बिजनौर (क्राइम इन्वेस्टिगेशन डेस्क): उत्तर प्रदेश के बिजनौर में दवा के नाम पर मौत का व्यापार करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। शहर के पॉश इलाके सिविल लाइन्स में चल रहे एक मेडिकल स्टोर की आड़ में नशे का काला कारोबार फल-फूल रहा था। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर जब यहाँ छापा मारा, तो अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। दुकान के अंदर दवाओं का नहीं, बल्कि 'नशे के बम' का जखीरा मौजूद था।READ ALSO:-Rapid Rail Shocker: 'मर्यादा' की पटरी से उतरी नमो भारत! 'गंदी बात' का Part-2 वायरल होने पर NCRTC ने की भावुक अपील, वीडियो लीक करने वाला 'घर का भेदी' नपा
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करीब 24 घंटे तक चली इस मैराथन कार्रवाई में टीम ने 6.25 लाख (सवा छह लाख) नशीली गोलियां, कैप्सूल और इंजेक्शन बरामद किए हैं। अंतरराष्ट्रीय और ब्लैक मार्केट में इनकी कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस कार्रवाई ने जिले के दवा माफियाओं में हड़कंप मचा दिया है।
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ऑपरेशन 'क्लीन स्वीप': कैसे हुई कार्रवाई?

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यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN), बरेली की टीम की लंबी रेकी और खुफिया जानकारी शामिल थी।
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    गुप्त सूचना: एसपी मनोज कुमार नरवाल को इनपुट मिला था कि बिजनौर के सिविल लाइन्स स्थित 'शिप्रा होटल' कॉम्प्लेक्स में चल रहे 'मेडिसिन प्वाइंट' (Medicine Point) नामक थोक मेडिकल स्टोर से बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित नशीली दवाएं सप्लाई की जा रही हैं।
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    बुधवार की शाम: सूचना पुख्ता होते ही बुधवार की शाम CBN की टीम ने मेडिकल स्टोर पर धावा बोल दिया।
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    ताले तोड़े गए: छापेमारी के वक्त मेडिकल स्टोर का संचालक सुधाकर रस्तोगी मौके से फरार हो गया था और दुकान बंद थी। टीम ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए वीडियोग्राफी कराई और दुकान के ताले तुड़वाकर शटर उठाया।
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    24 घंटे की तलाशी: शटर उठते ही अंदर नशीली दवाओं के कार्टन के अंबार लगे थे। बुधवार शाम से शुरू हुई गिनती गुरुवार देर शाम तक चलती रही।
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क्या-क्या मिला 'मौत के गोदाम' से?

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इस छापेमारी में जो दवाएं मिली हैं, वे आम बीमारियों के इलाज में कम और नशे के लिए ज्यादा इस्तेमाल होती हैं। यह पूरा जखीरा युवाओं को बर्बाद करने के लिए जमा किया गया था।
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बरामदगी की सूची (Seized Items):

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    ट्रेमाडोल (Tramadol): इसे 'फाइटर ड्रग' भी कहा जाता है। यह एक दर्द निवारक है लेकिन इसका इस्तेमाल हेरोइन जैसे नशे के विकल्प के रूप में किया जाता है।
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    अल्प्राजोलाम (Alprazolam): यह मानसिक तनाव की दवा है, लेकिन नशेड़ी इसका इस्तेमाल नींद और नशे के लिए करते हैं।
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    कोडीन सिरप (Codeine): यह खांसी की दवा में होता है, लेकिन बड़ी मात्रा में इसे नशे के लिए पिया जाता है।
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    पेंटाजोसिन (Pentazocine): यह एक दर्द निवारक इंजेक्शन है, जिसका नशे के तौर पर दुरुपयोग होता है।
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कुल मिलाकर, 6 लाख 25 हजार से अधिक यूनिट्स (टेबलेट, कैप्सूल, इंजेक्शन) बरामद की गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इतनी बड़ी मात्रा बिजनौर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों को नशे की गिरफ्त में लेने के लिए काफी थी।
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1.5 करोड़ का गणित: सस्ती दवा, महंगा नशा

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एसपी (CBN) मनोज कुमार नरवाल ने बताया कि इन दवाओं की वास्तविक कीमत (MRP) भले ही कम हो, लेकिन नशे के बाजार (Black Market) में इनकी कीमत कई गुना ज्यादा होती है।
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    एक पत्ता जो मेडिकल स्टोर पर 50-60 रुपये का होता है, उसे नशेड़ियों को 500 से 1000 रुपये तक में बेचा जाता है।
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    इस हिसाब से जब्त किए गए जखीरे की अनुमानित बाजार कीमत डेढ़ करोड़ रुपये (1.5 Crore) के आसपास है।
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दवा माफिया सुधाकर रस्तोगी फरार, NDPS में केस दर्ज

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इस काले कारोबार का मुख्य सरगना मेडिकल स्टोर का संचालक सुधाकर रस्तोगी बताया जा रहा है।
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    फरार आरोपी: रेड की भनक लगते ही सुधाकर रस्तोगी भूमिगत हो गया है। उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ आ रहा है।
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    सख्त कार्रवाई: CBN ने आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985) की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। यह कानून इतना सख्त है कि इसमें जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है और लंबी सजा का प्रावधान है।
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    गिरफ्तारी के प्रयास: पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की टीमें उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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टाटा मैजिक भरकर ले गई पुलिस, कोर्ट में पेशी

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गुरुवार की शाम जब कार्रवाई खत्म हुई, तो बरामद दवाओं का जखीरा इतना बड़ा था कि उसे ले जाने के लिए पुलिस को एक टाटा मैजिक (लोर्डर वाहन) मंगवाना पड़ा।
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    दवाओं को सील करके अलग-अलग बड़े कार्टन में पैक किया गया।
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    नियमों के मुताबिक, पहले इन दवाओं को कोर्ट में पेश किया गया और वहां सारी कागजी कार्रवाई पूरी की गई।
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    फिलहाल, जब्त माल को थाना कोतवाली शहर के मालखाने में सुरक्षित रखवाया गया है।
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    अगला चरण: शुक्रवार को इन दवाओं की 'सैंपलिंग' (Sampling) की जाएगी। इसके बाद नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा और बाकी माल को CBN टीम अपने साथ बरेली मुख्यालय ले जाएगी।
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'साइलेंट किलर' बन रही हैं ये दवाएं: युवाओं के लिए चेतावनी

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यह घटना सिर्फ एक क्राइम न्यूज नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा अलार्म है। मेडिकल नशा (Pharmaceutical Drugs Abuse) आज के युवाओं के लिए 'हेरोइन' और 'स्मैक' से भी बड़ा खतरा बन गया है।
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क्यों खतरनाक है यह नशा?

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    आसानी से उपलब्धता: कोकीन या चरस ढूंढना मुश्किल है, लेकिन मेडिकल स्टोर हर गली में हैं। सुधाकर रस्तोगी जैसे लोग चंद पैसों के लिए बिना पर्चे के ये दवाएं बेच देते हैं।
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    सस्ता विकल्प: महंगे ड्रग्स की तुलना में गोलियां और इंजेक्शन सस्ते पड़ते हैं, जिससे स्कूल-कॉलेज के छात्र आसानी से इसका शिकार बन जाते हैं।
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    शरीर पर असर: ट्रेमाडोल और अल्प्राजोलाम का लगातार सेवन किडनी, लिवर और नर्वस सिस्टम को पूरी तरह डैमेज कर देता है। ज्यादा डोज लेने से व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मौत हो सकती है।
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प्रशासन के रडार पर अन्य मेडिकल स्टोर्स

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सीबीएन की इस कार्रवाई के बाद बिजनौर के अन्य थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं में खलबली मची हुई है। सूत्रों का कहना है कि प्रशासन के पास कुछ और मेडिकल स्टोर्स की सूची है, जो बिना बिल और डॉक्टर की पर्ची के नशीली दवाएं बेच रहे हैं। आने वाले दिनों में और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
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एसपी मनोज कुमार नरवाल का बयान:

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"यह एक बड़ी सफलता है। हमें सूचना मिली थी कि यहाँ से नारकोटिक्स दवाओं की अवैध तस्करी हो रही है। बरामदगी बहुत बड़ी है। आरोपी के खिलाफ सख्त धाराओं में केस दर्ज किया गया है। हम दवा माफियाओं की कमर तोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जांच जारी है कि यह माल कहाँ से लाया गया था और कहाँ सप्लाई होना था।"
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बिजनौर में पकड़ी गई दवाओं की यह खेप बताती है कि 'सफेदपोश' अपराधी कैसे समाज की नसों में जहर घोल रहे हैं। 1.5 करोड़ का नशा अगर बाजार में पहुंच जाता, तो हजारों जिंदगियां बर्बाद हो सकती थीं। CBN की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन जरूरत है कि स्थानीय पुलिस और ड्रग इंस्पेक्टर भी ऐसे मेडिकल स्टोर्स पर नियमित निगरानी रखें।
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'खबरीलाल' अपने पाठकों से अपील करता है कि यदि आपके आसपास कोई मेडिकल स्टोर बिना पर्चे के संदिग्ध दवाएं बेचता है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या हेल्पलाइन नंबर पर दें। आपका एक कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।
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