मेरठ/हापुड़ (संवाददाता): आस्था और विश्वास के पर्व महाशिवरात्रि (Mahashivratri) की शाम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और हापुड़ जिले के कई परिवारों के लिए एक डरावनी रात में बदल गई। भगवान शिव की आराधना कर दिन भर उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं ने जब शाम को फलाहार (व्रत खोलने) के लिए कुट्टू के आटे (Buckwheat Flour) से बने पकवानों का सेवन किया, तो कुछ ही घंटों में उनकी जान पर बन आई।READ ALSO:-मेरठ CCSU: 'मेरे साथ रहो, न नौकरी की चिंता, न पैसे की'; शिक्षक ने जिम में छात्रा को दिया 'डर्टी ऑफर', A++ विवि की साख पर बट्टा
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मेरठ और हापुड़ के अलग-अलग इलाकों में दूषित कुट्टू का आटा खाने से 28 से अधिक लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए। मरीजों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं। सभी को उल्टी, दस्त, पेट में मरोड़ और घबराहट की शिकायत के बाद देर रात आनन-फानन में विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
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इस घटना ने एक बार फिर त्यौहारों पर बिकने वाले मिलावटी और पुराने खाद्य पदार्थों की पोल खोलकर रख दी है। प्रशासन ने देर रात ही छापेमारी शुरू कर दी, लेकिन तब तक कई दुकानदार अपनी दुकानों के शटर गिराकर फरार हो चुके थे।
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इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि आखिर यह घटना कैसे घटी, पीड़ितों की वर्तमान स्थिति क्या है और कुट्टू का आटा 'जहर' क्यों बन जाता है।
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हापुड़: बाबूगढ़ में एक ही परिवार के 4 लोग बेहोश

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घटना की शुरुआत हापुड़ जिले के बाबूगढ़ थाना क्षेत्र से हुई। यहाँ आस्था के साथ खिलवाड़ का एक जीता-जागता उदाहरण देखने को मिला।
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घटनाक्रम: बाबूगढ़ कस्बे के निवासी विकास कुमार शर्मा ने रविवार को महाशिवरात्रि का व्रत रखा था। शाम को व्रत खोलने के लिए वह पास ही स्थित एक पंसारी की दुकान से खुला कुट्टू का आटा खरीद कर लाए थे। घर की महिलाओं ने श्रद्धाभाव से उस आटे की कचौरी और पकौड़ियां बनाईं।
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परिवार के चार सदस्यों—स्वयं विकास कुमार शर्मा, उनके भाई विनय कुमार, पत्नी सरिता शर्मा और बुजुर्ग माता रेखा शर्मा—ने जैसे ही भोजन किया, कुछ देर तक सब सामान्य रहा। लेकिन, लगभग आधे घंटे बाद ही एक-एक करके सबकी तबीयत बिगड़ने लगी।
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लक्षण और अफरा-तफरी: सबसे पहले बुजुर्ग माता जी को घबराहट महसूस हुई। जब तक कोई कुछ समझ पाता, विकास और उनकी पत्नी को भी चक्कर आने लगे। देखते ही देखते चारों लोग उल्टी करने लगे और निढाल होकर गिर पड़े। पड़ोसियों और अन्य परिजनों ने जब यह मंजर देखा तो उनके हाथ-पांव फूल गए। स्थानीय डॉक्टर को बुलाया गया, लेकिन हालत गंभीर (Critical) देख उन्हें तुरंत बड़े अस्पताल रेफर कर दिया गया।
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प्रशासनिक कार्रवाई: हापुड़ के खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिवेंद्र सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम ने उस पंसारी की दुकान पर छापा मारा। वहां से बचे हुए आटे को जब्त कर लिया गया है और उसे प्रयोगशाला (Lab) भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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मेरठ: 24 लोग अस्पताल में, मातम में बदली खुशियां

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हापुड़ से भी भयावह स्थिति मेरठ (Meerut) में देखने को मिली, जहाँ दूषित आटे ने करीब 24 लोगों को अस्पताल पहुंचा दिया। यहाँ मामला केवल एक परिवार तक सीमित नहीं था, बल्कि शहर के अलग-अलग मोहल्लों से मरीजों की लाइन लग गई।
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काबू से बाहर हुए हालात: मेरठ में रात के 10:30 बजे के बाद अस्पतालों में अचानक मरीजों की भीड़ बढ़ने लगी। सभी के लक्षण एक जैसे थे—फूड पॉइजनिंग। जांच में सामने आया कि इन सभी ने मोहल्ला काबली गेट स्थित 'श्रीजी किराना स्टोर' और आसपास की दुकानों से कुट्टू का आटा खरीदा था।
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पीड़ित परिवारों की आपबीती:

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    पूर्व सभासद का परिवार: मोहल्ला कल्याण सिंह के निवासी और पूर्व सभासद रामकुमार दीक्षित (50), उनकी पत्नी ऊषा और बेटे शुभम ने जैसे ही खाना खाया, उन्हें विषैले भोजन का असर महसूस होने लगा। पूरा परिवार निजी नर्सिंग होम में जिंदगी और मौत से जूझता नजर आया।
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    ऊर्जा निगम लिपिक का परिवार: नालंदा कॉलोनी में रहने वाले बिजली विभाग के क्लर्क वासुदेव के घर में भी कोहराम मच गया। वासुदेव, उनकी पत्नी सुनीता, बेटी काव्या और भतीजी शिवानी समेत 5 लोग पकौड़ी खाते ही बीमार हो गए।
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अन्य प्रभावित इलाके: मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अशोक कटारिया के अनुसार, मरीजों का दायरा केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है:
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    मवाना (Mawana): यहाँ से 15 मरीज रिपोर्ट किए गए।
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    अपेक्स कॉलोनी: 4 लोग बीमार।
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    जागृति विहार: 2 लोग गंभीर।
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आधी रात को छापेमारी: दुकानदार फरार, 11 किलो 'जहर' जब्त

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जैसे ही फूड पॉइजनिंग की सूचना जिला प्रशासन तक पहुंची, हड़कंप मच गया। उपजिलाधिकारी (SDM) संतोष कुमार सिंह ने तत्काल खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की टीम को पुलिस बल के साथ मौके पर भेजा।
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रेड (Raid) की कार्रवाई:

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    टीम ने सबसे पहले काबली गेट स्थित श्रीजी किराना स्टोर पर छापा मारा।
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    इसके बाद अजय रस्तोगी की दुकान पर कार्रवाई की गई।
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    मौके से 11 किलो खुला कुट्टू का आटा और गिरी जब्त की गई।
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दुकानदार फरार: पुलिस की जीप का सायरन सुनते ही मिलावटखोर दुकानदारों में भगदड़ मच गई। मुख्य आरोपी दुकानदार अपनी दुकानें खुली छोड़कर या शटर गिराकर मौके से फरार हो गए। पुलिस अब उनकी तलाश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि त्योहारों पर पुराना और फफूंद लगा आटा बेचने वालों पर रासुका (NSA) जैसी कार्रवाई होनी चाहिए।
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मेडिकल अपडेट: खतरे से बाहर, लेकिन दहशत बरकरार

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मेरठ और हापुड़ के अस्पतालों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, समय पर इलाज मिल जाने के कारण अब अधिकांश मरीजों की हालत खतरे से बाहर (Stable) है।
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डॉक्टरों ने बताया कि फूड पॉइजनिंग के कारण मरीजों का ब्लड प्रेशर (BP) लो हो गया था और शरीर में पानी की कमी (Dehydration) हो गई थी। उन्हें ड्रिप चढ़ाई गई है और विषहरण (Detoxification) की दवाएं दी गई हैं। हालांकि, मरीजों में अभी भी कमजोरी और मानसिक दहशत बनी हुई है।
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क्यों 'जहर' बन जाता है कुट्टू का आटा? (वैज्ञानिक कारण)

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अक्सर सवाल उठता है कि भगवान का प्रसाद माना जाने वाला कुट्टू (Buckwheat) जानलेवा कैसे हो जाता है? इसके पीछे मुख्य रूप से भंडारण (Storage) की लापरवाही जिम्मेदार है।
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    फफूंद (Fungus): कुट्टू का आटा ज्यादा दिन तक रखने पर खराब हो जाता है। अगर इसे नमी वाली जगह पर रखा जाए, तो इसमें 'एफ्लाटॉक्सिन' (Aflatoxin) नामक फंगस पनप जाता है। यह फंगस शरीर में जाकर टॉक्सिन (जहर) पैदा करता है।
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    पुराना स्टॉक: दुकानदार अक्सर पिछले साल का बचा हुआ आटा, जो गोदामों में सड़ रहा होता है, उसे नए आटे में मिलाकर बेच देते हैं।
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    अन्य मिलावट: कई बार मुनाफे के चक्कर में कुट्टू के आटे में जंगली घास के बीज या खराब गुणवत्ता वाले चावल का आटा भी मिला दिया जाता है।
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कुट्टू के विषाक्त होने के लक्षण:

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    खाने में कड़वापन महसूस होना।
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    आटे का रंग सामान्य से ज्यादा काला या भूरा होना।
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    आटे में गांठें पड़ी होना।
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 उपभोक्ता जागरूकता: अगली बार सावधान रहें

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खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम जनता के लिए एडवाइजरी जारी की है। यदि आप व्रत में कुट्टू या सिंघाड़े का आटा खरीद रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
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    खुला आटा न खरीदें: हमेशा ब्रांडेड और पैक्ड (Packed) आटा ही खरीदें, जिस पर FSSAI का मार्क हो। खुले आटे में मिलावट की संभावना सबसे अधिक होती है।
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    मैन्युफैक्चरिंग डेट देखें: पैकेट पर यह जरूर चेक करें कि आटा कब पिसा है। कुट्टू का आटा पिसने के 1 महीने के भीतर इस्तेमाल कर लेना चाहिए।
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    रंग और गंध: अगर आटे का रंग अजीब है या उसमें से सीलन की बदबू आ रही है, तो उसे बिल्कुल न खरीदें।
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    थोड़ा चखें: पकाने से पहले थोड़ा सा आटा चखकर देखें। अगर वह कड़वा है, तो उसे तुरंत फेंक दें।
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    बिल जरूर लें: दुकानदार से पक्का बिल मांगें ताकि गड़बड़ी होने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।
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प्रशासन की नाकामी या व्यापारियों का लालच?

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हर साल नवरात्र और शिवरात्रि पर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, फिर भी प्रशासन पहले से नहीं जागता।
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    सैंपलिंग में सुस्ती: क्या खाद्य विभाग केवल त्योहार वाले दिन ही जागेगा? त्योहार से एक हफ्ता पहले गोदामों की चेकिंग क्यों नहीं की जाती?
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    सजा का अभाव: ऐसे मामलों में अक्सर दुकानदार कुछ दिन बाद छूट जाते हैं और फिर वही धंधा शुरू कर देते हैं। जब तक सख्त सजा नहीं मिलेगी, लोगों की जान से खिलवाड़ होता रहेगा।
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मेरठ और हापुड़ की जनता अब सवाल पूछ रही है कि उन 28 लोगों की जिंदगी को जोखिम में डालने वाले इन 'मुनाफाखोरों' को जेल कब भेजा जाएगा?
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सतर्कता ही बचाव है
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मेरठ और हापुड़ की यह घटना हम सभी के लिए एक सबक है। आस्था अपनी जगह है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। व्रत का उद्देश्य शरीर और आत्मा की शुद्धि है, न कि उसे रोगी बनाना।
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प्रशासन को चाहिए कि वह फरार दुकानदारों को जल्द गिरफ्तार करे और उनके लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करे। वहीं, हम पाठकों से अपील करते हैं कि खाद्य सामग्री खरीदते समय 'जागो ग्राहक जागो' की नीति अपनाएं।
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हेल्पलाइन: यदि आपको या आपके आसपास किसी को फूड पॉइजनिंग के लक्षण दिखें, तो तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा या नजदीकी जिला अस्पताल से संपर्क करें।
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(नोट: यह न्यूज़ रिपोर्ट 17 फरवरी 2026 की ताज़ा घटनाक्रम और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अभी भी निगरानी बनाए हुए हैं।)
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