बिजनौर। उत्तर प्रदेश में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका एक खौफनाक और जीता-जागता उदाहरण बिजनौर जिले से सामने आया है। यहां के हीमपुर दीपा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रावटी गांव में बेखौफ दबंगों ने कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती देते हुए एक बेहद जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया है। 20 अप्रैल की रात अपने ही घर की चौखट पर गोली का शिकार हुए युवक 'सौरभ' की बीती रात मेरठ के एक बड़े अस्पताल में इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई है।READ ALSO:-एक्सप्लेनर: अपमान की टीस और ED की दबिश – कैसे ढह गया केजरीवाल का 'राज्यसभा' किला?
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इस निर्मम हत्याकांड के बाद से मृतक सौरभ के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे रावटी गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। घटना को बीते चार दिन से अधिक का समय हो चुका है, नामजद एफआईआर (FIR) भी दर्ज है और अपराधियों की एक मोटरसाइकिल भी पुलिस के पास है, लेकिन इसके बावजूद बिजनौर पुलिस के हाथ अब तक पूरी तरह से खाली हैं। हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं। आइए, इस पूरी खौफनाक वारदात को विस्तार से जानते हैं कि उस काली रात आखिर क्या-क्या हुआ था।
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रात के अंधेरे में मौत की खौफनाक दस्तक: 20 अप्रैल की वो काली रात
\r\n\r\nयह दिल दहला देने वाला खूनी खेल 20 अप्रैल 2026 की रात को खेला गया। पुलिस को दी गई शिकायत और मृतक के पिता सुदेश (जो रावटी गांव के ही मूल निवासी हैं) के बयानों के अनुसार, रात के करीब 11:30 बज रहे थे। गांव में सब तरफ सन्नाटा पसर चुका था और परिवार के लोग अपने-अपने कमरों में गहरी नींद में सो रहे थे। सुदेश भी आराम कर रहे थे, तभी अचानक उनके घर के मुख्य दरवाजे पर किसी ने जोर-जोर से और आक्रामक तरीके से दस्तक देनी शुरू कर दी।
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आहट सुनकर सुदेश ने जब उठकर दरवाजा खोला, तो बाहर तीन युवक खड़े थे। इनमें से दो की पहचान गांव और आसपास के ही दबंगों— अंकित और अतुल के रूप में हुई है, जबकि तीसरा युवक अज्ञात था। दरवाजा खुलते ही तीनों जबरन, धक्का-मुक्की और बदतमीजी करते हुए घर के अंदर घुस आए। उनके चेहरे पर गुस्सा था, हाथ में हथियार थे और वे सुदेश से उनके बेटे सौरभ के बारे में पूछताछ करने लगे।
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शादी से लौटते ही बिछा दी मौत की बिसात: सिर से सटाकर मारी गोली
\r\n\r\nपिता सुदेश ने स्थिति को भांपते हुए उन दबंगों को बताया कि सौरभ अभी घर पर नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि वह गांव में ही किसी रिश्तेदार या परिचित के यहां एक शादी समारोह में शिरकत करने गया हुआ है। लेकिन खून सवार होने के कारण हमलावर घर में ही अड़े रहे।
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शिकायतकर्ता पिता के मुताबिक, हमलावर घर में ही मौजूद रहे और हंगामा करते रहे। इसी बीच दुर्भाग्यवश सौरभ शादी समारोह से वापस घर लौट आया। जैसे ही सौरभ ने अपने ही घर की चौखट पर कदम रखा, पहले से घात लगाए और गुस्से में तमतमाए बैठे तीनों आरोपियों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया।
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इससे पहले कि सौरभ कुछ समझ पाता, कोई सवाल करता या बचाव की कोई भी कोशिश करता, उनमें से एक हमलावर ने अपना अवैध तमंचा निकाला और सीधे सौरभ के सिर (Head) से सटाकर ट्रिगर दबा दिया। रात के सन्नाटे में गोली की कानफाड़ू आवाज से पूरा मोहल्ला गूंज उठा। पॉइंट-ब्लैंक रेंज (करीब से) से सिर में गोली लगते ही सौरभ खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा और मौके पर ही तड़पने लगा।
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पिता ने दिखाई बहादुरी, तो उन पर भी झोंक दी गोली (बाल-बाल बची जान)
\r\n\r\nअपने जवान बेटे को अपनी ही आंखों के सामने खून से लथपथ और जिंदगी-मौत के बीच तड़पता देख पिता सुदेश का दिल दहल गया। एक पिता की ममता और आक्रोश में उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना निहत्थे ही हमलावरों को पकड़ने की कोशिश की और उनकी तरफ झपटे।
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पिता को अपनी तरफ आता देख बेखौफ और खूंखार हो चुके हत्यारों ने उन पर भी सीधा फायर झोंक दिया। किस्मत अच्छी थी कि सुदेश इस जानलेवा हमले में बाल-बाल बच गए और गोली उनके पास से निकल गई। गोलीबारी के बाद पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। महिलाओं की चीखें और शोरगुल सुनकर आसपास के पड़ोसी भी जाग गए और सुदेश के घर की तरफ दौड़ पड़े।
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भागते-भागते छोड़ गए सबसे बड़ा सुराग: घटनास्थल पर मिली मोटरसाइकिल
\r\n\r\nगांव वालों को बड़ी संख्या में अपनी तरफ आता देख और पकड़े जाने के डर से तीनों आरोपी मौके से फरार होने लगे। हालांकि, इस हड़बड़ाहट और भागमभाग में वे एक बहुत बड़ी गलती कर बैठे, जो अब पुलिस की जांच का सबसे अहम और बड़ा सुराग बन चुकी है।
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आरोपी भागते समय अपनी मोटरसाइकिल स्टार्ट नहीं कर पाए और उसे मौके पर ही छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए भाग निकले। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल से वह मोटरसाइकिल बरामद कर ली है, जिसका नंबर UP 20 AP 1535 है। यह मोटरसाइकिल किसके नाम पर रजिस्टर्ड है, क्या यह चोरी की है, या किसी और की है? पुलिस अब इस अहम सुराग के जरिए आरोपियों की कुंडली खंगाल रही है।
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मौत से 4 दिन की लंबी जंग: मेरठ के अस्पताल में टूटी सौरभ की सांसें
\r\n\r\nइधर, खून से सने और बेहोश पड़े सौरभ को परिजनों और ग्रामीणों की मदद से आनन-फानन में बिजनौर के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। सिर में गहराई तक गोली लगने के कारण उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई थी और अत्यधिक खून बह चुका था। स्थानीय डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे तुरंत बेहतर इलाज के लिए मेरठ (Meerut) के एक बड़े अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
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मेरठ के उच्च स्तरीय अस्पताल में न्यूरोसर्जनों और डॉक्टरों की टीम ने सौरभ की जान बचाने के लिए लगातार चार दिनों तक अथक प्रयास किए। परिवार वालों की भी सांसें अटकी हुई थीं, सौरभ की मां का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरा गांव लगातार अपने बेटे की सलामती की दुआएं मांग रहा था। लेकिन दुर्भाग्य से, तमाम मेडिकल कोशिशों, सर्जरी और दुआओं के बावजूद, बीती रात्रि (24 अप्रैल) सौरभ जिंदगी की यह कठिन जंग हार गया और उसने अस्पताल के बिस्तर पर हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं।
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पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवाल: 4 दिन बाद भी हत्यारे क्यों हैं आजाद?
\r\n\r\nसौरभ की मौत की मनहूस खबर जैसे ही गांव रावटी पहुंची, वहां कोहराम मच गया। घर में मातम छा गया है और महिलाओं की चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो गया है। पूरे गांव में मातम के साथ-साथ दहशत का भी माहौल है।
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पुलिस की भूमिका की बात करें तो घटना वाली रात यानी 20 अप्रैल को ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया था। पुलिस ने पिता सुदेश की 'तहरीर' (लिखित शिकायत) के आधार पर नामजद आरोपियों— अंकित, अतुल और एक अज्ञात के खिलाफ शुरुआत में हत्या के प्रयास (धारा 307) व घर में घुसकर हमला करने की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया था। अब सौरभ की मौत के बाद इस एफआईआर (FIR) में हत्या (Murder) की धाराएं भी जोड़ दी जाएंगी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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आखिर कहां छिपे हैं हत्यारे? लेकिन सबसे बड़ा, हैरान करने वाला और चुभने वाला सवाल यह है कि घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी बिजनौर पुलिस के हाथ खाली क्यों हैं? आरोपियों की पहचान पूरी तरह से उजागर हो चुकी है, उनकी बाइक पुलिस के कब्जे में है, फिर भी हत्यारे कानून की पकड़ से दूर कैसे हैं? ग्रामीणों का आरोप है कि आरोपी दबंग किस्म के हैं और पुलिस उन्हें पकड़ने में ढिलाई बरत रही है।
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आगे का रास्ता: बिजनौर का यह हत्याकांड उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था की वास्तविक और डरावनी स्थिति को बयान करता है। एक पिता के सामने उसके घर की चारदीवारी के अंदर उसके बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है, और अपराधी आराम से फरार हो जाते हैं। अब यह देखना है कि बिजनौर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी (SP/DIG) इस मामले में क्या एक्शन लेते हैं और कितनी जल्दी पुलिस की एसओजी (SOG) या क्राइम ब्रांच इन फरार हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचाकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाती है। गांव वाले और मृतक के परिजन अब सिर्फ और सिर्फ इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.