यूपी मौसम अलर्ट (UP Weather Alert): उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। अगर आप सोच रहे थे कि अब गर्मियां पूरी तरह से आ चुकी हैं और ठंड का असर खत्म हो गया है, तो आपको अपनी तैयारियों पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों के लिए ताजा चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, 19 मार्च से प्रदेश में एक बार फिर मौसम बिगड़ने वाला है और अगले 4 दिनों तक लगातार बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।READ ALSO:-मेरठ में गैस की भारी किल्लत: सपा विधायक अतुल प्रधान ने समर्थकों के साथ किया कलेक्ट्रेट का घेराव, 'सिलेंडर' के नारों के साथ दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
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हाल ही में पिछले 48 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश की वजह से तापमान में करीब 3 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस अचानक हुए बदलाव से रात और अलसुबह के वक्त लोगों को एक बार फिर हल्की ठंड का एहसास होने लगा है। आइए, इस पूरे मौसमी बदलाव, मौसम वैज्ञानिकों के विश्लेषण और किसानों के लिए जारी की गई एडवाइजरी पर विस्तार से नजर डालते हैं।
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पिछले 24 से 48 घंटों का मौसमी हाल: तापमान में भारी गिरावट

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पिछले 24 घंटों के मौसमी आंकड़ों पर गौर करें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western UP) में कई स्थानों पर गरज और चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा असर शामली जिले में देखने को मिला, जहां एक-दो स्थानों पर बारिश के साथ ओले (Hailstorm) भी गिरे हैं। केवल पश्चिमी यूपी ही नहीं, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के भी कई इलाकों में छिटपुट बौछारें पड़ी हैं और तेज आंधी चलने की खबरें सामने आई हैं।
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इस बेमौसम बारिश और ठंडी हवाओं के कारण राज्य भर के औसत तापमान में बड़ी गिरावट देखी गई है। जो पारा कुछ दिनों पहले 40°C के पार जाने को बेताब था, वह अब लुढ़ककर 40°C से काफी नीचे आ गया है।
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यूपी के प्रमुख शहरों का तापमान

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बारिश के बावजूद कुछ जिलों में दिन के समय धूप निकलने से गर्मी का असर बरकरार रहा। पिछले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश के जिन शहरों में सबसे ज्यादा तापमान रिकॉर्ड किया गया, वे इस प्रकार हैं:
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    सुल्तानपुर (Sultanpur): यहां राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 37.4°C दर्ज किया गया।
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    बांदा (Banda): बांदा में भी अधिकतम तापमान 37.4°C रहा।
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    हमीरपुर (Hamirpur): हमीरपुर जिले का तापमान 36.2°C रिकॉर्ड किया गया।
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    उरई (Orai): उरई में दिन का अधिकतम पारा 36°C रहा।
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    झांसी (Jhansi): बुंदेलखंड के प्रमुख शहर झांसी में भी तापमान 36°C दर्ज किया गया।
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ये आंकड़े बताते हैं कि भले ही बारिश ने थोड़ी राहत दी हो, लेकिन जैसे ही आसमान साफ होता है, तीखी धूप अपना असर दिखाना शुरू कर देती है।
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लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र का ताजा अपडेट और पूर्वानुमान

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मौसम में हो रहे इस तेज और अचानक बदलाव को लेकर लखनऊ स्थित आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल सिंह ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 15 और 16 मार्च को एक कमजोर मौसमी सिस्टम के कारण पूरे प्रदेश में हल्की बारिश का दौर देखने को मिला था।
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अतुल सिंह के मुताबिक, "आज और कल (यानी 17 और 18 मार्च को) उत्तर प्रदेश में मौसम मुख्य रूप से साफ और शुष्क रहेगा। लेकिन, 19 मार्च से उत्तर भारत में एक और नया और बेहद सक्रिय 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) दस्तक दे रहा है। इसके प्रभाव से राज्य में बारिश और आंधी का नया दौर फिर से शुरू होगा। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है और कुछ जिलों में भारी ओलावृष्टि की भी पूरी आशंका है।"
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18 मार्च तक कैसा रहेगा मौसम और क्यों बढ़ेगा तापमान?

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बारिश का असर जैसे ही खत्म होता है, प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में चिलचिलाती धूप निकल आती है जिससे तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। मौसम विभाग (IMD) का स्पष्ट कहना है कि 18 मार्च तक उत्तर प्रदेश या इसके आसपास कोई भी मजबूत मौसमी सिस्टम एक्टिव नहीं रहेगा।
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इस वजह से अगले 48 घंटों तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क (Dry) रहेगा और आसमान से सीधे धूप बरसेगी। आसमान साफ रहने के कारण दिन के अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की और बढ़ोतरी होने की संभावना है। यानी 19 मार्च की बारिश से पहले यूपी के लोगों को एक बार फिर तेज और चुभती हुई गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
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IMD की बड़ी चेतावनी: 19 से 22 मार्च तक का यूपी मौसम अलर्ट

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, 19 मार्च से जो नया सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर भारत को प्रभावित करेगा, वह काफी ताकतवर है।
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    शुरुआत: इसके असर से सबसे पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश (NCR से सटे जिले, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, आगरा, मथुरा आदि) में बारिश की शुरुआत होने की संभावना है।
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    विस्तार: इसके बाद 20 और 21 मार्च को इस मौसमी सिस्टम का दायरा धीरे-धीरे पूरे प्रदेश (अवध और पूर्वांचल) में फैल जाएगा।
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    पूर्वानुमान: 22 मार्च तक उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने के प्रबल आसार हैं। इस दौरान लोगों को बिना वजह घरों से बाहर न निकलने और आकाशीय बिजली से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 
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किसानों और खड़ी फसलों पर बेमौसम बारिश का सीधा असर

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मार्च का महीना कृषि के लिहाज से बेहद संवेदनशील होता है, क्योंकि इस समय रबी की फसलें (जैसे गेहूं, सरसों, चना, मटर, आलू) खेतों में पककर तैयार होती हैं या कटाई के चरण में होती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 19 मार्च से शुरू होने वाली इस बारिश का सीधा असर तापमान पर भी पड़ेगा। इस दौरान अधिकतम तापमान में लगभग 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज हो सकती है, जिससे तापमान सामान्य या सामान्य से काफी नीचे पहुंच सकता है।
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कृषि विशेषज्ञों की किसानों को अहम सलाह

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आगामी बारिश, तेज हवाओं (40-50 किमी/घंटा) और ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है:
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    सिंचाई रोकें: खेतों में इस समय सिंचाई बिल्कुल न करें। अधिक नमी और तेज हवाओं से गेहूं जैसी खड़ी फसलें गिर सकती हैं, जिससे भारी नुकसान होगा।
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    जल निकासी की व्यवस्था: खेतों में बारिश का पानी जमा न होने दें। अतिरिक्त जल निकासी (Drainage) की उचित व्यवस्था पहले से कर लें।
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    सुरक्षित भंडारण: जिन किसानों ने अपनी सरसों या चने की फसल काट ली है, वे उसे तुरंत सुरक्षित और ढके हुए स्थानों पर पहुंचा दें। खुले में कटी हुई फसल कतई न छोड़ें।
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    दवाओं का छिड़काव रोकें: जब तक मौसम साफ न हो जाए, तब तक फसलों पर किसी भी तरह के कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव न करें, क्योंकि बारिश के पानी से यह धुल जाएगा।
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जलवायु परिवर्तन (Climate Change): मार्च में ही क्यों बढ़ रही है प्रचंड गर्मी?

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इस साल मौसम का जो रूप देखने को मिल रहा है, वह सामान्य नहीं है। यूपी के बांदा में कुछ ही दिन पहले (मार्च के दूसरे सप्ताह में) पारा 40 डिग्री सेल्सियस के स्तर को छू गया था। आम तौर पर ऐसी गर्मी मई या जून के महीने में देखने को मिलती है।
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इस असामान्य मौसमी घटना पर स्काईमेट वेदर (Skymet Weather) के उपाध्यक्ष और मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत ने अहम जानकारी दी है। उनका कहना है कि "पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्लोबल वार्मिंग का सीधा और स्पष्ट असर मौसम पर दिखाई दे रहा है। इसी कारण मौसम का पैटर्न बहुत तेजी से बदल रहा है।"
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समय से पहले गर्मी की शुरुआत: पलावत के अनुसार, गर्मी पहले की तुलना में काफी जल्दी शुरू होने लगी है। आमतौर पर देखा जाता था कि मार्च के आखिरी हफ्ते या अप्रैल के पहले सप्ताह तक पारा 40 डिग्री तक पहुंचता था। लेकिन अब मार्च के पहले या दूसरे हफ्ते में ही पारा 40 डिग्री के खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है। बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों में गर्मी के पुराने रिकॉर्ड भी टूटे हैं, जो पर्यावरण के लिहाज से एक गंभीर चिंता का विषय है। 
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हीटवेव (Heatwave) क्या है और यह कब मानी जाती है?

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मार्च में ही इतनी तेज गर्मी पड़ने के कारण कई जगहों पर हीटवेव (लू) जैसी स्थितियां बनने लगी हैं। कई बार लू का दौर अब पहले से ज्यादा दिनों तक चलता है। लेकिन वैज्ञानिक भाषा में हीटवेव किसे कहते हैं?
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मौसम विभाग (IMD) के तय मानकों के मुताबिक, हीटवेव की घोषणा तब की जाती है जब:
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    मैदानी इलाकों में किसी स्टेशन का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा पहुंच जाए।
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    या फिर, उस स्थान का मौजूदा तापमान वहां के सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया जाए।
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    पहाड़ी क्षेत्रों में हीटवेव तब मानी जाती है जब तापमान 30 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाए।
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इस साल लंबे समय तक चल सकती है हीटवेव

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IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल अल-नीनो (El Nino) और जलवायु परिवर्तन के मिले-जुले प्रभाव के कारण देश के कई इलाकों में लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति बन सकती है। इसका सीधा मतलब है कि यूपी सहित कई राज्यों के शहरों में लगातार कई-कई दिनों तक तापमान बहुत ज्यादा रह सकता है। लोगों को भीषण और झुलसाने वाली गर्मी का लंबे समय तक सामना करना पड़ सकता है।
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बदलते मौसम में स्वास्थ्य का कैसे रखें ख्याल?

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जब मौसम में इस तरह का उतार-चढ़ाव (दिन में चिलचिलाती धूप और बारिश के बाद रात में अचानक ठंड) होता है, तो मानव स्वास्थ्य पर इसका सबसे बुरा असर पड़ता है। डॉक्टरों के अनुसार, अचानक बदलते तापमान के कारण वायरल बुखार, सर्दी, खांसी और जुकाम के मरीजों की संख्या अस्पतालों में तेजी से बढ़ती है।
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बचाव के कुछ प्रमुख उपाय:

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    हीटवेव से बचने के लिए दिन के समय पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें। (External link: source URL)
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    19 मार्च से जब आंधी-तूफान आए, तो पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे बिल्कुल खड़े न हों।
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    सुबह और रात की हल्की ठंड से बचने के लिए उचित कपड़े पहनें।
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    कड़ी धूप से अचानक एसी (AC) वाले ठंडे कमरे में जाने से बचें, शरीर के तापमान को सामान्य होने का समय दें।
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संक्षेप में कहें तो, उत्तर प्रदेश का मौसम आने वाले दिनों में अत्यधिक अस्थिर रहने वाला है। 18 मार्च तक जहां धूप और गर्मी से तापमान बढ़ेगा, वहीं 19 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ प्रदेश में दस्तक देगा। इसके प्रभाव से 19 से 22 मार्च तक पूरे यूपी में तेज आंधी, ओलावृष्टि और भारी बारिश का अलर्ट है। इससे न केवल तापमान में 5 से 7 डिग्री की भारी गिरावट आएगी, बल्कि खेतों में खड़ी रबी की फसलों के लिए भी यह एक बड़ा खतरा बन सकता है। ऐसे में किसानों और आम जनता दोनों को मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सावधानियां बरतने की जरूरत है। प्रकृति और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में मौसम की सटीक जानकारी ही बचाव का सबसे बेहतर उपाय है।
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