियों ने उन्हें धर दबोचा। रासायनिक जांच (Chemical Test) में भी आरोपी के हाथ रंगीन पाए गए, जो इस बात का पुख्ता सबूत है कि उन्होंने रिश्वत के नोटों को छुआ था।\r\n \r\n
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घर में नोटों का अंबार: 50 लाख का कैश देख अधिकारी भी हैरान
\r\n\r\nगिरफ्तारी के तुरंत बाद, सीबीआई की कई टीमों ने एक साथ डॉ. शर्मा के ठिकानों पर धावा बोल दिया। उनके अंसल टाउन स्थित आलीशान आवास और लालकुर्ती बड़ा बाजार स्थित उनके क्लीनिक पर सघन तलाशी अभियान चलाया गया।
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घर के भीतर जब कमरों और अलमारियों की तलाशी ली गई, तो अधिकारियों की आंखें फटी रह गईं। अंदर से नोटों के बंडल निकलने लगे। जब गिनती पूरी हुई, तो यह रकम ₹50 लाख से भी ज्यादा निकली। सीबीआई अधिकारियों ने जब इस भारी भरकम नकदी के स्रोत (Source of Income) के बारे में पूछा, तो आरोपी पक्ष कोई भी वैध दस्तावेज या संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर सका।
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\r\n\r\n\r\nतनाव में पत्नी की बिगड़ी तबीयत: सीबीआई की इस अचानक और ताबड़तोड़ छापेमारी के कारण डॉ. शर्मा के घर में भारी तनाव का माहौल बन गया। इस घबराहट के बीच उनकी पत्नी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सीबीआई ने तुरंत डॉक्टरों की टीम को मौके पर बुलाया और उन्हें चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई। जांच का दायरा बढ़ाते हुए देर रात डॉ. शर्मा के पुत्र को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।\r\n
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राजनीतिक रसूख और पुराना विवादों से नाता
\r\n\r\nडॉ. सतीश चंद्र शर्मा कोई साधारण व्यक्ति नहीं हैं। पेशे से चिकित्सक (Doctor) होने के साथ-साथ उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक बेहद रसूखदार और कद्दावर नेता माना जाता है।
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- \r\n राजनीतिक पैठ: अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ के चलते ही केंद्र सरकार (रक्षा मंत्रालय) द्वारा उन्हें फरवरी 2022 में मेरठ कैंट बोर्ड के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया था। उनका रसूख इतना था कि हाल ही में उनका कार्यकाल दूसरी बार भी बढ़ाया गया था।\r\n \r\n
- \r\n पुराने आरोप: यह पहली बार नहीं है जब डॉ. शर्मा पर उंगलियां उठी हैं। छावनी क्षेत्र (Cantt Area) में अवैध निर्माण को संरक्षण देने और अन्य वित्तीय अनियमितताओं को लेकर वे पहले भी कई बार विवादों और गंभीर आरोपों के घेरे में रह चुके हैं।\r\n \r\n
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प्रशासन और जांच एजेंसी का क्या कहना है?
\r\n\r\nइस बड़ी कार्रवाई पर CBI के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा:
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\r\n\r\n\r\n"शिकायतकर्ता द्वारा दी गई पुख्ता जानकारी के आधार पर हमने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत यह सख्त कार्रवाई की है। आरोपी लोक सेवक (Public Servant) को ₹3 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया है। घर की तलाशी में ₹50 लाख से अधिक की अघोषित नकदी मिली है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर रिमांड की मांग की जाएगी ताकि छावनी परिषद में चल रहे इस 'भ्रष्टाचार के सिंडिकेट' में शामिल अन्य सफेदपोशों का भी पर्दाफाश किया जा सके।"\r\n
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वहीं, मेरठ कैंट बोर्ड के सीईओ (CEO) जाकिर हुसैन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, "कैंट बोर्ड भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करता है। चूंकि मामला अब केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) के अधीन है, इसलिए बोर्ड इस जांच में नियमानुसार पूरा सहयोग करेगा। शनिवार को होने वाली बोर्ड बैठक और उसमें शामिल प्रस्तावों पर अब कानूनी और प्रशासनिक नियमों के तहत ही आगे का फैसला लिया जाएगा।"
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आगे क्या? (आय से अधिक संपत्ति का कस सकता है फंदा)
\r\n\r\nसीबीआई की यह कार्रवाई यहीं रुकने वाली नहीं है। 50 लाख रुपये के बेहिसाबी कैश की बरामदगी ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। अब सीबीआई की रडार पर डॉ. सतीश शर्मा और उनके परिवार के:
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- \r\n सभी बैंक खाते (Bank Accounts)\r\n \r\n
- \r\n बैंक लॉकर (Lockers)\r\n \r\n
- \r\n रियल एस्टेट और प्रॉपर्टी के दस्तावेज\r\n \r\n
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जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुट गई है कि क्या यह मामला आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) का भी है? इस गिरफ्तारी ने न केवल मेरठ कैंट बोर्ड में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है, बल्कि कई अन्य नेताओं और अधिकारियों की रातों की नींद भी उड़ा दी है। देखना यह होगा कि सीबीआई की पूछताछ में और कितने रसूखदारों के नाम बेनकाब होते हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.