देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम (Digital Arrest Scam) के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (3 नवंबर 2025) को सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट रूप से कहा है कि "अब हम शांत नहीं बैठने वाले हैं," और अगर सख्ती से पेश नहीं आया गया तो समस्या और बढ़ जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस चौंकाने वाली ठगी को गंभीरता से लेते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने को कहा है।READ ALSO:-Voter List SIR 2025: 12 राज्यों में कल से शुरू होगा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण, जानें पूरी प्रक्रिया और Cut-off Date
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सीबीआई और न्यायपालिका के नाम पर बड़ी ठगी

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डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक ऐसी धोखाधड़ी है, जिसमें साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ितों से संपर्क करते हैं।
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    ठगी का तरीका: धोखेबाज फोन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीड़ितों को मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स से जुड़े किसी फर्जी मामले में फंसाने की धमकी देते हैं। वे गिरफ्तारी का डर दिखाकर उनसे पैसे वसूलते हैं। इस काम के लिए सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश भी दिखाए जाते हैं।
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    शुरुआत: यह मामला तब उठा जब पिछले महीने एक वरिष्ठ नागरिक दंपति ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर बताया कि उनसे 1 से 16 सितंबर के बीच ₹1.5 करोड़ की ठगी हुई है।
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₹3000 करोड़ की ठगी और कोर्ट का कड़ा रुख

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सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने स्थिति की भयावहता पर चिंता व्यक्त की।
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    आँकड़े: जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह चौंकाने वाला है कि पीड़ितों से लगभग ₹3000 करोड़ ठगे जा चुके हैं, और यह सब भारत में ही हो रहा है।
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    कोर्ट का रुख: जस्टिस सूर्यकांत ने सख्ती दिखाते हुए कहा, "अगर हम सख्त और कठोर आदेश नहीं देंगे तो समस्या और बढ़ जाएगी। हम इससे सख्ती से निपटेंगे।" उन्होंने उचित निर्देश जारी करने की बात कही।
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    सरकार का पक्ष: सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गृह मंत्रालय (MHA) की एक अलग यूनिट इस मामले को लेकर राज्यों के साथ समन्वय (coordination) कर रही है और कई कदम उठाए जा रहे हैं।
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गृह मंत्रालय और सीबीआई की रिपोर्ट

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इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, केंद्रीय एजेंसियों ने भी अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी है।
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    गृह मंत्रालय की रिपोर्ट: डिजिटल स्कैम को लेकर गृह मंत्रालय ने सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपी।
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    सीबीआई: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी इस मामले को रिकॉर्ड पर लिया। पिछली सुनवाई में अदालत ने CBI से पूछा था कि क्या उसके पास देशभर में ऐसे घोटालों से संबंधित सभी मामलों को संभालने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।
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सुरक्षा की मांग

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डिजिटल अरेस्ट स्कैम की बढ़ती वारदातों से आम नागरिकों, खासकर वरिष्ठ नागरिकों, में भय का माहौल है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख से आमजन को राहत की उम्मीद जगी है। सोशल मीडिया पर लोग मांग कर रहे हैं कि सरकार और एजेंसियों को साइबर अपराधियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
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10 नवंबर को अगली सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है। इस सुनवाई में अदालत डिजिटल अरेस्ट स्कैम से निपटने के लिए राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। यह उम्मीद है कि गृह मंत्रालय और CBI को अपनी समन्वय प्रणाली को और मजबूत करने का निर्देश दिया जाएगा।
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