करूर, तमिलनाडु | राजनीति के मंच पर अपने पहले बड़े कदम के साथ ही सुपरस्टार से नेता बने अभिनेता विजय को एक ऐसी त्रासदी का सामना करना पड़ा है, जिसने पूरे तमिलनाडु को झकझोर कर रख दिया है। शनिवार, 27 सितंबर, 2025 की शाम, जो उनकी राजनीतिक ताकत का एक और भव्य प्रदर्शन होने वाली थी, वह देखते ही देखते मातम और चीख-पुकार के एक अंतहीन सिलसिले में तब्दील हो गई। करूर के वेलुचामिपुरम में उनकी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) पार्टी की रैली में हुई भीषण भगदड़ में कम से कम 36 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हो गए।READ ALSO:-तमिलनाडु करूर: थलापति विजय की रैली में भीषण भगदड़, 31 की मौत, कई महिलाएं और बच्चे घायल, CM स्टालिन मौके पर पहुंचे
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कैसे जश्न का माहौल मातम में बदला?
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2026 के विधानसभा चुनावों में तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने का सपना देख रहे विजय, पिछले कुछ हफ्तों से हर शनिवार को राज्य के विभिन्न जिलों में रैलियां कर रहे थे। उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि हर जगह लाखों की भीड़ उमड़ रही थी। करूर में भी यही हुआ। शाम होते-होते वेलुचामिपुरम का मैदान इंसानी सिरों के एक विशाल समंदर जैसा दिख रहा था। लोग अपने 'थलपति' (कमांडर) की एक झलक पाने और उनके भाषण को सुनने के लिए बेताब थे।
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विजय के भाषण के दौरान भीड़ बढ़ने लगी और कई लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मैदान खचाखच भरा था और तिल रखने तक की जगह नहीं थी। इसी बीच, कथित तौर पर भीड़ में एक नौ साल की बच्ची के खो जाने की अफवाह फैली। घबराए हुए परिजन और आसपास के लोग उसे खोजने के लिए एक दिशा में भागे, जिससे एक भयावह चेन रिएक्शन शुरू हो गया। संतुलन बिगड़ा, लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और कुछ ही पलों में हजारों की भीड़ एक-दूसरे को कुचलते हुए भागने लगी। जो नीचे गिरा, उसे फिर उठने का मौका नहीं मिला।
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प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
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इस महा-त्रासदी ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि जब यह पता था कि विजय की रैलियों में अप्रत्याशित भीड़ आ रही है, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए? भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए उचित योजना का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
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त्रासदी के बाद का मंज़र
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घटना के बाद का दृश्य दिल दहला देने वाला था। मैदान में चारों तरफ चप्पलें, जूते, फटे कपड़े और लोगों का सामान बिखरा पड़ा था। एम्बुलेंस के सायरन और घायलों की चीख-पुकार ने पूरे माहौल को भयावह बना दिया था। घायलों को करूर के सरकारी और निजी अस्पतालों में ले जाया गया, जहां आपातकालीन वार्ड भर गए। अस्पतालों के बाहर अपने प्रियजनों की तलाश में भटकते लोगों का तांता लग गया, जिससे वहां भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
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राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे "अत्यंत दुखद और हृदय विदारक" बताया। उन्होंने तत्काल मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए, मद्रास उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया है, जो पूरी घटना के कारणों और किसी भी संभावित लापरवाही की जांच करेगा।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी और अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं ने भी इस हादसे पर दुख जताया है। हालांकि, इस खबर के लिखे जाने तक, अभिनेता विजय या उनकी पार्टी TVK की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
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यह घटना विजय के राजनीतिक करियर के शुरुआती चरण में एक बड़ा झटका है, जो अब तक DMK, AIADMK और BJP पर तीखे हमले कर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे थे। इस त्रासदी ने उनकी विजय यात्रा पर एक गहरा और दुखद प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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