मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साल के अंत में आम आदमी और बैंकिंग सेक्टर को दोहरी खुशखबरी दी है। एक तरफ जहां लोन की ईएमआई (EMI) कम होने का रास्ता साफ हो गया है, वहीं दूसरी तरफ बैंकों के पास अब कर्ज बांटने के लिए ज्यादा पैसा होगा। RBI ने बैंकिंग सिस्टम में नकदी (Liquidity) बढ़ाने के लिए गुरुवार को ओपन मार्केट से 50,000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) खरीदी हैं।READ ALSO:-अयोध्या से बड़ी खबर: अब घर बैठे होंगे 'राम दरबार' के साक्षात दर्शन; आरती का लाइव प्रसारण शुरू—जानें कब और कैसे देखें
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इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 0.25% की कटौती कर दी है, जिससे ब्याज दरें घटकर 5.25% पर आ गई हैं।
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बैंकों के हाथ में आया कैश, 18 दिसंबर को फिर होगी खरीद

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RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया था कि दिसंबर महीने में सेंट्रल बैंक कुल 1 लाख करोड़ रुपये की प्रतिभूतियां खरीदेगा। इसी प्लान के पहले चरण में गुरुवार को 50,000 करोड़ रुपये की खरीद पूरी कर ली गई है। इस कदम का सीधा मतलब है कि बैंकों के पास अब कैश फ्लो बढ़ जाएगा, जिससे वे ज्यादा लोन बांट सकेंगे। RBI का प्लान दो चरणों में है:
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    पहला चरण: 50,000 करोड़ (पूरा हुआ)
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    दूसरा चरण: 18 दिसंबर को (इसमें भी 50,000 करोड़ की सिक्योरिटीज खरीदी जाएंगी)।
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आम आदमी के लिए बड़ी राहत: लगातार चौथी बार घटा रेपो रेट

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बैंकिंग सिस्टम में जान फूंकने के साथ-साथ RBI ने आम आदमी की जेब का भी ख्याल रखा है। इस साल चौथी बार रेपो रेट में 0.25% की कटौती की गई है। अब रेपो रेट घटकर 5.25% हो गया है।
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साल की शुरुआत से अब तक कुल 1.25% की कटौती हो चुकी है। रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं। जब यह दर कम होती है, तो बैंकों को सस्ता फंड मिलता है और वे ग्राहकों को सस्ता होम लोन और ऑटो लोन ऑफर करते हैं। जानकारों का मानना है कि महंगाई दर (Inflation) के 4.0% के लक्ष्य से नीचे बने रहने और जीडीपी ग्रोथ के अच्छे आंकड़ों ने RBI को यह फैसला लेने का मौका दिया है।
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किन सिक्योरिटीज की हुई खरीद? (Technical Details)

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RBI ने 4 साल से लेकर 25 साल तक की मैच्योरिटी वाली अलग-अलग सरकारी बांड्स खरीदे हैं। इसका विवरण इस प्रकार है:
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    2029 में मैच्योर होने वाली: 6,638 करोड़ रुपये (रेट: 6.75%)
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    2031 में मैच्योर होने वाली: 15,316 करोड़ रुपये (रेट: 7.02%)
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    2032 में मैच्योर होने वाली: 21,189 करोड़ रुपये (रेट: 7.26%)
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इसके अलावा 2034, 2036, 2039 और 2050 में परिपक्व होने वाली सिक्योरिटीज की भी खरीदारी की गई है। सबसे लंबी अवधि (2050) वाली सिक्योरिटीज 6.67% की दर पर खरीदी गई हैं।
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क्या होगा असर?

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    लोन ग्रोथ: बैंकों के पास फंड बढ़ेगा, जिससे वे कॉरपोरेट और रिटेल लोन आसानी से दे पाएंगे।
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    सस्ती EMI: रेपो रेट कम होने से पुराने और नए लोन की ब्याज दरें कम होंगी।
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    अर्थव्यवस्था को रफ्तार: बाजार में पैसा आने से आर्थिक गतिविधियों (Economic Activities) में तेजी आएगी।
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RBI का यह कदम स्पष्ट करता है कि सरकार और केंद्रीय बैंक का पूरा फोकस ग्रोथ पर है। 18 दिसंबर को होने वाली अगली खरीद से बाजार में और 50 हजार करोड़ आएंगे, जिससे नए साल (2026) की शुरुआत भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शानदार रहने की उम्मीद है।
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