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बिजनौर (Bijnor News): डिजिटल दौर में छोटी सी लापरवाही आपकी बैंक खाते को खाली कर सकती है। बिजनौर में साइबर ठगों (Cyber Thugs) के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे अधिकारियों को भी नहीं बख्श रहे हैं। ताजा मामला जिले के एक वन क्षेत्राधिकारी (Forest Range Officer) से जुड़ा है, जिन्हें ठगों ने अपना शिकार बनाने की कोशिश की।READ ALSO:-नैनीताल कार हादसा: मुक्तेश्वर से लौट रहे गाजियाबाद के परिवार की XUV खाई में गिरी; मामा-भांजी की मौत, 6 जिंदगी और मौत के बीच
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हालांकि, वन क्षेत्राधिकारी की सूझबूझ और जागरूकता के चलते वे ठगी का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। मामला ऑनलाइन डॉक्टर का नंबर सर्च करने से जुड़ा है।
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क्या है पूरा मामला?

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बिजनौर में तैनात वन क्षेत्राधिकारी महेश गौतम (Mahesh Gautam) को चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने गूगल (Google Search) का सहारा लिया। उन्होंने शहर के प्रसिद्ध डॉक्टर अरोड़ा का नंबर गूगल पर सर्च किया। सर्च रिजल्ट में उन्हें एक मोबाइल नंबर मिला, जिसे डॉक्टर का समझकर उन्होंने कॉल कर दी।
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ठगों ने बिछाया जाल: अपॉइंटमेंट के नाम पर खेल

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महेश गौतम ने जैसे ही उस नंबर पर कॉल किया, दूसरी तरफ से बात कर रहे व्यक्ति ने खुद को क्लीनिक का स्टाफ बताया। उसने कहा कि डॉक्टर से मिलने के लिए पहले ऑनलाइन अपॉइंटमेंट (Online Appointment) बुक करना होगा।
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यहीं से ठगों ने अपना खेल शुरू किया। उन्होंने रेंजर महेश गौतम के व्हाट्सएप पर एक लिंक और एक APK फाइल भेजी। ठगों ने कहा कि इस फाइल को डाउनलोड करके 10 रुपये की फीस जमा करें, तभी नंबर लगेगा।
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एक शक ने बचा ली कमाई

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महेश गौतम को ठगों की बातों पर शक हो गया। उन्हें यह समझते देर नहीं लगी कि अपॉइंटमेंट के लिए किसी अनजान ऐप या APK फाइल को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने तुरंत फाइल डाउनलोड करने से इनकार कर दिया और फोन काट दिया। बाद में पता चला कि गूगल पर डला वह नंबर डॉक्टर के क्लीनिक का नहीं, बल्कि साइबर ठगों का था।
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कैसे काम करता है यह गैंग?

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साइबर विशेषज्ञ बताते हैं कि ठग गूगल मैप्स और बिजनेस लिस्टिंग में जाकर असली दुकानदारों या डॉक्टरों के नंबर एडिट कर अपना नंबर डाल देते हैं।
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    APK फाइल का खतरा: जैसे ही आप ठगों द्वारा भेजी गई APK फाइल (दुर्भावनापूर्ण ऐप) इंस्टॉल करते हैं, उन्हें आपके मोबाइल का पूरा एक्सेस मिल जाता है।
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    SMS फॉरवर्डिंग: यह ऐप आपके बैंक के OTP को ठगों तक पहुंचा देता है, जिससे वे खाता खाली कर देते हैं।
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जागरूकता ही बचाव है

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वन क्षेत्राधिकारी महेश गौतम की सतर्कता ने उन्हें बड़े नुकसान से बचा लिया। पुलिस और साइबर सेल लगातार अपील करती है कि:
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    गूगल पर मिले नंबरों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
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    किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई ऐप (AnyDesk, QuickSupport) या APK फाइल इंस्टॉल न करें।
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    डॉक्टर का अपॉइंटमेंट लेने के लिए आधिकारिक वेबसाइट या अस्पताल जाकर ही संपर्क करें।
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बिजनौर में वन क्षेत्राधिकारी महेश गौतम को साइबर ठगों ने निशाना बनाने की कोशिश की। गूगल पर डॉक्टर अरोड़ा का नंबर सर्च करने पर ठगों ने उन्हें एक APK फाइल भेजकर अपॉइंटमेंट बुक करने को कहा। रेंजर ने समझदारी दिखाते हुए फाइल डाउनलोड नहीं की और ठगी से बच गए।
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