मुजफ्फरनगर, शनिवार: उत्तर प्रदेश में 'आई लव मोहम्मद' पोस्टर विवाद को लेकर मचे बवाल और शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के बीच, प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद का एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। जमीयत के मुजफ्फरनगर जिलाध्यक्ष मौलाना मुकर्रम कासमी ने न सिर्फ इस तरह की पोस्टरबाजी की निंदा की है, बल्कि मुस्लिम समुदाय से ऐसा न करने की अपील भी की है। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन से माहौल खराब करने वाले सभी लोगों पर, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।READ ALSO:-आगरा में पूर्व 'मिस्टर यूपी' ने की आत्महत्या, अपने ही जिम में फंदे से लटकी मिली लाश, फिटनेस जगत में शोक की लहर
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"पोस्टरबाजी की निंदा, मुस्लिमों से की अपील"
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मौलाना मुकर्रम कासमी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह जो पोस्टर बाजी हो रही है, हम इसकी निंदा करते हैं। 'आई लव मोहम्मद' लिखना अपने आप को गलत हालात में डालना है।" उन्होंने मुस्लिम समुदाय, खासकर युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे इस तरह के पोस्टर न लगाएं और अपने मोबाइल पर भी ऐसी डीपी लगाने से बचें।
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उन्होंने पैगंबर से मोहब्बत का सही मतलब समझाते हुए कहा, "हम रसूल अल्लाह से मोहब्बत करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम सड़क पर आकर रोड जाम करें या हमारी वजह से किसी को परेशानी हो। रसूल से मोहब्बत की अलामत (निशानी) यह है कि आपके अखलाक, आपके रहन-सहन और आपकी सीरत में उनकी सिखाई हुई बातें नजर आएं।"
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मांग- 'I Love Mahadev' वालों पर भी हो कार्रवाई
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मौलाना कासमी ने प्रशासन से impartiality (निष्पक्षता) की मांग करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, "'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर लगाने पर जो कार्रवाई हो रही है, वही कार्रवाई 'आई लव महादेव' के पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ भी होनी चाहिए। चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, ऐसे लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई जरूर होनी चाहिए जो मुल्क और जिले का माहौल खराब करना चाहते हैं।"
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"CM योगी के बयान पर क्या बोले मौलाना?"
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि "ऐसी कार्रवाई की जाएगी कि सात पुश्तें याद रखेंगी," मौलाना ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी।
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उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री एक मजहब के नहीं, बल्कि हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सबके हैं। कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी उनकी है और जो कानूनी कार्रवाई वह कर रहे हैं, हम उससे सहमत हैं और कानून का स्वागत करते हैं।"
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हालांकि, उन्होंने बयान की भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा, "लेकिन सीएम को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए क्योंकि वो एक जिम्मेदार इंसान हैं। एक मुख्यमंत्री को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती।"
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संक्षेप में, जमीयत का यह बयान एक ओर मुस्लिम समुदाय को संयम बरतने की सलाह देता है, तो दूसरी ओर प्रशासन से बिना किसी भेदभाव के शांति भंग करने वाले सभी तत्वों पर समान रूप से कार्रवाई करने की मांग करता है।
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