नई दिल्ली/देहरादून: दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए उत्तराखंड का सफर अब बेहद आसान और सुहाना हो गया है। कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाला दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi-Dehradun Expressway) मंगलवार दोपहर से आम जनता के लिए आधिकारिक तौर पर खोल दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसका भव्य लोकार्पण करने के बाद मंगलवार दोपहर दो बजे से इस अत्याधुनिक मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है।READ ALSO:-संसद में बड़ा बदलाव! लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर होंगी 850, परिसीमन से साफ होगा महिला आरक्षण का रास्ता; जानें क्या है दक्षिण भारत का डर?
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लेकिन, इस चमचमाते एक्सप्रेसवे पर अपनी गाड़ी दौड़ाने का रोमांच आपके लिए भारी पड़ सकता है, अगर आपने नियमों की अनदेखी की। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और परिवहन विभाग ने इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर सुरक्षा के मद्देनजर कई बेहद सख्त नियम लागू किए हैं।
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भूलकर भी न ले जाएं बाइक और ऑटो, कटेगा 20 हजार का चालान

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इस नए एक्सप्रेसवे को तेज रफ्तार और निर्बाध सफर के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसे में हादसों को रोकने के लिए NHAI ने कड़ा फैसला लेते हुए इस एक्सप्रेसवे पर बाइक, स्कूटर (दोपहिया), ऑटो (तीनपहिया) और ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे धीमी गति वाले वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक (Ban) लगा दी है।
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परिवहन विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अगर कोई भी दोपहिया या तीनपहिया वाहन चालक चोरी-छिपे या जबरन एक्सप्रेसवे पर प्रवेश करता हुआ पाया गया, तो कैमरों की मदद से उसका सीधे 20,000 रुपये का भारी-भरकम ई-चालान काटा जाएगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि तेज गति से आ रहे बड़े वाहनों के कारण छोटे वाहनों के साथ होने वाले जानलेवा हादसों को टाला जा सके।
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6 घंटे का थकाऊ सफर अब मात्र 2.5 घंटे में

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इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से सबसे बड़ी राहत समय की बचत के रूप में मिली है। करीब 213 किलोमीटर लंबे इस विशाल आर्थिक गलियारे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून की दूरी तय करने में लगने वाला समय अब लगभग 6 घंटे से घटकर सिर्फ ढाई (2.5) घंटे रह गया है।
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क्या है पूरा रूट? यह एक्सप्रेसवे दिल्ली में अक्षरधाम (Akshardham) मंदिर के पास से शुरू होता है। इसके बाद यह उत्तर प्रदेश के लोनी, बागपत, शामली और सहारनपुर जिलों से होते हुए सीधे उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जाकर समाप्त होता है। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट में यात्रियों की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार, एम्बुलेंस और आपातकालीन हेल्पलाइन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
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बड़ी खुशखबरी: शुरुआत में टोल फ्री रहेगा एक्सप्रेसवे

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यात्रियों के लिए एक और बड़ी राहत की खबर यह है कि शुरुआत के कुछ दिनों तक इस एक्सप्रेसवे पर सफर लगभग फ्री रहने वाला है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अनुसार, फिलहाल एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली (Toll Collection) का सिस्टम और प्रक्रिया पूरी तरह से सेट नहीं हुई है। इसलिए शुरुआती दिनों में पूरे मार्ग पर केवल एक जगह ही टोल टैक्स की वसूली होगी।
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सूत्रों के मुताबिक, टोल कलेक्शन के लिए जल्द ही नए टेंडर जारी किए जाएंगे, जिसके बाद विधिवत टोल वसूली शुरू होगी। इसके साथ ही, दिल्लीवासियों के लिए एक विशेष प्रावधान किया गया है—अक्षरधाम से लोनी बॉर्डर तक का लगभग 18 किलोमीटर का एलिवेटेड हिस्सा हमेशा के लिए टोल फ्री (Toll Free) रखा जाएगा, ताकि दिल्ली के स्थानीय और रोजाना के ट्रैफिक पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
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पुराने NH-58 के भयंकर जाम से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति

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नए एक्सप्रेसवे के चालू होने से न केवल देहरादून जाने वालों को फायदा मिलेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों को भारी जाम से भी मुक्ति मिल जाएगी। अब तक दिल्ली-एनसीआर से रुड़की, हरिद्वार और देहरादून जाने वाला अधिकतर ट्रैफिक पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) से होकर गुजरता था।
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त्योहारों और वीकेंड पर इस ट्रैफिक के कारण गाजियाबाद, मुरादनगर, मोदीनगर, मेरठ, खतौली और मुजफ्फरनगर में कई-कई किलोमीटर लंबा भयंकर जाम लग जाता था। नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दिल्ली से उत्तराखंड जाने वाले ज्यादातर वाहन सीधे इसी मार्ग से गुजरेंगे, जिससे पुराने हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव आधा रह जाएगा और इन शहरों के लोगों को जाम के झाम से बड़ी राहत मिलेगी।
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सफर पर निकलने से पहले रट लें ये जरूरी नियम (Traffic Rules Checklist)

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एक्सप्रेसवे पर आपकी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग ने कुछ विशेष ड्राइविंग नियम तय किए हैं:
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    स्पीड लिमिट (Speed Limit): एक्सप्रेसवे पर प्राइवेट कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा और बस-ट्रक जैसे भारी व्यावसायिक वाहनों के लिए 80 किमी प्रति घंटा तय की गई है।
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    लेन ड्राइविंग (Lane Driving): सड़क की सबसे बाईं (Left) लेन भारी वाहनों और ट्रकों के लिए है। बीच वाली (Middle) लेन कारों की सामान्य ड्राइविंग के लिए है, जबकि सबसे दाईं (Right) लेन का उपयोग केवल ओवरटेक (Overtake) करने के लिए किया जाएगा।
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    यू-टर्न सख्त मना है: एक्सप्रेसवे पर किसी भी स्थिति में वाहन को रिवर्स (पीछे) चलाना या बीच से यू-टर्न (U-Turn) लेना सख्त रूप से प्रतिबंधित है।
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    एग्जिट छूट जाए तो क्या करें? अगर गलती से आपका एग्जिट (निकास) पीछे छूट गया है, तो गाड़ी वापस मोड़ने की गलती न करें। वाहन चालक को आगे जाकर अगला इंटरचेंज ही लेना होगा।
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    सुरंग के नियम (Tunnel Rules): डाटकाली मंदिर के पास बनी नई टनल (सुरंग) में प्रवेश करते समय वाहन की हेडलाइट ऑन रखना अनिवार्य है, ताकि दृश्यता (Visibility) बनी रहे।
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    आपातकालीन स्थिति (Emergency): यदि गाड़ी खराब हो जाती है या कोई इमरजेंसी आती है, तो वाहन को तुरंत एकदम किनारे (साइड शोल्डर) पर लगा दें और पार्किंग/हाजर्ड लाइट (Hazard Lights) ऑन कर दें।
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    आशारोड़ी ढलान पर चेतावनी: देहरादून की सीमा में प्रवेश करते समय 'आशारोड़ी' के पास एक लंबी ढलान आती है। विभाग ने विशेष रूप से सलाह दी है कि इस हिस्से में अपनी गाड़ी की गति को तुरंत कम कर लें और विशेष सावधानी बरतें।
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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे विकास और कनेक्टिविटी का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसका पूरा फायदा उठाने के लिए यह बेहद जरूरी है कि हम एक जिम्मेदार नागरिक की तरह नियमों का पालन करें। टू-व्हीलर से इस मार्ग पर जाने की गलती बिल्कुल न करें और अपनी लेन व गति सीमा का हमेशा ध्यान रखें।
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