[नई दिल्ली | स्पेशल इन्वेस्टिगेशन डेस्क]
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भारत की सड़कों पर हर साल लाखों सपने टूटते हैं, लाखों परिवार उजाड़ते हैं। वजह सिर्फ एक—सड़क दुर्घटना (Road Accident)। और उससे भी ज्यादा दर्दनाक वजह—समय पर इलाज न मिलना या इलाज के लिए जेब में पैसे न होना। लेकिन अब तस्वीर बदलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार एक ऐसी योजना को हरी झंडी दिखाने जा रही है, जो भारत के स्वास्थ्य और परिवहन क्षेत्र में 'गेम चेंजर' साबित होगी।
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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने पुष्टि की है कि सरकार जल्द ही पूरे देश में सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए 'कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम' (Cashless Treatment Scheme) शुरू करने जा रही है। इस योजना का ब्लूप्रिंट तैयार है, पायलट प्रोजेक्ट सफल हो चुका है और अब बस आधिकारिक लॉन्चिंग का इंतजार है।
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यह खबर केवल एक सरकारी योजना की घोषणा नहीं है, बल्कि उन करोड़ों भारतीयों के लिए 'जीवन रक्षा कवच' है जो रोज सड़कों पर सफर करते हैं। आइये, इस विस्तृत विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि यह योजना कैसे काम करेगी, इसका लाभ किसे मिलेगा, और यह आयुष्मान भारत से कितनी अलग है।
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योजना का परिचय: 'गोल्डन आवर' में मिलेगा जीवनदान

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अक्सर देखा गया है कि एक्सीडेंट के बाद अस्पताल प्रशासन पहले "पैसे जमा कराने" की मांग करता है, और इसी देरी में घायल व्यक्ति अपनी जान गंवा देता है। चिकित्सा विज्ञान में दुर्घटना के बाद के पहले एक घंटे को 'गोल्डन आवर' (Golden Hour) कहा जाता है। अगर इस दौरान सही इलाज मिल जाए, तो बचने की संभावना 80% तक बढ़ जाती है।
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योजना के प्रमुख स्तंभ:

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    कवरेज राशि: सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त दिया जाएगा।
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    कैशलेस सुविधा: घायल व्यक्ति या उसके परिवार को अस्पताल में एक भी रुपया नकद नहीं देना होगा। सारा खर्च सरकार और बीमा कंपनियां मिलकर वहन करेंगी।
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    समय सीमा: यह कवरेज दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक के लिए मान्य होगा। इसका उद्देश्य मरीज को खतरे से बाहर (Stabilize) लाना है।
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    पात्रता (Eligibility): यह योजना हर किसी के लिए है। चाहे वह अमीर हो या गरीब, बीमित हो या गैर-बीमित। अगर भारत की सड़क पर मोटर वाहन से एक्सीडेंट हुआ है, तो इलाज मिलेगा।
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नितिन गडकरी ने कहा, "हमारा लक्ष्य समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने से होने वाली मौतों को रोकना है। पैसे की कमी अब किसी की मौत का कारण नहीं बनेगी।"
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पायलट प्रोजेक्ट का रिपोर्ट कार्ड: चंडीगढ़ मॉडल की सफलता

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केंद्र सरकार ने इस योजना को पूरे देश में लागू करने से पहले इसकी जमीनी हकीकत परखने का फैसला किया था। इसके लिए चंडीगढ़ को चुना गया।
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ट्रायल रन की टाइमलाइन:

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    शुरुआत: सड़क परिवहन मंत्रालय ने 14 मार्च, 2024 को चंडीगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया।
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    विस्तार: सफलता को देखते हुए बाद में इसे 6 और राज्यों में आंशिक रूप से लागू किया गया।
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आंकड़े क्या कहते हैं?

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मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़े बताते हैं कि यह मॉडल बेहद सफल रहा है:
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    कुल आवेदन: मार्च 2024 से अब तक 6,833 सड़क दुर्घटना के मामले दर्ज हुए और आवेदन आए।
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    स्वीकृत मामले: इनमें से 5,480 लोगों को योजना के तहत कैशलेस इलाज मिला। यानी सफलता दर लगभग 80% रही।
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    भुगतान: सरकार ने अस्पतालों को इलाज के बदले 73,88,848 रुपये (करीब 74 लाख रुपये) का भुगतान किया।
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    रिजेक्शन क्यों? बाकी बचे मामले पुलिस जांच में खारिज कर दिए गए क्योंकि वे या तो मोटर वाहन दुर्घटना नहीं थे या फर्जी क्लेम पाए गए।
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इस पायलट प्रोजेक्ट ने साबित कर दिया है कि सिस्टम काम कर रहा है और अब इसे 140 करोड़ देशवासियों के लिए लागू करने का समय आ गया है।
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योजना की विस्तृत कार्यप्रणाली: यह कैसे काम करेगा?

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आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि एक्सीडेंट के वक्त अफरातफरी में इस योजना का लाभ कैसे मिलेगा? सूत्रों और पायलट प्रोजेक्ट के आधार पर इसकी प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होगी:
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स्टेप 1: दुर्घटना और पुलिस रिपोर्ट

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जैसे ही कोई सड़क दुर्घटना होती है, स्थानीय पुलिस को सूचित किया जाएगा। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचेगी या अस्पताल में बयान दर्ज करेगी। पुलिस एक 'एक्सीडेंट रिफरेन्स नंबर' या 'यूनिक आईडी' जनरेट करेगी।
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स्टेप 2: अस्पताल में भर्ती

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घायल को नजदीकी अस्पताल (चाहे सरकारी हो या एंपैनल किया गया प्राइवेट अस्पताल) ले जाया जाएगा। वहां रिसेप्शन पर यह आईडी या पुलिस रिपोर्ट दिखाई जाएगी।
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स्टेप 3: कैशलेस इलाज शुरू

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अस्पताल प्रशासन मरीज से एडवांस पैसा नहीं मांगेगा। 1.5 लाख रुपये तक के पैकेज के तहत इलाज तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। इसमें सर्जरी, आईसीयू चार्ज, दवाइयां और जांच शामिल होंगी।
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स्टेप 4: क्लेम सेटलमेंट

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इलाज का बिल अस्पताल सीधे नोडल एजेंसी (बीमा कंपनी या सरकारी ट्रस्ट) को भेजेगा। मोटर वाहन दुर्घटना कोष (Motor Vehicle Accident Fund) से इसका भुगतान किया जाएगा।
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मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 और कानूनी ताकत

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यह योजना हवा में नहीं बनाई गई है, बल्कि इसे कानूनी जामा पहनाया गया है। मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 162 के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज की व्यवस्था करे।
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    मोटर वाहन दुर्घटना कोष (Motor Vehicle Accident Fund): सरकार ने इस योजना को फंड करने के लिए एक विशेष कोष बनाया है। इस फंड में पैसा चालान (Traffic Challans) का एक हिस्सा, इंश्योरेंस कंपनियों का योगदान और केंद्र सरकार के बजट से आएगा।
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    हिट एंड रन (Hit and Run): यह योजना 'हिट एंड रन' मामलों (जहां टक्कर मारने वाली गाड़ी का पता न चले) में भी पूरी तरह लागू होगी। ऐसे मामलों में अक्सर पीड़ित को बीमा क्लेम नहीं मिल पाता था, लेकिन अब सरकार इलाज का खर्च उठाएगी।
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भारत में सड़क हादसों की भयावहता: क्यों जरूरी है यह योजना?

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इस योजना की गंभीरता को समझने के लिए हमें भारत के सड़क हादसों के आंकड़ों पर नजर डालनी होगी। ये आंकड़े डराने वाले हैं:
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    वैश्विक स्थिति: विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में वाहनों की कुल संख्या का केवल 1% भारत में है, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों का 11% भारत में होता है।
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    हर घंटे मौतें: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर घंटे लगभग 18 से 20 लोग सड़क हादसों में मरते हैं।
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    आर्थिक नुकसान: सड़क दुर्घटनाओं के कारण भारत को अपनी जीडीपी का करीब 3% (लाखों करोड़ रुपये) का नुकसान उठाना पड़ता है।
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  • \r\n
    युवा आबादी: मरने वालों में सबसे बड़ी संख्या 18 से 45 वर्ष के युवाओं की होती है, जो अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले होते हैं।
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नितिन गडकरी का विजन है कि 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50% तक कम किया जाए। 'कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम' उसी दिशा में एक बड़ा हथियार है।
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आयुष्मान भारत vs एक्सीडेंट कैशलेस स्कीम: अंतर समझें

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कई लोग इस योजना को 'आयुष्मान भारत' से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन ये दोनों अलग हैं।
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विशेषता
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आयुष्मान भारत योजना
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एक्सीडेंट कैशलेस स्कीम
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पात्रता
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केवल गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (BPL)।
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अमीर-गरीब, हर भारतीय नागरिक।
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कार्ड की जरूरत
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आयुष्मान कार्ड होना अनिवार्य है।
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किसी विशेष कार्ड की जरूरत नहीं (पुलिस रिपोर्ट/ID काफी है)।
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बीमारी कवरेज
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पहले से मौजूद बीमारियों और अन्य रोगों के लिए।
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केवल सड़क दुर्घटना (Trauma) के लिए।
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लिमिट
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5 लाख रुपये सालाना (पूरे परिवार के लिए)।
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1.5 लाख रुपये (प्रति एक्सीडेंट, प्रति व्यक्ति)।
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समय सीमा
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साल भर मान्य।
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एक्सीडेंट के 7 दिनों तक मान्य।
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यानी, अगर किसी अमीर व्यक्ति का एक्सीडेंट होता है जिसके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है, तो उसे भी इस नई योजना का लाभ मिलेगा।
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चुनौतियां और समाधान: सरकार की तैयारी

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इतने बड़े स्तर पर योजना लागू करने में कई चुनौतियां भी हैं, जिनसे निपटने के लिए मंत्रालय ने रोडमैप तैयार किया है।
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1. फर्जी क्लेम (Fake Claims):

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अक्सर देखा गया है कि लोग पुराने चोट या घर में लगी चोट को एक्सीडेंट बताकर क्लेम लेने की कोशिश करते हैं।
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    समाधान: पुलिस रिपोर्ट (FIR/GD Entry) को अनिवार्य बनाया जाएगा। एआई (AI) आधारित सिस्टम से चोट की प्रकृति की जांच होगी।
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2. ग्रामीण इलाके:

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शहरों में तो अस्पताल हैं, लेकिन गांव के हाईवे पर एक्सीडेंट होने पर अच्छे अस्पताल नहीं मिलते।
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    समाधान: सरकार हाईवे के किनारे स्थित छोटे निजी अस्पतालों और क्लीनिकों को भी इस योजना से जोड़ रही है (Empanelment)। जीपीएस इनेबल्ड एम्बुलेंस नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।
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3. अस्पतालों की आनाकानी:

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प्राइवेट अस्पताल अक्सर सरकारी योजनाओं के मरीजों को लेने से बचते हैं क्योंकि भुगतान में देरी होती है।
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    समाधान: नितिन गडकरी ने भरोसा दिलाया है कि भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी और एक तय समय सीमा के भीतर अस्पतालों के खाते में पैसा ट्रांसफर होगा।
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आम आदमी के लिए गाइड: एक्सीडेंट हो जाए तो क्या करें?

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'खबरिलाल' अपने पाठकों को जागरूक करने के लिए एक स्टेप-बाय-स्टेप गाइड भी साझा कर रहा है। भगवान न करे, अगर आपके सामने कोई एक्सीडेंट हो, तो आप इस योजना का लाभ कैसे दिला सकते हैं:
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    मदद से न डरें (Good Samaritan): सबसे पहले घायल की मदद करें। कानून अब 'गुड समैरिटन' (मददगार) को सुरक्षा देता है। पुलिस आपको परेशान नहीं करेगी और न ही बार-बार थाने बुलाएगी।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    पुलिस को कॉल करें (112/100): तुरंत पुलिस को सूचना दें। यह सबसे जरूरी है क्योंकि योजना का लाभ लेने के लिए पुलिस की एंट्री (General Diary) जरूरी होगी।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    नजदीकी अस्पताल: एंबुलेंस या निजी वाहन से घायल को नजदीकी अस्पताल ले जाएं।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    योजना का जिक्र करें: रिसेप्शन पर बताएं कि यह रोड एक्सीडेंट का मामला है और केंद्र सरकार की कैशलेस स्कीम के तहत इमरजेंसी इलाज शुरू किया जाए।
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  8. \r\n
  9. \r\n
    दस्तावेज: घायल का आधार कार्ड या कोई भी आईडी प्रूफ दें। अगर आईडी नहीं है, तो पुलिस सत्यापन करेगी।
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  10. \r\n
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नितिन गडकरी का विजन और भविष्य की राह

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सड़क सुरक्षा को लेकर बेहद संवेदनशील रहे हैं। उन्होंने कई मंचों पर स्वीकार किया है कि भारत में सड़क इंजीनियरिंग और ड्राइविंग बिहेवियर में सुधार की जरूरत है।
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उन्होंने हाल ही में कहा:

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"हम सिर्फ सड़कें नहीं बना रहे, हम सुरक्षित सफर का वादा कर रहे हैं। 1.5 लाख रुपये की यह कैशलेस योजना गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो एक्सीडेंट होने पर जमीन-जायदाद बेचने को मजबूर हो जाते हैं। हम इसे राज्यों के परिवहन मंत्रालयों के सहयोग से मिशन मोड में लागू करेंगे।"
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2026 में क्या बदलेगा?

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    इंटीग्रेटेड डेटाबेस: पुलिस, अस्पताल और बीमा कंपनियां एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़ेंगी।
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  • \r\n
  • \r\n
    फास्ट ट्रैक इलाज: एक्सीडेंट के मामलों के लिए अस्पतालों में अलग 'ट्रॉमा डेस्क' बन सकती है।
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  • \r\n
  • \r\n
    बीमा कंपनियों की भूमिका: जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) इस योजना के क्रियान्वयन में नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगी।
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एक संवेदनशील भारत की ओर कदम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह योजना 'सबका साथ, सबका विकास' के साथ-साथ 'सबका जीवन' बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 1.5 लाख रुपये की राशि भले ही बहुत बड़ी सर्जरी के लिए कम लग सकती है, लेकिन यह शुरुआती 7 दिनों में घायल की जान बचाने (Stabilize करने) के लिए पर्याप्त है।
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पायलट प्रोजेक्ट में 80% सफलता दर यह बताती है कि अगर नीयत साफ हो, तो सरकारी योजनाएं फाइलों से निकलकर जमीन पर असर दिखाती हैं। अब देखना यह है कि देशव्यापी स्तर पर इसका क्रियान्वयन कितनी कुशलता से होता है।
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'Khabreelal' की अपील:

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सड़क पर चलते समय ट्रैफिक नियमों का पालन करें। हेलमेट और सीट बेल्ट जरूर लगाएं। याद रखें, सरकार इलाज का खर्च उठा सकती है, लेकिन आपके शरीर और जीवन की भरपाई कोई नहीं कर सकता। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें।
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[नोट: यह विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालय द्वारा जारी हालिया बयानों और चंडीगढ़ पायलट प्रोजेक्ट के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। योजना के राष्ट्रव्यापी लॉन्च की तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी।]
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