लखनऊ (स्पेशल पावर डेस्क): उत्तर प्रदेश में इन दिनों बिजली उपभोक्ताओं के बीच सबसे बड़ी चर्चा का विषय 'स्मार्ट मीटर' (Smart Meters) बना हुआ है। पूरे प्रदेश में पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटरों को हटाकर तेजी से स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही एक बहुत बड़ी अफवाह और शिकायत भी आम हो गई है कि "स्मार्ट मीटर बहुत तेज चलते हैं" और "इनके लगने के बाद बिजली का बिल दोगुना या तिगुना हो गया है।" उपभोक्ताओं के इस डर, भ्रम और लगातार आ रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL) ने इस मुद्दे पर पूरी पारदर्शिता के साथ अपनी बात रखी है।READ ALSO:-मुख्यमंत्री की गरिमा और मातृशक्ति का अपमान बर्दाश्त नहीं: CM योगी की मां पर अभद्र टिप्पणी करने वाला मौलाना बिहार से गिरफ्तार, UP STF का बड़ा एक्शन
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मंगलवार को लखनऊ स्थित एमवीवीएनएल (MVVNL) मुख्यालय में मध्यांचल की प्रबंध निदेशक (Managing Director) रिया केजरीवाल (Riya Kejriwal) ने एक बेहद महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इस प्रेस वार्ता में उन्होंने न केवल स्मार्ट मीटरों की एक्यूरेसी (सटीकता) पर आधिकारिक डेटा पेश किया, बल्कि वर्टिकल व्यवस्था (Vertical System), प्रीपेड मीटर की कार्यप्रणाली, ईईएसएल (EESL) मीटरों की तकनीकी खामियों और लखनऊ सहित पूरे मध्यांचल क्षेत्र में बिजली आपूर्ति (Power Supply) के बुनियादी ढांचे में हुए सुधारों पर विस्तार से चर्चा की।
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इस इन-डेप्थ (In-depth) विशेष रिपोर्ट में हम मध्यांचल एमडी रिया केजरीवाल द्वारा दी गई हर उस जानकारी का बारीकी से विश्लेषण करेंगे, जो एक बिजली उपभोक्ता के तौर पर आपके लिए जाननी बेहद जरूरी है। अगर आपके घर में भी स्मार्ट मीटर लग चुका है या लगने वाला है, तो यह रिपोर्ट आपके सारे सवालों के जवाब देगी।
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सबसे बड़ा सवाल: क्या सच में तेज चलते हैं स्मार्ट मीटर? (The Accuracy Debate)
\r\n\r\nस्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं में सबसे बड़ा खौफ यही है कि ये मीटर पारंपरिक मीटरों की तुलना में ज्यादा रीडिंग रिकॉर्ड करते हैं। कई मोहल्लों में तो लोग मीटर बदलने आई टीमों का विरोध तक कर रहे हैं। इस भ्रांति को दूर करने के लिए एमडी रिया केजरीवाल ने ठोस आंकड़ों का सहारा लिया।
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69,000 चेक मीटर का महा-परीक्षण
\r\n\r\nप्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि विभाग उपभोक्ताओं की शिकायतों को हवा में नहीं उड़ाता। जब ज्यादा बिल आने की शिकायतें बढ़ने लगीं, तो मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने इसकी सत्यता जांचने के लिए एक बहुत बड़ा तकनीकी अभियान चलाया।
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\r\n\r\n\r\n"स्मार्ट मीटर की रीडिंग को लेकर आ रही भ्रांतियों और समस्याओं को दूर करने के लिए विभाग की तरफ से मध्यांचल क्षेत्र में 69,000 'चेक मीटर' (Check Meters) लगाए गए थे। हमने उपभोक्ता के स्मार्ट मीटर के ठीक बगल में एक पारंपरिक चेक मीटर लगाया ताकि दोनों की रीडिंग का मिलान किया जा सके। मुझे यह बताते हुए संतुष्टि हो रही है कि इन 69 हजार मीटरों की टेस्टिंग में एक भी मीटर की रीडिंग में कोई डिफरेंस (अंतर) नहीं आया है।" - रिया केजरीवाल, एमडी, एमवीवीएनएल\r\n
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क्यों लगता है कि बिल ज्यादा आ रहा है? (The Logical Reason)
\r\n\r\nविशेषज्ञों के अनुसार, स्मार्ट मीटर बिल्कुल सटीक होते हैं। पुराने इलेक्ट्रोमैग्नेटिक या शुरुआती इलेक्ट्रॉनिक मीटर कई बार मामूली लोड (जैसे मोबाइल चार्जर, स्टैंडबाय मोड में टीवी या इन्वर्टर की चार्जिंग) को रिकॉर्ड नहीं कर पाते थे या समय के साथ उनकी मशीनरी सुस्त हो जाती थी। इसके विपरीत, स्मार्ट मीटर डिजिटल और अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। ये घर में खर्च होने वाली बिजली की एक-एक यूनिट (न्यूनतम वाट तक) को 100% सटीकता के साथ मापते हैं। इसलिए उपभोक्ताओं को अचानक लगता है कि उनका बिल बढ़ गया है, जबकि हकीकत में वे उतनी ही बिजली का उपभोग कर रहे होते हैं, जिसकी पहले सही से रिकॉर्डिंग नहीं हो पाती थी।
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कार्यप्रणाली: रिचार्ज करो और बिजली जलाओ (How Prepaid Meters Work)
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) अब पोस्टपेड से 'प्रीपेड' (Prepaid) व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ठीक वैसे ही जैसे आप अपने मोबाइल फोन को इस्तेमाल करने से पहले रिचार्ज करते हैं, अब बिजली भी एडवांस रिचार्ज पर काम करेगी। एमडी रिया केजरीवाल ने इसके फायदों और नए नियमों की जानकारी दी।
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3 दिन का 'ग्रेस पीरियड' (Grace Period on Negative Balance)
\r\n\r\nउपभोक्ताओं को यह डर सताता है कि अगर रात के समय मीटर का बैलेंस खत्म हो गया, तो क्या घर में अंधेरा हो जाएगा? एमडी ने इस डर को निराधार बताया।
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- \r\n नया नियम: अगर आपके स्मार्ट प्रीपेड मीटर का बैलेंस शून्य (Zero) हो जाता है और बिल निगेटिव (Negative) में जाने लगता है, तब भी आपकी बिजली तुरंत नहीं काटी जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n विभाग की तरफ से उपभोक्ताओं को तीन दिन (3 Days) का ग्रेस पीरियड दिया जाता है।\r\n \r\n
- \r\n इन तीन दिनों में उपभोक्ता को अपने मोबाइल पर लगातार अलर्ट मैसेज मिलते रहेंगे ताकि वे सुविधा अनुसार अपना मीटर रिचार्ज कर सकें।\r\n \r\n
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2 घंटे में ऑटोमेटिक रिकनेक्शन (Automatic Reconnection Feature)
\r\n\r\nअगर ग्रेस पीरियड खत्म होने के बाद भी रिचार्ज नहीं किया जाता है और बिजली का कनेक्शन कट (Disconnect) हो जाता है, तो इसके बाद की प्रक्रिया को भी पूरी तरह से मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त (Human-intervention free) कर दिया गया है।
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- \r\n जैसे ही उपभोक्ता अपना बकाया बिल/रिचार्ज ऑनलाइन जमा करेगा, सिस्टम सर्वर के माध्यम से मीटर को सीधा कमांड भेजेगा।\r\n \r\n
- \r\n एमडी ने आश्वस्त किया कि बिल जमा करने के अधिकतम दो घंटे के अंदर हर हाल में कनेक्शन दोबारा से ऑटोमेटिक जुड़ जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n अब किसी भी उपभोक्ता को अपनी कटी हुई बिजली जुड़वाने के लिए किसी लाइनमैन (Lineman) को खोजने या जेई (JE) को फोन करने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।\r\n \r\n
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तकनीकी अड़चनें: EESL मीटरों में खामी की बात स्वीकारी (Admission of Technical Faults)
\r\n\r\nएक जिम्मेदार अधिकारी की तरह, एमडी रिया केजरीवाल ने केवल विभाग की तारीफें ही नहीं कीं, बल्कि जमीन पर आ रही वास्तविक समस्याओं को भी खुले दिल से स्वीकार किया।
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EESL स्मार्ट मीटरों में रिकनेक्शन की समस्या
\r\n\r\nउन्होंने माना कि पुराने टेंडर के तहत एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL - ईईएसएल) द्वारा लगाए गए कुछ स्मार्ट मीटरों में तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं।
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- \r\n क्या है समस्या? एमडी ने बताया कि ईईएसएल के स्मार्ट मीटर में जब एक बार बैलेंस खत्म होने पर बिजली कनेक्शन कट जाता है, तो रिचार्ज करने के बाद उसे वापस जुड़ने (Reconnect) में कुछ सर्वर और टेक्निकल दिक्कतें आ रही हैं।\r\n \r\n
- \r\n इन मीटरों का सर्वर कमांड लेने में देरी करता है, जिससे कई बार 2 घंटे बीत जाने के बाद भी उपभोक्ता के घर की बिजली चालू नहीं हो पाती है।\r\n \r\n
- \r\n समाधान: विभाग ईईएसएल की टेक्निकल टीम के साथ मिलकर इन सॉफ्टवेयर और संचार (Communication) संबंधी खामियों को दूर करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। नए लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि यह समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।\r\n \r\n
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UPPCL का डिजिटल अवतार: उपभोक्ता सुविधाएं अब मुट्ठी में (Digital Initiatives for Consumers)
\r\n\r\nप्रेस कॉन्फ्रेंस का एक बड़ा हिस्सा UPPCL के तकनीकी सशक्तिकरण पर केंद्रित था। विभाग चाहता है कि उपभोक्ता बिजली दफ्तरों के चक्कर लगाना बंद करें और डिजिटल माध्यमों का भरपूर उपयोग करें। एमडी रिया केजरीवाल ने उपभोक्ताओं से कई महत्वपूर्ण अपीलें कीं।
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UPPCL स्मार्ट ऐप (UPPCL Smart App)
\r\n\r\nएमडी ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने स्मार्टफोन में 'UPPCL स्मार्ट ऐप' जरूर डाउनलोड कर लें। यह एक ऐप उपभोक्ताओं के लिए काफी होगा।
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- \r\n फीचर्स: इस ऐप पर उपभोक्ता अपने मीटर की लाइव दैनिक खपत (Daily Consumption), वर्तमान बैलेंस, पिछले महीनों का बिलिंग इतिहास और रिचार्ज के विकल्प देख सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n इससे पारदर्शिता आती है और उपभोक्ता स्वयं अपने बिजली खर्च की मॉनिटरिंग कर सकता है।\r\n \r\n
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जन-जागरूकता और डेली कॉलिंग (Mass Awareness Campaigns)
\r\n\r\nविभाग जानता है कि प्रीपेड सिस्टम उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए नया है। इसलिए लोगों को नए नियमों के बारे में जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है।
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- \r\n एमवीवीएनएल ने लाखों उपभोक्ताओं के मोबाइल नंबरों पर एसएमएस (SMS) भेजकर उन्हें स्मार्ट मीटर और प्रीपेड व्यवस्था की जानकारी दी है।\r\n \r\n
- \r\n विभाग के कॉल सेंटर की 100 लोगों की डेडिकेटेड टीम हर दिन उपभोक्ताओं को फोन कर रही है, उनका फीडबैक ले रही है और उन्हें मीटर के फायदों के बारे में समझा रही है।\r\n \r\n
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1912 हेल्पलाइन और व्हाट्सऐप चैटबोट (1912 & WhatsApp Chatbot)
\r\n\r\nअगर किसी को बिजली कटने, मीटर खराब होने या बिल में गड़बड़ी की शिकायत दर्ज करानी है, तो उसे उपकेंद्र (Sub-station) जाने की जरूरत नहीं है।
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- \r\n टोल-फ्री नंबर 1912: यह UPPCL का सेंट्रलाइज्ड कंप्लेंट नंबर है, जो 24x7 काम करता है। यहां दर्ज कराई गई शिकायत की सीधी मॉनिटरिंग मुख्यालय स्तर से होती है।\r\n \r\n
- \r\n व्हाट्सऐप चैटबोट: बिजली विभाग ने एक स्मार्ट व्हाट्सऐप चैटबोट भी लॉन्च किया है। उपभोक्ता केवल एक 'Hi' का मैसेज भेजकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, बिल डाउनलोड कर सकते हैं और अपनी समस्या का जल्द से जल्द समाधान पा सकते हैं।\r\n \r\n
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बुनियादी ढांचे में सुधार: "पिछले 3-4 सालों में आपूर्ति सबसे बेहतर" (Improvements in Power Infrastructure)
\r\n\r\nस्मार्ट मीटर के अलावा, प्रेस वार्ता में लखनऊ और पूरे मध्यांचल क्षेत्र में बिजली की निर्बाध आपूर्ति (Continuous Power Supply) के बुनियादी ढांचे पर भी विस्तृत चर्चा की गई। भीषण गर्मी के दौरान लोगों को बिना कट के बिजली मिले, इसके लिए विभाग ने क्या-क्या कदम उठाए हैं, इसकी जानकारी दी गई।
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ट्रिपिंग में आई भारी कमी (Reduction in Power Tripping)
\r\n\r\nगर्मियों में ओवरलोड के कारण बार-बार बत्ती गुल होना (Tripping) एक आम समस्या रही है। एमडी रिया केजरीवाल ने बताया कि इस बार ट्रिपिंग की घटनाओं में काफी कमी आई है।
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- \r\n मेंटेनेंस (Maintenance) पर जोर: सर्दियों के मौसम में ही जर्जर तारों, इंसुलेटर और पुराने ट्रांसफार्मरों की मरम्मत और बदलने का काम (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) बड़े पैमाने पर किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n लाइन और ट्रांसफार्मर के लोड बैलेंसिंग (Load Balancing) पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि किसी एक ट्रांसफार्मर पर क्षमता से अधिक दबाव न पड़े और वह जले नहीं।\r\n \r\n
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लखनऊ बना प्राथमिकता (Lucknow on Priority)
\r\n\r\nराजधानी लखनऊ होने के नाते, यहां की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सबसे ऊपर रखा गया है।
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- \r\n शहर के विभिन्न सब-स्टेशनों की क्षमता बढ़ाई गई है।\r\n \r\n
- \r\n अंडरग्राउंड केबलिंग (Underground Cabling) और जर्जर एरियल बंच केबल (ABC) को बदलने का काम प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है।\r\n \r\n
- \r\n एमडी ने विश्वास के साथ कहा, "अगर हम डेटा देखें, तो पिछले तीन-चार सालों में बिजली आपूर्ति की स्थिति प्रदेश में सबसे बेहतर हुई है। फॉल्ट अटेंड करने का रिस्पॉन्स टाइम (Response Time) घटा है।"\r\n \r\n
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एक नजर में: पुराने मीटर बनाम स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Traditional vs Smart Prepaid Meters)
\r\n\r\nउपभोक्ताओं की सुविधा के लिए, आइए विभाग द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर समझते हैं कि आपका पुराना मीटर नए स्मार्ट मीटर से कैसे अलग है:
\r\n\r\n| \r\n फीचर / सुविधा \r\n | \r\n \r\n पुराना मीटर (Traditional/Postpaid) \r\n | \r\n \r\n नया स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid) \r\n | \r\n
| \r\n रीडिंग का तरीका \r\n | \r\n \r\n मीटर रीडर हर महीने घर आता है (मैनुअल)। \r\n | \r\n \r\n सिम कार्ड के जरिए सर्वर पर अपने आप रीडिंग जाती है। \r\n | \r\n
| \r\n बिलिंग प्रणाली \r\n | \r\n \r\n महीने के अंत में बिल आता है (पोस्टपेड)। \r\n | \r\n \r\n मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज, फिर इस्तेमाल (प्रीपेड)। \r\n | \r\n
| \r\n सटीकता (Accuracy) \r\n | \r\n \r\n कम लोड पर कई बार रीडिंग मिस हो जाती थी। \r\n | \r\n \r\n 100% सटीक, हर छोटा लोड (वाट) रिकॉर्ड करता है। \r\n | \r\n
| \r\n बिजली कटना (Disconnection) \r\n | \r\n \r\n बिल जमा न करने पर लाइनमैन आकर तार काटता था। \r\n | \r\n \r\n बैलेंस शून्य/ग्रेस पीरियड खत्म होने पर ऑटोमेटिक सर्वर से कटती है। \r\n | \r\n
| \r\n पुनः संयोजन (Reconnection) \r\n | \r\n \r\n लाइनमैन को ढूंढकर वापस तार जुड़वाना पड़ता था। \r\n | \r\n \r\n रिचार्ज करते ही 2 घंटे में ऑटोमेटिक जुड़ जाती है। \r\n | \r\n
| \r\n खपत की निगरानी \r\n | \r\n \r\n महीने के अंत में ही पता चलता था कि कितनी बिजली जली। \r\n | \r\n \r\n UPPCL ऐप पर रोज की खपत लाइव चेक कर सकते हैं। \r\n | \r\n
अगर आपको लगता है कि आपका स्मार्ट मीटर तेज चल रहा है, तो क्या करें? (Consumer Action Guide)
\r\n\r\nमध्यांचल एमडी के 69,000 चेक मीटर वाले दावे के बावजूद, अगर किसी उपभोक्ता को लगता है कि उसके घर का स्मार्ट मीटर वास्तव में खराब है या बहुत तेज भाग रहा है, तो विभाग ने इसके लिए एक पारदर्शी प्रक्रिया बनाई हुई है। आपको हंगामा करने या परेशान होने की जरूरत नहीं है, बल्कि इन सरल चरणों का पालन करें:
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- \r\n चेक मीटर के लिए आवेदन करें: आप अपने नजदीकी बिजली उपकेंद्र (SDO ऑफिस) में जाकर 'चेक मीटर' (Check Meter) लगाने के लिए एक निर्धारित शुल्क (लगभग 50 से 100 रुपये) के साथ आवेदन कर सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n पैरलल मीटर की स्थापना: विभाग आपके वर्तमान स्मार्ट मीटर के ठीक बगल में सीरीज (Series) में एक नया 'इलेक्ट्रॉनिक चेक मीटर' लगा देगा।\r\n \r\n
- \r\n 15 दिन की मॉनिटरिंग: दोनों मीटरों को 7 से 15 दिनों तक एक साथ चलने दिया जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n रीडिंग का मिलान: तय समय बाद जेई (JE) दोनों मीटरों की सील और रीडिंग की जांच करेगा।\r\n \r\n
- \r\n कार्रवाई: अगर दोनों की रीडिंग समान है, तो आपका स्मार्ट मीटर सही माना जाएगा और आपको उसी के अनुसार बिल देना होगा। लेकिन, अगर स्मार्ट मीटर की रीडिंग चेक मीटर से ज्यादा पाई जाती है, तो विभाग तुरंत आपका स्मार्ट मीटर मुफ्त में बदलेगा और आपके पिछले ज्यादा आए बिल को संशोधित (Revise) करेगा।\r\n \r\n
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मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की एमडी रिया केजरीवाल द्वारा की गई यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा 'जागरूकता अभियान' (Awareness Drive) साबित हो सकती है। 69 हजार चेक मीटरों की टेस्टिंग का दावा इस बात की पुष्टि करता है कि "स्मार्ट मीटर तेज चलते हैं," यह धारणा तकनीकी सच्चाई से ज्यादा एक मनोवैज्ञानिक भ्रम (Psychological Myth) है।
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हालांकि, ईईएसएल (EESL) के मीटरों में रिकनेक्शन की समस्या जैसी तकनीकी खामियों को स्वीकार करना विभाग के पारदर्शी और ईमानदार रवैये को भी दर्शाता है। यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) अब पूरी तरह से टेक्नोलॉजी ड्रिवन (Technology-driven) हो रहा है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर, UPPCL ऐप और 1912 हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं भविष्य के 'स्मार्ट ग्रिड' (Smart Grid) की नींव रख रही हैं।
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अब जिम्मेदारी उपभोक्ताओं की भी है कि वे अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय इन डिजिटल सुविधाओं को अपनाएं, अपने बिजली उपभोग (Power Consumption) के प्रति जागरूक हों और ऊर्जा की बचत करें। क्योंकि स्मार्ट मीटर तेज नहीं चलता, वह बस आपके द्वारा खर्च की गई एक-एक बूंद (यूनिट) का सटीक हिसाब रखता है। पारदर्शी बिलिंग और 24 घंटे निर्बाध बिजली का जो लक्ष्य योगी सरकार ने रखा है, वह स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली के बिना पूरा नहीं किया जा सकता।
Sabse pehle comment karne wale banein.