उत्तर प्रदेश में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे लाखों लोगों और सालों से अटके प्रोजेक्ट्स में फंसी अपनी गाढ़ी कमाई को लेकर चिंतित निवेशकों के लिए मंगलवार का दिन बेहद राहत भरा रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति (Integrated Township Policy) के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव को मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस फैसले से अब न सिर्फ छोटे शहरों में आधुनिक कॉलोनियां बन सकेंगी, बल्कि खरीदारों को अपने घर की चाबी के लिए सालों साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा।READ ALSO:-मेरठ में 'कबूतरबाजों' का बड़ा खेल: विदेश में 'मलाईदार' नौकरी के नाम पर 40 लाख डकारे, वर्क वीजा बताकर थमा दिया टूरिस्ट वीजा
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1. गेम चेंजर: अब छोटी जमीन पर भी बड़ी टाउनशिप

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योगी सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्ट देने के लिए टाउनशिप बसाने हेतु जमीन की न्यूनतम सीमा को आधा कर दिया है।
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    पहले क्या था: पहले बिल्डरों को टाउनशिप का लाइसेंस तभी मिलता था, जब उनके पास एक साथ कम से कम 25 एकड़ जमीन हो। एनसीआर और बड़े शहरों में इतनी जमीन एक साथ जुटाना मुश्किल हो रहा था।
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    अब क्या होगा: सरकार ने इस नियम को शिथिल करते हुए सीमा 12.5 एकड़ कर दी है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि अब कम जमीन पर भी आधुनिक सुविधाओं वाली 'मिनी टाउनशिप' विकसित हो सकेंगी। इससे मेरठ, गोरखपुर, बरेली और आगरा जैसे टियर-2 शहरों में रियल एस्टेट में बूम आएगा।
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2. समय सीमा पर 'सर्जिकल स्ट्राइक': 8 साल का वक्त खत्म

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खरीदारों की सबसे बड़ी शिकायत "पजेशन में देरी" (Delay in Possession) को दूर करने के लिए सरकार ने टाइमलाइन को बेहद सख्त कर दिया है। पहले बिल्डरों को प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए 8 से 12 साल का लंबा वक्त मिलता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
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    नई समय सीमा: 25 एकड़ तक की टाउनशिप को अब हर हाल में 3 साल के अंदर पूरा करना होगा।
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    वहीं, 25 एकड़ से बड़ी टाउनशिप के लिए अधिकतम समय सीमा 5 साल तय की गई है।
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यानी अब बुकिंग के 3 से 5 साल के भीतर खरीदार अपने घर में गृह प्रवेश कर सकेंगे।
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3. फंसे हुए प्रोजेक्ट्स का निकलेगा समाधान

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नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ और गाजियाबाद में हजारों फ्लैट्स अधर में लटके हैं। बिल्डरों के पास फंड की कमी या जमीन के पेंच के कारण काम रुका हुआ था। सरकार ने ऐसे पुराने और रुके हुए प्रोजेक्ट्स की DPR (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में संशोधन की मंजूरी दे दी है। अब बिल्डर नए नियमों के तहत अपनी योजना को दोबारा प्लान (Re-plan) कर सकेंगे, जिससे रुका हुआ काम फिर से शुरू हो सकेगा। यह उन परिवारों के लिए संजीवनी जैसा है जो सालों से EMI भर रहे हैं लेकिन घर नहीं मिला।
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4. बिल्डरों की मनमानी पर लगाम
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अक्सर देखा जाता था कि बिल्डर टाउनशिप के नाम पर जमीन लेते थे और लाइसेंस मिलने के बाद उसे टुकड़ों में अन्य लोगों को बेच देते थे। नई नीति में इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यदि कोई बिल्डर 12.5 एकड़ (न्यूनतम अर्हता) पर लाइसेंस लेता है, तो वह उस जमीन का कोई भी हिस्सा किसी 'थर्ड पार्टी' को नहीं बेच सकता। उस जमीन का इस्तेमाल सिर्फ पार्क, सड़क, कम्युनिटी सेंटर और प्रोजेक्ट के विकास के लिए ही करना होगा।
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योगी सरकार का यह फैसला रीयल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने और खरीदारों का भरोसा जीतने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जमीन की सीमा घटने से जहां नए प्रोजेक्ट्स आएंगे, वहीं समय सीमा तय होने से बिल्डरों की लेटलतीफी पर लगाम लगेगी। यह नीति सही मायनों में 'अपना घर' के सपने को हकीकत में बदलने में मददगार साबित होगी।
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योगी कैबिनेट ने इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति में बदलाव किया है। अब 25 एकड़ की जगह 12.5 एकड़ जमीन पर टाउनशिप का लाइसेंस मिलेगा। प्रोजेक्ट पूरा करने का समय 8-12 साल से घटाकर 3-5 साल कर दिया गया है। साथ ही, अटके हुए प्रोजेक्ट्स की डीपीआर संशोधित कर उन्हें पूरा करने का रास्ता साफ किया गया है।
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