दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब विदाई ले रहा है, और इसके साथ ही भारत में एक नई मौसमी चुनौती दस्तक देने को तैयार है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल के अंत में प्रशांत महासागर में ला नीना के सक्रिय होने की प्रबल संभावना है, जिसका सीधा असर भारत की सर्दियों पर पड़ेगा। अगर यह भविष्यवाणी सच हुई, तो इस साल न सिर्फ मॉनसून में अच्छी बारिश होगी, बल्कि सर्दी भी सामान्य से कहीं ज्यादा पड़ेगी।READ ALSO:-बिजनौर में किन्नरों का आतंक: नवजात की खुशी मातम में बदली, बधाई में 21 हजार रुपये मांगने पर रिटायर्ड दरोगा की हार्ट अटैक से मौत
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क्या है ला नीना और यह कैसे बदलता है मौसम?
\r\n\r\nला नीना (La Niña) एक वैश्विक जलवायु पैटर्न है, जिसे अल नीनो साउदर्न ऑसिलेशन (ENSO) का एक हिस्सा माना जाता है। इस स्थिति में प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से काफी कम हो जाता है, जिससे पूर्वी हवाएं तेज हो जाती हैं। यह बदलाव दुनिया के कुछ हिस्सों में भारी बारिश लाता है, जबकि कुछ अन्य हिस्सों में सूखे की स्थिति पैदा कर सकता है। जिस समय ला नीना सक्रिय होता है, उस दौरान भारत में ठंड भी काफी बढ़ जाती है।
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भारत पर ला नीना का असर: बारिश और कड़ाके की ठंड
\r\n\r\nइस साल ला नीना के असर से भारत में दो बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
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- \r\n अच्छी बारिश: ला नीना के कारण इस बार सर्दियों में भी देश के कई हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की उम्मीद है। यह बारिश किसानों के लिए, खासकर खरीफ की फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, हालांकि धान की फसल को इससे नुकसान होने की आशंका है।\r\n \r\n
- \r\n भयंकर शीतलहर: मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों में भयंकर शीतलहर, कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी का दौर रहेगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के लोगों को इसके लिए पहले से तैयार रहने की सलाह दी गई है।\r\n \r\n
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क्या कहते हैं मौसम विशेषज्ञ?
\r\n\r\nदुनिया भर की मौसम एजेंसियां भी इस पूर्वानुमान पर अपनी मुहर लगा रही हैं।
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- \r\n अमेरिका की CPC: अमेरिका की राष्ट्रीय मौसम सेवा ने 11 सितंबर को जारी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच ला नीना के सक्रिय होने की संभावना 71% है।\r\n \r\n
- \r\n भारतीय मौसम विभाग (IMD): अगस्त 2025 में जारी बुलेटिन में IMD ने कहा था कि इस दौरान प्रशांत महासागर में स्थिति तटस्थ बनी रहेगी, लेकिन अक्टूबर से दिसंबर के बीच ला नीना के सक्रिय होने की संभावना 50% है, जिसका सीधा मतलब होगा- भारत में ज्यादा ठंड।\r\n \r\n
- \r\n स्काईमेट वेदर: स्काईमेट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर का तापमान अभी ला नीना के स्तर तक नहीं पहुंचा है, लेकिन अगर यह -0.5°C से नीचे गया और तीन महीने तक बना रहा, तो ला नीना को सक्रिय घोषित कर दिया जाएगा।\r\n \r\n
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इन सभी पूर्वानुमानों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि इस बार सर्दियों में उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का दौर रहेगा। लोगों को सलाह दी गई है कि वे इसके लिए पहले से तैयारी कर लें।
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Sabse pehle comment karne wale banein.