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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन लगातार सख्त कदम उठा रहा है। 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति के तहत अपराधियों पर नकेल कसी जा रही है। इसी कड़ी में, बिजनौर जनपद (Bijnor District) के थाना नूरपुर क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ दो दरिंदों ने इंसानियत को शर्मसार करते हुए एक नाबालिग बच्ची को अपने हवस का शिकार बनाया।READ ALSO:-यूपी में मानसून का 'रौद्र रूप': प्रयागराज-वाराणसी में तूफानी बारिश से जलभराव, मौसम विभाग का 57 जिलों में महा-अलर्ट
\r\n\r\n\r\n\r\nहालांकि, बिजनौर पुलिस ने इस मामले में रत्ती भर भी देरी नहीं की। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस एक्शन मोड में आ गई और महज 24 घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर समाज को एक कड़ा संदेश दिया है कि अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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क्या है पूरा मामला? (The Incident)
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी और पुलिस प्रेस नोट के अनुसार, यह पूरी घटना बिजनौर के नूरपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम आदमपुर उर्फ आजमपुर की है। दिनांक 01 अगस्त 2026 (01.08.2026) को एक बेबस माँ (वादिनी) ने न्याय की गुहार लगाते हुए थाना नूरपुर में एक तहरीर दी।
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\r\n— Bijnor Police (@bijnorpolice) August 2, 2026
\r\nथाना नूरपुर पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 270/2026 धारा 137(2)/70(2)/351(3) बीएनएस व धारा 5(g)/6 पॉक्सो एक्ट से सम्बन्धित 02 अभियुक्तगण को गिरफ्तार किया गया ।#UPPolice pic.twitter.com/tnRInjduB5
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तहरीर में लगाए गए आरोपों के अनुसार, गाँव के ही रहने वाले दो युवकों ने उनकी नाबालिग बेटी को अपना निशाना बनाया। आरोप है कि अभियुक्तों ने बच्ची के भोलेपन का फायदा उठाया और उसे बहला-फुसला कर अपने साथ किसी अज्ञात स्थान पर ले गए। इसके बाद आरोपियों ने नाबालिग के साथ घिनौना कृत्य (दुष्कर्म) किया।
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दरिंदगी यहीं नहीं रुकी; जब बच्ची ने इसका विरोध किया या किसी को बताने की बात कही, तो आरोपियों ने उसे और उसके परिवार को जान से मारने की खौफनाक धमकी (Death Threats) भी दी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी और परिवार गहरे सदमे में चला गया।
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नूरपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई (Prompt Police Action)
\r\n\r\nजैसे ही यह गंभीर मामला नूरपुर पुलिस के संज्ञान में आया, थाना स्तर पर तुरंत हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता और पीड़िता के नाबालिग होने को देखते हुए पुलिस ने तनिक भी विलंब नहीं किया।
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पीड़िता की माँ की तहरीर के आधार पर तत्काल प्रभाव से थाना नूरपुर पर मु.अ.सं. 270/2026 पंजीकृत किया गया। पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए बिना समय गंवाए एक विशेष टीम का गठन किया। उच्चाधिकारियों के कड़े निर्देश थे कि इस मामले में आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। पुलिस टीम ने मुखबिरों का जाल बिछाया और संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश देना शुरू कर दिया।
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नतीजतन, दिनांक 02 अगस्त 2026 (02.08.2026) को पुलिस की इस घेराबंदी ने रंग दिखाया और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
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गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों का विवरण:
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- \r\n पारस (पुत्र बलराज सिंह) - निवासी: ग्राम आदमपुर उर्फ आजमपुर, थाना नूरपुर, जनपद बिजनौर।\r\n \r\n
- \r\n आसिफ (पुत्र राशिद) - निवासी: ग्राम आदमपुर उर्फ आजमपुर, थाना नूरपुर, जनपद बिजनौर।\r\n \r\n
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इन सख्त कानूनी धाराओं (BNS और POCSO) में दर्ज हुआ मुकदमा
\r\n\r\nभारत में हाल ही में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों के तहत यह कार्रवाई की गई है, जो पुराने IPC से कहीं अधिक सख्त और पीड़ित-केंद्रित हैं। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट की बेहद कठोर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है:
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- \r\n धारा 137(2) BNS: यह धारा अपहरण (Kidnapping) से संबंधित है। नाबालिग को बहला-फुसलाकर उसके कानूनी अभिभावकों की कस्टडी से दूर ले जाने के गंभीर अपराध में यह धारा लगाई जाती है।\r\n \r\n
- \r\n धारा 70(2) BNS: भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत यह धारा गैंगरेप या महिलाओं/बच्चियों के खिलाफ होने वाले गंभीर यौन अपराधों से सख्ती से निपटती है। इसमें कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।\r\n \r\n
- \r\n धारा 351(3) BNS: यह धारा आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) के लिए लगाई गई है, क्योंकि आरोपियों ने बच्ची को जान से मारने की धमकी दी थी।\r\n \r\n
- \r\n धारा 5(g)/6 पॉक्सो (POCSO) अधिनियम: पॉक्सो एक्ट की ये धाराएं 'Aggravated Penetrative Sexual Assault' (गंभीर प्रवेधी यौन हमला) से जुड़ी हैं। जब कोई व्यक्ति किसी बच्चे (18 वर्ष से कम उम्र) के साथ इस स्तर का जघन्य यौन अपराध करता है, तो पॉक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद या मृत्युदंड तक का प्रावधान हो सकता है। यह एक गैर-जमानती और बेहद संगीन अपराध की श्रेणी में आता है।\r\n \r\n
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इन धाराओं का साफ अर्थ है कि अभियुक्तों के लिए अब कानूनी फंदा बेहद कड़ा होने वाला है, और उन्हें लंबे समय तक सलाखों के पीछे रहना पड़ सकता है।
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गिरफ्तार करने वाली जांबाज पुलिस टीम
\r\n\r\nइस त्वरित और सफल ऑपरेशन का श्रेय नूरपुर थाने की उस चुस्त पुलिस टीम को जाता है, जिसने दिन-रात एक करके महज कुछ ही घंटों में आरोपियों को धर दबोचा। टीम में निम्नलिखित अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे:
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- \r\n थानाध्यक्ष श्री प्रवेज कुमार (थाना नूरपुर, जनपद बिजनौर) - जिनके नेतृत्व में पूरी रणनीति तैयार की गई।\r\n \r\n
- \r\n उप-निरीक्षक (U.P.S.I.) श्री प्रमोद कुमार - जिन्होंने जमीनी स्तर पर दबिश और जांच का जिम्मा संभाला।\r\n \r\n
- \r\n हेड कांस्टेबल 415 भूपेन्द्र सिंह\r\n \r\n
- \r\n कांस्टेबल 1113 किरनपाल\r\n \r\n
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इन सभी पुलिसकर्मियों की सक्रियता की वजह से समाज के ये दुश्मन अब कानून की गिरफ्त में हैं। पुलिस महानिदेशक और स्थानीय एसपी द्वारा भी समय-समय पर मातहतों को महिला संबंधी अपराधों में इसी प्रकार की त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए जाते रहे हैं।
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समाज के लिए एक सबक और जागरूकता की आवश्यकता
\r\n\r\nयह घटना केवल एक पुलिस केस नहीं है, बल्कि हमारे समाज के लिए एक गहरी चिंता का विषय है। एक तरफ जहाँ प्रशासन और पुलिस (UP Police) अपना काम मुस्तैदी से कर रहे हैं, वहीं अभिभावकों को भी अपने बच्चों के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
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- \r\n बच्चों से संवाद: माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के साथ, विशेषकर बेटियों के साथ एक दोस्ताना और खुला संवाद स्थापित करें। ताकि कोई भी अजनबी या परिचित उन्हें बहला-फुसला न सके।\r\n \r\n
- \r\n आस-पड़ोस पर नजर: कई बार अपराधी हमारे आस-पास के ही लोग होते हैं, जैसा कि इस केस में दोनों आरोपी उसी गाँव के निवासी निकले। इसलिए आस-पड़ोस की गतिविधियों पर नजर रखना बेहद जरूरी है।\r\n \r\n
- \r\n कानून पर भरोसा: इस केस से यह भी साबित होता है कि पीड़ित परिवार को डरने या धमकियों के आगे झुकने की जरूरत नहीं है। अगर तुरंत पुलिस की मदद ली जाए, तो अपराधियों को उनके किए की सजा जरूर मिलती है।\r\n \r\n
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आगे की कार्यवाही (What's Next?)
\r\n\r\nवर्तमान में थाना नूरपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्तों (पारस और आसिफ) का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है और कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेजने की आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। इसके साथ ही, पुलिस बच्ची का भी मेडिकल और मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान (धारा 183 BNS/164 CrPC के समतुल्य) दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर रही है ताकि कोर्ट में ट्रायल के दौरान केस पूरी तरह से मजबूत रहे और दरिंदों को सख्त से सख्त सजा मिल सके।
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बिजनौर पुलिस का यह एक्शन स्पष्ट करता है कि "अपराधियों का स्थान समाज में नहीं, बल्कि जेल की सलाखों के पीछे है।" थाना नूरपुर पुलिस की इस शानदार और त्वरित कार्यप्रणाली की स्थानीय लोग भी काफी सराहना कर रहे हैं।
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(डिस्क्लेमर: यह समाचार पुलिस द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रेस नोट दिनांक 02.08.2026 पर आधारित है। मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया न्यायालय के अधीन है। पॉक्सो एक्ट के नियमों का पालन करते हुए पीड़िता की पहचान को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है।)
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Sabse pehle comment karne wale banein.