मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश में अवैध कब्जों, भू-माफियाओं और सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ योगी आदित्यनाथ सरकार का 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) अभियान पूरी सख्ती के साथ निरंतर जारी है। प्रशासन अब किसी भी कीमत पर सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। इसी कड़ी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में गुरुवार को प्रशासन का हंटर जमकर चला। मेरठ के रेलवे रोड थाना क्षेत्र स्थित केसरगंज पुलिस चौकी के ठीक सामने जिला पंचायत की टीम ने एक बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध रूप से बनी दुकानों को बुलडोजर (Bulldozer Action) से जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं दूसरी ओर इस मामले में कानूनी विवाद भी खड़ा हो गया है।READ ALSO:-दुःखद खब़र: पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री ओमवती देवी का निधन, बिजनौर और नगीना की राजनीति के एक बड़े युग का अंत
\r\n\r\n\r\n\r\n
योगी सरकार का भू-माफियाओं पर कड़ा प्रहार
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि भू-माफियाओं और सरकारी जमीनों पर कुंडली मारकर बैठे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। मेरठ प्रशासन भी इसी तर्ज पर काम कर रहा है। केसरगंज क्षेत्र शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण इलाकों में से एक है। यहां की बेशकीमती सरकारी जमीन पर लंबे समय से अवैध निर्माण की शिकायतें प्रशासन को मिल रही थीं। आरोप है कि भू-माफियाओं ने जिला पंचायत की इस बेशकीमती भूमि पर अवैध रूप से पक्की दुकानों का निर्माण कर लिया था और वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की यह रूपरेखा तैयार की।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रशासन का दावा: दो बार दिया गया था नोटिस
\r\n\r\nइस पूरी बुलडोजर कार्रवाई को लेकर प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरी तरह से पालन किया है। जिला पंचायत विभाग के अनुसार, सरकारी जमीन पर अवैध रूप से काबिज इन लोगों को रातों-रात बेदखल नहीं किया गया। विभाग द्वारा संबंधित कब्जाधारकों को बाकायदा दो बार कानूनी नोटिस जारी किए गए थे। इन नोटिसों के माध्यम से उन्हें स्वयं अपना अवैध निर्माण हटाने का पर्याप्त समय और अवसर दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि इसके बावजूद कब्जाधारकों ने प्रशासन के आदेशों को हल्के में लिया। उन्होंने न तो अपना निर्माण हटाया और न ही जिला पंचायत विभाग को कोई संतोषजनक या ठोस कानूनी जवाब पेश किया। जब प्रशासन को लगा कि कब्जाधारक सहयोग नहीं कर रहे हैं, तो अंतिम विकल्प के रूप में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का फैसला लिया गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भारी पुलिस बल और पीएसी की रही तैनाती: इलाके में मची अफरा-तफरी
\r\n\r\nचूंकि मामला व्यावसायिक दुकानों को तोड़ने का था और केसरगंज एक भीड़भाड़ वाला इलाका है, इसलिए प्रशासन को विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी। इसे देखते हुए गुरुवार को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के भारी विरोध या उपद्रव की स्थिति से निपटने के लिए रेलवे रोड थाना पुलिस के साथ-साथ भारी संख्या में प्रांतीय सशस्त्र पीएसी (PAC) बल और महिला पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। जैसे ही केसरगंज पुलिस चौकी के सामने पीला पंजा (बुलडोजर) पहुंचा और उसकी दहाड़ गूंजी, पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आस-पास के व्यापारी अपनी दुकानें बंद कर बाहर आ गए और तमाशबीनों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई। हालांकि, पुलिस की सख्त घेराबंदी के कारण कोई भी विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सका और देखते ही देखते अवैध दुकानों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
अधीक्षण अभियंता का सख्त संदेश: शहर में अन्य जगह भी चलेगा बुलडोजर
\r\n\r\nअवैध कब्जे के खिलाफ हुई इस बड़ी कार्रवाई के बारे में मेरठ जिला पंचायत के अधीक्षण अभियंता मनोज ने मीडिया को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में स्पष्ट किया कि सरकारी संपत्तियों पर कब्जा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया, "केसरगंज में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दुकानों के निर्माण की शिकायतें हमें काफी लंबे समय से मिल रही थीं। हमने पूरी जांच पड़ताल की और नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए आज इस जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करा लिया है।" इतना ही नहीं, अधीक्षण अभियंता ने शहर के अन्य भू-माफियाओं को भी खुली चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि जिला पंचायत विभाग ने शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे कई अन्य अवैध निर्माणों का चिह्नीकरण कर लिया है। ऐसे सभी स्थानों पर जल्द ही इसी तरह का सख्त बुलडोजर एक्शन देखने को मिलेगा। विभाग का दावा है कि इस पूरी कार्रवाई में सभी कानूनी प्रक्रियाएं और नियम-कायदे पूरी तरह से अपनाए गए हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कहानी में नया मोड़: निर्माणकर्ता का 'स्टे ऑर्डर' (Stay Order) का बड़ा दावा
\r\n\r\nजहां एक ओर जिला पंचायत प्रशासन अपनी इस कार्रवाई को पूरी तरह से वैध और नियमानुसार बता रहा है, वहीं दूसरी ओर इस मामले में एक बड़ा पेंच फंस गया है। जिन दुकानों को तोड़ा गया है, उनके निर्माणकर्ता फिरोज राणा ने प्रशासन की इस पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे सरासर अवैध और मनमाना करार दिया है। फिरोज राणा के दावे ने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। राणा का दावा है कि उन्होंने यह जमीन या दुकान किसी अवैध तरीके से नहीं कब्ज़ाई थी। उनका कहना है कि बाकायदा जिला पंचायत ने खुद अखबार में विज्ञप्ति निकालकर इन दुकानों के आवंटन की सूचना दी थी। राणा के अनुसार, उन्होंने पूरी पारदर्शिता के साथ नीलामी प्रक्रिया में भाग लिया और बोली लगाकर इस संपत्ति को हासिल किया था। इससे भी बड़ा आरोप लगाते हुए फिरोज राणा ने कहा कि उनके पास माननीय न्यायालय (Court) का एक वैध 'स्टे ऑर्डर' (स्थगनादेश) भी मौजूद था। उनका आरोप है कि प्रशासन और जिला पंचायत के अधिकारियों ने न्यायालय के आदेश की खुली अवहेलना करते हुए तानाशाही रवैया अपनाया और उनके लाखों रुपये की लागत से बनी दुकानों को ढहा दिया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
कानूनी पेचीदगियों में उलझ सकता है मामला
\r\n\r\nनिर्माणकर्ता फिरोज राणा के दावों के बाद अब यह पूरा मामला भारी कानूनी पेचीदगियों में फंसता नजर आ रहा है। पीड़ित पक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि वह प्रशासन की इस 'अवैध' कार्रवाई के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और न्याय के लिए दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। यदि पीड़ित पक्ष के दावे में सच्चाई पाई जाती है और यह साबित हो जाता है कि न्यायालय का स्टे ऑर्डर होने के बावजूद दुकानों पर बुलडोजर चलाया गया, तो यह 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट' (Contempt of Court) यानी न्यायालय की अवमानना का गंभीर मामला बन सकता है। ऐसे में कार्रवाई में शामिल अधिकारियों को अदालत के सख्त सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
फिलहाल मेरठ के केसरगंज में हुई इस बुलडोजर कार्रवाई ने शहर के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। अब देखना यह होगा कि जिला पंचायत निर्माणकर्ता द्वारा लगाए गए स्टे ऑर्डर की अवहेलना के आरोपों का क्या जवाब देती है और न्यायालय इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.