नई दिल्ली/देहरादून: दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) और उत्तराखंड (Uttarakhand) के बीच सफर करने वाले लाखों लोगों का दशकों पुराना सपना अब हकीकत में बदल गया है। मंगलवार का दिन भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुप्रतीक्षित 'दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे' (Delhi-Dehradun Expressway) का विधिवत उद्घाटन किया। इस विश्वस्तरीय एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से अब दिल्ली से देहरादून की दूरी सिमट कर रह गई है। जहां पहले इस सफर में 6 से 7 घंटे का लंबा और थका देने वाला समय लगता था, वहीं अब यात्री अपनी कार से यह दूरी मात्र 2.5 से 3 घंटे में आसानी से तय कर सकेंगे।READ ALSO:-बिजनौर में खौफ का साया! मंडी समिति की दीवार पर एक साथ दिखे 4 तेंदुए, 3 ने फांदी दीवार, दौड़ते गुलदार का रोंगटे खड़े कर देने वाला Viral Video
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उद्घाटन समारोह के बाद, पीएम मोदी ने स्वयं इस शानदार एक्सप्रेस-वे पर सफर करके इसके निर्माण की गुणवत्ता और सुविधाओं का आनंद लिया। इस परियोजना को केवल एक सड़क नहीं, बल्कि एक 'आर्थिक गलियारे' (Economic Corridor) के रूप में विकसित किया गया है, जो अपने आसपास के पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देगा।
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पीएम मोदी ने किया वाइल्डलाइफ कॉरिडोर का खास निरीक्षण

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इस एक्सप्रेस-वे की सबसे बड़ी खासियत इसकी पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सफर के दौरान उत्तर प्रदेश के सहारनपुर (Saharanpur) जिले में प्रवेश करते ही उस विशेष 'वन्यजीव गलियारे' (Elevated Wildlife Corridor) का बारीकी से जायजा लिया, जिसे जंगली जानवरों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
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 उत्तराखंड में प्रवेश करने के लिए डाटकाली मंदिर के पास एक नई सुरंग बनाई गई है।

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अक्सर हाईवे बनने से जंगलों के बीच से गुजरने वाले जानवरों की जान को खतरा रहता है और वे हादसों का शिकार हो जाते हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए इस एक्सप्रेस-वे के एक बड़े हिस्से को खंभों पर (Elevated) बनाया गया है। पीएम मोदी ने इस इंजीनियरिंग चमत्कार की सराहना करते हुए कहा कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने का यह एक बेहतरीन और अनुकरणीय मॉडल है।
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे: एक नजर में महात्वाकांक्षी परियोजना

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इस पूरे प्रोजेक्ट को 'दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर' नाम दिया गया है। आइए जानते हैं इसके निर्माण से जुड़े कुछ बेहद अहम आंकड़े:
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    कुल लंबाई और लेन: यह पूरा एक्सप्रेस-वे 213 किलोमीटर लंबा है और इसे 6-लेन (भविष्य में 8-लेन तक विस्तार योग्य) का एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे बनाया गया है।
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    परियोजना की लागत: इस विशाल ढांचे को खड़ा करने में केंद्र सरकार ने ₹12,000 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च की है।
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    कहां से कहां तक: यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली में अक्षरधाम (Akshardham) मंदिर के पास से शुरू होता है और सीधे उत्तराखंड की राजधानी देहरादून जाकर समाप्त होता है।
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    दूरी में कमी: इस नए और सीधे अलाइनमेंट के कारण दिल्ली और देहरादून के बीच की वास्तविक दूरी में भी लगभग 25 किलोमीटर की कमी आई है।
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    प्रमुख रूट: यह हाईवे दिल्ली से निकलकर लोनी, बागपत (Baghpat), शामली (Shamli), मुजफ्फरनगर के कुछ हिस्सों और सहारनपुर (Saharanpur) से होते हुए देहरादून में प्रवेश करता है।
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इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना और पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे केवल अपनी रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनूठे डिजाइन के लिए भी पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें दो ऐसी मुख्य विशेषताएं शामिल हैं जो इसे भारत के अन्य सभी हाईवे से अलग और खास बनाती हैं:
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    एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर: राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) और शिवालिक वन प्रभाग के इको-सेंसिटिव जोन से गुजरने वाले हिस्से में 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड (खंभों पर टिका) वाइल्डलाइफ कॉरिडोर बनाया गया है। यह पूरे एशिया का अपनी तरह का सबसे लंबा वन्यजीव गलियारा है। इसके नीचे से हाथी, गुलदार (तेंदुए), हिरण और अन्य जंगली जानवर बिना किसी रुकावट या दुर्घटना के डर के आसानी से जंगल के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जा सकेंगे। हाईवे पर ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण को रोकने के लिए विशेष साउंड बैरियर और लाइट शील्ड लगाए गए हैं।
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    डाटकाली मंदिर के पास शानदार सुरंग: देहरादून में प्रवेश करते समय পাহाड़ी घुमावदार रास्तों और पुराने संकरे मार्ग के ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए ऐतिहासिक डाटकाली मंदिर (Datkali Temple) के पास 370 मीटर लंबी एक अत्याधुनिक ट्विन-ट्यूब सुरंग (Tunnel) का निर्माण किया गया है। इस सुरंग के बन जाने से यात्रियों का न केवल समय बचेगा, बल्कि सफर भी बेहद सुरक्षित हो जाएगा।
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हाई-टेक सुविधाएं और कनेक्टिविटी का नया जाल

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यात्रियों की सुविधा और सुगम यातायात को सुनिश्चित करने के लिए इस 213 किलोमीटर लंबे मार्ग पर कई संरचनाएं तैयार की गई हैं। पूरे एक्सप्रेस-वे पर कुल 10 बड़े इंटरचेंज (Interchanges) बनाए गए हैं। इन इंटरचेंज के माध्यम से आसपास के शहरों और गांवों के लोग आसानी से एक्सप्रेस-वे पर चढ़ और उतर सकेंगे।
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इसके अलावा, रेल पटरियों को सुरक्षित पार करने के लिए 3 रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) और नदियों/नहरों के ऊपर 4 बड़े पुलों का निर्माण किया गया है। यह पूरा हाईवे क्लोज्ड टोलिंग सिस्टम (Closed Tolling System) पर आधारित है, जिसका मतलब है कि आप जितने किलोमीटर का सफर तय करेंगे, आपको सिर्फ उतने ही हिस्से का टोल टैक्स देना होगा। सुरक्षा के लिहाज से हर कुछ किलोमीटर पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और आपातकालीन कॉल बॉक्स लगाए गए हैं।
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पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के लिए 'गेम चेंजर' (Economic Impact)

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इस एक्सप्रेस-वे के चालू होने से सबसे बड़ा फायदा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के क्षेत्रों को होगा।
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    पर्यटन में भारी उछाल: अब तक दिल्ली-एनसीआर के लोग वीकेंड पर देहरादून, मसूरी (Mussoorie), ऋषिकेश (Rishikesh) या हरिद्वार जाने से पहले जाम के डर से दो बार सोचते थे। अब 2.5 घंटे का सफर होने से पर्यटन उद्योग में जबरदस्त उछाल आएगा। होटल, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की आय में भारी वृद्धि की उम्मीद है।
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    व्यापार और कृषि को बढ़ावा: बागपत, शामली और सहारनपुर जैसे जिले मुख्य रूप से कृषि और छोटे उद्योगों पर निर्भर हैं। यहां के किसानों को अब अपने ताजे फल, सब्जियां और दूध दिल्ली के बड़े बाजारों तक पहुंचाने में बहुत कम समय लगेगा, जिससे उनकी उपज खराब नहीं होगी और उन्हें बेहतर दाम मिलेंगे।
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    औद्योगिक विकास: आसान और तेज कनेक्टिविटी के कारण अब इन इलाकों में नए उद्योग, लॉजिस्टिक पार्क और वेयरहाउस स्थापित होने की संभावनाएं कई गुना बढ़ गई हैं। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे।
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे केवल दो शहरों को जोड़ने वाली एक सड़क मात्र नहीं है, बल्कि यह 21वीं सदी के 'न्यू इंडिया' (New India) की एक मजबूत तस्वीर पेश करता है। पीएम मोदी द्वारा इसका उद्घाटन किया जाना उन लाखों यात्रियों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है, जो सालों से मुरादनगर, मोदीनगर और रुड़की के भयानक ट्रैफिक जाम का सामना करते आ रहे थे। आज से आम जनता के लिए इस एक्सप्रेस-वे के दरवाजे खुल गए हैं, जो निश्चित रूप से इस पूरे क्षेत्र के लिए विकास की एक नई और तेज रफ्तार वाली जीवन रेखा साबित होगा।
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