मेरठ (रिपोर्ट): सावन का पवित्र महीना और मासिक शिवरात्रि का पावन अवसर—इन दोनों के अद्भुत संगम ने मेरठ जिले को पूरी तरह से शिवभक्ति के रंग में रंग दिया है। देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए जिलेभर के तमाम ऐतिहासिक और प्रमुख शिव मंदिरों में देर रात से ही आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध है। हरिद्वार से कांवड़ में भरकर लाया गया पवित्र गंगाजल, हाथों में बेलपत्र, धतूरा और दूध लिए लाखों शिवभक्त लंबी-लंबी कतारों में लगकर अपने आराध्य का जलाभिषेक कर रहे हैं। मंदिरों के कपाट 24 घंटे के लिए खोल दिए गए हैं, ताकि कोई भी भक्त बाबा के दर्शन से वंचित न रह जाए।Read also:-कांवड़ यात्रा के बाद मेरठ को जाम से मिलेगी मुक्ति: मंगलवार शाम से खुलेंगे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और रुड़की हाईवे, शहर के अंदर भी दौड़ेंगे वाहन
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आस्था के आगे बारिश भी हुई नतमस्तक: इन्द्रदेव ने किया शिवभक्तों का स्वागत

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सावन के महीने में जहां एक तरफ उमस और गर्मी से लोग बेहाल रहते हैं, वहीं इस शिवरात्रि पर मौसम ने भी भक्तों का पूरा साथ दिया। जलाभिषेक के लिए जब भक्त मीलों लंबी लाइनों में खड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, तभी अचानक झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस बारिश ने भक्तों के लिए किसी वरदान से कम काम नहीं किया। तपती धूप और उमस के बीच आसमान से गिरी इन बूंदों ने लाइनों में लगे भक्तों की थकान को पल भर में मिटा दिया और उनकी खुशी दोगुनी हो गई। बारिश की फुहारों के बीच "हर-हर महादेव", "बम-बम भोले" और "बोल बम-तारक बम" के जयकारों से पूरा आसमान गूंज उठा। मौसम सुहावना होने के कारण श्रद्धालुओं के चेहरों पर एक अलग ही तेज और उत्साह देखने को मिला।
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24 घंटे खुले शिवालयों के कपाट: हर घंटे 6,000 श्रद्धालु कर रहे जलाभिषेक

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श्रद्धालुओं की अपार भीड़ और उनकी अगाध श्रद्धा को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया और मंदिरों के कपाट लगातार 24 घंटे खुले रखने की घोषणा की। भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह 4 बजे से ही जलाभिषेक का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह एक पल के लिए भी नहीं थमा।
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आंकड़ों की बात करें तो बाबा औघड़नाथ मंदिर में हर घंटे लगभग 6,000 भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित कर रहे हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष सतीश सिंघल ने इस व्यवस्था पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि, "आज शिवरात्रि के मुख्य दिन एक लाख से अधिक भक्तों के जल चढ़ाने का अनुमान है। वहीं, अगर पिछले 72 घंटों (तीन दिनों) के आंकड़ों पर गौर करें, तो लगभग दो लाख से ज्यादा शिवभक्त अब तक बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक कर चुके हैं।" इतनी बड़ी संख्या में भक्तों के आगमन के बावजूद व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है, जो कि मंदिर प्रबंधन की बेहतरीन तैयारियों का प्रमाण है।
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बाबा औघड़नाथ और बिलेश्वर महादेव मंदिर में दिखा अद्भुत नजारा

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मेरठ का ऐतिहासिक बाबा औघड़नाथ मंदिर (काली पलटन मंदिर), जिसका 1857 की क्रांति से भी गहरा नाता रहा है, आज पूरी तरह से केसरिया रंग में रंगा नजर आया। वहीं, प्राचीन बिलेश्वर महादेव मंदिर में भी पैर रखने की जगह नहीं थी। इन दोनों प्रमुख शिवालयों के साथ-साथ जिले के अन्य छोटे-बड़े शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की कतारें मंदिर परिसर के बाहर सड़कों तक पहुंच गईं।
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भक्त अपने साथ पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), भांग, भस्म, चंदन और शमी पत्र लेकर पहुंचे थे। मंदिर के गर्भगृह से लगातार शंख और घंटों की ध्वनि सुनाई दे रही थी। जगह-जगह भजन-कीर्तन की टोलियां डमरू की थाप पर भगवान शिव के भजनों में लीन होकर नृत्य करती नजर आईं। मंदिर परिसर और उसके आसपास का पूरा माहौल इतना आध्यात्मिक और शिवमय हो गया था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति खुद को महादेव के चरणों में समर्पित महसूस कर रहा था।
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महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों में दिखा गजब का उत्साह

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इस महाशिवरात्रि की सबसे खास बात यह रही कि इसमें युवाओं और कांवड़ियों के साथ-साथ महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे-छोटे बच्चों की भी भारी भागीदारी देखी गई। घंटों तक कतारों में खड़े रहने के बावजूद किसी के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी, हाथों में पूजा की थाली लिए शिव भजनों का गायन कर रही थीं। वहीं, छोटे बच्चे भी अपने माता-पिता के साथ "बम-बम भोले" का उद्घोष करते हुए मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। यह दृश्य इस बात का गवाह था कि सनातन धर्म और भगवान शिव के प्रति लोगों की आस्था उम्र की हर सीमा से परे है। सभी ने शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाकर अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और निरोगी काया की कामना की।
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सुरक्षा और व्यवस्था: 10 दिन पहले से चल रही थीं तैयारियां

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लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करना कोई आसान काम नहीं है। मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने इसके लिए लगभग 10 दिन पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं।
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    बैरिकेडिंग और कतार व्यवस्था: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जिग-जैग बैरिकेडिंग की गई थी, ताकि किसी भी तरह की भगदड़ की स्थिति न बने।
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    सीसीटीवी और पुलिस बल: चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद से पूरे मेला क्षेत्र और मंदिर परिसर की निगरानी की जा रही है।
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    चिकित्सा और स्वयंसेवक: जगह-जगह मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। मंदिर समिति के सैकड़ों स्वयंसेवक लगातार भक्तों को निर्देशित करने और उन्हें सुरक्षित दर्शन कराने में जुटे हुए हैं।
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क्या है सावन की मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व?

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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का पूरा महीना भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय है। सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सावन की मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब विष (हलाहल) निकला था, तो सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया था। विष के तीव्र प्रभाव से भोलेनाथ का शरीर तपने लगा था। तब सभी देवी-देवताओं ने उन्हें शीतलता प्रदान करने के लिए सावन के महीने में ही उन पर जल और दूध अर्पित किया था।
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यही कारण है कि सावन की शिवरात्रि पर भगवान शिव का गंगाजल और ठंडे दूध से जलाभिषेक करने की प्राचीन परंपरा है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं, विवाह में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं और भक्त की हर मनोकामना शीघ्र पूरी होती है। इसी अगाध आस्था और विश्वास के चलते मेरठ के शिवालयों में आज यह भक्ति का महाकुंभ देखने को मिल रहा है।
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