दिल्ली-एनसीआर के अहम हिस्से नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ई-रिक्शा (E-Rickshaw) अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी (Last-mile connectivity) का एक प्रमुख साधन बन चुके हैं। हजारों लोग रोजाना अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इन वाहनों पर निर्भर हैं। लेकिन इन दिनों नोएडा के ई-रिक्शा ड्राइवरों के बीच एक नई और बेहद अजीबोगरीब परेशानी चर्चा का विषय बनी हुई है। कई चालकों का दावा है कि उनके वाहन सड़क पर चलते-चलते अचानक बिना किसी तकनीकी खराबी के बंद हो रहे हैं। जांच करने पर पता चल रहा है कि यह कोई सामान्य खराबी नहीं, बल्कि Noida E-Rickshaw Hack का मामला है।READ ALSO:-गाजियाबाद में खौफनाक वारदात: बर्थडे पार्टी के बहाने घर से बुलाया, फिर दोस्तों ने ही सीने और पेट में 7 बार चाकू घोंपकर कर दी हत्या
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आरोप है कि कुछ शरारती तत्व मोबाइल फोन और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी का फायदा उठाकर ई-रिक्शा के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से छेड़छाड़ कर रहे हैं और बैटरी को रिमोट तरीके से स्विच ऑफ कर रहे हैं। इस अनोखे साइबर अपराध ने चालकों की रातों की नींद उड़ा दी है।
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कैसे हो रहा है Noida E-Rickshaw Hack?
\r\n\r\nई-रिक्शा ड्राइवरों का कहना है कि कई बार उनका वाहन पूरी तरह से चार्ज और ठीक होने के बावजूद अचानक सड़क पर रुक जाता है। जब चालक मैकेनिक के पास जाकर बैटरी, मोटर और अन्य तकनीकी हिस्सों की हार्डवेयर जांच कराते हैं, तो कोई भी शारीरिक (Physical) या यांत्रिक खराबी सामने नहीं आती है। इससे ड्राइवरों को घंटों सड़क पर परेशान होना पड़ता है। कई बार सवारियों (यात्रियों) को बीच रास्ते में ही उतरना पड़ता है, जिससे न केवल ड्राइवरों का आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि सवारियों के साथ उनकी बहस भी हो जाती है।
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मोबाइल ऐप और ब्लूटूथ से छेड़छाड़ की आशंका
\r\n\r\nई-रिक्शा से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों ने इस पूरे मामले की परतें खोली हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में आने वाले कुछ आधुनिक ई-रिक्शा में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) या कंट्रोलर को ब्लूटूथ या मोबाइल ऐप के जरिए मॉनिटर और नियंत्रित करने की सुविधा दी जाती है। इसका मूल उद्देश्य वाहन के मालिक को बैटरी की सेहत (Battery Health) और चार्जिंग स्टेटस की जानकारी देना होता है।
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यदि इस सिस्टम की साइबर सुरक्षा पर्याप्त मजबूत न हो या किसी बाहरी व्यक्ति को इसका एक्सेस (Access) मिल जाए, तो वह व्यक्ति वाहन के कंट्रोल से आसानी से छेड़छाड़ कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस Noida E-Rickshaw Hack के मामलों में 'BAT-BMS' नामक एक मोबाइल ऐप का जिक्र सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि यदि कोई शरारती तत्व ई-रिक्शा के सिस्टम से कनेक्ट हो जाए, तो वह इसी तरह के ऐप का इस्तेमाल करके बैटरी को रिमोट तरीके से कभी भी स्विच ऑफ कर सकता है।
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ई-रिक्शा चालकों ने बयां किया अपना दर्द और परेशानी
\r\n\r\nइस नई समस्या ने गरीब ई-रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रहार किया है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के इलाके में ई-रिक्शा चलाने वाले रादिल खान ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि हाल ही में दोपहर करीब 12 बजे उनका ई-रिक्शा अचानक सड़क के बीचों-बीच बंद हो गया। काफी प्रयास करने के बावजूद वाहन चालू नहीं हुआ। बाद में जब वह उसे किसी तरह खींचकर एजेंसी लेकर पहुंचे, तो उन्हें हैरान कर देने वाली बात पता चली। मैकेनिक ने बताया कि बैटरी को सॉफ्टवेयर के माध्यम से स्विच ऑफ कर दिया गया था, जिसे बाद में कंप्यूटर से जोड़कर दोबारा सक्रिय (Active) किया गया।
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एक अन्य ई-रिक्शा चालक राहुल कुमार ने बताया कि वह सूरजपुर से नोएडा के भंगेल की ओर जा रहे थे। जब वह हल्द्वानी मोड़ के पास पहुंचे, तो उनका ई-रिक्शा अचानक बंद हो गया। उस समय रिक्शे में सवारियां बैठी हुई थीं, जिन्हें बीच रास्ते में ही उतरना पड़ा। राहुल को कई घंटे तक कड़ी धूप में परेशानी झेलनी पड़ी। बाद में एक जानकार मैकेनिक ने मोबाइल सॉफ्टवेयर के जरिए बैटरी को दोबारा ऑन किया, तब जाकर वाहन स्टार्ट हुआ।
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चालक चरण सिंह का अनुभव भी कुछ ऐसा ही रहा। उन्होंने बताया कि करीब 15 दिन पहले उनका वाहन भी चलते-चलते बंद हो गया था। शुरुआत में उन्हें लगा कि बैटरी पूरी तरह खराब हो गई है, लेकिन सर्विस सेंटर में जब गहन जांच की गई तो पता चला कि किसी ने अनधिकृत रूप से सॉफ्टवेयर सेटिंग में बदलाव कर दिया था। Noida E-Rickshaw Hack की इन घटनाओं ने अब चालकों के मन में डर पैदा कर दिया है।
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सुरक्षा को लेकर निर्माता कंपनियों और प्रशासन से उठाई मांग
\r\n\r\nलगातार सामने आ रहे Noida E-Rickshaw Hack के मामलों को देखते हुए, ई-रिक्शा ड्राइवरों ने स्थानीय प्रशासन और निर्माता कंपनियों (Manufacturers) से सुरक्षा बढ़ाने की जोरदार मांग की है। उनका स्पष्ट सुझाव है कि हर ई-रिक्शा के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) को अधिक सुरक्षित बनाया जाना चाहिए। इसके लिए सिस्टम में पासवर्ड प्रोटेक्शन (Password Protection) या मल्टी-लेयर सिक्योरिटी (Multi-layer Security) सिस्टम को अनिवार्य किया जाए, ताकि कोई भी राह चलता बाहरी व्यक्ति बिना अनुमति के वाहन के कंट्रोल सिस्टम तक पहुंच न बना सके।
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इस पूरे विवाद पर शोरूम संचालकों का भी बयान आया है। नोएडा के एक प्रमुख ई-रिक्शा शोरूम के संचालक सेवक शर्मा का कहना है कि पुराने मॉडल के ई-रिक्शा में इस तरह की हैकिंग की समस्या अधिक देखने को मिल सकती है, क्योंकि उनमें बेसिक ब्लूटूथ सिस्टम होता था जिसमें पासवर्ड नहीं मांगा जाता था। उनके अनुसार, बाजार में आ रहे नए मॉडल के अधिकांश ई-रिक्शा में अब पहले से ही पासवर्ड आधारित सुरक्षा दी जा रही है। इससे कोई भी अनधिकृत व्यक्ति (Unauthorized person) आसानी से सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ नहीं कर सकता है।
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पुलिस और प्रशासन का क्या कहना है?
\r\n\r\nनोएडा पुलिस ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है, हालांकि अभी तक थानों में कोई लिखित शिकायत नहीं पहुंची है। एडिशनल डीसीपी (ADCP) स्वतंत्र सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि अभी तक इस प्रकार की किसी घटना की आधिकारिक (Official) शिकायत पुलिस में दर्ज नहीं कराई गई है।
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उन्होंने कहा कि यदि किसी चालक द्वारा शिकायत मिलती है, तो उसकी साइबर सेल द्वारा तकनीकी जांच कराई जाएगी। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर शरारत के उद्देश्य से वाहन के सॉफ्टवेयर से छेड़छाड़ की गई है, तो संबंधित आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट (IT Act) और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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तकनीकी विशेषज्ञों ने अंत में ई-रिक्शा मालिकों को सलाह दी है कि वे केवल अधिकृत सर्विस सेंटर (Authorized Service Center) से ही अपने वाहन का सॉफ्टवेयर अपडेट कराएं। इसके अलावा, जिन वाहनों में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी की सुविधा है, उसका उपयोग बेहद सावधानीपूर्वक करें और डिफ़ॉल्ट पासवर्ड (Default Password) को तुरंत बदल लें। ड्राइवरों से अपील की गई है कि यदि उनके वाहन में भी इस तरह की हैकिंग की समस्या आती है, तो उसकी सूचना केवल मैकेनिक तक सीमित न रखें, बल्कि संबंधित कंपनी और पुलिस को भी अवश्य दें, ताकि मामले की तथ्यात्मक और कानूनी जांच की जा सके।
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नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सामने आ रहे Noida E-Rickshaw Hack के मामले इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ साइबर सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है, फिर चाहे वह मोबाइल फोन हो या एक साधारण सा ई-रिक्शा। बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में खामियों का फायदा उठाकर शरारती तत्व गरीब चालकों की रोजी-रोटी से खेल रहे हैं। निर्माता कंपनियों को अब वाहनों की डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी, वहीं चालकों को भी पासवर्ड सुरक्षा के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। पुलिस प्रशासन को भी इस नए प्रकार के साइबर खतरे से निपटने के लिए प्रो-एक्टिव कदम उठाने की आवश्यकता है।
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संक्षेप में: नोएडा में ई-रिक्शा चालक 'Noida E-Rickshaw Hack' की समस्या से जूझ रहे हैं, जहां मोबाइल ऐप (BAT-BMS) और ब्लूटूथ के जरिए वाहनों का बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम हैक किया जा रहा है। चलते वाहनों के अचानक बंद होने से चालकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। शोरूम संचालकों ने पासवर्ड सुरक्षा की वकालत की है, जबकि नोएडा पुलिस (ADCP स्वतंत्र सिंह) ने शिकायत मिलने पर सख्त साइबर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विशेषज्ञों ने डिफ़ॉल्ट पासवर्ड बदलने की सलाह दी है।
Sabse pehle comment karne wale banein.