मेरठ कैंट (शिक्षा समाचार): शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इस बदलते परिवेश में विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए शिक्षकों का निरंतर अपडेट रहना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, मेरठ कैंट स्थित प्रतिष्ठित आर्मी पब्लिक स्कूल (APS) ने अपने शिक्षकों के लिए एक उत्कृष्ट 'इन-सर्विस शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम' (In-Service Teacher Training Program) का आयोजन किया।READ ALSO:-मेरठ में भड़काऊ बयानबाजी की तुरंत सजा: CM योगी और PM मोदी को अपशब्द कहने वाले की निकली हेकड़ी, थाने से कान पकड़कर लंगड़ाते हुए निकला 70 वर्षीय आरोपी
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
यह 5 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 23 मई से 30 मई 2026 तक विजय दिवस ऑडिटोरियम (पीडब्ल्यू) में आयोजित किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. (श्रीमती) रीता गुप्ता और प्रधानाध्यापिका श्रीमती ममता सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षताओं (Professional Competencies) को निखारना और उन्हें 21वीं सदी के समकालीन शैक्षिक कौशलों से सुसज्जित करना था।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
कार्यक्रम के सफल समन्वयन का जिम्मा विद्यालय की काउंसलिंग सेल के श्री प्रशांत हुड्डा ने निभाया, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सभी शिक्षक इस प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग लें।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

बाल सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा पर विशेष जोर (POSH और POCSO)

\r\n\r\n
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन (23 मई 2026) की शुरुआत एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय के साथ हुई। सेवानिवृत्त कर्नल अलंकार भारद्वाज द्वारा एक विशेष कार्यशाला का संचालन किया गया, जिसका मुख्य विषय था:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    पॉश अधिनियम (POSH Act): कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम, 2013
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act): बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
कर्नल भारद्वाज ने शिक्षकों को बाल संरक्षण, कार्यस्थल पर सुरक्षा, शिक्षकों के कानूनी उत्तरदायित्वों और किसी भी अप्रिय स्थिति में शिकायत व रिपोर्टिंग तंत्र के बारे में विस्तार से जागरूक किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को सुरक्षित माहौल प्रदान करने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा, विद्यालय की संरक्षण समिति और आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की कार्यप्रणाली पर भी गहन चर्चा की गई।
\r\n\r\n

\r\n\r\n

जीवन कौशल और प्रभावी संचार पर ज्ञानवर्धक सत्र

\r\n\r\n
प्रशिक्षण के अगले चरणों में श्रीमती ज्योत्स्ना भारद्वाज (एनविजन इंडिया एजुसर्विसेज) द्वारा चार बेहद इंटरैक्टिव और ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए गए:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    जीवन कौशलों के समावेशन का महत्व (Importance of Life Skills): इस कार्यशाला में इस बात पर चर्चा की गई कि किताबी ज्ञान के अलावा विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए उनके भीतर जीवन कौशल (Life Skills) विकसित करना कितना आवश्यक है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    प्रभावी संचार की कला – शब्दों की शक्ति (Art of Effective Communication): एक शिक्षक और विद्यार्थी के बीच संवाद सबसे अहम होता है। इस सत्र में मौखिक और अमौखिक (Non-Verbal) संचार, सक्रिय रूप से सुनने की कला (Active Listening), सहानुभूति और कक्षा में संचार बाधाओं को दूर करने के उपायों पर प्रकाश डाला गया। शिक्षकों ने कई संवादात्मक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
    \r\n
  4. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कक्षा प्रबंधन और बदलती शिक्षा प्रणाली पर मंथन

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    प्रभावी कक्षा प्रबंधन एवं संगठन: प्रशिक्षण के चौथे दिन की कार्यशाला कक्षा के माहौल को बेहतर बनाने पर केंद्रित थी। शिक्षकों को सिखाया गया कि कैसे एक सुव्यवस्थित, समावेशी (Inclusive) और सकारात्मक कक्षा वातावरण का निर्माण किया जाए। इसके साथ ही, विद्यार्थियों के व्यवहार प्रबंधन और अधिगम (Learning) परिणामों को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय शिक्षण रणनीतियों (Active Teaching Strategies) पर मंथन किया गया।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    परिवर्तनों के अनुरूप स्वयं को ढालना: 30 मई 2026 को कार्यक्रम के समापन के अवसर पर अंतिम कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की नई पहलों, शिक्षा में प्रौद्योगिकी (Technology) के बढ़ते उपयोग, दक्षता-आधारित शिक्षा (Competency-based Learning) और भविष्य की चुनौतियों के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने वाली नवीन शिक्षण-पद्धतियों से अवगत कराया गया।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

प्रधानाचार्या का संदेश और कार्यक्रम का समापन

\r\n\r\n
कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्या डॉ. (श्रीमती) रीता गुप्ता ने शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी रिसोर्स पर्सन्स (संसाधन व्यक्तियों) और काउंसलिंग सेल की टीम के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। डॉ. गुप्ता ने कहा कि, "इस प्रकार के क्षमता-विकास (Capacity Building) कार्यक्रम शिक्षकों को न केवल नवीन ज्ञान और कौशल प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें अपने विद्यार्थियों के लिए और अधिक प्रभावी मार्गदर्शक बनने में भी सहायता करते हैं।"
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन एक औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। प्रशिक्षण में भाग लेने वाले सभी शिक्षकों ने यह संकल्प लिया कि वे इस दौरान सीखे गए नवीन कौशलों और ज्ञान को अपनी कक्षाओं में पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करेंगे, ताकि आर्मी पब्लिक स्कूल में एक सुरक्षित, समावेशी, नवाचारी और पूर्णतः शिक्षार्थी-केंद्रित (Learner-Centric) शैक्षिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन