शकील अहमद ब्यूरो चीफI बिजनौर: जिले में गुलदार के बढ़ते आतंक से परेशान किसानों के सब्र का बांध टूट चुका है। लगातार हो रही मौतों और जान-माल के नुकसान से गुस्साए किसानों ने सोमवार को वन विभाग के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया। उन्होंने विरोध का एक ऐसा तरीका अपनाया, जिससे पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया और डीएफओ (मंडल वन अधिकारी) दफ्तर एक तरह से रणभूमि में तब्दील हो गया।READ ALSO:-बिजनौर में खेत से मिली बुजुर्ग महिला की लाश, मौत का रहस्य गहराया, क्या घास लेने गई मुन्नी देवी की हुई हत्या?
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डीएफओ दफ्तर बना रणभूमि: किसान, मवेशी और आक्रोश
\r\n\r\nएक व्यक्ति की गुलदार के हमले में मौत के बाद, बड़ी संख्या में आक्रोशित किसान अपने मवेशियों के साथ डीएफओ दफ्तर पहुंचे। उनका यह विरोध प्रदर्शन महज एक विरोध नहीं, बल्कि एक चेतावनी थी। किसानों ने अपने पशुओं को दफ्तर के अंदर बांध दिया, यह दिखाने के लिए कि गुलदार का खतरा सिर्फ इंसानी जान तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी आजीविका पर भी मंडरा रहा है। पूरे परिसर में "वन विभाग मुर्दाबाद" और "गुलदार का आतंक खत्म करो" जैसे नारों से गूंज उठा।
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क्यों खूंखार हो रहा गुलदार? वन विभाग पर गंभीर आरोप
\r\n\r\nकिसानों का आरोप है कि वन विभाग गुलदार को पकड़ने या उसे दूर भगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। उन्होंने बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारी सिर्फ आश्वासन देते हैं, जबकि गुलदार खेतों और आबादी वाले इलाकों में घुसकर लोगों और उनके पशुओं पर हमला कर रहे हैं। किसानों ने वन विभाग पर अपनी जिम्मेदारी से भागने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी निष्क्रियता के कारण ही गुलदार का खौफ इतना बढ़ गया है।
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आर-पार की लड़ाई का ऐलान: अब समाधान से कम कुछ भी मंजूर नहीं
\r\n\r\nप्रदर्शनकारी किसानों ने साफ कर दिया है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता। उनकी मुख्य मांग है कि नरभक्षी हो चुके गुलदारों को तुरंत पकड़ा जाए या मार गिराया जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो उनका आंदोलन और भी उग्र हो जाएगा। फिलहाल पुलिस और वन विभाग के अधिकारी प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
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Sabse pehle comment karne wale banein.