नई दिल्ली/देहरादून: दिल्ली से पहाड़ों की रानी मसूरी और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून जाने वाले यात्रियों का वर्षों का इंतजार आज आखिरकार खत्म हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आज देहरादून में इस अत्याधुनिक 'दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर' (Delhi-Dehradun Expressway) का विधिवत लोकार्पण कर दिया गया है। इसी के साथ यह शानदार 213 किलोमीटर लंबा मार्ग आम जनता के लिए खोल दिया गया है। जो सफर पहले 6 से 7 घंटे का थका देने वाला होता था, वह अब इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के जरिए मात्र 2.5 से 3 घंटे में सिमट जाएगा।READ ALSO:-दिल्ली से देहरादून अब सिर्फ 2.5 घंटे में! PM मोदी ने किया बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन, एशिया के सबसे लंबे 'वाइल्डलाइफ कॉरिडोर' का लिया जायजा
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हालांकि, इस चमचमाते एक्सप्रेसवे पर अपनी गाड़ी दौड़ाने का रोमांच जितना सुखद है, इसके नियम उतने ही सख्त हैं। अगर आप भी इस वीकेंड दिल्ली से देहरादून की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले परिवहन विभाग (Transport Department) द्वारा जारी किए गए कड़े नियमों को जान लेना आपके लिए बेहद जरूरी है। आपकी एक छोटी सी लापरवाही न सिर्फ आपकी जान जोखिम में डाल सकती है, बल्कि आपकी जेब पर भारी-भरकम चालान का बोझ भी डाल सकती है।
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सफर होगा सुहाना, लेकिन भूलकर भी न करें ये गलतियां

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परिवहन उपायुक्त शैलेश तिवारी ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे मुख्य रूप से 'हाई-स्पीड ट्रैफिक' के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसे में यहां यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। विभाग ने सुरक्षित सफर के लिए निम्नलिखित सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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    एक्सप्रेसवे पर रुकना या मुड़ना सख्त मना है: यह कोई आम सड़क नहीं है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच अचानक गाड़ी रोकना या यू-टर्न (U-Turn) लेना जानलेवा हो सकता है। इसलिए एक्सप्रेसवे के बीच में गाड़ी खड़ी करना या मोड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले ही अपने एंट्री (Entry) और एग्जिट (Exit) पॉइंट तय करने होंगे।
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    वाइल्डलाइफ कॉरिडोर (राजाजी नेशनल पार्क) में हॉर्न पर बैन: इस एक्सप्रेसवे का एक बड़ा और अहम हिस्सा उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) के इको-सेंसिटिव जोन से होकर गुजरता है। यहां वन्यजीवों की सुरक्षा और शांति के लिए एशिया का सबसे बड़ा 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड (खंभों पर टिका) वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया गया है। परिवहन विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि इस पूरे क्षेत्र में हॉर्न बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वन्यजीवों की शांति भंग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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    रात के समय लो बीम (Low Beam) हेडलाइट अनिवार्य: रात के समय सफर करने वाले चालकों के लिए भी नियम तय किए गए हैं। तेज रोशनी से सामने से आने वाले या आगे चल रहे वाहन चालकों की आंखों में चकाचौंध (Glare) हो सकती है, जिससे हादसे की आशंका रहती है। इसलिए एक्सप्रेसवे पर रात के समय हाई बीम के बजाय 'लो बीम' हेडलाइट का उपयोग करना अनिवार्य किया गया है।
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तीसरी आंख की निगरानी: उल्लंघन पर गिरेगा ऑटोमैटिक चालान

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अगर आपको लगता है कि पुलिस नहीं है तो आप नियम तोड़ सकते हैं, तो यह आपकी भूल होगी। पूरे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) से लैस किया गया है। पूरे मार्ग पर हाई-डेफिनिशन और स्पीड रडार वाले इलेक्ट्रॉनिक कैमरे (Electronic Cameras) लगाए गए हैं।
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अगर कोई वाहन चालक निर्धारित गति सीमा (Speed Limit) का उल्लंघन करता है, गलत दिशा (Wrong-way) में चलता है, या अवैध रूप से लेन बदलता है, तो सिस्टम द्वारा तुरंत उसकी गाड़ी की नंबर प्लेट स्कैन कर ली जाएगी और ऑटोमैटिक ई-चालान (E-Challan) जनरेट होकर सीधे वाहन मालिक के मोबाइल पर पहुंच जाएगा।
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आशारोड़ी ढलान और डाटकाली टनल: यहां बरतें विशेष सावधानी

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एक्सप्रेसवे से देहरादून की सीमा में प्रवेश करते समय आशारोड़ी (Asharodi) के पास एक तीव्र और लंबी ढलान आती है। परिवहन विभाग ने विशेष रूप से चेतावनी जारी की है कि इस स्थान पर पहुंचते ही वाहन चालक अपनी गाड़ी की गति को तुरंत नियंत्रित कर लें। ढलान पर तेज रफ्तार अनियंत्रित होकर किसी बड़े और जानलेवा हादसे का कारण बन सकती है। इसके अलावा, ऐतिहासिक डाटकाली मंदिर के पास बनी 370 मीटर लंबी नई टनल (सुरंग) क्षेत्र में भी गति धीमी रखने और ओवरटेकिंग से बचने की सख्त हिदायत दी गई है।
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यात्रा शुरू करने से पहले चेकलिस्ट (Pre-Trip Checklist) तैयार रखें

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चूंकि यह मार्ग अभी बिल्कुल नया शुरू हुआ है, इसलिए इसके किनारे पेट्रोल पंप, फूड प्लाजा, शौचालय और गैराज (मैकेनिक) जैसी आवश्यक जन-सुविधाएं (Wayside Amenities) अभी विकसित की जा रही हैं। ऐसे में बीच रास्ते में फंसने से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
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    ईंधन (Fuel) चेक करें: एक्सप्रेसवे पर चढ़ने से पहले ही अपनी गाड़ी की टंकी फुल करा लें या पर्याप्त ईंधन सुनिश्चित कर लें।
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    टायरों का प्रेशर: यह सबसे महत्वपूर्ण है। तेज रफ्तार में लगातार चलने से सड़क और टायरों के बीच घर्षण (Friction) पैदा होता है, जिससे टायर बहुत गर्म हो जाते हैं और फटने (Tyre Burst) का खतरा रहता है। यात्रा से पहले मैकेनिक से टायरों की स्थिति जांच लें और हवा का प्रेशर (Air Pressure) कंपनी के मानक के अनुसार ही रखें।
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जेब पर कितना पड़ेगा असर? (Toll Tax Details)

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सुहाने सफर के लिए यात्रियों को अपनी जेब भी ढीली करनी होगी। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस क्लोज्ड टोलिंग सिस्टम वाले एक्सप्रेसवे के लिए टोल दरें (Toll Tax Rates) निर्धारित कर दी हैं। जानिए कार/जीप जैसे हल्के निजी वाहनों के लिए क्या होंगे रेट:
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    दिल्ली से काठा (बागपत): एक तरफ का टोल 235 रुपये। अगर आप 24 घंटे के अंदर वापस आते हैं, तो कुल 350 रुपये लगेंगे।
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    दिल्ली से रसूलपुर (सहारनपुर): एक तरफ का टोल 420 रुपये। एक ही दिन में वापसी करने पर 630 रुपये का भुगतान करना होगा।
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    दिल्ली से सैयद माजरा (सहारनपुर): एक तरफ की यात्रा के लिए टोल दर 530 रुपये तय की गई है। 24 घंटे में वापसी पर यह 790 रुपये लगेगा।
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    दिल्ली से देहरादून (पूरा सफर): अगर आप दिल्ली से सीधे देहरादून तक का सफर तय करते हैं, तो आपको 675 रुपये का टोल टैक्स चुकाना होगा। वहीं, अगर आप एक दिन (24 घंटे) के अंदर देहरादून से दिल्ली वापस लौटते हैं, तो आपको कुल 1010 रुपये टोल के रूप में देने होंगे।
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क्या होगी एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट? (Speed Limits)

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इस अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे को विश्वस्तरीय मानकों पर बनाया गया है, लेकिन सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गति सीमा सख्ती से लागू की गई है:
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    प्राइवेट कारें (निजी वाहन): कारों के लिए अधिकतम स्पीड लिमिट 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इस रफ्तार से चलकर कारें ढाई से तीन घंटे में आसानी से अपना सफर पूरा कर सकेंगी।
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    कॉमर्शियल वाहन (बस, ट्रक आदि): भारी और व्यावसायिक वाहनों में स्पीड गवर्नर (Speed Governor) लगे होने के कारण उनकी गति सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित रहेगी। इन वाहनों को दिल्ली से देहरादून पहुंचने में करीब 3 घंटे या उससे थोड़ा अधिक समय लगेगा।
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    वाइल्डलाइफ कॉरिडोर: राजाजी नेशनल पार्क के इको-सेंसिटिव जोन में बने एलिवेटेड कॉरिडोर पर स्पीड लिमिट सामान्य से कम रखी गई है ताकि जानवरों को कोई खतरा न हो।
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निदिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे निस्संदेह विकास की एक नई इबारत है, जो पर्यटन और व्यापार दोनों को पंख लगाएगा। लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम परिवहन विभाग द्वारा बनाए गए इन नियमों का पूरी तरह से पालन करें। 'दुर्घटना से देर भली' के मंत्र को याद रखें, सुरक्षित गति से चलें, और अपने इस नए सफर का आनंद लें।
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