लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली बकाएदारों और खासकर बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं को एक बार फिर बड़ी राहत मिलने वाली है। योगी आदित्यनाथ सरकार 1 दिसंबर, 2025 से 'एकमुश्त समाधान योजना' (OTS) लागू करने जा रही है, जिसका उद्देश्य विभाग के लंबित राजस्व की वसूली करना और उपभोक्ताओं को राहत देना है। सबसे खास बात यह है कि इस बार यूपी बिजली समाधान योजना 2025 में एक बार फिर बिजली चोरी के मामलों में फंसे उपभोक्ताओं को भी शामिल किया गया है, जिसके लिए विजिलेंस को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।READ ALSO:-आगरा में 'बाबरी' पर बवाल: TMC विधायक के लिए यमुना किनारे खोदी कब्र; सिर काटने वाले को 1 करोड़ और सोने की चूड़ियां देने का ऐलान
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ऊर्जा मंत्री की पहल पर यह निर्णय लिया गया है, ताकि लाखों लंबित बिजली चोरी के मामलों का निपटारा हो सके और विभाग के राजस्व को बढ़ाया जा सके।
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बिजली चोरों को फिर मिली 'आखिरी मौका' की सुविधा
\r\n\r\nसाल 2023-24 में जब यह योजना पहली बार लागू हुई थी, तब बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं को शामिल किया गया था, जिसे 'पहली और आखिरी बार' की सुविधा बताया गया था। हालांकि, 2024-25 में उन्हें बाहर रखा गया। लेकिन, अब 2025-26 के लिए एक बार फिर ओटीएस योजना में बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं को छूट का लाभ लेने की अनुमति दी गई है।
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योजना का दायरा (चेयरमैन के अनुसार):
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- \r\n 2 किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं पर लागू।\r\n \r\n
- \r\n 1 किलोवाट तक के वाणिज्यिक उपभोक्ताओं पर लागू।\r\n \r\n
- \r\n सभी श्रेणी के बिजली चोरी से संबंधित प्रकरणों में राजस्व निर्धारण धनराशि पर छूट दी जाएगी।\r\n \r\n
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पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल ने बताया कि इससे उन उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी जो बिजली चोरी के विवादों में फंसे हैं। गरीब और मध्यवर्गीय उपभोक्ताओं को बकाए का भुगतान मासिक किश्तों में करने की सुविधा दी गई है।
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विजिलेंस की जिम्मेदारी: हर उपभोक्ता से संपर्क
\r\n\r\nइस बार योजना को सफल बनाने के लिए विजिलेंस को एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। विजिलेंस के अपर पुलिस महानिदेशक जेएन सिंह ने बताया कि उनके अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे बिजली चोरी के तहत दर्ज एफआईआर प्रकरणों की सूची बनाकर एक-एक उपभोक्ता से संपर्क करें।
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विजिलेंस का लक्ष्य है कि प्रदेश में लाखों की संख्या में लंबित बिजली चोरी के एफआईआर प्रकरणों का इस योजना के तहत पंजीकरण कराकर समाधान किया जाए। लखनऊ में ही करीब 31 हजार ऐसे एफआईआर दर्ज हैं। यूपी बिजली समाधान योजना 2025 के तहत पंजीकरण कराकर छूट का लाभ लेकर ऐसे मामले समाप्त किए जा सकते हैं, इसलिए विजिलेंस को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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योजना में कितनी मिल सकती है राहत?
\r\n\r\nजब साल 2023 में पहली बार बिजली चोरों के लिए यह योजना लागू की गई थी, तब उन्हें बकाया राशि पर बड़ी राहत दी गई थी:
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- \r\n एकमुश्त भुगतान: 30 नवंबर तक 10 प्रतिशत पंजीकरण राशि जमा करने पर 65 प्रतिशत तक बिजली चोरी के राजस्व निर्धारण की राशि को जमा करने से छूट मिली थी।\r\n \r\n
- \r\n किश्तों में भुगतान: 31 दिसंबर तक किश्तों में बिल जमा करने पर भी 45 प्रतिशत की छूट की व्यवस्था थी।\r\n \r\n
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इस बार भी बिजली चोरी के मामलों में लगभग इसी तरह की भारी छूट मिलने की संभावना है।
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पिछला अनुभव और वर्तमान चुनौती
\r\n\r\nसाल 2023 में लागू हुई 70 दिनों की ओटीएस योजना के तहत 50.56 लाख उपभोक्ताओं ने लाभ लिया था, जिससे विभाग को 5,436 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। हालांकि, बिजली चोरी के मामलों में विभाग को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली थी, और सिर्फ 1.03 लाख उपभोक्ताओं ने ही लाभ लिया।
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लखनऊ में ही, 2024-25 में 191.75 करोड़ रुपये की बिजली चोरी पकड़ी गई थी, लेकिन विभाग सिर्फ 5.82 करोड़ रुपये ही वसूल पाया था। वर्तमान में लाखों की संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं जो बिजली विभाग को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। यूपी बिजली समाधान योजना 2025 इस राजस्व घाटे को कम करने की एक और बड़ी कोशिश है।
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रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
\r\n\r\nउपभोक्ता इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित माध्यमों से पंजीकरण करा सकते हैं:
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- \r\n विभागीय वेबसाइट (UPPCL Official Website)\r\n \r\n
- \r\n खण्ड और उपखण्ड कार्यालय\r\n \r\n
- \r\n जन सेवा केन्द्र (CSC)\r\n \r\n
- \r\n कैश काउन्टर\r\n \r\n
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योगी सरकार ने 1 दिसंबर से यूपी बिजली समाधान योजना 2025 को लागू करके लाखों बिजली बकाएदारों और चोरी करने वाले उपभोक्ताओं को एक और बड़ा अवसर दिया है। इस बार विजिलेंस की सक्रिय भागीदारी से उम्मीद है कि बिजली चोरी के लंबित एफआईआर मामलों का बड़े पैमाने पर निपटारा होगा। यह योजना उन गरीब और मध्यवर्गीय उपभोक्ताओं को भी राहत देगी जो बकाया राशि को मासिक किश्तों में जमा करके बिजली चोरी के विवादों से बाहर निकलना चाहते हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.