लोकसभा और आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच, चुनाव आयोग (Election Commission) एक बड़ा और महत्वपूर्ण अभियान शुरू करने जा रहा है। मंगलवार, 4 नवंबर 2025 से, नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) शुरू होगा। इस अभ्यास के दूसरे चरण से कुल 51 करोड़ मतदाता प्रभावित होंगे। चुनाव आयोग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता न छूटे और कोई भी अवैध व्यक्ति सूची में शामिल न हो।READ ALSO:-गाजियाबाद: 'अली के चाहने वाले भागते नहीं': विवादित बयानों से बाज नहीं आई 17 साल की लड़की, नया भड़काऊ वीडियो वायरल, पुलिस जांच में जुटी
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एसआईआर का उद्देश्य और इतिहास
\r\n\r\nSIR एक विस्तृत अभ्यास है, जिसका मुख्य उद्देश्य अवैध विदेशी प्रवासियों के जन्म स्थान की जांच करके उन्हें मतदाता सूची से बाहर निकालना है। बांग्लादेश और म्यांमार सहित विभिन्न राज्यों में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के मद्देनजर यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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- \r\n ऐतिहासिक महत्व: Voter List SIR आज़ादी के बाद का यह नौवां अभ्यास है। पिछली बार इसका आयोजन 2002 से 2004 के बीच किया गया था।\r\n \r\n
- \r\n बिहार का उदाहरण: इससे पहले, बिहार में मतदाता सूची का SIR पूरा किया गया था, और राज्य की अंतिम सूची लगभग 7.42 करोड़ नामों के साथ 30 सितंबर को प्रकाशित हुई थी।\r\n \r\n
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12 राज्यों में कल से शुरू होगी प्रक्रिया
\r\n\r\nVoter List SIR का दूसरा चरण 4 नवंबर से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ समाप्त होगा।
\r\n\r\nSIR के दूसरे चरण में शामिल 12 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
\r\n\r\n| \r\n क्षेत्र \r\n | \r\n \r\n राज्य/केंद्र शासित प्रदेश \r\n | \r\n
| \r\n उत्तरी/मध्य भारत \r\n | \r\n \r\n उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान \r\n | \r\n
| \r\n पश्चिमी भारत \r\n | \r\n \r\n गुजरात, गोवा \r\n | \r\n
| \r\n दक्षिणी भारत \r\n | \r\n \r\n तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, लक्षद्वीप \r\n | \r\n
| \r\n पूर्वी भारत \r\n | \r\n \r\n पश्चिम बंगाल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़ \r\n | \r\n
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SIR की समय सारणी (Timeline):
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- \r\n गणना प्रक्रिया शुरू: 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक (बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म भरवाएंगे)\r\n \r\n
- \r\n ड्राफ्ट सूची जारी: 9 दिसंबर 2025\r\n \r\n
- \r\n अंतिम सूची का प्रकाशन: 7 फरवरी 2026\r\n \r\n
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महत्वपूर्ण बदलाव: चुनाव आयोग ने इस बार आधार कार्ड को उन दस्तावेजों की सूची में शामिल किया है, जिन्हें लोगों को इन 12 राज्यों में जमा करना होगा।
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मुख्य चुनाव आयुक्त का स्पष्टीकरण
\r\n\r\nमुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने 27 अक्टूबर को SIR के दूसरे चरण की घोषणा करते हुए असम के बारे में विशेष स्पष्टीकरण दिया:
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- \r\n असम के लिए अलग घोषणा: CEC ने कहा कि असम में नागरिकता अधिनियम के तहत अलग प्रावधान हैं और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नागरिकता की जांच का काम पूरा होने वाला है। इसलिए, असम के लिए SIR की अलग से तिथि घोषित की जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n योग्यता सुनिश्चित करना: चुनाव आयोग का मानना है कि यह अभ्यास यह सुनिश्चित करेगा कि 'कोई भी पात्र मतदाता न छूटे' और 'कोई भी अवैध व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो'।\r\n \r\n
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विरोध और आशंका
\r\n\r\nSIR के इस व्यापक अभ्यास ने कुछ राजनीतिक विवाद भी पैदा किए हैं।
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- \r\n विरोध: तमिलनाडु के कई राजनीतिक दलों ने इस प्रक्रिया का विरोध किया है और राज्य में इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।\r\n \r\n
- \r\n आशंकाएं: विपक्षी दलों ने पहले बिहार में भी इस अभ्यास पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि दस्तावेजों के अभाव में करोड़ों पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित हो जाएंगे। हालांकि, चुनाव आयोग ने आश्वासन दिया था कि भारत का कोई भी पात्र नागरिक वोटर लिस्ट से नहीं छूटेगा।\r\n \r\n
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आगामी चुनावों पर असर
\r\n\r\nजिन राज्यों (जैसे तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल) में 2026 में चुनाव होने हैं, उनके लिए यह मतदाता सूची अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर मतदाताओं से गणना फॉर्म भरवाएंगे और जरूरी दस्तावेज जमा करने को कहेंगे। यह अभ्यास आगामी चुनावों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.