धर्म-कर्म डेस्क (Astrology & Religion News): सनातन धर्म में रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार भाई-बहन के पवित्र और अटूट रिश्ते का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को यह पावन पर्व पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं भाई अपनी बहन को जीवन भर उसकी रक्षा का वचन देता है।READ ALSO:-मेरठ में 'लव जिहाद' का आरोप: 2 मुस्लिम युवकों के साथ मिलीं 9वीं-11वीं की नाबालिग हिंदू छात्राएं, VHP-बजरंग दल का भारी हंगामा
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लेकिन, हिंदू धर्म शास्त्रों में किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए 'शुभ मुहूर्त' का विशेष महत्व बताया गया है। इस वर्ष रक्षाबंधन के पावन पर्व पर चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) का साया मंडरा रहा है, जिसके कारण लोगों के मन में कई तरह के सवाल और संशय उत्पन्न हो गए हैं। ग्रहण काल और भद्रा काल में राखी बांधना शास्त्रों में पूरी तरह से वर्जित माना गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस बार चंद्र ग्रहण का क्या प्रभाव रहेगा, सूतक काल लगेगा या नहीं, और राखी बांधने का सबसे सटीक और शुभ मुहूर्त क्या है।
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क्या रक्षाबंधन पर लगेगा चंद्र ग्रहण और सूतक काल? (Chandra Grahan Impact in India)
\r\n\r\nज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल तभी मान्य होता है जब वह ग्रहण उस क्षेत्र विशेष में दिखाई दे। सूतक काल के दौरान मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के धार्मिक या शुभ कार्य (जैसे- पूजा-पाठ, विवाह, मुंडन, या रक्षाबंधन) करने की सख्त मनाही होती है। चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले लग जाता है।
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राहत की बात यह है कि इस वर्ष रक्षाबंधन के दिन लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान (Visible) नहीं होगा। भारतीय समय के अनुसार इस ग्रहण का प्रभाव और इसके दर्शन देश में नहीं होंगे। इसलिए, भारत में इस चंद्र ग्रहण का कोई भी धार्मिक प्रभाव या सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि बहनें बिना किसी डर, संशय या मानसिक बाधा के पूरे उल्लास के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मना सकती हैं।
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राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त (Rakhi Tying Shubh Muhurat)
\r\n\r\nचूंकि भारत में चंद्र ग्रहण और सूतक काल का कोई प्रभाव नहीं है, इसलिए बहनों को केवल पूर्णिमा तिथि और 'भद्रा काल' (Bhadra Kaal) का ध्यान रखते हुए ही राखी बांधनी है।
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- \r\n सर्वोत्तम शुभ मुहूर्त: इस बार बहनों के लिए अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र सजाने का सबसे उत्तम और कल्याणकारी समय सुबह 05 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n क्यों खास है यह समय? प्रातः काल का यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस समय वातावरण शुद्ध होता है और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दोषमुक्त समय में बांधी गई राखी भाई के जीवन में एक अभेद्य रक्षा कवच का निर्माण करती है।\r\n \r\n
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शास्त्रों के अनुसार ग्रहण और सूतक काल के नियम
\r\n\r\nहालाँकि भारत में यह ग्रहण नहीं दिख रहा है, लेकिन सनातन शास्त्रों (जैसे- धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु) में ग्रहण के दौरान त्योहार मनाने के बहुत ही स्पष्ट और कड़े नियम बताए गए हैं:
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- \r\n सूतक काल से पूर्व का विधान: यदि किसी क्षेत्र में ग्रहण रात्रि के समय लग रहा हो, तो प्रातः काल सूतक प्रारंभ होने से पहले का समय राखी बांधने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। सूतक शुरू होने से पहले ही स्नान-ध्यान कर त्योहार के सभी धार्मिक नियम पूरे कर लेने चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n ग्रहण समाप्ति और मोक्ष का नियम: यदि ग्रहण दिन के समय (सुबह या दोपहर) लगता है, तो ग्रहण काल के दौरान राखी भूलकर भी नहीं बांधनी चाहिए। जब ग्रहण का 'मोक्ष' (समाप्ति) हो जाए, उसके बाद पूरे घर की साफ-सफाई करनी चाहिए। स्वयं स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करने चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n मंदिर का शुद्धिकरण: ग्रहण मोक्ष के बाद घर के देव स्थान (मंदिर) को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करना सबसे आवश्यक है। भगवान की नई सिरे से पूजा-आरती करने के बाद ही बहनों को राखी बांधने का कार्य करना चाहिए। मोक्ष के बाद किया गया यह कार्य अत्यंत फलदायी होता है।\r\n \r\n
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भद्रा काल में राखी बांधना क्यों है वर्जित? (Why avoid Bhadra Kaal?)
\r\n\r\nरक्षाबंधन के दिन बहनों को चंद्र ग्रहण से भी ज्यादा 'भद्रा काल' का ध्यान रखना होता है। भद्रा और ग्रहण, दोनों से मुक्त समय ही रक्षासूत्र बांधने के लिए सर्वथा शुभ माना गया है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन है। भद्रा का स्वभाव अत्यंत क्रोधी और विनाशकारी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने उसे भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, जिसके परिणामस्वरूप रावण और उसके पूरे कुल का सर्वनाश हो गया था। यही कारण है कि सदियों से हिंदू धर्म में भद्रा काल के दौरान कोई भी शुभ कार्य, विशेषकर रक्षाबंधन, नहीं किया जाता है। पंचांग देखकर भद्रा रहित समय का चुनाव करना अत्यंत आवश्यक है।
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रक्षाबंधन की सही पूजा विधि (Proper Rakhi Puja Vidhi)
\r\n\r\nमुहूर्त के साथ-साथ सही विधि से राखी बांधने पर ही त्योहार का पूरा पुण्य प्राप्त होता है:
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- \r\n दिशा का रखें ध्यान: राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, जबकि बहन का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर होना शुभ माना जाता है।\r\n \r\n
- \r\n पूजा की थाली: बहनें तांबे या पीतल की थाली सजाएं। इसमें रोली, चंदन, अक्षत (साबुत चावल), दीपक, मिठाई और रक्षासूत्र (राखी) अवश्य रखें।\r\n \r\n
- \r\n तिलक और आरती: सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं। उसकी आरती उतारें और फिर दाहिनी कलाई (Right Hand) पर मंत्रोच्चार के साथ राखी बांधें। इसके बाद मिठाई खिलाकर उसका मुंह मीठा कराएं।\r\n \r\n
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समय और मुहूर्त का सही ध्यान रखकर ही इस पावन पर्व का सबसे मुख्य नियम सिद्ध होता है। शुभ मुहूर्त में किया गया यह कार्य भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में आजीवन प्रेम, विश्वास और खुशहाली बनाए रखता है।

Sabse pehle comment karne wale banein.