खबरीलाल न्यूज़ डेस्क (मेरठ): पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शिक्षा के सबसे बड़े केंद्र, मेरठ (Meerut) स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) का 38वां दीक्षांत समारोह बुधवार को संपन्न हुआ। यह दिन उन 199 मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए जीवन का सबसे गौरवान्वित करने वाला क्षण था, जिन्हें अपनी कड़ी मेहनत के दम पर स्वर्ण पदक (Gold Medals) प्राप्त हुए। लेकिन, इस भव्य और गरिमामयी समारोह की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली चर्चा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल (Governor Anandiben Patel) का वह बेबाक और कड़ा भाषण रहा, जिसने विश्वविद्यालय प्रशासन से लेकर पूरे शिक्षा जगत में खलबली मचा दी है।READ ALSO:-मुजफ्फरनगर में गाड़ी से कांवड़ टच होने पर बवाल: फौजी और कांवड़िए के बीच तीखी नोकझोंक का वीडियो वायरल, जानिए पुलिस ने कैसे टाला बड़ा विवाद!
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मेरठ की धरती से राज्यपाल ने न केवल शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर किया, बल्कि समाज, युवा पीढ़ी और व्यवस्था की उन कमियों पर सीधा प्रहार किया, जिन पर अक्सर पर्दा डाल दिया जाता है।
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 हॉस्टलों के काले सच का पर्दाफाश: "खाने के डिब्बों में आ रहा ड्रग्स"

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अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय के हॉस्टलों (University Hostels) की सुरक्षा और वहां के माहौल को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया, जिसने वहां मौजूद सभी कुलपतियों और प्रशासनिक अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए।
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 दीक्षांत समारोह में मौजूद गेस्ट और स्टूडेंट्स।

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उन्होंने सख्त लहजे में कहा, "मैंने अब तक प्रदेश के लगभग 15 बड़े विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों का औचक निरीक्षण किया है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि वहां कमरों के बाहर शराब की खाली बोतलें पड़ी मिलीं। इससे भी भयानक सच यह है कि हॉस्टलों में जो बाहर से ऑनलाइन खाना ऑर्डर किया जाता है, उन फूड डिलीवरी के पैकेट्स के जरिए छात्रों तक ड्रग्स (Drugs) और नशीले पदार्थ पहुंचाए जा रहे हैं।"
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राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि वे केवल हवा में बातें नहीं कर रहीं हैं। उन्होंने खुद इन चौंकाने वाली सच्चाइयों की तस्वीरें अपने कैमरे में कैद की हैं और बाकायदा हॉस्टल प्रबंधन तथा संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों (VCs) को ये तस्वीरें सबूत के तौर पर दिखाई हैं। नशाखोरी पर अपनी व्यक्तिगत नाराजगी जताते हुए उन्होंने युवाओं से कहा, "हमारे परिवार में तो पिछले चार पीढ़ियों से किसी ने चाय तक नहीं पी है, और आज की पीढ़ी ड्रग्स की आदी हो रही है। नशा कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। यह धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, उसकी प्रतिभा, उसके स्वास्थ्य और उसके माता-पिता की सारी उम्मीदों को जड़ से नष्ट कर देता है। इसे तुरंत छोड़िए।"
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 दीक्षांत में राज्यपाल ने मेधावियों को मेडल और उपाधि दी।

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बेटियों का दबदबा और समाज की मानसिकता पर करारा तंज

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दीक्षांत समारोह का एक बेहद सुखद पहलू यह था कि इस वर्ष भी पदकों पर बेटियों का ही दबदबा रहा। राज्यपाल ने मंच से आंकड़े पेश करते हुए बताया कि समारोह में दिए गए कुल पदकों में से 75 प्रतिशत मेडल बेटियों ने जीते हैं, जबकि छात्रों (लड़कों) के हिस्से में केवल 25 प्रतिशत मेडल ही आए हैं।
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इस शानदार उपलब्धि के बहाने उन्होंने समाज की उस दकियानूसी मानसिकता पर भी करारा प्रहार किया, जो आज भी बेटों की चाहत में अंधी है। उन्होंने कहा, "जरा सोचिए, हमारा समाज आज भी बेटों के पीछे भाग रहा है। कई परिवारों में अगर तीन बेटियां पैदा हो जाएं, तो घर में हाहाकार मच जाता है, मातम सा छा जाता है। जबकि हकीकत आपके सामने है। बेटियां बेहद होनहार और होशियार हैं। उन पर भरोसा कीजिए, उन्हें अवसर दीजिए। वे न केवल परिवार का बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करेंगी। बेटा हो या बेटी, माता-पिता को दोनों के चरित्र निर्माण और शिक्षा पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए।"
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बिना सोचे-समझे 'झंडा' उठाने वाले युवाओं को नसीहत

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आजकल विश्वविद्यालयों में होने वाले अनावश्यक प्रदर्शनों और छात्र राजनीति पर भी राज्यपाल ने अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने युवाओं के भटकने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "आजकल के कई युवाओं को यह तक नहीं पता होता कि उन्हें जीवन में आखिर करना क्या है? भीड़ की मानसिकता हावी है। कोई एक व्यक्ति कोई भी झंडा लेकर सड़क पर निकल पड़ता है, और बाकी युवा बिना सोचे-समझे उसके पीछे-पीछे चल पड़ते हैं।"
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उन्होंने कहा कि युवाओं को यह समझना बहुत जरूरी है कि वे जो भी कर रहे हैं, क्या वह उनके भविष्य और देशहित में है या नहीं। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया कि छात्रों को उन महापुरुषों (जैसे चौधरी चरण सिंह जी) के जीवन और संघर्षों के बारे में जरूर विस्तार से बताया जाना चाहिए, जिनके नाम पर उनके विश्वविद्यालय का नाम रखा गया है।
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ट्रेन का सफर और जमीनी हकीकत की जांच

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सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए भी राज्यपाल के तरीके बेहद दिलचस्प हैं। उन्होंने बताया कि आजकल वह जानबूझकर ट्रेनों से सफर कर रही हैं, ताकि रेलवे ट्रैक और स्टेशनों के आसपास साफ-सफाई की वास्तविक स्थिति देख सकें।
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उन्होंने अपना एक हालिया अनुभव साझा करते हुए कहा, "कानपुर जाते समय मैंने ट्रेन से देखा कि रेलवे ट्रैक के किनारे भयंकर जलभराव और गंदगी थी। मैंने तुरंत अपने फोन से उसकी फोटो और वीडियो बनाए और रेलवे के शीर्ष अधिकारियों को भेज दिए। इसके बाद आनन-फानन में वहां सफाई कराई गई। इसके बाद मैंने स्थानीय नगर निगम के अधिकारियों को भी तलब किया और पूछा कि यह गंदा पानी आखिर आ कहां से रहा है? मैंने उन्हें सख्त निर्देश दिए हैं कि अगली बार जब मैं आऊं, तो मुझे इस समस्या की पूरी रिपोर्ट और स्थायी समाधान चाहिए।"
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शिक्षा और शिक्षकों पर उठाए कड़े सवाल

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राज्यपाल ने शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाए। उन्होंने बताया कि डी.लिट. (D.Lit.) जैसी सर्वोच्च मानद उपाधियों का दायरा अब बढ़ाया जाना चाहिए।
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    डिग्री नहीं, कौशल का हो सम्मान: उन्होंने कहा कि डी.लिट. की उपाधि सिर्फ औपचारिक रूप से पढ़े-लिखे लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। गांवों में ऐसी कई महिलाएं और पुरुष हैं, जो भले ही स्कूल-कॉलेज न गए हों, लेकिन किसी खास कला, शिल्प या कौशल में महारत रखते हैं और लोगों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं। ऐसे लोग भी इस बड़े सम्मान के असली हकदार हैं।
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    शिक्षकों की निष्क्रियता: एक शिक्षक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, "मैंने एक प्रोफेसर से पूछा कि उन्होंने अब तक कितनी किताबें लिखी हैं? जवाब मिला- 'दो'। जब मैंने पूछा कि कितने सालों से पढ़ा रहे हो? तो उनका जवाब था- '20 सालों से'। यह बेहद निराशाजनक है। 20 वर्षों के लंबे करियर में किसी भी शिक्षक को कम से कम पांच किताबें तो लिखनी ही चाहिए।"
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इसरो (ISRO), डीआरडीओ (DRDO) और भविष्य की तकनीक

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भाषण के अंतिम चरण में राज्यपाल ने युवाओं को देश के नवनिर्माण और आधुनिक विज्ञान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज भारत की युवा शक्ति के दम पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) का डिजाइन तैयार किया गया है।
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उन्होंने विश्वविद्यालयों से अपील की कि वे अपने यहां अंतरिक्ष विज्ञान (Space Science) से जुड़े नए और उन्नत पाठ्यक्रम शुरू करें। उन्होंने कहा, "इसरो का गगनयान मिशन जल्द ही तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजने वाला है। आसमान से बिजली क्यों गिरती है? इसे कैसे रोका जाए? समुद्र में भयंकर लहरें क्यों उठती हैं? इन सभी जटिल विषयों पर आज हमारा इसरो दिन-रात काम कर रहा है। इसी तरह डीआरडीओ (DRDO) 225 नए लड़ाकू विमान तैयार कर रहा है। इन सभी राष्ट्रीय महा-परियोजनाओं में आप जैसे मेधावी युवाओं के योगदान की सख्त जरूरत है।"
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मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का यह 38वां दीक्षांत समारोह केवल डिग्रियां और मेडल बांटने का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह उच्च शिक्षा के लिए एक बड़ा 'वेक-अप कॉल' (Wake-up Call) बन गया। आनंदीबेन पटेल का यह बेबाक अंदाज और हॉस्टलों से जुड़ा उनका सनसनीखेज खुलासा यह साफ संकेत देता है कि प्रदेश सरकार अब विश्वविद्यालयों में पनप रही किसी भी प्रकार की अराजकता और नशाखोरी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। अब देखना यह है कि मेरठ प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रबंधन इस कड़े संदेश के बाद जमीनी स्तर पर क्या ठोस कदम उठाते हैं।
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