मौसम एक बार फिर अपने सबसे अप्रत्याशित रूप में हमारे सामने है। अमूमन मार्च का महीना वसंत के जाने और गर्मियों की शुरुआत का संकेत देता है। इस समय तक पंखे और एसी चलने लगते हैं, लेकिन इस साल कुदरत ने मानो 'रिवर्स गियर' लगा दिया है। चिलचिलाती धूप की जगह घने बादलों ने ले ली है, और पसीने की जगह लोगों को ठिठुरन महसूस हो रही है। देश के 15 से अधिक राज्यों में मौसम का मिजाज पूरी तरह से बिगड़ चुका है।READ ALSO:-देश भर में गैस संकट के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय का 'मास्टरस्ट्रोक': कमर्शियल LPG सप्लाई में 20% का बंपर इजाफा, 23 मार्च से लागू होंगे ये 2 सख्त नियम
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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और मध्य भारत तक एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र (Cyclonic Circulation) का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। इसका सीधा परिणाम यह है कि दिन और रात के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में समझते हैं कि आखिर मौसम में यह अचानक बदलाव क्यों आया है, किन राज्यों में सबसे ज्यादा खतरा है, और इसका हमारे दैनिक जीवन तथा कृषि पर क्या प्रभाव पड़ने वाला है।
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दिल्ली-एनसीआर में मौसम का यू-टर्न: पंखे हुए बंद, निकले कंबल

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देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद) के इलाकों में मौसम का सबसे नाटकीय बदलाव देखने को मिला है। पिछले दो दिनों से दिल्ली में सूर्य देव के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। आसमान में छाए घने काले बादलों और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ठंडी हवाओं ने पूरी दिल्ली को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
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तापमान में भारी गिरावट का दौर

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दिल्ली में अचानक ठंड की वापसी ने सभी को हैरान कर दिया है। बीते दिन अधिकतम तापमान गिरकर 21.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान मात्र 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह इस मौसम के सामान्य तापमान से कई डिग्री नीचे है। अचानक आई इस ठंड के कारण घरों में चलने वाले पंखे और कूलर बंद हो गए हैं। सुबह और शाम के समय बच्चों और बुजुर्गों को फिर से स्वेटर और जैकेट पहनने पड़ रहे हैं। आज सुबह तो कई इलाकों में हल्की धुंध (Fog) भी देखने को मिली, जिसने विजिबिलिटी को काफी कम कर दिया।
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अगले एक हफ्ते का पूर्वानुमान (Delhi Weekly Forecast)

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मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली वालों को अभी इस अस्थिर मौसम से राहत मिलने की उम्मीद कम है:
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    अगले 24 घंटे: अधिकतम तापमान सामान्य से काफी कम (-5.1 डिग्री और उससे नीचे) रहने की संभावना है।
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    23 मार्च: आसमान में घने बादल छाए रहेंगे। गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। इस दौरान तेज हवाएं चल सकती हैं।
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    24 से 27 मार्च: अगले चार दिनों तक आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। हालांकि अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 3 से 4 डिग्री की वृद्धि हो सकती है, लेकिन सुबह और शाम की ठंडक बरकरार रहेगी।
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उत्तर प्रदेश का मौसम: पश्चिमी यूपी में बारिश और ओलावृष्टि का साया

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उत्तर प्रदेश के मौसम में भी भारी उलटफेर देखा जा रहा है। विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में इसका सबसे ज्यादा असर है। मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मुरादाबाद बेल्ट में आसमान में घने बादल डेरा डाले हुए हैं। इन इलाकों में पिछले 24 घंटों में रुक-रुक कर बूंदाबांदी हुई है और ठंडी हवाओं ने सिहरन पैदा कर दी है।
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    मेरठ और बिजनौर में अलर्ट: स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, मेरठ और बिजनौर सहित आसपास के क्षेत्रों में 23 और 24 मार्च को तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी चेतावनी दी गई है। किसानों के लिए यह समय बेहद चिंताजनक है, क्योंकि खेतों में गेहूं और सरसों की फसल पक कर तैयार खड़ी है।
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    पूर्वी यूपी: लखनऊ, कानपुर और पूर्वांचल के इलाकों में भी आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। हालांकि यहाँ बारिश की तीव्रता पश्चिमी यूपी के मुकाबले कम रहने का अनुमान है, लेकिन तापमान में गिरावट यहाँ भी दर्ज की गई है।
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पहाड़ों पर सफेद आफत: हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बर्फबारी

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उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जो ठंड महसूस की जा रही है, उसका सीधा कारण हिमालयी राज्यों में हो रही भारी बर्फबारी है।
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    हिमाचल प्रदेश: IMD ने 23 और 26 मार्च को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, शिमला, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों में भारी बारिश और बर्फबारी का अलर्ट जारी किया है। यहाँ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बर्फीली हवाएं चल रही हैं, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई प्रमुख राजमार्ग और संपर्क मार्ग बर्फबारी के कारण बंद कर दिए गए हैं।
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    उत्तराखंड: देवभूमि उत्तराखंड में भी 23 मार्च के लिए अलर्ट जारी किया गया है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी हुई है, जबकि निचले इलाकों जैसे देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में तेज बारिश और ठंडी हवाओं का दौर जारी है।
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    जम्मू-कश्मीर: घाटी में भी लगातार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। श्रीनगर सहित कई हिस्सों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात दर्ज किया गया है।
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देश के अन्य 15 राज्यों का विस्तृत मौसम अपडेट

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मौसम का यह बिगड़ा हुआ रूप सिर्फ उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। देश के पूर्वी, मध्य और दक्षिणी हिस्सों में भी इसका असर साफ़ देखा जा सकता है।
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1. पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत (Northeast & East India)

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    असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश: पूर्वोत्तर के इन राज्यों में 24 मार्च को भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। यहाँ नमी युक्त हवाओं के कारण जलभराव और भूस्खलन (Landslide) का खतरा बढ़ गया है।
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    पश्चिम बंगाल और सिक्किम: 22 से 24 मार्च के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में गरज, बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।
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    झारखंड और बिहार: यहाँ एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है, जिसके कारण आसमान में बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
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2. मध्य और पश्चिम भारत (Central & West India)

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    मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़: पश्चिमी विक्षोभ का विस्तार पंजाब से लेकर उत्तरी छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तक है। इसके प्रभाव से इन राज्यों के कई जिलों में अचानक गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। दिन का तापमान यहाँ भी सामान्य से नीचे आ गया है।
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    महाराष्ट्र (Maharashtra): 22-23 और 24 मार्च को मध्य महाराष्ट्र में, और 23-24 मार्च को मराठवाड़ा क्षेत्र में गरज-चमक के साथ बारिश होने की प्रबल संभावना है। किसानों के लिए यह बेमौसम बारिश फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
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    राजस्थान और गुजरात: राजस्थान के उत्तरी हिस्सों और उत्तरी गुजरात में साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर है। यहाँ धूल भरी आंधी चलने और हल्की बारिश होने की संभावना है।
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3. दक्षिण भारत: उमस और गर्मी का प्रकोप (South India)

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जहाँ उत्तर और मध्य भारत ठंड और बारिश से ठिठुर रहा है, वहीं दक्षिण भारत के कुछ तटीय इलाकों में मौसम इसके बिलकुल उलट है।
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    केरल और माहे: 22 मार्च के दौरान यहाँ मौसम अत्यधिक गर्म और उमस भरा (Hot and Humid) रहने की संभावना है।
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    कोंकण, गोवा और कर्नाटक: 22 और 23 मार्च को कोंकण, गोवा और तटीय कर्नाटक में भी भीषण गर्मी और उमस की स्थिति बनी रहेगी। लोगों को डिहाइड्रेशन से बचने की सलाह दी गई है।
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    आंध्र प्रदेश: 22 मार्च को तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
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आखिर मार्च में क्यों लौट आई दिसंबर जैसी ठंड? (The Science Behind It)

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मौसम में इस अचानक और बड़े बदलाव के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े भौगोलिक और मौसमी कारण जिम्मेदार हैं:
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    सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Active Western Disturbances): भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) से उठने वाली नमी युक्त हवाएं जब हिमालय से टकराती हैं, तो पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बारिश होती है। इस समय एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत पर सक्रिय है। 22 मार्च से एक कमजोर विक्षोभ और फिर 26 मार्च 2026 से एक और अत्यंत सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है, जो मौसम को लगातार अस्थिर बनाए हुए है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र (Cyclonic Circulation): वर्तमान में हरियाणा, उत्तरी गुजरात, राजस्थान, उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिणी उत्तर प्रदेश से लेकर नागालैंड तक एक विशाल साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। यह सिस्टम अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में नमी खींच रहा है, जो बारिश और ओलावृष्टि का मुख्य कारण है।
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    पश्चिमी जेट स्ट्रीम (Western Jet Stream): पूर्वी भारत के ऊपर 90 समुद्री मील की अत्यधिक तेज रफ्तार वाली पश्चिमी जेट स्ट्रीम हवाएं चल रही हैं। वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर चलने वाली ये हवाएं निचले स्तर के मौसम प्रणालियों को और अधिक तीव्र और आक्रामक बना रही हैं।
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कृषि पर प्रभाव: किसानों की धड़कनें तेज (Impact on Agriculture)

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मार्च के महीने में होने वाली यह बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि किसानों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं है। यह समय रबी की फसलों की कटाई और पकाई का होता है।
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    गेहूं की फसल को नुकसान: पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश (विशेषकर मेरठ-बिजनौर बेल्ट) और मध्य प्रदेश में गेहूं की फसल बिल्कुल पक कर तैयार है। तेज आंधी और बारिश के कारण गेहूं की खड़ी फसल खेतों में बिछ सकती है (Lodging of crop), जिससे दाने का रंग काला पड़ सकता है और उत्पादन में भारी कमी आ सकती है।
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    सरसों और चना: जो किसान सरसों की कटाई कर चुके हैं और फसल खेतों में पड़ी है, उनके लिए बारिश बड़ा नुकसानदायक है। चने की फसल में भी अत्यधिक नमी से फंगस लगने का डर है।
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    बागवानी और फल (आम का बौर): उत्तर प्रदेश के आम उत्पादक क्षेत्रों (जैसे मलिहाबाद, सहारनपुर, मेरठ) में आम के पेड़ों पर बौर (फूल) आ चुके हैं। तेज हवाएं और ओलावृष्टि इन बौरों को झाड़ सकती है, जिसका सीधा असर इस साल आम की पैदावार पर पड़ेगा।
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किसानों के लिए मौसम विभाग की सलाह:

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    पकी हुई फसलों की कटाई तुरंत कर लें और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भंडारित करें।
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    खेतों में जलजमाव न होने दें, जल निकासी का उचित प्रबंध करें।
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    अगले कुछ दिनों तक खेतों में सिंचाई (Irrigation) और रासायनिक दवाओं का छिड़काव (Spraying of chemicals) बिल्कुल रोक दें।
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  7. \r\n
    मंडी ले जाने वाली उपज को तिरपाल या प्लास्टिक से अच्छी तरह ढक कर रखें।
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स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर असर: क्या सावधानियां बरतें?

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दिन और रात के तापमान में अचानक हो रहे इस उतार-चढ़ाव (Fluctuation) का सीधा असर इंसानी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पर पड़ता है।
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    वायरल बीमारियों का खतरा: मौसम के इस बदलाव के कारण सर्दी, जुकाम, खांसी, और वायरल बुखार के मामलों में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है।
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    सावधानियां:
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      गर्म कपड़े पहनें: खासकर सुबह और शाम के समय दोपहिया वाहन चालकों, बुजुर्गों और बच्चों को हल्के गर्म कपड़े (Layered clothing) जरूर पहनने चाहिए।
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      खान-पान: ठंडे पेय पदार्थों (कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम) से पूरी तरह बचें। गुनगुना पानी पिएं और विटामिन सी युक्त फलों का सेवन करें।
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      यात्रा करते समय: पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने वाले पर्यटक मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही निकलें। बारिश और धुंध के कारण सड़कों पर फिसलन और कम विजिबिलिटी की समस्या हो सकती है, इसलिए वाहन बेहद सावधानी से और धीमी गति से चलाएं।
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मार्च 2026 का यह मौसम स्पष्ट रूप से जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और मौसमी चक्र में आ रहे बदलावों का एक गंभीर संकेत है। बेमौसम बरसात, बेतहाशा बढ़ती गर्मी और असमय पड़ने वाली ठंड अब एक 'न्यू नॉर्मल' बनता जा रहा है। मौसम विभाग का यह अलर्ट सिर्फ एक सूचना नहीं, बल्कि एहतियात बरतने की चेतावनी है। चाहे आप शहर के निवासी हों, रोज़मर्रा की यात्रा करने वाले हों या फिर खेतों में मेहनत करने वाले किसान, इस अस्थिर मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतना ही बचाव का एकमात्र उपाय है।
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ख़बरीलाल मीडिया (Khabreelal) आपको मौसम के हर पल-पल के अपडेट से वाकिफ कराता रहेगा। अपने शहर, विशेषकर उत्तर प्रदेश, मेरठ और बिजनौर की हर ताज़ा और विश्वसनीय ख़बर के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

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Q1. मार्च के महीने में अचानक इतनी ठंड क्यों बढ़ गई है? Ans. उत्तर भारत पर एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय है, जिसके कारण पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है। यही ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों में पहुँचकर तापमान को तेजी से गिरा रही हैं।
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Q2. क्या दिल्ली में अगले कुछ दिनों में बारिश होगी? Ans. हाँ, मौसम विभाग (IMD) के अनुसार 23 मार्च को दिल्ली में गरज-चमक के साथ बारिश की पूरी संभावना है। इसके बाद 27 मार्च तक आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे।
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Q3. किसानों को इस बेमौसम बारिश से अपनी फसल कैसे बचानी चाहिए? Ans. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पकी हुई फसलों की कटाई जल्द से जल्द कर लें। खेतों में पानी इकट्ठा न होने दें और मौसम साफ होने तक किसी भी प्रकार के कीटनाशक या खाद का छिड़काव न करें।
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Q4. पश्चिमी यूपी (मेरठ, बिजनौर) में आने वाले दिनों का मौसम कैसा रहेगा? Ans. मेरठ, बिजनौर और आसपास के पश्चिमी यूपी के क्षेत्रों में आसमान में बादल छाए रहेंगे। 23 और 24 मार्च को तेज हवाओं के साथ बारिश होने और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि की भी चेतावनी जारी की गई है। 
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Q5. क्या अगले हफ्ते देश में कहीं लू (Heatwave) चलने की संभावना है? Ans. नहीं, मौसम विभाग के नवीनतम अपडेट के अनुसार अगले एक सप्ताह तक देश के किसी भी हिस्से में लू (Heatwave) चलने की कोई संभावना नहीं है। ज्यादातर राज्यों में दिन का तापमान सामान्य से नीचे ही रहेगा।
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