मेरठ न्यूज: छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर कमिश्नरी चौराहे पर भारी बवाल। पुलिस पर हमला और सड़क जाम के मामले में 13 नामजद, 7 गिरफ्तार और 50 पर केस।
Published at : 09 Jul 2026, 10:09 AM
Updated at : 10 Sep 2026, 10:11 PM
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Meerut News Protest at Commissionerate Chauraha FIR on 60 Accused
पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर मेरठ में बुधवार का दिन भारी हंगामे और तनाव के बीच गुजरा। शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण माने जाने वाले सिविल लाइन थानाक्षेत्र स्थित 'कमिश्नरी चौराहे' पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने अचानक सड़क जाम कर दी। यह पूरा बवाल टीपी नगर थानाक्षेत्र की छात्रा ललिता गौतम की निर्मम हत्या के मामले को लेकर हुआ। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के नाम पर शुरू हुआ यह प्रदर्शन देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया और कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया।READ ALSO:-ग्लोबल मार्केट में भड़का तनाव: अमेरिका-ईरान युद्ध की आहट से क्रूड ऑयल 7% उछला, जानें आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम
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प्रदर्शनकारियों ने न केवल अवैध रूप से सड़क जाम कर आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त किया, बल्कि ड्यूटी पर मुस्तैद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी जमकर अभद्रता और मारपीट की। इस हिंसक टकराव में 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। मेरठ पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 13 नामजद और करीब 50 अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। रातों-रात ताबड़तोड़ दबिश देकर पुलिस ने 7 मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भी भेज दिया है।
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कैसे शुरू हुआ बवाल? बाहरी जिलों से बुलाई गई थी भीड़
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पुलिस की प्रारंभिक जांच और खुफिया रिपोर्ट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि बुधवार को कमिश्नरी चौराहे पर हुआ यह धरना-प्रदर्शन पूरी तरह से सुनियोजित था, लेकिन इसके लिए प्रशासन से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। दरअसल, टीपी नगर क्षेत्र की रहने वाली छात्रा ललिता गौतम की हत्या के बाद से ही इलाके में तनाव था। कुछ स्वयंभू नेताओं और असामाजिक तत्वों ने मृतका के परिवार को बरगलाकर इस संवेदनशील मुद्दे को भुनाने की कोशिश की।
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प्रेस नोट \r\nमहिला की मृत्यु व अभियोग के सफल अनावरण के बाद भी प्रकरण में परिजनों को भड़काकर अवैध रूप से सड़क जाम करने, भीड़ को उकसाने एवं कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाले अभियुक्त को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया। \r\n \r\nदिनांक 15 मई को थाना टीपीनगर क्षेत्र से एक महिला गुमशुदा हुई… pic.twitter.com/nai4LqkuZJ
पुलिस के अनुसार, इस प्रदर्शन में सिर्फ मेरठ के लोग शामिल नहीं थे, बल्कि भीड़ जुटाने के लिए नोएडा, गाजियाबाद, अमरोहा, हापुड़ और आसपास के अन्य जिलों से भी युवाओं को बुलाया गया था। बिना किसी कानूनी अनुमति के, इस भीड़ ने सीधे कमिश्नरी चौराहे की ओर कूच किया और वहां विधि विरुद्ध तरीके से जमावड़ा लगा लिया। इन लोगों का मुख्य उद्देश्य सरकारी काम में बाधा डालना और शहर की शांति व्यवस्था को भंग करना था।
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रवि गौतम की आत्मदाह की धमकी और डीएम कार्यालय पर धावा
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जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, प्रदर्शनकारियों का रवैया भी उग्र होता गया। इसी बीच, प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे रवि गौतम नामक युवक ने हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू कर दिया। उसने पुलिस और प्रशासन पर अनुचित दबाव बनाने के उद्देश्य से सरेआम आत्मदाह करने की धमकी दे डाली। इस धमकी के बाद भीड़ और ज्यादा बेकाबू हो गई।
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अराजकता का आलम यह था कि बड़ी संख्या में उपद्रवियों ने कमिश्नरी चौराहे पर चारों तरफ से ट्रैफिक रोक दिया। इसके बाद, उत्तेजित भीड़ ने सीधे जिलाधिकारी (DM) कार्यालय की तरफ रुख किया और जबरन अंदर घुसने की कोशिश की। जब सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो उपद्रवियों ने डीएम कार्यालय का गेट तक तोड़ने की कोशिश की और अंदर घुसकर हिंसक प्रदर्शन करने की धमकियां दीं।
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आम जनता बेहाल, एंबुलेंस भी फंसी जाम में
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कमिश्नरी चौराहा मेरठ शहर का हृदय स्थल है। यहां से प्रतिदिन हजारों वाहन, स्कूल बसें, और मरीज गुजरते हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए इस अचानक जाम के कारण पूरे इलाके का ट्रैफिक सिस्टम पूरी तरह से चरमरा गया। भीषण जाम के कारण आम राहगीरों, न्याय की आस में आए फरियादियों, छुट्टी के बाद घर लौट रहे विद्यार्थियों, महिलाओं और छोटे बच्चों को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
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स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस भीषण जाम में मरीजों की जान बचाने वाली दो एंबुलेंस भी बुरी तरह फंस गईं। प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस को भी रास्ता देने की संवेदनशीलता नहीं दिखाई। अंततः, मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को हटाकर दोनों एंबुलेंस को सुरक्षित वहां से बाहर निकाला।
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अधिकारियों की अपील दरकिनार, पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला
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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एडीएम सिटी, एसपी ग्रामीण (SP Rural), नगर मजिस्ट्रेट, सीओ कैंट, सीओ सिविल लाइन और प्रभारी निरीक्षक थाना सिविल लाइन भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए।
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प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने अत्यंत संयम का परिचय देते हुए लाउड हेलर (माइक) के जरिए और व्यक्तिगत रूप से प्रदर्शनकारियों से बार-बार शांति बनाए रखने की अपील की। उन्हें समझाया गया कि उनका यह तरीका गैर-कानूनी है और वे ज्ञापन देकर अपनी बात रख सकते हैं। लेकिन, उपद्रवी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। उन्होंने अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की शुरू कर दी।
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जब पुलिस ने उन्हें जबरन पीछे धकेलने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारियों ने हाथापाई करते हुए पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया। इस हिंसक झड़प में 11 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। हद तो तब हो गई जब उपद्रवियों ने महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी अभद्र और अशोभनीय व्यवहार किया। अंततः, कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त होने से बचाने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को मजबूरन 'न्यूनतम बल प्रयोग' (Mild Lathicharge) करना पड़ा।
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संगीन धाराओं में FIR, इन 13 आरोपियों पर कसा शिकंजा
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इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के सख्त निर्देशों पर थाना सिविल लाइन में उपद्रवियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने सीएलए (क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अत्यंत कठोर धाराओं के तहत मुकदमा (मु0अ0सं0 173/2026) दर्ज किया है।
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इन धाराओं में हुई है एफआईआर: धारा 74, 109(1), 126(2), 132, 223, 189, 190, 195, 196, 270, 121, 221, 226 बीएनएस व 7 सीएल एक्ट। यह धाराएं सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस पर हमला करने, बलवा करने और समाज में वैमनस्य फैलाने से संबंधित हैं।
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नामजद 13 आरोपियों की सूची:
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रवि गौतम (पुत्र नामालूम) - निवासी: गाजियाबाद/नोएडा
हेमन्त प्रधान - निवासी: चाइना पुरी, थाना मेडिकल, जनपद मेरठ
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संजय - निवासी: लिसाड़ी गेट, जनपद मेरठ
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बिजेन्द्र सूद - निवासी: (अज्ञात)
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दिग्विजय भाटी - निवासी: जनपद अमरोहा
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अजय कुमार (पुत्र सन्तराम) - निवासी: (अज्ञात)
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इन 13 नामजद आरोपियों के अलावा 25 से 50 अज्ञात व्यक्तियों को भी मुकदमे में शामिल किया गया है।
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आगे की कार्रवाई: वीडियो फुटेज से हो रही पहचान
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मेरठ पुलिस ने साफ कर दिया है कि शहर की फिजा बिगाड़ने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। देर रात तक चली पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश में 13 नामजद आरोपियों में से 7 को गिरफ्तार कर लिया गया है। फरार चल रहे अन्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
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इसके साथ ही, घटनास्थल से प्राप्त वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और मीडिया कैमरों में कैद तस्वीरों के आधार पर अज्ञात उपद्रवियों को चिह्नित करने का काम तेजी से चल रहा है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताना सबका अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर गुंडागर्दी, पुलिस पर हमला और आम जनता को बंधक बनाने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। फिलहाल, घायल सभी 11 पुलिसकर्मियों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है और कमिश्नरी चौराहे पर एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। शहर में शांति व्यवस्था पूरी तरह से कायम है।
Sabse pehle comment karne wale banein.