लखनऊ: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र के लिए आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है। लंबी बीमारी और हृदय की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए अब एक नई उम्मीद की किरण जगी है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित 'संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' (SGPGIMS) के डॉक्टरों की टीम ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कारनामा कर दिखाया है।READ ALSO:-भारत में चुनावों की बदलेगी तस्वीर? फर्जी वोटिंग रोकने के लिए मतदान केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैनिंग की मांग; सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
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एसजीपीजीआई (SGPGI) ने उत्तर प्रदेश का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट (हृदय प्रत्यारोपण) कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। यह असाधारण उपलब्धि न केवल एडवांस कार्डियक केयर (Advanced Cardiac Care) की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है, बल्कि इस सफलता ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण (National Organ Transplant) के मानचित्र पर भी बहुत ही मजबूती के साथ स्थापित कर दिया है। अब तक ऐसे जटिल ऑपरेशनों के लिए यूपी के मरीजों को दिल्ली या दक्षिण भारत के अस्पतालों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा उनके अपने राज्य में उपलब्ध हो गई है।
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दिल्ली के डोनर से मिला 'जीवनदान', अंगों ने बचाई कई जानें

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इस ऐतिहासिक प्रत्यारोपण के पीछे एक बहुत ही भावुक और प्रेरणादायक कहानी है। एसजीपीजीआई प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस पूरे मिशन की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली से हुई।
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दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में एक ब्रेन-डेड (Brain Dead) मरीज के परिजनों ने दुःख की इस घड़ी में भी समाज के लिए एक महान उदाहरण पेश करते हुए अंगदान (Organ Donation) का साहसिक निर्णय लिया। इस डोनर द्वारा हृदय (Heart), लिवर और दोनों गुर्दे (Kidneys) सहित कई महत्वपूर्ण अंग दान किए गए।
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    लिवर और गुर्दे का प्रत्यारोपण: डोनर के लिवर और गुर्दे का प्रत्यारोपण दिल्ली के ही जरूरतमंद मरीजों में सफलतापूर्वक कर दिया गया।
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    हृदय का सफर (दिल्ली से लखनऊ): हृदय (हार्ट) को उत्तर प्रदेश के एक गंभीर मरीज के लिए आवंटित किया गया था। हृदय प्रत्यारोपण में समय सबसे बड़ी चुनौती होती है।
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एयर एंबुलेंस और 'ग्रीन कॉरिडोर' का अद्भुत समन्वय

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हार्ट ट्रांसप्लांट में 'इस्केमिक टाइम' (Ischemic Time - अंग को शरीर से निकालने और दूसरे शरीर में प्रत्यारोपित करने के बीच का समय) को कम से कम रखना बेहद जरूरी होता है। हृदय के मामले में यह समय सीमा मात्र 4 से 6 घंटे की होती है।
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इस बहुमूल्य समय को बचाने के लिए दिल्ली और लखनऊ पुलिस के साथ मिलकर एक 'ग्रीन कॉरिडोर' (Green Corridor) का निर्माण किया गया।
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    दिल्ली का सफर: आरएमएल अस्पताल से दिल्ली एयरपोर्ट तक एंबुलेंस को बिना किसी ट्रैफिक के निर्बाध रूप से पहुंचाया गया।
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    एयर एंबुलेंस (Air Ambulance): दिल्ली एयरपोर्ट से धड़कते हुए हृदय को एक विशेष बॉक्स में सुरक्षित रखकर 'एयर एंबुलेंस' के माध्यम से लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक लाया गया।
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    लखनऊ का सफर: लखनऊ एयरपोर्ट से एसजीपीजीआई तक भी पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर चंद मिनटों में दिल को ऑपरेशन थियेटर तक पहुंचा दिया। इस त्वरित सेवा ने ग्राफ्ट (Graft) की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की, जो सर्जरी की सफलता का मुख्य कारण बनी।
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गंभीर हार्ट फेल्योर से जूझ रहा था मरीज, डॉक्टरों ने किया कमाल

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यह नया दिल जिस मरीज को प्रत्यारोपित किया गया है, उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी। वह 'डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी' (Dilated Cardiomyopathy) नामक गंभीर बीमारी के कारण एंड-स्टेज हार्ट फेल्योर (Heart Failure) से पीड़ित था। इस बीमारी में हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और हृदय फैल जाता है, जिससे वह शरीर में पर्याप्त रक्त पंप करने में असमर्थ हो जाता है। ऐसे मरीजों के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट ही जीवन बचाने का एकमात्र और आखिरी विकल्प होता है।
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समन्वित टीमवर्क की मिसाल: विशेषज्ञों की एक बड़ी टीम ने इस अत्यंत जटिल और जोखिम भरी सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस मैराथन सर्जिकल प्रक्रिया में एसजीपीजीआई के कई विभागों ने एक साथ मिलकर काम किया:
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    कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CVTS) विभाग
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    कार्डियोलॉजी विभाग (Cardiology)
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    एनेस्थीसिया विभाग (Anesthesia) इसके साथ ही, राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO), क्षेत्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (ROTTO) तथा दिल्ली के आरएमएल (RML) अस्पताल की टीमों ने बेहतरीन समन्वय स्थापित कर इस मिशन को सफल बनाया।
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ऐतिहासिक सफलता पर गदगद हुई यूपी सरकार: सीएम और राज्यपाल ने दी बधाई

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उत्तर प्रदेश के चिकित्सा इतिहास की इस सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक पर राज्य के शीर्ष नेतृत्व ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है।
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    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath): सीएम योगी ने एसजीपीजीआई की पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे प्रदेश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक 'युगांतरकारी उपलब्धि' बताया है। उन्होंने कहा कि, "यह सफलता इस बात का ज्वलंत प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश में उन्नत और विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाओं की क्षमता लगातार बढ़ रही है। हमारी सरकार प्रदेशवासियों को उनके घर के समीप ही सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध है।"
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    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल (Governor Anandiben Patel): प्रदेश की राज्यपाल महोदया ने एसजीपीजीआईएमएस की टीम को उनके उत्कृष्ट समन्वय, समर्पण और शानदार टीमवर्क के लिए विशेष रूप से सराहा है।
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    उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Deputy CM Brajesh Pathak): स्वास्थ्य विभाग का भी जिम्मा संभाल रहे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इस सफलता का श्रेय प्रशासन के बेहतर समन्वय, त्वरित एयर एम्बुलेंस सेवा और ट्रैफिक पुलिस द्वारा बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर जैसी चाक-चौबंद व्यवस्थाओं को दिया।
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चतुर्थक चिकित्सा (Quaternary Care) की ओर यूपी का मजबूत कदम

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एसजीपीजीआईएमएस के निदेशक प्रोफेसर आर.के. धीमन ने इस उपलब्धि को संस्थान और प्रदेश के लिए एक गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता चतुर्थक चिकित्सा (Quaternary Care - चिकित्सा का सबसे उन्नत और जटिल स्तर) सेवाओं की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है।
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प्रो. धीमन ने जोर देकर कहा कि, "यह ट्रांसप्लांट उत्तर प्रदेश में एक व्यापक और एकीकृत 'बहु-अंग प्रत्यारोपण प्रणाली' (Multi-Organ Transplant System) की नींव है। भविष्य में हम इस सुविधा का और अधिक विस्तार करेंगे ताकि राज्य के किसी भी नागरिक को ऑर्गन फेल्योर की स्थिति में दूसरे राज्यों में दर-दर न भटकना पड़े।"
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अंगदान के प्रति जागरूकता की आवश्यकता

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एसजीपीजीआई लखनऊ का यह पहला हार्ट ट्रांसप्लांट केवल एक मेडिकल अजूबा नहीं है, बल्कि यह अंगदान (Organ Donation) के महत्व को भी रेखांकित करता है। दिल्ली के उस अज्ञात डोनर के परिवार ने जो फैसला लिया, उसी की बदौलत आज यूपी के एक परिवार का चिराग बुझने से बच गया। यह ऐतिहासिक घटना हमें सिखाती है कि मृत्यु के बाद भी हम अंगदान के जरिए कई लोगों के जीवन में फिर से धड़कनें और मुस्कान लौटा सकते हैं। उत्तर प्रदेश अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी एक नई और सशक्त पहचान गढ़ रहा है।
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