बिजनौर जिले के नूरपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम गोहावर में ईद-उल-फितर का पावन त्योहार पूरी अकीदत, हर्षोल्लास और आपसी भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है। बिजनौर गोहावर में ईद की नमाज के अवसर पर सुबह से ही एक अलग ही रौनक़ देखने को मिली। नए परिधानों में सजे-धजे बच्चे, युवा और बुजुर्ग अल्लाह की इबादत के लिए ईदगाह और मस्जिदों की ओर जाते नजर आए। आज के इस मुकद्दस मौके पर नूरपुर गोहावर मे ईद की अदा की गई नमाज ने पूरे क्षेत्र में शांति और सौहार्द का संदेश दिया है। Read also:-ईरान-इजरायल युद्ध की आंच खाड़ी तक: रियाद में मिसाइल हमले का शिकार हुआ सीतापुर का लाल, पत्नी से फोन पर बात करते समय हुआ धमाका
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बिजनौर गोहावर में ईद की नमाज: एक व्यापक झलक

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इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रमजान के पवित्र महीने के 30 रोजे मुकम्मल होने के बाद शव्वाल महीने की पहली तारीख को ईद-उल-फितर मनाई जाती है। गोहावर में भी चांद के दीदार के साथ ही चारों तरफ खुशियों की लहर दौड़ गई थी। आज सुबह गोहावर की मुख्य ईदगाह में नमाज अदा करने के लिए हजारों अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी। बिजनौर गोहावर में ईद की नमाज का यह दृश्य अपने आप में अद्भुत था, जहां हर वर्ग के लोग एक कतार में खड़े होकर खुदा की बारगाह में सजदा कर रहे थे।
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मौलाना मोहम्मद मुकर्रम ने अदा कराई ईद की नमाज

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गोहावर ईदगाह में इस वर्ष ईद की नमाज की इमामत मौलाना मोहम्मद मुकर्रम ने की। ठीक तय समय पर ईदगाह में तकबीर की सदाएं गूंज उठीं। मौलाना मोहम्मद मुकर्रम ने ईद की नमाज अदा कराई और अपने खुतबे (संबोधन) में इस्लाम के मूल संदेशों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ईद का दिन अल्लाह की तरफ से रोजेदारों के लिए एक इनाम है। उन्होंने आपसी प्रेम, करुणा और गरीबों की मदद करने पर विशेष जोर दिया।
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मौलाना ने अपने खुतबे में बताया कि 'जकात-उल-फितर' (फितरा) देना हर संपन्न मुस्लिम का फर्ज है, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी इस खुशी के मौके पर शामिल हो सकें। उनके मार्मिक और ज्ञानवर्धक खुतबे ने उपस्थित सभी नमाजियों के दिलों में भाईचारे और नेकी का जज्बा भर दिया।
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इस बार बिजनौर गोहावर में ईद की नमाज में शामिल होने के लिए केवल गोहावर गांव के ही नहीं, बल्कि आस-पास के कई गांवों और नूरपुर कस्बे से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। शहर से गांव तक नमाजियों की उमड़ी भीड़ के कारण ईदगाह का पूरा मैदान खचाखच भर गया था। 
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देश में अमन-चैन और खुशहाली की मांगी दुआ

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ईद की दो रकात नमाज और खुतबे के बाद सामूहिक दुआ का आयोजन हुआ। मौलाना मोहम्मद मुकर्रम ने जब हाथ उठाकर दुआ मांगी, तो हजारों अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं और हर जुबान से 'आमीन' की सदाएं गूंजने लगीं। इस दौरान देश में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी गई। देश और दुनिया में शांति, तरक्की, आपसी सद्भाव और भाईचारे के लिए खुदा से इल्तजा की गई।
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मौलाना ने विशेष रूप से मुल्क (भारत) की हिफाजत और सभी धर्मों के लोगों के बीच गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखने की दुआ की। उन्होंने कहा कि सच्चा मुसलमान वही है जो अपने देश से मोहब्बत करे और उसकी तरक्की में अपना योगदान दे।
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नूरपुर गोहावर में ईद की अदा की गई नमाज: भाईचारे का प्रतीक

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बिजनौर गोहावर में ईद की नमाज केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की साझी सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। नमाज के तुरंत बाद लोग एक-दूसरे के गले मिले और 'ईद मुबारक' कहकर बधाइयां दीं। गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाने का यह दृश्य समाज में प्रेम और एकता का संचार कर रहा था।
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सुरक्षा व्यवस्था के बीच पढ़ी गई ईद की नमाज

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किसी भी बड़े त्योहार पर सुरक्षा व्यवस्था एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। बिजनौर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने ईद के मद्देनजर पहले से ही चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। बिजनौर गोहावर में ईद की नमाज के दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। ईदगाहों और मस्जिदों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
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थाना नूरपुर के प्रभारी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सुबह से ही मोर्चें संभाले रखे थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर थी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो सके। ड्रोन कैमरों के माध्यम से भी भीड़ की निगरानी की जा रही थी। शांतिपूर्ण माहौल में नमाज संपन्न होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। स्थानीय पुलिस ने नमाजियों की सुविधा के लिए ट्रैफिक डायवर्जन भी किया था, जिससे लोगों को आवागमन में कोई परेशानी न हो।
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अन्य राजनीतिक, सामाजिक संगठनों ने भी किया स्वागत

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ईद के इस मुबारक मौके पर भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि पूरी तरह से जीवंत नजर आई। ईदगाह के बाहर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हिंदू समाज के लोगों ने स्टॉल लगाकर नमाजियों का स्वागत किया। नमाज पढ़कर बाहर निकल रहे मुस्लिम भाइयों को गुलाब के फूल भेंट किए गए और गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी गई।
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समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस सहित कई स्थानीय नेताओं ने ईदगाह पहुंचकर लोगों से मुलाकात की। यह दृश्य साबित करता है कि बिजनौर गोहावर में ईद की नमाज सिर्फ एक समुदाय का त्योहार नहीं, बल्कि पूरे समाज की खुशियों का पर्व है।
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ईद के त्योहार का धार्मिक और सामाजिक महत्व

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ईद-उल-फितर इस्लाम धर्म का सबसे प्रमुख त्योहार है। रमजान के पूरे महीने सूरज उगने से लेकर सूर्यास्त तक भूखे-प्यासे रहकर (रोजा रखकर) अल्लाह की इबादत की जाती है। इस महीने को संयम, आत्म-अनुशासन और बुराइयों से दूर रहने का महीना माना जाता है। महीने भर की इस कड़ी इबादत के बाद जब शव्वाल का चांद नजर आता है, तो वह खुशियों का पैगाम लेकर आता है।
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मीठी ईद और सेवइयों की मिठास

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ईद-उल-फितर को 'मीठी ईद' भी कहा जाता है। नमाज अदा करने के बाद हर घर में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें 'सेवइयां' सबसे प्रमुख होती हैं। गोहावर और नूरपुर के बाजारों में पिछले कई दिनों से सेवइयों, मेवों, कपड़ों और इत्र की जमकर खरीदारी हो रही थी। आज हर घर से शीर खुरमा और लजीज पकवानों की खुशबू आ रही है। मेहमानों, पड़ोसियों और गैर-मुस्लिम दोस्तों को भी घर बुलाकर सेवइयां खिलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
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बिजनौर और नूरपुर गोहावर का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

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बिजनौर जिला अपनी ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत के लिए जाना जाता है। नूरपुर ब्लॉक का गोहावर गांव भी इस विरासत का अहम हिस्सा है। यहाँ के लोग मुख्य रूप से कृषि और छोटे व्यवसायों से जुड़े हैं। समय के साथ गांव में आधुनिकता आई है, लेकिन लोगों ने अपनी परंपराओं और जड़ों को नहीं छोड़ा है। बिजनौर गोहावर में ईद की नमाज का यह बड़ा आयोजन बताता है कि यहाँ के लोग आज भी अपनी धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं को कितनी शिद्दत से निभाते हैं।
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रमजान के महीने की इबादत और उसका फल

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स्थानीय लोगों का कहना है कि रमजान के दौरान गोहावर की मस्जिदों में तरावीह (रात की विशेष नमाज) का दौर चलता था। मौलाना मोहम्मद मुकर्रम जैसे आलिमों ने पूरे महीने लोगों को कुरान और हदीस की रोशनी में जीवन जीने का तरीका सिखाया। आज उसी इबादत का फल ईद की खुशियों के रूप में मिला है।
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स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका की तैयारियां

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त्योहार को स्वच्छ और सुंदर माहौल में मनाने के लिए नगर पालिका और ग्राम पंचायतों ने भी अहम भूमिका निभाई। ईदगाह की ओर जाने वाले रास्तों की साफ-सफाई, चूने का छिड़काव और पीने के पानी (वजू) की व्यवस्था प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई थी। बिजली विभाग ने भी त्योहार के दिन निर्बाध विद्युत आपूर्ति के निर्देश दिए थे।
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युवाओं और बच्चों में दिखा खास उत्साह

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ईद के मौके पर सबसे ज्यादा खुशी बच्चों के चेहरों पर देखने को मिलती है। नए कपड़े पहनकर और 'ईदी' (बुजुर्गों द्वारा बच्चों को दिए जाने वाले पैसे या उपहार) पाकर बच्चों का उत्साह चरम पर था। ईदगाह के बाहर लगे मेलों में बच्चों ने खिलौने खरीदे और झूलों का आनंद लिया। युवा वर्ग भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी तस्वीरें साझा कर रहे थे और दूर-दराज बैठे अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को ईद की मुबारकबाद दे रहे थे।
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कुल मिलाकर, बिजनौर गोहावर में ईद की नमाज का आयोजन पूर्ण रूप से सफल, शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण रहा। मौलाना मोहम्मद मुकर्रम की इमामत में हजारों लोगों ने खुदा के सामने सिर झुकाया और देश की तरक्की की दुआ मांगी। सुरक्षा के कड़े इंतजामों और अन्य सामाजिक संगठनों के स्वागत सत्कार ने इस त्योहार की गरिमा को और बढ़ा दिया। शहर से लेकर गांव तक उमड़ी भीड़ इस बात की गवाह है कि यह त्योहार दिलों को जोड़ने का काम करता है। हर्षोल्लास और भाईचारे के साथ मनाई जा रही यह ईद हमेशा गोहावर के लोगों की यादों में एक खूबसूरत पल के रूप में दर्ज रहेगी।
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सारांश: बिजनौर जिले के नूरपुर गोहावर में ईद-उल-फितर का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। मौलाना मोहम्मद मुकर्रम ने मुख्य ईदगाह में ईद की नमाज अदा कराई, जिसमें शहर और गांवों से हजारों अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ी। पुलिस और प्रशासन की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के बीच नमाजियों ने देश में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी। नमाज के बाद राजनीतिक व सामाजिक संगठनों ने गले मिलकर सभी को ईद की मुबारकबाद दी, जो क्षेत्र की मजबूत गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाता है। बिजनौर गोहावर में ईद की नमाज ने समाज में प्रेम और सद्भाव का एक गहरा संदेश छोड़ा है।
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