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देहरादून/सोनप्रयाग: उत्तराखंड के चार धामों में से एक, बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने सोनप्रयाग (Sonprayag) से केदारनाथ धाम तक बनने वाले महत्वाकांक्षी रोपवे प्रोजेक्ट का टेंडर अडानी ग्रुप (Adani Group) को सौंप दिया है। इस परियोजना से 16 किलोमीटर की कठिन और थका देने वाली पैदल चढ़ाई का सफर सिमटकर महज 35 से 40 मिनट का रह जाएगा।READ ALSO:-रिश्ते शर्मसार! नानी-धेवता के अवैध संबंध में रोड़ा बना पति; धान के खेत में सोते समय गला घोंटकर की हत्या; पत्नी और प्रेमी गिरफ्तार
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परियोजना की लागत, अवधि और निर्माण एजेंसी
\r\n\r\nप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल यह रोपवे उत्तराखंड में पर्यटन और बुनियादी ढांचे को नई गति देने वाला है।
\r\n\r\n| \r\n विवरण \r\n | \r\n \r\n तथ्य \r\n | \r\n
| \r\n परियोजना का नाम \r\n | \r\n \r\n सोनप्रयाग से केदारनाथ रोपवे \r\n | \r\n
| \r\n कुल लंबाई \r\n | \r\n \r\n 12.9 किलोमीटर \r\n | \r\n
| \r\n अनुमानित लागत \r\n | \r\n \r\n लगभग ₹4,081 करोड़ \r\n | \r\n
| \r\n निर्माण का लक्ष्य \r\n | \r\n \r\n 5 से 6 साल \r\n | \r\n
| \r\n निर्माण एजेंसी \r\n | \r\n \r\n अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) का RMRW डिवीजन \r\n | \r\n
| \r\n संचालन और रख-रखाव \r\n | \r\n \r\n निर्माण पूरा होने के बाद अगले 29 वर्षों तक अडानी ग्रुप द्वारा \r\n | \r\n
यह परियोजना भारत सरकार के 'पर्वतमाला योजना' (National Ropeway Development Programme) का एक अहम हिस्सा है और इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है।
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9 घंटे की यात्रा 36 मिनट में क्यों?
\r\n\r\nवर्तमान में, श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग या गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक पहुँचने के लिए लगभग 16 किलोमीटर की दुर्गम और खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है, जिसमें स्वस्थ व्यक्ति को भी 8 से 9 घंटे का समय लगता है।
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- \r\n समय की बचत: रोपवे तैयार होने के बाद, यह 12.9 किमी की हवाई दूरी मात्र 36 मिनट में पूरी हो जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n क्षमता: यह रोपवे प्रत्येक दिशा में प्रति घंटे 1,800 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगा।\r\n \r\n
- \r\n आधुनिक तकनीक: इस परियोजना में अत्याधुनिक मोनोकेबिल डिटैचेबल गोंडोला (Monocable Detachable Gondola) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह भारत का पहला 3S (ट्राइ-कैबल) रोपवे सिस्टम हो सकता है, जो सुरक्षा और स्थिरता के लिए वैश्विक मानकों पर खरा उतरता है।\r\n \r\n
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अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने सोशल मीडिया पर इस प्रोजेक्ट की जानकारी साझा करते हुए कहा कि "केदारनाथ रोपवे सिर्फ एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आस्था और आधुनिकता के बीच का एक पुल होगा।"
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श्रद्धालुओं को मिलने वाली बड़ी सुविधाएँ
\r\n\r\nकेदारनाथ धाम में सालाना तीर्थयात्रियों की संख्या 15 से 20 लाख तक पहुँच जाती है। रोपवे बनने से यात्रा में कई महत्वपूर्ण सुधार आएंगे:
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- \r\n सुरक्षित यात्रा: मानसून के मौसम में भूस्खलन और बारिश के कारण पैदल मार्ग अक्सर जोखिम भरा हो जाता है। रोपवे यात्रा को सुरक्षित और मौसम की बाधाओं से कम प्रभावित बनाएगा।\r\n \r\n
- \r\n बुजुर्गों को राहत: कठिन चढ़ाई के कारण बुजुर्गों, बच्चों और शारीरिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को सबसे बड़ी राहत मिलेगी, जो अब आसानी से बाबा के दर्शन कर सकेंगे।\r\n \r\n
- \r\n समय प्रबंधन: यात्रा का समय 9 घंटे से घटकर 36 मिनट होने से श्रद्धालु कम समय में यात्रा पूरी कर सकेंगे, जिससे उन्हें धाम में दर्शन और पूजा के लिए अधिक समय मिलेगा।\r\n \r\n
- \r\n पर्यटन और रोजगार: यह प्रोजेक्ट उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।\r\n \r\n
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फिलहाल मानसून के दौरान हेलीकॉप्टर सेवा भी अक्सर बंद हो जाती है, ऐसे में रोपवे वर्ष के अधिक महीनों में केदारनाथ धाम तक निरंतर कनेक्टिविटी प्रदान करने का एक स्थायी समाधान साबित होगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
\r\n\r\nसवाल 1: केदारनाथ रोपवे कहाँ से कहाँ तक बनेगा?
\r\n\r\nजवाब: यह रोपवे सोनप्रयाग से शुरू होकर सीधे केदारनाथ धाम तक बनेगा।
\r\n\r\nसवाल 2: इस रोपवे प्रोजेक्ट का टेंडर किस कंपनी को मिला है?
\r\n\r\nजवाब: इस परियोजना का टेंडर अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Ltd.) को मिला है।
\r\n\r\nसवाल 3: रोपवे बनने के बाद केदारनाथ की यात्रा में कितना समय लगेगा?
\r\n\r\nजवाब: रोपवे तैयार होने के बाद 9 घंटे की पैदल यात्रा केवल 35 से 40 मिनट में पूरी हो जाएगी।
\r\n\r\nसवाल 4: यह रोपवे कितना लंबा होगा और इसकी अनुमानित लागत कितनी है?
\r\n\r\nजवाब: रोपवे की लंबाई 12.9 किलोमीटर होगी और इस पर करीब 4,081 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
\r\n\r\nसवाल 5: यह प्रोजेक्ट सरकार की किस योजना का हिस्सा है? जवाब: यह केंद्र सरकार की नेशनल रोपवे डेवलपमेंट प्रोग्राम - पर्वतमाला योजना का एक हिस्सा है।
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Sabse pehle comment karne wale banein.