उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, आधारभूत ढांचे और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को नया रूप देने के लिए कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों पर अपनी मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के समग्र विकास और व्यवस्थागत सुधारों से जुड़े कुल 21 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।READ ALSO:-जलप्रलय की आहट! यूपी में मानसून का 'रौद्र रूप', 72 जिलों में भारी बारिश का हाई अलर्ट, स्कूल बंद और नदियां उफान पर
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कैबिनेट बैठक का सबसे बड़ा और बहुचर्चित फैसला उत्तर प्रदेश के मदरसों में मिलने वाली उच्च शिक्षा की डिग्रियों को लेकर रहा। राज्य सरकार ने मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम 2004 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब मदरसों में कामिल (स्नातक/Graduation) और फाजिल (परास्नातक/Post Graduation) की उच्च डिग्रियां नहीं दी जा सकेंगी। अब प्रदेश के मदरसों में केवल 12वीं (आलिम) स्तर तक की ही पढ़ाई हो सकेगी।
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\r\n\r\nमदरसों में उच्च शिक्षा पर रोक: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया कदम
\r\n\r\nकैबिनेट बैठक के बाद फैसलों की विस्तृत जानकारी देते हुए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह कदम माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशों के पूर्ण अनुपालन में उठाया गया है।
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\r\n\r\n\r\n"सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत मदरसा बोर्ड कानून में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया है। मदरसों द्वारा पूर्व में जारी की गई कामिल और फाजिल की डिग्रियों को भी निरस्त माना जाएगा, क्योंकि ये विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मानकों और दायरे से बाहर थीं।" - ओमप्रकाश राजभर, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री\r\n
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क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
\r\n\r\n5 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने 'अंजुम कादरी एवं अन्य बनाम भारत सरकार' मामले में फैसला सुनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें मदरसा अधिनियम को असंवैधानिक घोषित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 की संवैधानिक वैधता को तो बरकरार रखा, लेकिन यह साफ कर दिया था कि मदरसा बोर्ड के पास UGC के नियमों के बाहर जाकर कामिल और फाजिल जैसी उच्च शिक्षा की डिग्री देने का अधिकार नहीं है।
\r\n\r\n\r\n\r\nकामिल और फाजिल डिग्रियों का अर्थ और ढांचा
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- \r\n कामिल (Kamil Degree): यह अरबी, फारसी और दीनियात (धार्मिक अध्ययन) विषयों में 3 वर्ष का पाठ्यक्रम होता था। मदरसा बोर्ड द्वारा इसे सामान्य यूनिवर्सिटी की स्नातक (B.A.) डिग्री के समकक्ष माना जाता था।\r\n \r\n
- \r\n फाजिल (Fazil Degree): कामिल के बाद 2 वर्ष का उच्च अध्ययन पाठ्यक्रम होता था, जिसे स्नातकोत्तर (M.A.) की डिग्री के बराबर माना जाता था।\r\n \r\n
युवाओं और स्टार्ट-अप्स को सौगात: लखनऊ और नोएडा में बनेगा 'U-HUB'
\r\n\r\nशिक्षा सुधारों के साथ-साथ योगी सरकार ने प्रदेश के युवाओं और टेक्नोलॉजी स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी योजना को हरी झंडी दिखाई है। नोएडा और लखनऊ में 'यू-हब' (U-HUB) स्थापित करने के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है।
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- \r\n सरकारी कंपनी का गठन: आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग द्वारा नवगठित 'स्टार्टअप मिशन निदेशालय' के अंतर्गत 'U-HUB' नाम से एक विशेष सरकारी कंपनी बनाई जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n आईआईटी के परिसरों में स्थापना: U-HUB की स्थापना आईआईटी कानपुर के नोएडा सेंटर और आईआईटी लखनऊ के कैंपस में की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n बजट और नेतृत्व: सरकार ने इसके संचालन के लिए इस वर्ष 100 करोड़ रुपये का शुरुआती बजट रखा है। आईआईटी कानपुर इन्क्यूबेशन के निदेशक को 3 वर्ष की अवधि के लिए U-HUB का पहला निदेशक नियुक्त किया गया है।\r\n \r\n
- \r\n उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के डीप-टेक और गंभीर अनुसंधान पर आधारित स्टार्ट-अप्स को विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, मेंटरशिप, फंडिंग और सरकारी मदद उपलब्ध कराना है।\r\n \r\n
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इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: जेवर लिंक एक्सप्रेसवे और प्रयागराज-चित्रकूट विकास प्राधिकरण
\r\n\r\nप्रदेश में कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास को रफ्तार देने के लिए कैबिनेट ने दो बड़े ढांचागत फैसलों पर मुहर लगाई है:
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- \r\n 74.467 किमी लंबा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे: नोएडा के अंतरराष्ट्रीय जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 6-लेन वाले ग्रीनफील्ड जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे पश्चिमी यूपी के उद्योगों और निर्यात को सीधा लाभ मिलेगा।\r\n \r\n
- \r\n प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण: प्रयागराज और चित्रकूट के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन महत्व को ध्यान में रखते हुए इस पूरे क्षेत्र के सुनियोजित और समग्र विकास के लिए एक नए विशेष विकास प्राधिकरण का गठन किया जाएगा।\r\n \r\n
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40 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट (Supplementary Budget 2026-27)
\r\n\r\nप्रदेश के विकास कार्यों की गति को निर्बाध बनाए रखने के लिए योगी कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के अनुपूरक बजट प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान की है। इस बजट का एक बड़ा हिस्सा जारी विकास योजनाओं, नए एक्सप्रेसवे निर्माण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर खर्च किया जाएगा।
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किसान, श्रमिक और सामाजिक कल्याण से जुड़े अन्य प्रमुख निर्णय
\r\n\r\nकैबिनेट बैठक में राज्य के किसानों, मजदूरों और हाशिए पर खड़े समुदायों के लिए भी कई महत्वपूर्ण नीतियां लागू करने का फैसला किया गया:
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- \r\n प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू: खरीफ 2026 और रबी 2026-27 फसलों के लिए प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को निरंतर लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली।\r\n \r\n
- \r\n उत्तर प्रदेश शीरा नीति 2026: राज्य में एथेनॉल उत्पादन और आबकारी संतुलन बनाए रखने के लिए 'उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण संशोधन विधेयक 2026' लाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।\r\n \r\n
- \r\n घुमंतू विकास बोर्ड का गठन: राज्य में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए एक समर्पित 'घुमंतू विकास बोर्ड' बनाने का निर्णय लिया गया।\r\n \r\n
- \r\n मजदूर संहिता नियमावली 2026: श्रमिकों के हितों की रक्षा, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नई मजदूर संहिता नियमावली 2026 को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही 'भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार संशोधन विधेयक 2020' को केंद्र सरकार से वापस लेने का प्रस्ताव मंजूर किया गया।\r\n \r\n
- \r\n विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2: योजना के नियमों में संशोधन कर नए प्रावधानों और लाभों को जोड़ा गया है।\r\n \r\n
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एक नजर में: योगी कैबिनेट के प्रमुख फैसलों की सूची
\r\n\r\n| \r\n क्र. सं. \r\n | \r\n \r\n विभाग / क्षेत्र \r\n | \r\n \r\n स्वीकृत मुख्य निर्णय \r\n | \r\n
| \r\n 1 \r\n | \r\n \r\n मदरसा शिक्षा \r\n | \r\n \r\n मदरसा बोर्ड कानून 2004 में संशोधन; कामिल (BA) और फाजिल (MA) डिग्रियों की मान्यता समाप्त। \r\n | \r\n
| \r\n 2 \r\n | \r\n \r\n आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स \r\n | \r\n \r\n लखनऊ और नोएडा में 100 करोड़ के बजट से 'U-HUB' स्टार्ट-अप केंद्र की स्थापना। \r\n | \r\n
| \r\n 3 \r\n | \r\n \r\n वित्तीय प्रबंधन \r\n | \r\n \r\n वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ~40,000 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित। \r\n | \r\n
| \r\n 4 \r\n | \r\n \r\n एक्सप्रेसवे / परिवहन \r\n | \r\n \r\n जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले 74.467 किमी 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को हरी झंडी। \r\n | \r\n
| \r\n 5 \r\n | \r\n \r\n क्षेत्रीय विकास \r\n | \r\n \r\n धार्मिक व पर्यटन विकास हेतु 'प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण' का गठन। \r\n | \r\n
| \r\n 6 \r\n | \r\n \r\n कृषि कल्याण \r\n | \r\n \r\n खरीफ 2026 और रबी 2026-27 के लिए पीएम फसल बीमा योजना लागू करने का प्रस्ताव। \r\n | \r\n
| \r\n 7 \r\n | \r\n \r\n उद्योग एवं आबकारी \r\n | \r\n \r\n उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण संशोधन विधेयक 2026 पारित। \r\n | \r\n
| \r\n 8 \r\n | \r\n \r\n सामाजिक कल्याण \r\n | \r\n \r\n विमुक्त व घुमंतू समुदायों के विकास के लिए पृथक 'घुमंतू विकास बोर्ड' का गठन। \r\n | \r\n
| \r\n 9 \r\n | \r\n \r\n श्रम कल्याण \r\n | \r\n \r\n श्रमिक सुरक्षा हेतु 'मजदूर संहिता नियमावली 2026' लागू। \r\n | \r\n
| \r\n 10 \r\n | \r\n \r\n कौशल विकास \r\n | \r\n \r\n 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2' में संशोधन कर नए प्रावधानों को जोड़ा गया। \r\n | \r\n
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बदलाव की ओर उत्तर प्रदेश
\r\n\r\nयोगी सरकार की इस कैबिनेट बैठक से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि राज्य सरकार एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट की कानूनी व्यवस्थाओं का अनुपालन कराते हुए शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता ला रही है, वहीं दूसरी ओर हाई-टेक उद्योगों, एक्सप्रेसवे, कृषि सुरक्षा और स्टार्ट-अप्स के जरिए उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के अपने लक्ष्य की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।



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