Chhath Puja में कौन सा फल चढ़ाएं? केला, नारियल, सिंघाड़ा और डाभ नींबू समेत 10 फलों का धार्मिक महत्व और छठी मैया को प्रसन्न करने की विधि जानें।
Published at : 25 Oct 2025, 07:51 AM IST
Updated : 05:00 PM IST
· 26 दिन पहले
Chhath Puja Fruits
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लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा आज (25 अक्टूबर 2025) से 'नहाय-खाय' के साथ शुरू हो गया है। सूर्य देव और छठी मैया की आराधना के इस कठिन व्रत में पूजा सामग्री की शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रती महिलाएँ अपनी मनोकामनाएँ पूरी करने के लिए सूप (बांस की टोकरी) में तरह-तरह के फल और पारंपरिक प्रसाद सजाकर अर्घ्य देती हैं।
इन फलों को चढ़ाने के पीछे केवल परंपरा नहीं, बल्कि गहरा धार्मिक महत्व और स्वास्थ्य का संदेश छिपा है। आइए जानते हैं वे 10 फल कौन से हैं जो छठ पूजा में अनिवार्य रूप से चढ़ाए जाते हैं और उनका महत्व क्या है:
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छठ पूजा 2025: 10 प्रमुख फल और उनका धार्मिक महत्व ✨
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क्रम
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फल का नाम
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धार्मिक महत्व और मान्यता
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1.
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केला (Banana)
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छठ मैया का प्रिय फल, समृद्धि, दीर्घायु और पवित्रता का प्रतीक।
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2.
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गन्ना (Sugarcane)
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खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक। गन्ने से ही मंडप बनाकर पूजा की जाती है।
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3.
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डाभ नींबू
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पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक। इसका मोटा छिलका इसे जूठा होने से बचाता है।
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4.
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नारियल (Coconut)
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श्रीफल और माता लक्ष्मी का स्वरूप, जो धन-वैभव लाता है।
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5.
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सिंघाड़ा (Water Chestnut)
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जल तत्व की पवित्रता और स्वास्थ्य का प्रतीक।
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6.
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शकरकंद और सुथनी
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भूमि में उगने वाले कंदमूल, जो सादगी और प्राकृतिक पोषण का प्रतीक हैं।
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7.
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अनानास (Pineapple)
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खुशहाली और सौभाग्य का संकेत माना जाता है।
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8.
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सेब (Apple)
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अन्य मौसमी फलों के साथ स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए चढ़ाया जाता है।
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9.
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पान और सुपारी
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पवित्रता, संकल्प और पूजा की पूर्णता के लिए अनिवार्य।
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10.
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मौसमी फल (जैसे अमरूद)
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सूर्य देव द्वारा प्रदान किए गए जीवन और फलों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए।
छठ पूजा में कटे-छिले या जूठे फल नहीं चढ़ाए जाते हैं। इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण है:
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शुद्धता: केला, नारियल और गन्ने जैसे फल अपने छिलके या आवरण के कारण बाहर से किसी पशु या पक्षी द्वारा जूठे नहीं किए जा सकते। इससे प्रसाद की पवित्रता बनी रहती है, जो इस पर्व का आधार है।
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प्रकृति से जुड़ाव: यह पर्व प्रकृति (सूर्य, जल, भूमि) के प्रति आभार व्यक्त करता है, इसलिए इसमें सिंघाड़ा और गन्ना जैसे प्राकृतिक रूप से शुद्ध फल चढ़ाए जाते हैं।
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**सूर्य षष्ठी व्रत: 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2025**
Sabse pehle comment karne wale banein.