उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पुलिस महकमे की छवि धूमिल करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। लिसाड़ी गेट थाने में कथित दलाली और वसूली की शिकायत पर विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। Meerut Police Suspension मामले में 4.50 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में दो दरोगा और एक हेड कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई डीआईजी कलानिधि नैथानी तक शिकायत पहुंचने और उनके द्वारा दिए गए जांच के आदेश के बाद की गई।

कैफे संचालक के खाते में ट्रांसफर कराई गई रकम शिकायतकर्ता के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने रिश्वत की यह रकम नकद लेने के बजाय ऑनलाइन माध्यम से ली। आरोप है कि 4.50 लाख रुपये की धनराशि लिसाड़ी गेट थाने के सामने कैफे चलाने वाले शादाब राव और कुछ अन्य लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई। इस लेन-देन की भनक लगते ही पुलिस के उच्चाधिकारियों में खलबली मच गई।

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अधिकारियों ने थाने में की छह घंटे तक पड़ताल डीआईजी कलानिधि नैथानी के सख्त निर्देश के बाद एसपी सिटी विनायक भौसले और सीओ कोतवाली संग्राम सिंह बुधवार रात लिसाड़ी गेट थाने पहुंचे। अधिकारियों ने लगातार छह घंटे तक थाने के दस्तावेजों, रिकॉर्ड और मामले से जुड़े तथ्यों की बारीकी से जांच की। इसके बाद सीओ कोतवाली सीधे कैफे पहुंचे और संचालक शादाब राव से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। इस पूछताछ में ऑनलाइन लेनदेन और ट्रांसफर की गई रकम के असल उद्देश्य को लेकर सवाल-जवाब किए गए।

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कौन है शादाब राव? इस पूरे मामले में कैफे संचालक शादाब राव की भूमिका बेहद संदिग्ध मानी जा रही है।

  • दरोगा के साथ तस्वीरें: शादाब राव की दरोगा आरिफ अली के साथ एक बर्थडे पार्टी की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जो कथित मिलीभगत की ओर इशारा करती हैं।

  • आपराधिक इतिहास: शादाब पहले भी फर्जी आरसी (RC) से जुड़े एक मामले में जेल जा चुका है।

  • गंभीर आरोप: आरोप है कि थाने के सामने ही उसका मुख्य अड्डा चलता था। उसकी थाने के कंप्यूटर और हथियारों तक कथित पहुंच होने की भी बातें सामने आ रही हैं। इसके अलावा, एक कारोबारी को बंधक बनाकर दो लाख रुपये वसूलने का भी दावा किया गया है, हालांकि इस आरोप की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई सीओ कोतवाली ने थाने में रिकॉर्ड खंगालने और शादाब राव से पूछताछ किए जाने की पुष्टि की है। हालांकि, रिश्वत से जुड़े ठोस सबूतों के बारे में फिलहाल स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है। विभाग ने प्रथम दृष्टया मामले की गंभीरता को देखते हुए दो दरोगा और एक हेड कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है। रिश्वत के इन गंभीर आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

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