लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के शहरी विकास और नियोजन विभाग ने शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण से जुड़े नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन नई गाइडलाइन्स का उद्देश्य निर्माण प्रक्रिया को सरल बनाना, शहरी नियोजन को व्यवस्थित करना और विशेष रूप से सार्वजनिक स्थानों जैसे बारात घरों में पार्किंग की अनिवार्यता सुनिश्चित करना है। यूपी भवन निर्माण नई गाइडलाइन को जुलाई में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिली थी, और अब ये नियम प्रभावी हो गए हैं। इन बदलावों से आम नागरिक, छोटे व्यापारी और बिल्डर्स सभी प्रभावित होंगे।READ ALSO:-वोटर लिस्ट में नाम खोजना हुआ 'मक्खन': ECI ने खत्म की पोलिंग स्टेशन बताने की झंझट, अब सिर्फ नाम से खुलेगा 2003 का रिकॉर्ड
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नक्शा पास कराने की अनिवार्यता में बड़ी छूट

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छोटे भूखंडों पर निर्माण करने वालों को बड़ी राहत देते हुए, नई गाइडलाइन में नक्शा पास कराने की अनिवार्यता में छूट दी गई है (विकसित क्षेत्रों को छोड़कर):
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    आवासीय भूखंड: 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय भूखंडों पर निर्माण के लिए अब नक्शा पास कराना जरूरी नहीं होगा। हालांकि, निर्मित (Built-up) क्षेत्रों में यह छूट लागू नहीं होगी।
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    व्यावसायिक भूखंड: 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भूखंडों पर निर्माण के लिए भी नक्शा पास कराना अनिवार्य नहीं होगा।
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इसके अलावा, अप्रूव्ड ले-आउट में 500 वर्ग मीटर के आवासीय और 200 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भूखंडों के लिए ऑनलाइन जमा किए गए नक्शे को ट्रस्ट-बेस्ड स्वीकृति माना जाएगा, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी।
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आवासीय भवनों के साथ दुकान बनाने के नियम

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यूपी भवन निर्माण नई गाइडलाइन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब चौड़ी सड़कों पर बने आवासीय भवनों के साथ दुकानें बनाने की आधिकारिक इजाजत होगी, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए सड़क की चौड़ाई की शर्त निर्धारित की गई है:
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    बड़े शहर (10 लाख से अधिक आबादी): इन शहरों में 24 मीटर चौड़ी सड़क पर बने आवासीय भवनों के साथ व्यावसायिक निर्माण की मंजूरी मिलेगी।
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    छोटे शहर (10 लाख से कम आबादी): यहां यह सुविधा 18 मीटर चौड़ी सड़क पर उपलब्ध होगी।
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बारात घर, पार्किंग और FAR पर नए नियम

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ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए बारात घरों और होटलों में पार्किंग के नियमों को सख्त किया गया है, जबकि पोर्च/पोर्टिको के आकार में बढ़ोतरी की गई है।
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बारात घर और पार्किंग

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    जनसंख्या अनुपात: 25,000 लोगों पर एक बारात घर बनाने का नियम लाया गया है।
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    क्षेत्रफल: बारात घर के लिए 750 वर्ग मीटर का पक्का निर्माण हो सकता है।
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    अनिवार्य खुला क्षेत्र: 750 वर्ग मीटर के निर्माण के अलावा, 1000 से 3000 वर्ग मीटर तक का खुला क्षेत्र रखना जरूरी होगा। इस क्षेत्र का उपयोग विशेष रूप से पार्किंग और लॉन के लिए किया जाएगा, जिससे सड़क पर वाहनों का जमावड़ा न हो।
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FAR और अन्य बदलाव
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    डिफ्रेंशियल एफएआर चार्ज में छूट: ऐसे भूखंड, जो विकसित लेआउट के बाहर आते हैं और जिनका बेस FAR पुनर्गठन की वजह से बढ़ा है, उन्हें 'डिफ्रेंशियल एफएआर बेनिफिट चार्ज' नहीं देना होगा।
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    पोर्च और पोर्टिको: अब भवनों में पोर्च और पोर्टिको का अधिकतम साइज 6×3 मीटर से बढ़ाकर 8×4 मीटर कर दिया गया है।
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    पेट्रोल पंप: अनिर्मित क्षेत्रों में बिना सर्विस स्टेशन वाले पेट्रोल पंप अब 24 मीटर की जगह 18 मीटर चौड़ी सड़क पर लगाए जा सकेंगे। 
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    होस्टल पार्किंग: होटलों में पार्किंग की अनिवार्यता को 100 वर्ग मीटर फ्लोर एरिया पर 1.5 पार्किंग की जरूरत से घटाकर 1.25 कर दिया गया है।
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अन्य महत्वपूर्ण बदलावों में 15 मीटर से ऊंचे भवनों में बने बेसमेंट की कंपाउंडिंग की सुविधा खत्म कर दी गई है। साथ ही, भूखण्डों के बंटवारे के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 9 मीटर तय की गई है। 
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आवास एवं शहरी नियोजन विभाग द्वारा जारी यूपी भवन निर्माण नई गाइडलाइन शहरी विकास में पारदर्शिता और व्यावहारिकता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। छोटे भूखंडों पर नक्शा पास कराने में मिली छूट और चौड़ी सड़कों पर आवासीय-सह-व्यावसायिक निर्माण की अनुमति से लोगों को राहत मिलेगी। वहीं, बारात घरों के लिए अनिवार्य पार्किंग व्यवस्था और बढ़े हुए पोर्च के साइज जैसे प्रावधान शहरी जीवन को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं।
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