नई दिल्ली: देश की दो प्रमुख व्हिस्की बनाने वाली कंपनियों के बीच ट्रेडमार्क को लेकर चल रहे विवाद ने एक गंभीर सामाजिक और सुरक्षा चिंता को उजागर किया है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला सामने आया कि दक्षिण-पश्चिम भारत में इन कंपनियों की व्हिस्की की बिक्री का एक बड़ा हिस्सा छोटे टेट्रा पैक (Tetra Pack) द्वारा किया जाता है। इस खुलासे से सुप्रीम कोर्ट भी हैरान रह गया।READ ALSO:-E-Abkari App लॉन्च: अब दुकान-दर-दुकान भटकना बंद! घर बैठे मिलेगी आपकी पसंदीदा ब्रैंड की शराब की जानकारी
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न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य सरकारों से आश्चर्य जताते हुए पूछा कि वे शराब की ऐसी पैकेजिंग की अनुमति क्यों दे रहे हैं। पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि, "यह बहुत खतरनाक है। यह जूस के टेट्रा पैक जैसा दिखता है। कल्पना कीजिए कि यह बच्चों के हाथों में पड़ जाए? माता-पिता और शिक्षकों को यह शक भी नहीं होगा कि टेट्रा पैक में नशीला पदार्थ है।"
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ट्रेडमार्क विवाद से खुला पैकेजिंग का राज
\r\n\r\nयह पूरा मामला 'ऑफिसर्स चॉइस' व्हिस्की बनाने वाली कंपनी एलाइड ब्लेंडर्स (Allied Blenders) और 'ओरिजिनल चॉइस' व्हिस्की बनाने वाली कंपनी जॉन डिस्टिलर्स (John Distillers) के बीच ट्रेडमार्क में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ था।
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- \r\n व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता: दोनों कंपनियों की कुल बिक्री ₹30,000 करोड़ रुपये से अधिक है। जॉन डिस्टिलर्स की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पीठ को बताया कि अकेले कर्नाटक में टेट्रा पैक का कारोबार 65 प्रतिशत है।\r\n \r\n
- \r\n विवाद की जड़: यह विवाद तब सामने आया जब मद्रास उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने 'ओरिजिनल चॉइस' ट्रेडमार्क को 'ऑफिसर्स चॉइस' से समानता के कारण सुधारने का आदेश दिया था। इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई।\r\n \r\n
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सुप्रीम कोर्ट की चिंता और मध्यस्थता की पेशकश
\r\n\r\nसर्वोच्च न्यायालय में जब विभिन्न आकार की बोतलें और टेट्रा पैक पीठ को दिखाए गए, तो न्यायाधीशों ने टेट्रा पैक व्हिस्की विवाद की सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता से उठाया। कोर्ट ने सीधे राज्य सरकारों की नीति पर सवाल उठाते हुए इसे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बताया।
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- \r\n मध्यस्थता: पीठ ने दोनों कंपनियों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं (हरीश साल्वे, एएम सिंघवी, एनके कौल, मुकुल रोहतगी और श्याम दीवान) से पूछा कि क्या समझौते की कोई संभावना है। दोनों पक्षों द्वारा मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने पर सहमति जताने के बाद, पीठ ने सेवानिवृत्त सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश एल नागेश्वर राव से अनुरोध किया कि वे इस ट्रेडमार्क और लेबल विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाएं।\r\n \r\n
- \r\n अगली सुनवाई: मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकलने तक यह मामला लंबित रहेगा।\r\n \r\n
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सामाजिक सुरक्षा पर सवाल
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने एक महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान केंद्रित किया है: शराब की पैकेजिंग का बच्चों और अनभिज्ञ लोगों पर पड़ने वाला प्रभाव। टेट्रा पैक का स्वरूप अक्सर फलों के जूस या अन्य पेय पदार्थों से मिलता-जुलता होता है, जिससे अनजाने में बच्चे इसका सेवन कर सकते हैं। यह टेट्रा पैक व्हिस्की विवाद अब सिर्फ दो कंपनियों के बीच नहीं रहा, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा का मुद्दा बन गया है, जिस पर राज्य सरकारों को अपनी पैकेजिंग नीतियों की समीक्षा करने की आवश्यकता है।
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'ऑफिसर्स चॉइस' और 'ओरिजिनल चॉइस' व्हिस्की कंपनियों के बीच ट्रेडमार्क विवाद के दौरान टेट्रा पैक व्हिस्की विवाद सामने आया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि जूस जैसे दिखने वाले ये टेट्रा पैक बच्चों के लिए 'बहुत खतरनाक' हैं और राज्य सरकारों से ऐसी पैकेजिंग की अनुमति देने पर सवाल किया। कोर्ट ने विवाद को सुलझाने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश एल नागेश्वर राव को मध्यस्थ नियुक्त किया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.