मेरठ/नोएडा (Meerut News): डिजिटल दुनिया में ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) का नशा और उसके पीछे चल रहा काले धन का खेल अब जांच एजेंसियों के रडार पर है। जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (DGGI) मेरठ जोन की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन गेमिंग जीएसटी फ्रॉड (Online Gaming GST Fraud) के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।READ ALSO:-Voter List: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का मिल सकता है 'बोनस टाइम', चुनाव आयोग ने यूपी-बंगाल के लिए जारी किए सख्त निर्देश
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विभाग ने 320 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कर चोरी के आरोप में दो कंपनी मालिकों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने ऑनलाइन गेमिंग के जरिए करीब 1200 करोड़ रुपये जीते, लेकिन सरकार को एक रुपये का भी टैक्स नहीं चुकाया। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि ये गेमिंग की आड़ में काले धन को सफेद (Money Laundering) करने का काम कर रहे थे।
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3 महीने से रडार पर थे आरोपी
\r\n\r\nशासकीय अधिवक्ता लक्ष्य कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि डीजीजीआई (DGGI) मेरठ जोन की टीम पिछले तीन महीनों से इन संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही थी। टीम को इनपुट मिला था कि ऑनलाइन गेमिंग के जरिए भारी मात्रा में पैसों का लेनदेन हो रहा है, लेकिन टैक्स जमा नहीं किया जा रहा।
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पुख्ता सबूत मिलने के बाद टीम ने जाल बिछाया और दोनों मुख्य आरोपियों को नोएडा से गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी राजन और फरीदाबाद निवासी रवि सिंह के रूप में हुई है।
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1200 करोड़ जीते, पर टैक्स नहीं दिया
\r\n\r\nजांच में सामने आया है कि यह खेल बहुत बड़े स्तर पर चल रहा था। आंकड़ों के मुताबिक:
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- \r\n राजन (दिल्ली): इसने अपनी कंपनी के जरिए ऑनलाइन गेमिंग में करीब 442 करोड़ रुपये की रकम जीती।\r\n \r\n
- \r\n रवि सिंह (फरीदाबाद): इसने और भी बड़ा खेल करते हुए 760 करोड़ रुपये जीते।\r\n \r\n
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कुल मिलाकर दोनों ने लगभग 1200 करोड़ रुपये की कमाई की। नियमानुसार, ऑनलाइन गेमिंग से हुई कमाई पर सरकार को जीएसटी देना अनिवार्य है। इस जीत की रकम पर करीब 320 करोड़ रुपये की जीएसटी (GST) देनदारी बनती थी, जिसे आरोपियों ने डकार लिया।
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काला धन सफेद करना और ग्राहकों से ठगी
\r\n\r\nयह मामला सिर्फ ऑनलाइन गेमिंग जीएसटी फ्रॉड तक सीमित नहीं है। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
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- \r\n मनी लॉन्ड्रिंग: आरोप है कि दोनों कंपनी मालिक ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल काले धन को सफेद (Black money to White) करने के लिए कर रहे थे। वे अवैध स्रोतों से आए पैसों को गेमिंग की जीत (Winnings) के रूप में दिखा रहे थे।\r\n \r\n
- \r\n ग्राहकों से अवैध वसूली: जांच में यह भी पता चला है कि इन लोगों ने गेम खेलने वाले ग्राहकों के खातों से अवैध तरीके से पैसे काटे। यानी सरकार के साथ-साथ आम जनता के साथ भी फर्जीवाड़ा किया गया।\r\n \r\n
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कोर्ट ने भेजा जेल
\r\n\r\nगिरफ्तारी के बाद डीजीजीआई की टीम ने बुधवार को दोनों आरोपियों, राजन और रवि सिंह को मेरठ में विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Special CJM) दुर्गेश नंदिनी की अदालत में पेश किया। अदालत ने मामले की गंभीरता और भारी मात्रा में कर चोरी को देखते हुए दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
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गेमिंग सेक्टर पर सख्ती
\r\n\r\nहाल ही में सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग, कसीनो और घुड़दौड़ पर 28% जीएसटी (28% GST) लगाने का फैसला किया था। इसके बाद से ही जीएसटी इंटेलिजेंस विंग सक्रिय है। मेरठ जोन की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि गेमिंग की आड़ में टैक्स चोरी करने वालों पर अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है।
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अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी और भी कड़ियां जुड़ सकती हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस सिंडिकेट में और भी लोग शामिल हैं और पैसों का ट्रेल (Money Trail) कहां तक जाता है।
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जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) मेरठ ने ऑनलाइन गेमिंग के जरिए 320 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले दो आरोपियों, राजन और रवि सिंह को नोएडा से गिरफ्तार किया है। इन्होंने 1200 करोड़ रुपये जीते थे लेकिन टैक्स नहीं दिया। साथ ही, इन पर मनी लॉन्ड्रिंग और ग्राहकों के पैसे काटने का भी आरोप है। कोर्ट ने दोनों को जेल भेज दिया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.