आज के डिजिटल दौर में सरकार ने लगभग हर काम को ऑनलाइन कर दिया है। ट्रैफिक चालान कटने की जानकारी अब सीधा मोबाइल फोन पर SMS के जरिए मिल जाती है, ताकि वाहन चालक समय पर जुर्माना भर सकें। लेकिन, तकनीक की यह सहूलियत अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बनती जा रही है। साइबर अपराधियों ने इस सुविधा को ठगी का नया हथियार बना लिया है।READ ALSO:-मेरठ में शिवरात्रि का महा-आयोजन: औघड़नाथ मंदिर छावनी में तब्दील; 400 जवानों का त्रिस्तरीय घेरा, आसमान से ड्रोन और 300 कैमरों से निगहबानी
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इन दिनों लोगों के मोबाइल पर धड़ल्ले से फर्जी चालान के मैसेज आ रहे हैं। पहली नजर में ये मैसेज इतने असली लगते हैं कि कोई भी आम इंसान धोखे में आ सकता है। अगर आपके पास भी गाड़ी का चालान आने का कोई संदेश आया है और उसमें भुगतान करने का लिंक दिया गया है, तो जरा संभल जाइए! थोड़ी सी भी जल्दबाजी आपकी गाढ़ी कमाई को पलभर में साफ कर सकती है। आइए जानते हैं कि इस नए स्कैम का तरीका क्या है और कैसे आप असली और नकली चालान में फर्क पहचान सकते हैं।
\r\n\r\n

 

जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶ \r\n\r\n

फर्जी चालान स्कैम का पूरा खेल: कैसे लगाते हैं चपत?

\r\n\r\n
साइबर ठग बहुत ही शातिर तरीके से इस जालसाजी को अंजाम देते हैं। इसके अलग-अलग चरण होते हैं:
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

1. शुरुआत एक शातिर SMS से होती है

\r\n\r\n
इस स्कैम की शुरुआत एक साधारण दिखने वाले टेक्स्ट मैसेज से होती है। इस मैसेज में दावा किया जाता है कि आपकी गाड़ी का एक चालान पेंडिंग (बाकी) है और यदि तय समय के भीतर जुर्माना नहीं भरा गया, तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इस मैसेज में आपकी गाड़ी का सही नंबर और आधिकारिक जैसी दिखने वाली भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि लोग इसे सच मान बैठें।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

2. फिशिंग लिंक पर क्लिक कराने का दबाव

\r\n\r\n
मैसेज के साथ एक लिंक (URL) दिया जाता है। यह लिंक देखने में बिल्कुल सरकारी परिवहन वेबसाइट जैसा लगता है, लेकिन इसके डोमेन नाम, स्पेलिंग या यूआरएल में हल्का सा फेरबदल होता है। ठग अक्सर छोटे (Shortened) लिंक का इस्तेमाल करते हैं, जिससे असली वेबसाइट का नाम छिप जाता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

3. क्लोन वेबसाइट (नकली पोर्टल) का जाल

\r\n\r\n
जैसे ही कोई यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है, वह एक ऐसी वेबसाइट पर पहुंच जाता है जिसे हूबहू सरकारी ई-चालान पोर्टल की तरह डिजाइन किया गया होता है। उसमें सरकारी वेबसाइट जैसे रंग, फॉन्ट और लोगो का इस्तेमाल होता है। इतना ही नहीं, यूजर का विश्वास जीतने के लिए वहां नकली चालान नंबर, गाड़ी का नंबर और ट्रैफिक नियम उल्लंघन की झूठी डिटेल भी दिखाई देती है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

4. बैंक और कार्ड की गोपनीय जानकारी चुराना

\r\n\r\n
वेबसाइट असली लगे, इसलिए वहां पेमेंट का विकल्प होता है। जैसे ही यूजर जुर्माना भरने के लिए आगे बढ़ता है, उससे डेबिट/क्रेडिट कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट और सीवीवी (CVV) जैसी बेहद गोपनीय जानकारियां मांगी जाती हैं। कुछ फर्जी वेबसाइट्स पर ओटीपी (OTP) भी मांग लिया जाता है। जैसे ही यूजर ये डिटेल्स दर्ज करता है, साइबर अपराधियों के पास बैंक खाते का पूरा कंट्रोल पहुंच जाता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

5. मिनटों में खाली हो जाता है बैंक खाता

\r\n\r\n
जरूरी बैंकिंग डिटेल्स हाथ लगते ही ठग अनधिकृत लेनदेन (Unauthorized Transactions) को अंजाम देते हैं। कई बार ये ट्रांजैक्शन विदेशी मर्चेंट या पेमेंट गेटवे के जरिए किए जाते हैं, जिससे कटे हुए पैसों को वापस पाना बेहद मुश्किल या नामुमकिन हो जाता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

कैसे करें असली और नकली चालान की पहचान? (महत्वपूर्ण टिप्स)

\r\n\r\n
यदि आपके पास भी कोई चालान का मैसेज आया है, तो घबराने या तुरंत पेमेंट करने के बजाय इन बातों की जांच जरूर करें:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    सेंडर का नंबर देखें: यदि चालान का मैसेज किसी सामान्य 10 अंकों वाले पर्सनल मोबाइल नंबर से आया है, तो वह 100% फर्जी है। सरकार या परिवहन विभाग कभी भी साधारण मोबाइल नंबर से चालान के मैसेज नहीं भेजते।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    वेबसाइट का डोमेन (URL) चेक करें: भारत सरकार की सभी आधिकारिक और वैध वेबसाइट्स अंत में .gov.in डोमेन का इस्तेमाल करती हैं। असली ई-चालान का आधिकारिक पोर्टल echallan.parivahan.gov.in है। अगर मैसेज में दिया गया लिंक .com, .net, .online या किसी अन्य संदिग्ध डोमेन पर ले जा रहा है, तो उसे भूलकर भी न खोलें।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    कभी भी पर्सनल डिटेल्स शेयर न करें: आधिकारिक सरकारी पोर्टल कभी भी पेमेंट के लिए सीधे आपकी कार्ड डिटेल्स या सीवीवी नहीं मांगते, बल्कि वे सुरक्षित पेमेंट गेटवे (जैसे UPI, Net Banking, BHIM) पर रीडायरेक्ट करते हैं।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सुरक्षित रहने के लिए क्या करें?

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    ऑफिशियल वेबसाइट का इस्तेमाल करें: अगर आपको शक है कि आपकी गाड़ी का चालान कटा है या नहीं, तो किसी भी SMS लिंक पर क्लिक करने के बजाय सीधे गूगल पर भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट echallan.parivahan.gov.in पर जाएं। वहां अपनी गाड़ी का नंबर, आरसी (RC) या चेसिस नंबर डालकर खुद असली स्थिति चेक करें।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    मैसेज में दिए गए लिंक से दूरी बनाएं: अनजान नंबरों से आए ट्रैफिक चालान के किसी भी लिंक पर क्लिक न करें और न ही कोई ऐप डाउनलोड करें।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    साइबर क्राइम में करें शिकायत: यदि आप इस तरह के किसी फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं या आपके साथ ठगी का प्रयास होता है, तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज कराएं या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सतर्क रहें, सुरक्षित रहें! डिजिटल लेन-देन करते समय हमेशा आधिकारिक माध्यमों का ही उपयोग करें
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें