उत्तर प्रदेश के शामली जिले के जलालाबाद क्षेत्र से बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता को तार-तार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की स्थानीय शाखा में एक तथाकथित बैंक मित्र द्वारा भोले-भाले ग्राहकों के खून-पसीने की कमाई के लाखों रुपये हड़पने का बड़ा मामला सामने आया है। इस पूरे फर्जीवाड़े को शामली पीएनबी बैंक मित्र घोटाला (Shamli PNB Bank Mitra Scam) का नाम दिया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस गबन का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मुख्य आरोपी खुलेआम यह स्वीकार कर रहा है कि इस काले कारनामे में बैंक के अन्य कर्मचारी भी उसके साथ पूरी तरह से शामिल हैं। पीड़ितों की गुहार के बाद अब शामली के जिलाधिकारी (DM) ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सख्त जांच के आदेश दे दिए हैं।READ ALSO:-फीफा वर्ल्ड कप ग्रुप-G का महासंग्राम: मिस्र का 92 साल का इंतजार और बढ़ा, हानी के 'ऑन गोल' से टूटा सपना, ईरान-न्यूजीलैंड का रोमांचक ड्रॉ
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आइए, इस शामली पीएनबी बैंक मित्र घोटाला की पूरी परतें खोलते हैं और जानते हैं कि कैसे सालों से बैंक के अंदर बैठकर यह गोरखधंधा बेखौफ चलाया जा रहा था।
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वायरल ऑडियो ने किया 'मिलीभगत' का पर्दाफाश

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जलालाबाद पीएनबी शाखा में बैंक मित्र का काम देखने वाले आरोपी अंकुर सैनी पर आरोप है कि उसने लोगों को बैंक में पैसा जमा करने और आसानी से लोन दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी की है। इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब आरोपी बैंक मित्र अंकुर सैनी और एक पीड़ित ग्राहक के बीच फोन पर हुई बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
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इस वायरल ऑडियो में पीड़ित व्यक्ति अंकुर सैनी से अपने डूबे हुए पैसों की वापसी की लगातार मांग कर रहा है। जवाब में, अंकुर सैनी न सिर्फ गबन की बात को स्वीकार कर रहा है, बल्कि वह बेखौफ होकर यह भी कह रहा है कि इस रकम को उसने अकेले नहीं हड़पा है, बल्कि बैंक के मैनेजर और अन्य कर्मचारियों की भी इसमें पूरी हिस्सेदारी है। इस ऑडियो के सामने आने के बाद बैंक ग्राहकों में भारी रोष और दहशत का माहौल है।
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शामली जिलाधिकारी (DM) के दरबार पहुंचे पीड़ित

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अपनी जीवन भर की जमापूंजी लुट जाने के बाद जलालाबाद और आसपास के क्षेत्र के दर्जनों पीड़ित ग्रामीण शामली के जिलाधिकारी (District Magistrate) कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने डीएम को एक विस्तृत प्रार्थना पत्र सौंपा। इस पत्र में स्पष्ट रूप से बैंक मित्र अंकुर सैनी और तत्कालीन बैंक मैनेजर सहित अन्य बैंक कर्मचारियों पर मिलीभगत करके षड्यंत्र रचने और ग्राहकों की रकम हड़पने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
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पीड़ितों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि:

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    इस पूरे शामली पीएनबी बैंक मित्र घोटाला की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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    बैंक मैनेजर और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (FIR) की जाए।
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    गरीब और किसान ग्राहकों की लूटी गई मेहनत की कमाई को बैंक से वापस दिलाया जाए।
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जिलाधिकारी ने ग्रामीणों की इस गंभीर शिकायत और वायरल ऑडियो का संज्ञान लेते हुए मामले की तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जो भी इस घोटाले में दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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5 साल पहले छिन चुकी थी आईडी, फिर भी बैंक में था दबदबा

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इस पूरे शामली पीएनबी बैंक मित्र घोटाला का सबसे हैरान कर देने वाला पहलू यह है कि आरोपी अंकुर सैनी तकनीकी रूप से पिछले 5 सालों से बैंक मित्र था ही नहीं! प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 5 साल पहले ही कई अनियमितताओं के उजागर होने के बाद बैंक प्रबंधन ने अंकुर सैनी से बैंक मित्र की आधिकारिक आईडी (ID) और शाखा का काम छीन लिया था।
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नियमों के मुताबिक, बैंक मित्र का दर्जा खत्म होने के बाद किसी भी बाहरी व्यक्ति को बैंक के अंदर कैश काउंटर या मुख्य पटल (Main Desk) पर बैठने की अनुमति नहीं होती है। लेकिन, अंकुर सैनी अपने रसूख और तत्कालीन बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ 'गहरी सांठगांठ' के चलते लगातार बैंक के मुख्य कार्यपटल पर बैठता रहा।
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वह खुलेआम बैंक के अंदर बैठकर ग्राहकों से लेन-देन करता था, उनके पासबुक में एंट्री करता था और खाते में पैसे जमा करने का भरोसा देकर नकदी अपनी जेब में रख लेता था। सभी बैंक कर्मचारियों की आंखों के सामने एक बाहरी व्यक्ति सालों तक बैंक का कामकाज संभालता रहा और अधिकारी मौन रहे। यह सीधा इशारा करता है कि यह गबन बिना बैंक के आंतरिक समर्थन के संभव ही नहीं था।
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बैंक की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर उठे गंभीर सवाल

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ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बैंक और उसके कर्मचारियों पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं। बैंक मित्र योजना (Bank Correspondent Scheme) भारत सरकार और रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा इसलिए शुरू की गई थी ताकि दूर-दराज के लोगों को घर के पास बैंकिंग सुविधाएं मिल सकें। लेकिन जलालाबाद के इस शामली पीएनबी बैंक मित्र घोटाला ने इस पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
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    सुरक्षा में सेंध: जब 5 साल पहले ही अंकुर को हटाया जा चुका था, तो बैंक मैनेजर ने उसे अपनी ब्रांच में कैसे घुसने दिया?
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    ऑडिट का फेल होना: बैंक में लगातार होने वाले आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) में यह बात क्यों नहीं पकड़ी गई कि एक अनाधिकृत व्यक्ति कैश काउंटर चला रहा है?
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    सिस्टम का दुरुपयोग: ग्राहकों को दी जाने वाली रसीदों और पासबुक एंट्री का मिलान बैंक के सर्वर से क्यों नहीं किया गया?
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आगे की राह और पुलिसिया कार्रवाई की उम्मीद

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जिलाधिकारी द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद अब प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही पुलिस इस मामले में आरोपी अंकुर सैनी और तत्कालीन बैंक मैनेजर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें हिरासत में लेगी। वायरल ऑडियो को फोरेंसिक जांच के लिए भी भेजा जा सकता है ताकि कोर्ट में इसे मजबूत सुबूत के तौर पर पेश किया जा सके।
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जलालाबाद का शामली पीएनबी बैंक मित्र घोटाला सिर्फ एक व्यक्ति द्वारा की गई चोरी नहीं है, बल्कि यह सिस्टम में मौजूद गहरे भ्रष्टाचार का जीता-जागता प्रमाण है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी अपनी गाढ़ी कमाई लेकर कहां जाए? वायरल ऑडियो ने बैंक अधिकारियों की जिस 'काली सच्चाई' को उजागर किया है, उसकी परतें खुलनी बेहद जरूरी हैं। अब देखना यह है कि जिलाधिकारी के जांच आदेशों के बाद प्रशासन कितनी जल्दी इन सफेदपोश अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजता है और गरीब ग्राहकों का पैसा उन्हें कब तक वापस मिल पाता है।
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शामली के जलालाबाद स्थित पीएनबी शाखा में एक पूर्व बैंक मित्र अंकुर सैनी ने बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से ग्राहकों के लाखों रुपये गबन कर लिए हैं। इसका खुलासा एक वायरल ऑडियो से हुआ जिसमें वह बैंक स्टाफ की संलिप्तता स्वीकार कर रहा है। ग्राहकों की शिकायत पर शामली जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त जांच के आदेश दे दिए हैं। आरोपी 5 साल पहले सस्पेंड होने के बावजूद बैंक काउंटर पर काम कर रहा था।
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