देश में यूपीआई (UPI) पेमेंट्स के भविष्य और इस पर लगने वाले चार्जेज को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर अब पूरी तरह से विराम लग गया है। संसद में 'टैक्स और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' के पारित होने के बाद, केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आम जनता के लिए यूपीआई का इस्तेमाल पहले की तरह ही पूरी तरह मुफ्त (Free) रहेगा।READ ALSO:-उत्तर प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: सरकार ने 7 PCS अधिकारियों का किया तबादला, लखनऊ से लेकर गोरखपुर तक बदले गए अफसर
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बयान देते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया है कि ग्राहकों और नागरिकों के लिए यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। हालांकि, डिजिटल पेमेंट के विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए सरकार कुछ बड़े कमर्शियल ट्रांजैक्शन पर मामूली मर्चेंट चार्ज लगाने पर विचार कर रही है।
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क्यों पड़ी नए ढांचे की जरूरत?

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भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम आज दुनिया में सबसे बड़ा है, लेकिन इसे चलाने की एक बड़ी लागत भी है। वर्तमान में डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री का सालाना ऑपरेशनल (परिचालन) खर्च लगभग ₹20,700 करोड़ तक पहुंच चुका है।
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लगातार बढ़ रहे ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के बीच नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर का अपग्रेडेशन, साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और फ्रॉड रोकने की प्रणालियों (Anti-Fraud Systems) को बेहतर बनाने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता है। सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता कम करने के लिए वित्त मंत्रालय ने बजट पर बोझ घटाते हुए 'दो फॉर्मूले' तैयार किए हैं।
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सरकार के दो नए फॉर्मूले: कैसे आत्मनिर्भर बनेगा UPI?

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मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, यूपीआई इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए इन दो विकल्पों पर काम किया जा रहा है:
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    कैलिब्रेटेड एमडीआर (Calibrated MDR) की वापसी: इसके तहत केवल बड़े कमर्शियल ट्रांजैक्शंस पर 0.3% से 0.5% का मामूली मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि यह नियम केवल ₹2,000 से ऊपर के भुगतानों और ₹1.5 करोड़ (₹15 मिलियन) से अधिक के सालाना टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों पर ही लागू होगा।
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    टियर-आधारित इंसेंटिव स्ट्रक्चर (Tier-based Incentive System): सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करने के लिए एक चरणबद्ध व्यवस्था बनाई जाएगी। वर्तमान में सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और छोटे दुकानदारों के नुकसान की भरपाई के लिए ₹2,000 करोड़ का बजट आवंटित किया है, जिसे आने वाले कुछ वर्षों में योजनाबद्ध तरीके से कम किया जाएगा।
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आम जनता और दुकानदारों पर क्या होगा असर?

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इस नए ढांचे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आम आदमी और छोटे व्यापारियों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जा सके।
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    आम जनता के लिए पूरी तरह फ्री: दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने (P2P ट्रांसफर) पर कोई चार्ज नहीं लगेगा (₹0 चार्ज)।
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    छोटे दुकानदारों को राहत: सब्जी वाले, चाय की दुकान, स्थानीय किराना स्टोर या किसी भी छोटे दुकानदार के QR कोड को स्कैन करके पेमेंट करने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा।
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    बड़े मर्चेंट्स पर असर: मॉल, बड़े शोरूम, या बड़ी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से ₹2,000 से अधिक की खरीदारी करने पर केवल उन बड़े व्यापारियों को एमडीआर देना होगा। ध्यान रहे, यह चार्ज भी क्रेडिट या डेबिट कार्ड पर लगने वाले शुल्क के मुकाबले काफी कम होगा और इसका सीधा बोझ ग्राहक पर नहीं पड़ेगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए नियमों को लागू करने से पेमेंट कंपनियों को जरूरी रेवेन्यू मिलेगा। अगर पेमेंट कंपनियां केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहीं, तो भविष्य में साइबर सुरक्षा और नेटवर्क अपग्रेडेशन जैसे जरूरी निवेश प्रभावित हो सकते हैं।
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क्या होता है MDR (Merchant Discount Rate)?

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MDR वह फीस है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर बड़े दुकानदारों (जिनका सालाना टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से अधिक है) द्वारा बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को दी जाती है।
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मुख्य बातें:

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    यह शुल्क व्यापारी (Merchant) देता है, न कि ग्राहक।
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    ग्राहकों के लिए पेमेंट करना पूरी तरह फ्री होता है।
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    ₹2,000 से कम के सभी ट्रांजैक्शन इस MDR के दायरे से पूरी तरह बाहर रखे गए हैं।
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