मेरठ: सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार के दीमक को खत्म करने के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो (Anti-Corruption Bureau) लगातार कड़ी कार्रवाइयां कर रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार की सुबह मेरठ में एंटी करप्शन टीम ने एक बेहद सटीक और गुप्त ऑपरेशन को अंजाम देते हुए राजकीय निर्माण निगम के एक जूनियर इंजीनियर (JE) और उसके ड्राइवर को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए जेई का नाम योगेंद्र कुमार बताया जा रहा है, जिसने एक सरकारी ठेकेदार का बिल पास करने की एवज में एक लाख रुपये की मोटी रिश्वत की मांग की थी।READ ALSO:-मेरठ मेट्रो और नमो भारत (RRTS) स्टेशनों पर खोलें अपना बिजनेस: NCRTC ने जारी किया कमर्शियल स्पेस का महा-टेंडर
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इस गिरफ्तारी ने पूरे विभाग में हड़कंप मचा दिया है। कार्रवाई इतनी तेजी से हुई कि जब तक विभाग के अन्य कर्मचारियों को कुछ समझ आता, तब तक एंटी करप्शन की टीम दोनों आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले चुकी थी। आइए जानते हैं इस पूरे रिश्वत कांड की इनसाइड स्टोरी।
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क्या है पूरा मामला? जानिए ठेकेदार की पीड़ा
\r\n\r\nसरकारी विभागों में काम करने वाले ठेकेदारों की सबसे बड़ी समस्या समय पर भुगतान (Payment) न होना है। इस मामले में पीड़ित ठेकेदार का नाम सत्येंद्र सिंह तोमर है। सत्येंद्र पिछले काफी समय से मेरठ के राजकीय निर्माण निगम (Rajkiya Nirman Nigam) में ठेकेदारी का काम करते आ रहे हैं। उन्होंने विभाग के लिए कई निर्माण कार्य पूरे किए थे, लेकिन जब उन कार्यों के एवज में भुगतान की बारी आई, तो उनकी फाइलें एक मेज से दूसरी मेज पर धूल फांकने लगीं।
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सत्येंद्र सिंह तोमर का एक बड़ा पेमेंट लंबे समय से विभाग में अटका हुआ था। एक ठेकेदार के लिए उसका अटका हुआ पैसा कितनी अहमियत रखता है, यह किसी से छिपा नहीं है। सत्येंद्र ने अपने रुके हुए भुगतान को हासिल करने के लिए विभाग के आला अधिकारियों से लेकर बाबुओं तक के कई चक्कर काटे, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले।
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फाइलों पर कुंडली मारकर बैठा था JE योगेंद्र कुमार
\r\n\r\nलगातार चक्कर काटने और मिन्नतें करने के बाद जब ठेकेदार सत्येंद्र को कोई सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने अपने स्तर पर विभाग के अंदर ही इस बात की गहराई से छानबीन शुरू की कि आखिर उनकी फाइल को किस स्तर पर और क्यों रोका जा रहा है।
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गुप्त सूत्रों और विभाग के अन्य कर्मचारियों से संपर्क करने पर उन्हें यह चौंकाने वाली जानकारी मिली कि उनके भुगतान की फाइल किसी तकनीकी खामी के कारण नहीं, बल्कि विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) योगेंद्र कुमार के इशारे पर जानबूझकर रोकी गई है।
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पास कराने के एवज में मांगी गई 1 लाख की 'कमीशन'
\r\n\r\nजब सत्येंद्र को यह पता चला कि खेल कहां से हो रहा है, तो उन्होंने सीधे जेई योगेंद्र कुमार से संपर्क साधा। सत्येंद्र ने जेई से गुहार लगाई कि वे उनका काफी समय से लंबित बिल पास कर दें, क्योंकि उनका बाजार का काफी पैसा फंसा हुआ है।
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लेकिन जेई योगेंद्र कुमार का दिल नहीं पसीजा। उसने अपनी कुर्सी और पद का दुरुपयोग करते हुए सीधे शब्दों में सत्येंद्र के सामने एक शर्त रख दी। योगेंद्र ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उसे उसकी 'कमीशन' यानी एक लाख रुपये की रिश्वत (Bribe) नकद नहीं मिलेगी, तब तक फाइल आगे नहीं बढ़ेगी।
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सत्येंद्र का साहसिक कदम: एंटी करप्शन टीम में की लिखित शिकायत
\r\n\r\nपिछले कई हफ्तों से सत्येंद्र पर लगातार रिश्वत देने का दबाव बनाया जा रहा था। मानसिक रूप से परेशान सत्येंद्र के पास दो ही रास्ते थे—या तो वह जेई के आगे घुटने टेक दे और एक लाख रुपये की रिश्वत दे दे, या फिर इस भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ आवाज उठाए।
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सत्येंद्र सिंह तोमर ने दूसरा और साहसिक रास्ता चुना। उन्होंने घूसखोर जेई को उसी की भाषा में सबक सिखाने की ठान ली। सत्येंद्र ने बिना किसी भनक के गुपचुप तरीके से मेरठ की एंटी करप्शन (Anti-Corruption) विंग से संपर्क किया। उन्होंने वहां के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और जेई योगेंद्र कुमार द्वारा बनाए जा रहे दबाव और एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग के खिलाफ एक लिखित शिकायत दर्ज कराई।
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एंटी करप्शन की 'सीक्रेट प्लानिंग' और बिछाया गया जाल
\r\n\r\nलिखित शिकायत मिलते ही एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम तुरंत एक्शन मोड में आ गई। टीम ने सबसे पहले आरोपों की प्रारंभिक जांच की और जब यह स्पष्ट हो गया कि जेई वाकई में घूस मांग रहा है, तो उसे रंगे हाथों पकड़ने (Trap) की एक फूलप्रूफ प्लानिंग रची गई।
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एंटी करप्शन टीम की रणनीति के अनुसार:
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- \r\n केमिकल वाले नोट: टीम ने सत्येंद्र सिंह तोमर से एक लाख रुपये की नकद राशि ली और उन नोटों पर एक खास तरह का अदृश्य केमिकल (फिनोल्फथेलिन पाउडर) लगा दिया। यह केमिकल सामान्य आंखों से नहीं दिखता, लेकिन पानी या खास घोल के संपर्क में आते ही गहरा लाल या गुलाबी रंग छोड़ देता है, जो अदालत में सबसे बड़ा सुबूत बनता है।\r\n \r\n
- \r\n टारगेट सेट करना: सत्येंद्र को यह निर्देश दिया गया कि वे जेई को फोन करके बताएं कि रुपयों का इंतजाम हो गया है और वे रकम लेकर विभाग पहुंच रहे हैं। टीम के सदस्य सादे कपड़ों में आम नागरिकों की तरह विभाग के आसपास तैनात हो गए।\r\n \r\n
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ड्राइवर की आड़ में रची गई चालाकी जो पड़ी भारी
\r\n\r\nमंगलवार की सुबह तय योजना के मुताबिक सत्येंद्र सिंह तोमर एक लाख रुपये के केमिकल लगे नोट लेकर राजकीय निर्माण निगम के कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने जेई योगेंद्र को अपने आने की सूचना दी।
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जेई योगेंद्र कुमार खुद को बहुत शातिर समझता था। उसे शायद किसी अनहोनी का अंदेशा था या वह सीधे तौर पर पैसे हाथ में लेने से बचना चाहता था। इसलिए उसने खुद पैसे लेने के बजाय अपने भरोसेमंद ड्राइवर नीरज को सत्येंद्र से रकम वसूलने के लिए नीचे भेज दिया।
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जैसे ही सत्येंद्र ने वे केमिकल लगे एक लाख रुपये के नोट ड्राइवर नीरज के हाथों में थमाए, आसपास सादे कपड़ों में मुस्तैद एंटी करप्शन टीम ने बिना एक पल की देरी किए नीरज को दबोच लिया। नीरज के हाथ पकड़ लिए गए ताकि वह पैसों को फेंक न सके।
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फिल्मी स्टाइल में भागा जेई योगेंद्र, टीम ने दौड़ाकर पकड़ा
\r\n\r\nनीरज की गिरफ्तारी के तुरंत बाद, एंटी करप्शन टीम ने उसी की निशानदेही पर विभाग के अंदर बैठे मुख्य आरोपी जेई योगेंद्र कुमार को पकड़ने के लिए धावा बोल दिया।
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कार्यालय में बैठे योगेंद्र कुमार को जैसे ही यह भनक लगी कि उसका ड्राइवर नीरज नीचे एंटी करप्शन की टीम के हत्थे चढ़ गया है, उसके होश उड़ गए। गिरफ्तारी के डर से जेई योगेंद्र कुमार अपनी कुर्सी छोड़कर फिल्मी स्टाइल में वहां से भाग खड़ा हुआ। उसने विभाग के पिछले रास्तों से निकलकर भागने की कोशिश की।
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लेकिन एंटी करप्शन टीम की घेराबंदी इतनी पुख्ता थी कि वह ज्यादा दूर नहीं जा सका। टीम के तेज-तर्रार अधिकारियों ने कुछ ही दूरी पर पीछा करके हांफते हुए जेई योगेंद्र कुमार को धर दबोचा।
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आगे की कानूनी कार्रवाई: दोनों आरोपी भेजे गए जेल
\r\n\r\nगिरफ्तारी के बाद एंटी करप्शन की टीम ने दोनों आरोपियों (जेई योगेंद्र कुमार और ड्राइवर नीरज) के हाथ धुलवाए, जिससे पानी का रंग लाल हो गया और रंगे हाथों रिश्वत लेने का तकनीकी सुबूत पक्का हो गया। इसके बाद टीम दोनों को अपने साथ गुप्त स्थान पर ले गई, जहां उनसे पूछताछ की गई।
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पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की सुसंगत और गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत (जेल) भेज दिया गया है।
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यह घटना उन सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक कड़ा सबक है जो आम जनता और ठेकेदारों का शोषण करके अपनी जेबें भरते हैं। मेरठ पुलिस और एंटी करप्शन टीम की इस त्वरित कार्रवाई की पूरे शहर में जमकर सराहना हो रही है।
Sabse pehle comment karne wale banein.