ख़बरीलाल ऊर्जा और प्रशासनिक डेस्क, लखनऊ: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में 'स्मार्ट प्रीपेड मीटर' (Smart Prepaid Meter) योजना, जिसे बिजली विभाग में क्रांति लाने और उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए लागू किया गया था, अब आम जनता के लिए एक बड़ी सिरदर्द बन गई है। प्रदेश भर से हाहाकार मचने की खबरें आ रही हैं। उपभोक्ता अपने नेगेटिव बैलेंस (Negative Balance) को क्लियर करने के लिए ऑनलाइन रिचार्ज कर रहे हैं, उनके बैंक खाते से पैसे भी कट रहे हैं, लेकिन उनके घरों की बत्ती 6-6 घंटे बाद भी गुल है।READ ALSO:-ईद पर मेरठ में फर्राटा नहीं भरेंगे वाहन: 21 मार्च सुबह 5 बजे से शहर में 'महा-डायवर्जन' लागू; घर से निकलने से पहले चेक कर लें रास्तों की पूरी लिस्ट
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इस भयंकर तकनीकी खामी और बिजली कंपनियों की लापरवाही का मामला अब उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC - Uttar Pradesh Electricity Regulatory Commission) की चौखट पर पहुंच गया है। 'उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद' (UP State Electricity Consumers Council) ने बिजली कंपनियों पर नियमों का खुला उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए एक सख्त 'अवमानना याचिका' (Contempt Petition) दाखिल कर दी है।
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वहीं दूसरी ओर, ऊर्जा निगम (UPPCL) भी एक्शन मोड में है। सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर जो उपभोक्ता बिना रिचार्ज किए अवैध रूप से 'कटिया' डालकर बिजली चोरी कर रहे थे, उनके खिलाफ महा-अभियान छेड़ दिया गया है। जांच में पकड़े गए 146 लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।
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ख़बरीलाल (Khabreelal) की इस विशेष और महा-विस्तृत रिपोर्ट में आइए समझते हैं कि आखिर इस 'डिजिटल मीटर' के पीछे का पूरा 'एनलॉग झोल' क्या है? उपभोक्ताओं के अधिकार क्या कहते हैं और ऊर्जा निगम इस संकट से निपटने के लिए क्या कर रहा है।
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क्या है पूरा विवाद? (स्मार्ट मीटर की 'अन-स्मार्ट' वर्किंग)

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उत्तर प्रदेश में लाखों घरों में पुराने पोस्टपेड मीटर हटाकर नए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं। इन मीटरों की कार्यप्रणाली मोबाइल फोन के प्रीपेड सिम की तरह होती है। आप जितना रिचार्ज करेंगे, उतनी बिजली इस्तेमाल कर पाएंगे।
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समस्या की जड़: सिस्टम की प्रोग्रामिंग के अनुसार, जैसे ही मीटर का बैलेंस 'जीरो' या 'नेगेटिव' (Negative Balance) में जाता है, मीटर में लगा ऑटोमैटिक स्विच कमांड रिसीव करता है और उपभोक्ता की बिजली अपने आप (Automatically) काट दी जाती है। यहां तक तो सब ठीक है, लेकिन असली परेशानी रिचार्ज के बाद शुरू होती है।
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नियमों के तहत, उपभोक्ता द्वारा ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से रिचार्ज करने के अधिकतम 15 मिनट से लेकर 2 घंटे के भीतर बिजली की आपूर्ति स्वतः (Automatically) बहाल हो जानी चाहिए। लेकिन प्रदेश भर से ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि लोग रात में रिचार्ज कर रहे हैं और अगले दिन दोपहर तक उनके घर की बिजली चालू नहीं हो रही है। कुछ मामलों में तो यह देरी 6 से 8 घंटे तक की है। भीषण गर्मी या त्योहारी सीजन में इस लेटलतीफी ने उपभोक्ताओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
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उपभोक्ता परिषद का बड़ा एक्शन - आयोग में अवमानना याचिका

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लाखों उपभोक्ताओं की इस परेशानी को देखते हुए 'उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद' ने मोर्चा खोल दिया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गुरुवार को सीधे विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार के समक्ष एक अवमानना याचिका (Contempt Petition) दाखिल की।
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क्या है 'स्टैंडर्ड ऑफ परफार्मेंस रेगुलेशन 2019'? अवधेश वर्मा ने अपनी याचिका में 'स्टैंडर्ड ऑफ परफार्मेंस रेगुलेशन 2019' (Standard of Performance Regulation 2019) का हवाला दिया है। यह वह कानूनी दस्तावेज है जो उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करता है।
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    नियम का उल्लंघन: रेगुलेशन 2019 स्पष्ट रूप से कहता है कि नेगेटिव बैलेंस पर ऑटोमैटिक डिस्कनेक्शन (Automatic Disconnection) होने की स्थिति में, यदि उपभोक्ता अपना मीटर रिचार्ज करा लेता है, तो किसी भी सूरत में अधिकतम दो घंटे के भीतर बिजली बहाल हो जानी चाहिए।
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    तकनीकी मानक: तकनीकी प्रविधानों के अनुसार तो स्मार्ट मीटर सिस्टम को इतना फास्ट होना चाहिए कि सर्वर पर पेमेंट अपडेट होते ही महज 15 मिनट में कमांड मीटर तक पहुंच जाए और सप्लाई चालू हो जाए।
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    मुआवजे का प्रावधान: अगर बिजली कंपनी 2 घंटे के भीतर सप्लाई चालू करने में विफल रहती है, तो उपभोक्ता को हुए मानसिक और आर्थिक नुकसान के लिए उसे मुआवजा (Compensation) पाने का कानूनी अधिकार है।
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उपभोक्ता परिषद की मांग है कि चूंकि बिजली कंपनियां अपने ही बनाए गए रेगुलेशन का खुलेआम उल्लंघन कर रही हैं, इसलिए इसके लिए जिम्मेदार आला अधिकारियों (MDs, Chief Engineers) पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई (Punitive Action) की जाए और उपभोक्ताओं को उनका हर्जाना दिलाया जाए।
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त्योहारों और तकनीकी खामियों के बीच सरकार का 'डैमेज कंट्रोल'

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मामले की गंभीरता और जनता में बढ़ते भारी आक्रोश को देखते हुए उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा), नरेंद्र भूषण से भी आपातकालीन मुलाकात की।
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सरकार का फौरी राहत भरा फैसला: इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन को जमीनी हकीकत से अवगत कराया गया। यह बताया गया कि सर्वर (Server), टेलीकॉम नेटवर्क (Telecom Network/SIM Connectivity) और बिलिंग सॉफ्टवेयर के बीच 'सिंक' (Sync) न हो पाने के कारण यह भारी तकनीकी खामी आ रही है।
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इस पर संज्ञान लेते हुए अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) ने उपभोक्ताओं को एक बड़ी फौरी राहत दी है। यह फैसला लिया गया है कि:

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    त्योहारी सीजन में राहत: आगामी त्योहारों (जैसे रमजान, नवरात्र, ईद आदि) और वर्तमान में चल रही तकनीकी खामियों को देखते हुए, फिलहाल किसी भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर की बिजली नेगेटिव बैलेंस होने पर भी स्वतः (Automatically) नहीं काटी जाएगी।
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    सिस्टम अपग्रेड: जब तक सर्वर और मीटर के बीच का कम्यूनिकेशन 'रियल-टाइम' (Real-time) नहीं हो जाता और 15 मिनट में बिजली चालू होने की गारंटी नहीं मिल जाती, तब तक ऑटोमैटिक डिस्कनेक्शन के सिस्टम को होल्ड पर रखा जाएगा।
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यह फैसला लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें अचानक रात के अंधेरे में बिजली कटने का डर सताता रहता था।
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रिचार्ज के बजाय 'कटियामारी' - 146 पर दर्ज हुई FIR (Anti-Theft Drive)

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एक तरफ जहां तकनीकी खामियों ने सिस्टम को बेनकाब किया है, वहीं दूसरी तरफ कुछ उपभोक्ताओं की चालाकी ने भी ऊर्जा निगम के होश उड़ा दिए हैं।
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2.6 लाख उपभोक्ताओं की 'चुप्पी' बनी शक का आधार: ऊर्जा निगम (UPPCL) के डेटाबेस के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में नेगेटिव बैलेंस होने के कारण प्रदेश भर में करीब 5.79 लाख स्मार्ट प्रीपेड कनेक्शन ऑटोमैटिक तरीके से काटे गए थे। हैरानी की बात यह रही कि इनमें से करीब 2.6 लाख उपभोक्ताओं ने कई दिन बीत जाने के बाद भी अपना मीटर रिचार्ज नहीं कराया।
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विभाग के अधिकारियों का माथा ठनका कि आखिर बिना बिजली के इतने लाख परिवार कैसे रह रहे हैं? जब विजिलेंस (Vigilance) और स्थानीय बिजलीघरों की टीमों ने इसकी गुप्त जांच शुरू की, तो सच्चाई चौंकाने वाली थी।
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जांच और महा-कार्रवाई: यह पाया गया कि जिन लोगों के स्मार्ट मीटर का बैलेंस खत्म हो गया था और बिजली कट गई थी, उन्होंने रिचार्ज कराने के बजाय सीधे खंभे से 'कटिया' (Direct Line) फंसाकर बिजली चोरी करनी शुरू कर दी थी। कुछ लोगों ने तो मीटर को ही 'बाइपास' (Bypass) कर दिया था।
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    छापेमारी के आंकड़े: गुरुवार तक ऊर्जा निगम की टीमों ने ऐसे संदिग्ध 2,990 कनेक्शनों की जमीनी जांच (Physical Verification) की।
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    146 पर एफआईआर: इन 2,990 छापों में से 146 स्थानों पर सरेआम बिजली चोरी (Electricity Theft) पकड़ी गई।
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    कठोर कार्रवाई: इन सभी 146 उपभोक्ताओं के खिलाफ विद्युत अधिनियम (Electricity Act) की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी गई है।
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    वसूला जाएगा भारी जुर्माना: एफआईआर के साथ-साथ इन उपभोक्ताओं पर बिजली चोरी के एसेसमेंट (Assessment) के आधार पर भारी आर्थिक जुर्माना (Penalty) भी लगाया गया है, जिसकी वसूली भू-राजस्व (Land Revenue) की तरह की जाएगी। ऊर्जा निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी 2.6 लाख उपभोक्ता रिचार्ज नहीं करा रहे हैं, उन सभी के घरों की चेकिंग आने वाले दिनों में की जाएगी।
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आखिर क्यों फेल हो रहा है स्मार्ट मीटर का सिस्टम?

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    कमजोर टेलीकॉम कनेक्टिविटी: हर स्मार्ट मीटर में एक 'सिम कार्ड' (SIM Card) लगा होता है जो GPRS या 4G तकनीक के जरिए हेडक्वाटर के सर्वर से जुड़ा रहता है। यूपी के कई ग्रामीण और घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में नेटवर्क इतना कमजोर है कि मीटर का सिग्नल सर्वर तक पहुंच ही नहीं पाता। ऐसे में जब आप रिचार्ज करते हैं, तो सर्वर 'कमांड' तो भेजता है, लेकिन मीटर के ऑफलाइन होने के कारण वह कमांड रिसीव नहीं होती और बिजली चालू नहीं होती।
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    सर्वर ओवरलोड: बिलिंग कंपनियों (Billing Agencies) के सर्वर की क्षमता (Capacity) लाखों मीटरों के रियल-टाइम डेटा (Real-time Data) को एक साथ प्रोसेस करने के लिए पर्याप्त नहीं है। पीक आवर्स (खासकर महीने की शुरुआत में) जब लाखों लोग एक साथ रिचार्ज करते हैं, तो सिस्टम 'बॉटलनेक' (Bottleneck) का शिकार हो जाता है।
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    HES (Head End System) की विफलता: यह वह सॉफ्टवेयर है जो मीटर और बिलिंग सिस्टम के बीच मध्यस्थ (Mediator) का काम करता है। कई बार HES और MDM (Meter Data Management) सॉफ्टवेयर आपस में सिंक (Sync) नहीं कर पाते, जिससे 'कमांड पेंडिंग' (Command Pending) में चली जाती है।
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    थर्ड पार्टी पेमेंट गेटवे डिले: जब उपभोक्ता Paytm, PhonePe या बैंक ऐप से रिचार्ज करता है, तो वह पैसा बिजली विभाग के खाते में अपडेट होने में ही कई बार घंटों लग जाते हैं। जब तक विभाग को पेमेंट कन्फर्मेशन नहीं मिलता, वह मीटर को चालू करने की कमांड नहीं भेजता।
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उपभोक्ताओं के लिए ख़बरीलाल की विशेष एडवाइजरी (Consumer Advice)

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अगर आपके घर में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा है, तो इन भारी परेशानियों से बचने के लिए इन बातों का हमेशा ध्यान रखें:
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    अलर्ट मैसेज पर ध्यान दें: जब आपका बैलेंस कम होता है, तो मीटर और आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर 'लो बैलेंस' (Low Balance) का मैसेज आता है। बिजली कटने का इंतजार न करें, बल्कि मैसेज आते ही अपना मीटर एडवांस में रिचार्ज करा लें।
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    वर्किंग आवर्स में रिचार्ज करें: कोशिश करें कि आप अपना रिचार्ज सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही करें। रात में 11 बजे के बाद बैंक के सर्वर्स और पेमेंट गेटवे में अक्सर मेंटेनेंस का काम चलता है, जिससे पेमेंट फंसने के चांस ज्यादा होते हैं।
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    टोल-फ्री नंबर: अगर रिचार्ज के 1 घंटे बाद भी बिजली नहीं आती है, तो तुरंत 1912 (UPPCL Toll-Free Help Line) पर कॉल करके अपनी शिकायत (Token Number) दर्ज कराएं।
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    मुआवजे का दावा: अगर 2 घंटे से अधिक समय बीत जाता है, तो आप नियामक आयोग के नियम 2019 के तहत मुआवजा मांगने के अधिकारी हैं। इसके लिए आप ई-निवारण (e-Nivaran) पोर्टल पर अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
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डिजिटल इंडिया और जमीनी हकीकत का टकराव

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स्मार्ट प्रीपेड मीटर निस्संदेह ऊर्जा क्षेत्र में एक प्रगतिशील कदम है, जिसका उद्देश्य बिजली चोरी रोकना और राजस्व (Revenue) बढ़ाना है। लेकिन जब किसी 'स्मार्ट' तकनीक को एक 'कमजोर' बुनियादी ढांचे (Poor Infrastructure) पर थोप दिया जाता है, तो उसका परिणाम वैसा ही होता है जैसा आज उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है।
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विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में दायर अवमानना याचिका इस बात का कड़ा संदेश है कि सरकारी या निजी एजेंसियां आम जनता को 'गिनी पिग' (Guinea Pig) की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। अगर नियम बनाए गए हैं, तो उनका पालन सिस्टम को भी उतनी ही मुस्तैदी से करना होगा, जितनी मुस्तैदी से वह उपभोक्ता की बिजली काटने में दिखाता है। दूसरी ओर, 146 एफआईआर यह भी बताती हैं कि उपभोक्ता भी अपनी जिम्मेदारियों से भागकर अवैध रास्तों (कटिया) का चुनाव नहीं कर सकते।
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ख़बरीलाल (Khabreelal) इस पूरे मामले पर, खासकर UPERC में होने वाली सुनवाई और ऊर्जा निगम द्वारा सर्वर अपडेट करने की डेडलाइन पर पैनी नजर बनाए रखेगा। उत्तर प्रदेश शासन, बिजली विभाग और आपके शहर की हर उस खबर के लिए जो सीधे आपसे जुड़ी है, हमारे साथ बने रहें।
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