इलेक्ट्रिक वाहनों की जिस खामोशी को हम पर्यावरण के लिए वरदान और ध्वनि प्रदूषण से राहत मानते आए हैं, वही खामोशी सड़कों पर एक अदृश्य खतरा भी बनती जा रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब जल्द ही देश की सड़कों पर दौड़ने वाली शांत इलेक्ट्रिक कारें, बसें और ट्रक भी अपनी मौजूदगी का 'आहसास' कराएंगे।READ ALSO:-WhatsApp के 'साम्राज्य' में 'देसी' सेंध! कौन है Arattai, जो रातों-रात बना भारत का नंबर 1 चैटिंग ऐप? पढ़िए पूरी इनसाइड स्टोरी
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सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर अकॉस्टिक व्हीकल अलर्टिंग सिस्टम (AVAS) को सभी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है। यह फैसला पैदल यात्रियों, साइकिल सवारों और खासकर दृष्टिबाधित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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विस्तार से समझें: क्यों पड़ी इस 'आवाज' की जरूरत?
\r\n\r\nपेट्रोल और डीजल वाहनों के इंजन की एक स्वाभाविक आवाज होती है, जिससे सड़क पर चल रहे लोगों को उनके आने का अंदाजा हो जाता है। इसके विपरीत, इलेक्ट्रिक वाहन, खासकर कम गति पर, लगभग पूरी तरह शांत होते हैं। यह 'साइलेंट' होना शहरी और भीड़भाड़ वाले इलाकों में बेहद खतरनाक हो सकता है, जहां पैदल यात्री, बच्चे और जानवर अचानक सड़क पर आ सकते हैं। AVAS इसी सुरक्षा खामी को भरने का काम करेगा।
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क्या है AVAS टेक्नोलॉजी और कैसे करेगी काम?
\r\n\r\nAVAS एक स्मार्ट सेफ्टी फीचर है जिसे इलेक्ट्रिक वाहन में फिट किया जाता है। यह सिस्टम वाहन के चलने पर एक मानकीकृत कृत्रिम ध्वनि (artificial sound) उत्पन्न करता है।
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- \r\n ऑटोमेटिक एक्टिवेशन: यह सिस्टम वाहन के 20 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ने तक अपने आप सक्रिय हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n समझदार तकनीक: 20 किमी/घंटा से अधिक की गति पर, टायर के सड़क पर घर्षण और हवा की आवाज ही इतनी पर्याप्त होती है कि वाहन की मौजूदगी का पता चल सके, इसलिए यह सिस्टम खुद-ब-खुद बंद हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n मानकों पर आधारित: वाहनों में लगने वाला AVAS सिस्टम AIS-173 मानकों के अनुरूप होगा, ताकि इसकी आवाज न तो बहुत तेज हो और न ही परेशान करने वाली, बल्कि सिर्फ सचेत करने के लिए पर्याप्त हो।\r\n \r\n
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लागू होने की समय-सीमा: अपनी गाड़ी के लिए जानें तारीख
\r\n\r\nसरकार इस अहम नियम को दो चरणों में लागू करने की योजना बना रही है:
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- \r\n पहला चरण (नए वाहन): 1 अक्टूबर, 2026 से बाजार में आने वाले सभी नए इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल्स (पैसेंजर और मालवाहक) में AVAS लगाना अनिवार्य होगा।\r\n \r\n
- \r\n दूसरा चरण (मौजूदा वाहन): 1 अक्टूबर, 2027 तक, सड़कों पर पहले से चल रहे सभी मौजूदा इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल्स में भी इस सिस्टम को लगवाना अनिवार्य हो जाएगा।\r\n \r\n
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एक और राहत: स्पेयर टायर की झंझट होगी खत्म!
\r\n\r\nइसी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में सरकार ने वाहन मालिकों को एक और बड़ी राहत देने का प्रस्ताव दिया है। जिन वाहनों (कार, तिपहिया और क्वाड्रीसाइकल) में ट्यूबलेस टायर लगे हैं, उन्हें अब स्पेयर टायर (अतिरिक्त पहिया) रखने की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है। यह कदम आधुनिक टायर टेक्नोलॉजी को देखते हुए उठाया गया है।
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कुल मिलाकर, सरकार का यह दोहरा कदम न केवल भारत की सड़कों को सुरक्षित बनाएगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा मानकों के साथ कदमताल करते हुए देश के EV भविष्य की एक मजबूत नींव भी रखेगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.