नई दिल्ली (New Delhi): देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने एक बड़ा कदम उठाया है। मतदाता सूची (Voter List) को त्रुटिहीन और शुद्ध बनाने के लिए चल रहे 'विशेष सघन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision - SIR) अभियान के तहत आयोग कई राज्यों में डेडलाइन बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।READ ALSO:-Bijnor News: गूगल पर 'डॉक्टर' खोजना पड़ा भारी! वन क्षेत्राधिकारी को ठगने की फिराक में थे साइबर ठग, एक APK फाइल ने बिगाड़ा पूरा खेल
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उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार समेत 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मतदाताओं के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है। आयोग ने संकेत दिए हैं कि मतदाताओं को अपनी जानकारी अपडेट करने, नाम जुड़वाने या सुधारने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मिल सकता है।
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यूपी की मांग पर आयोग गंभीर, गुरुवार को फैसला
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश की ओर से एसआईआर (SIR) के दौरान गणना फार्म (Enumeration Form) जमा करने की अवधि को बढ़ाने की मांग की गई थी। इस मांग पर चुनाव आयोग ने सकारात्मक रुख दिखाया है। आयोग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, जिन राज्यों में अगले साल चुनाव होने हैं, उन्हें छोड़कर बाकी राज्यों में समय सीमा बढ़ाई जा सकती है।
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- \r\n वर्तमान स्थिति: अभी केरल को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में फार्म भरने और जमा करने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर है।\r\n \r\n
- \r\n संभावित बदलाव: आयोग इसे एक हफ्ते के लिए बढ़ा सकता है। इस पर अंतिम निर्णय गुरुवार को लिए जाने की संभावना है।\r\n \r\n
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मृत और शिफ्टेड वोटरों की लिस्ट होगी ऑनलाइन
\r\n\r\nवोटर लिस्ट में गड़बड़ी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए आयोग ने एक नई व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है। आयोग ने सभी 12 राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों (CEOs) से कहा है कि ड्राफ्ट लिस्ट जारी करने से पहले हर बूथ की DSAD लिस्ट (Dead, Shifted, Absent, Duplicate) राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाए।
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आयोग ने निर्देश दिया है कि जिस तरह बिहार में मृत, स्थानांतरित और अनुपस्थित मतदाताओं की सूची वेबसाइट पर अपलोड की गई थी, उसी तर्ज पर अन्य राज्य भी इसे सीईओ (CEO) और डीईओ (DEO) की वेबसाइट पर उपलब्ध कराएं। इससे आम जनता और राजनीतिक दल आसानी से देख सकेंगे कि किन नामों को हटाया जा रहा है।
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राजनीतिक दलों के एजेंटों की बढ़ेगी भूमिका
\r\n\r\nचुनाव आयोग ने स्पष्ट कहा है कि मतदाता सूची से कोई भी नाम गलत तरीके से नहीं कटना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों के साथ समन्वय बनाने को कहा गया है।
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- \r\n अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे बूथ लेवल एजेंट (BLA) को सक्रिय करें।\r\n \r\n
- \r\n अगर किसी बूथ पर किसी वोटर का नाम गलत तरीके से मृत या शिफ्टेड श्रेणी में डाल दिया गया है, तो बीएलए तुरंत इसकी सूचना दें ताकि समय रहते उसे ठीक किया जा सके।\r\n \r\n
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पश्चिम बंगाल के लिए खास निर्देश: हाईराइज सोसायटियों पर फोकस
\r\n\r\nआयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) को विशेष निर्देश जारी किए हैं। शहरों में बढ़ती हाईराइज बिल्डिंग्स और हाउसिंग सोसायटियों को देखते हुए आयोग ने वहां नए मतदान केंद्र (Polling Stations) बनाने को कहा है।
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- \r\n उद्देश्य: सोसायटियों में रहने वाले मतदाताओं को वोटिंग के लिए दूर न जाना पड़े।\r\n \r\n
- \r\n सीमा: आयोग ने सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता न हों।\r\n \r\n
- \r\n डेडलाइन: बंगाल के सीईओ को 31 दिसंबर तक ऐसे नए मतदान केंद्रों की सूची आयोग को मुहैया करानी होगी।\r\n \r\n
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चुनाव आयोग का यह कदम मतदाता सूची की पवित्रता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। डेडलाइन बढ़ने से उन लोगों को मौका मिलेगा जो किन्हीं कारणों से अब तक अपना नाम नहीं जुड़वा पाए हैं। वहीं, मृत और डुप्लीकेट वोटरों की लिस्ट सार्वजनिक होने से फर्जी वोटिंग पर लगाम लगेगी और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
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चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत 12 राज्यों में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण की डेडलाइन 11 दिसंबर से बढ़ाकर एक हफ्ता और कर सकता है। आयोग ने निर्देश दिया है कि मृत और शिफ्टेड वोटरों की सूची वेबसाइट पर अपलोड की जाए और राजनीतिक दलों के साथ साझा की जाए ताकि कोई गड़बड़ी न हो। बंगाल में हाईराइज बिल्डिंग्स में नए बूथ बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.